damage of dna and its repair in hindi , डीएनए की क्षति व सुधार क्या है , क्षति और सुधार कैसे होता है

जाने damage of dna and its repair in hindi , डीएनए की क्षति व सुधार क्या है , क्षति और सुधार कैसे होता है ?

डीएनए की क्षति व सुधार (Damage of DNA and its Repair)

जीव की कोशिकाओं में उपस्थित डीएनए आनुवंशिक संचरण के लिए उत्तरदायी होता है। यह जीनोम की एक स्थायी प्रतिलिपि (copy) के रूप में उपस्थित रहता है। इसकी संरचना में किसी भी प्रकार के परिवर्तन होने से डीएनए प्रतिकृति ( replication) व अनुलेखन (transcription) प्रभावित होते हैं जिसके फलस्वरूप जीन में उत्परिवर्तन (mutation) प्रकट होते हैं।

डीएनए अणु अत्यन्त नाजुक होते हैं तथा विभिन्न प्रकार के विकिरण भौतिक एवं रासायनिक अन्तरकोशिकीय दबावों का सामना करते हैं। इनमें पराबैंगनी प्रकाश, एक्स रे, एल्कॉहलेटिंग एजेन्ट एवं स्वतन्त्र रेडिकल्स इत्यादि क्षतिकारक है तथा डीएनए के अणुक्रमों में बदलाव कर सकने में सक्षम है। यह निम्न परिवर्तन कर सकते हैं जैसे-

  • पॉलीन्यूक्लियोटाइड श्रृंखला को तोड़ना श्रृंखला में नाइट्रोजननी क्षारों में रासायनिक परिवर्तन
  • पुनरावृत्ति के दौरान क्षारों का मिसमैच
  • पिरीमिडीन डाइमर का निर्माण
  • नाइट्रोजन क्षारकों से विअमोनीकरण (deamination) डीएनए में निम्न गलतियाँ पायी जाती है।
  1. डीएनए में एकल श्रृंखला टूट सकती है।
  2. डीएनए के दो श्रृंखला टूट सकती है।
  3. नाइट्रोजन क्षारकों में परिवर्तन जैसे पराबैंगनी किरणों द्वारा थायमीन डाइमर का निर्माण (इसमें दो पिरिमिडीन जुड़ कर डायमर (dimer) निर्मित करते हैं।

डीएनए की क्षति (Damage of DNA)

कोशिका में उपस्थित डीएनए को अनेक प्रकार के वातावरणीय कारक प्रभावित करते हैं। यह निम्न प्रकार के होते हैं।

(i) रसायन (Chemicals) : सान्द्र रसायन जैसे नाइट्रोसोग्वानीडीन आदि ग्वानीन से क्रिया करके प्यूरीन रिंग के N – T पर एल्कायल समूह जोड़ देते हैं। जिसके N – गलाइकोसिडिक बंध कमजोर पड़कर टूट जाता है व यह DNA सूत्र के टूटने का कारण बन जाता है।

(ii) विकिरण (Radiation) : आयनीकरण विकिरण यथा X व Y किरणे तथा अन्य प्रकार की किरणे जो रेडियोथैरेपी के दौरान इस्तेमाल की जाती है व डीएनए के सूत्र में क्षति (break) कर देती है। इस सूत्र के टूटने का कारण B कणों द्वारा उत्पन्न द्वितियक इलेक्ट्रॉन, X- किरण फोटोन अथवा जल द्वारा मुक्त रेडिकल्स का निर्माण होता है जो फॉस्फोडाइस्टर बन्ध को तोड़ देता है जिसके कारण डीएनए का सूत्र टूट जाता है।

(iii) भौतिक उद्दीपन (Physical stimuli) : उच्च व निम्नताप इत्यादि से उत्पन्न क्षति इसके अन्तर्गत आती है।

(iv) प्रतिकृति के दौरान गलत क्षारकों का गठबंधन डीएनए को क्षति पहुँचाते हैं जिससे डीएनए अपने मूल स्वरूप हटकर कुछ विभिन्नतायें प्रदर्शित करता है, वातावरणीय कारकों अथवा अन्य कारणों से उत्पन्न डीएनए में जो कमी अथवा ह्रास पैदा हो जाती है उसे डीएनए की क्षति ( damage) कहते हैं। यह कोशिका की कार्य क्षमता व जीवन शक्ति ( vitality) को प्रभावित करते हैं तथा निम्न दो प्रकार से हो सकती हैं-

(1) मोनोएडक्ट (Monoadduct),

(2) डाइएडक्ट (Didduct)

(1) मोनोएडक्ट (Monoadduct)

यह रसायनिक उत्परिवर्तजन (mutagen) जैसे – HNO, के कारण होती है। इसमें डीएनए के केवल एक क्षारीय बेस में डीएमीनेशन प्रतिक्रिया के फलस्वरूप क्षति होती है।

चित्र-8: डीऐमीनेशन के कारण DNA क्षति सामान्य टेम्पलेट क्षतिग्रस्त डीएनए टेम्पलेट को विभिन्न एन्जाइम की मदद से सुधार (repair) देता है।

(2) डाइएडक्ट (Diadduct )

यह क्षति अल्ट्रा वायलेट विकिरण के कारण होती है। इसमें डीएनए के एक से अधिक नाइट्रोजिनस क्षार (Nitrogeneous base) होते हैं जैसे- पिरामीडीन के द्वितय (dimers)

डीएनए में सुधार (Repair of DNA)

विकृतिकरण तथा पुनकृर्तिकरण (Denaturation and Renaturation ) : डीएनए अणु में पॉलीन्यूक्लियोटाइड के दोनों सूत्र गर्म करने पर पृथक हो जाते हैं। इस प्रक्रिया को विकृतिकरण (denaturaion) या गलन (melting) कहते हैं। डीएनए अणु में दोनों सूत्र दुर्बल हाइड्रोजन बंधों द्वारा जुड़े रहते हैं इसलिए ये 100°C तक गर्म करते ही पृथक हो जाते हैं। धीरे-धीरे ठण्डा करने पर इस विकृतिकरण (denaturated ) डीएनए के दोनों सूत्र पुनः एकीकरण से डीएनए के द्विकुण्डलित (double helix) अणु का निर्माण करते हैं। इस पुनर्एकीकरण (reunion) को पुनर्कृतिकरण (renaturation) कहते हैं व यही डीएनए सुधार के लिये आवश्यक गुण है।

कोशिकाओं की डीएनए में सुधार की अन्तर्भूत क्षमता ने जैविक उद्विकास (biological evolution) में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। विगत वर्षों के अनवरत शोध के दौरान वैज्ञानिकों ने पाया कि डीएनए की आण्विक संरचना इस प्रकार की होती है कि इसमें होने वाली क्षति को, कोशिका में उपस्थित अणु, पहचान कर आसानी से सुधार सकते हैं। डीएनए की संरचना देखने पर ज्ञात होता है कि वह दो कुंडलीय (double helix) सूत्रों द्वारा निर्मित होता है एवं अपनी प्रतिलिपियाँ बनाने में सक्षम होता है। जब एक सूत्र क्षतिग्रस्त (damaged) होता है एवं दोनों सूत्र अलग हो जाते हैं तब प्रत्येक सूत्र एक टेम्पलेट की तरह कार्य करने लगता है। लगभग सभी कोशिकाओं में डीएनए क्षति की मरम्मत करने के विकर (एन्जाइमस) उपस्थित रहते हैं। डीएनए के सुधार के बाद कोशिका अपना सामान्य कार्य करने लगती है व जीवन शक्ति (vitality) पुनः प्राप्त हो जाती है।

कोशिकाओं में निम्न प्रकार से क्षतिग्रस्त DNA में सुधार लाया जा सकता है-

(1) कर्तन सुधार (Excision repair)

(2) पश्चपुनरावर्ती सुधार (Post replication repair)

(3) बेमेल सुधार (Mismatch repair)

(4) एस ओ एस सुधार (SOS repair )

(1) कर्तन सुधार (Excision repair )- इसमें डीएनए के क्षतिग्रस्त भागों का कर्तन करने नए अनुक्रम (sequence) संश्लेषित किए जाते हैं जो टूटे हुए भागों को जोड़ देते हैं। इस प्रक्रिया के दौरान इनमें गुआनिन के आगे साइटोसिन के डीएमीनेश द्वारा यूरेसिल बनता है।

यूरेसिल तथा डीऑक्सीराइबोस के मध्य स्थित बन्धन डीएनए ग्लाइकोसीलेस द्वारा टूटकर मात्र शर्करा बचती है जिसमें डीएनए से एपी विस्थ (AP Site) पर क्षार अनुपस्थित होता है। यह एमेन्डोन्यूक्लियेज द्वारा चिन्हित किया गया है जो डीएनए शृंखला को जोड़ता है।

बचा हुआ डीऑक्सीराइबोस डी ऑक्सी. राइबोसफोसफोडिसट्रेज द्वारा हट जाता है।

  1. सुधार के दौरान खाली स्थान (gap) डीएनए पॉलीमरेज द्वारा भर जाता है तथा लाइगेज द्वारा सील हो जाता है। इस तरह गुआनीन के आगे सही क्षार बेस साइटोसिन पुनः जुड़ जाता है ।

जटिल क्रिया विधि काम में ली जाती है जिसके तहत बहुविकर सम्मिश्र (multienzyme complex) सुधार के काम में प्रयुक्त होते हैं। इस क्रिया विधि में क्षतिग्रस्त स्थलों की पहचान (recognition), न्यूक्लिऐस क्षारों को हटाना तथा पॉलिमरेस बेस की सहायता से नव संश्लेषित डीएनए के सूत्रों को अवकाशों (gap) के मध्य में (क्षतिग्रस्त डीएनए के कारण) भर दिया जाता है व अन्तः में पॉलिन्यूक्लिओटाइड लाइगेज विकर की सहायता से डीएनए के नवसंश्लेषित भागों को जोड़ दिया जाता है। मानव डीएनए विधि इस्तेमाल होती है।

फोटोरिएक्टीवेशन (Photoreactivation )- इस प्रकार के सुधार में जो डीएनए अल्ट्रावायलेट प्रकाश के कारण क्षतिग्रस्त होते हैं, उनकी मरम्मत की जाती है। दृश्य प्रकाश (visible light) की उपस्थिति में एन्जायम क्रिया करके द्वितय (dimers) को एकलक (monomer) में खोल देते हैं व कार्य सुधार शुरू कर देते हैं।

(2) पश्चपुनरावृत्ति सुधार (Post replication repair)—– ए. कॉनबर्ग ने डीएनए पॉलिमिरेज I का पता लगाया जो प्रतिकृति (replication) के समय ही होता है तथा मानव डीएनए के सुधार में भी यह क्रिया विधि इस्तेमाल की जाती है।

(3) एस ओ एस सुधार (SOS repair )- यह प्रोकेरियोटिक जीवों में पाया जाता है । एसओएस (SOS) प्रभाव सर्वप्रथम मिरोस्लेव रेडमेन (Miroslav Radman) ने 1974 में खोजा व इसको SOS अनुक्रिया (response) नाम दिया जिसका मूल अर्थ है सेव आवर सोल (save our soul) यह सुधार कार्य कोशिका में केवल तभी होता है जब डी एन ए क्षतिग्रस्त हो जाता है व सामान्य विधियों (कर्तन, पश्च पुनरावृत्ति, सुधार आदि) से ठीक नहीं हो सकता ।

चित्र – 11 : UV-किरणों द्वारा क्षतिग्रस्त DNA का फोटो रिएक्टीवेशन विधि द्वारा सीधा सुधार- यह कार्य दृश्य प्रकाश (visible light) की ऊर्जा द्वारा डाइमर के बन्ध T (bonds) को नष्ट करके पुनः एकलक (monomer) में बदल जाता है।

ई. कोलाई (E. coli) रेक ए (rec. A) प्रोटीन कम सान्द्रता में मिलता है किन्तु डी एन ए के क्षतिग्रस्त होते ही इसकी मात्रा कई गुणी बढ़ जाती है। रेक ए के अलावा 15 और विभिन्न प्रकार के प्रोटीन डी एन ए के क्षतिग्रस्त होते ही संश्लेषित हो जाते हैं जो तुरन्त ही डी एन ए के सुधार (repair ) में सहायता प्रदान करते हैं तथा कोशिका को जीवन शक्ति ( vitality) प्रदान करते हैं ।

(4) बेमेल सुधार (Mismatch Repair )- इस विधि में ऐसे क्षार युग्मों को ज्ञात किया जाता है जो मैच नहीं करते अथवा युग्म ठीक से नहीं बनाते। यह बेमेल मेच प्रतिकृतिकरण अथवा पुर्नयोजन (recombination) द्वारा होता है। यह मिसमैच कर्तन सुधार द्वारा ठीक किया जाता है। म्यूट जीन (mute gene) ई. कोलाई के मिसमैच (mismatch) में भाग लेता है। बेमेल सुधार के दौरान जब एक नये संश्लेषित डीनएन में गलत क्षार जुड़ जाता है तब वह द्विकुण्डलित सूत्र (double strand) की ज्यामिती (geometry) बिगाड़ देता है। यह स्थल डीएनए बेमेल सुधार प्रोटीन द्वारा चिन्हित कर लिया जाता है। जो इस बेमेल भाग को नवनिर्मित सूत्र से हटा देता है तथा जो अवकाश बचता है उस स्थल पर डीएनए पॉलीमिरेज द्वारा सही क्षार जोड़ दिया जाता है जिसे डीएनए लाइगेज द्वारा सील कर दिया जाता है।

प्रश्न (Questions)

(A) बहुविकल्पी प्रश्न ( Multiple Choice Type Questions)

  1. पॉलीमरेज की खोज किसने की-

(a) लेडरबगं

(c) वॉटसन

(b) कोर्नबर्ग

(d) क्रिक

Who discovered polymerase-

(a) Lederberg

(c) Watson

(b) Kornberg

(d) Crik

  1. एसओएस सुधार किसमें पाया जाता है-

(a) यूकेरयोटिक जीव

(b) प्रोकेरयोटिक जीव

(c) a + b

(d) उपरोक्त में से कोई नहीं

SOS repair is found in-

(a) Eucaryotic organism

(c) a + b

(b) Procaryotic organisan

(d) None of the above

  1. म्यूट जीन किसमें भाग लेता है-

(a) एसओएस सुधार

(c) बेमेल सुधार

(b) पश्च पुनरावृत्ति सुधार

(d) कर्तन सुधार

Mute gene takes place in-

(a) SOS repair

(c) Mismatch repair

(b) Post replication repair

(d) Excision repair

  1. रेक – A प्रोटीन किसमें मिलता है-

(a) ई. कोलाई

(c) न्यूरोस्पोरा

(b) ड्रोसोफिला

(d) एगेरिकस

Rec-A protein is found in-

(a) E-coli

(c) Neurospora

(b) Drosophila

(d) Agaricus

(B) रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिये ( Fill in the blanks)

  1. प्रोटीन की सतह डीएनए की द्विकुण्डलन की…………………… खांच में अच्छी तरफ फिट हो जाती है। ( बड़ी खांच )

The surface of protein comfortably fit in the………………………. groove of double helix of DNA.   (major)

  1. सर्वप्रथम डीएनए प्रोटीन बन्ध संरचनायें……………… क्रिस्टलोग्राफी से ज्ञात हुई। (एक्स रे)

The DNA protein binding structures were discovered with the help of………………………crystallography.  (X-ray)

  1. ई. कोलाई में डीएनए के क्षतिग्रस्त होते ही………..A प्रोटीन संश्लेषित हो जाते हैं । ( Rec )

……………………… A proteins are synthesied when DNA is damaged E. coli (Rec).

  1. ई. कोलाई के मिसमेच सुधार में … …………… जीन भाग लेता है। (प्यूट)

………………….Gene takes part in mismatch repair of E.coli.    (Mute)

  1. एक कोड को …..दिशा में पढ़ा जा सकता है। (एक)

One code is read in……………..direction.     (one)

  1. डीएनए प्रोटीन पारस्परिक क्रिया ……………तथा………………. इत्यादि प्रक्रियाओं में भाग लेते हैं। (पुनरावृत्ति, अनुलेखन)

DNA protein interactions take part in……….. and…………….. processes.

  1. डीएनए प्रोटीन पारस्परिक क्रिया डीएनए के………………….. खांच में सम्पन्न होती है। (बड़ी)

DNA protein interaction is performed in……………….. groove. (Major)

  1. जिंक फिंगर अनुलेख ………. पादपों में मिलते हैं। (उच्च)

Zinc finger motifs are found in ……………………(higher)

  1. ल्यूसीन जिपर …….जीवों में मिलते हैं। (जीवाणु)

Leucine zipper are located in……………………(bacteria)

  1. ल्यूसीन जिपर बॉक्स तथा सन्वर्द्धक से गठबंधन करता है। (टाटा)

Leucine zipper unites……….. box and enhancer.    (TATA)

  1. डायएडक्ट क्षति….. .. विकिरण के कारण होती है। (पराबैंगनी)

Diadduct damage of DNA is due to ……….. .. radiations.  (Ultraviolet)

  1. डीएनए की मोनोएडक्ट क्षति…………………..के कारण होती है। (HNO, रासायनिक उत्परिवर्तन)

Monoadduct damage of DNA is due to………. (HNO, chemical mutagen)

  1. डीएनए व जीन नियमन में प्रयुक्त प्रोटीन्स के मध्य होने वाली पारस्परिक क्रिया……………..कहलाती है। (उत्परिवर्तजन)

The interaction between DNA and the proteins used in gene regulation is called…………….  (Mutagenesis)

  1. प्रोटीन अनुकल्प जब डीएनए के साथ जुड़ जाते है तो इसे………..कहते हैं । (जिंक फिंगर)

When protein motifs bind with DNA then it is called    (Zinc finger)

(C) सत्य / असत्य बताइये (True Or False)

  1. वह प्रोटीन जो डीएनए के साथ गठबंधन करते हैं उन्हें जीन नियमन प्रोटीन कहते हैं। (सत्य)

Those protein which bind with DNA are called gene regulation protein.   (True)

  1. जिंक फिंगर अनुलेख जीवाणु में पाये जाते हैं। (असत्य)

Zinc finger motif are found in Bacteria.   (False)

  1. डीएनए में क्षति व निम्न ताप से आ सकती है। (सत्य)

DNA damage can occur due to low or high temperature.   (True)

  1. ड्रोसोफिला के प्रांत में चार जिंक फिंगर होते हैं। (असत्य)

In domain of Drosophila four zinc finger are present.   (False)

  1. डीएनए में मोनोडक्ट क्षति रसायनिक उत्परिवर्तजन के कारण होती है। (सत्य)

In DNA monoadduct damage is due to chemical mutagen HNO2.  (True)

(D) टिप्पणी लिखिये (Write short notes )

  1. डीएनए में सुधार पर टिप्पणी लिखिये ।

Write a short note on repair in DNA.

  1. डीएनए प्रोटीन पारस्परिक क्रिया के कार्य पर टिप्पणी लिखिये।

Write a short note on function of DNA protein interactions.

  1. प्रोटीन के संरचनात्मक अनुकल्प पर टिप्पणी लिखिये ।

Write a short note on structural motifs of proteins.

  1. डीएनए के विकृतिकरण तथा पुनकृतिकरण पर टिप्पणी लिखिये।

Write a short note on denaturation and renaturation of DNA.

  1. डीएनए के SOS सुधार पर टिप्पणी लिखिये ।

Write a short note on SOS repair of DNA.

(E) लघुत्तरात्मक प्रश्न (Short Answer type Questions)

  1. डीएनए प्रोटीन पारस्परिक क्रिया की परिभाषा दीजिये ।

Define DNA-Protein interaction.

  1. जिंक फिंगर अनुलेख क्या होते हैं ?

What are zinc finger motifs.

  1. डीएनए में क्षति के दो कारण लिखिये।

Write two reasons for damage in DNA

  1. डाइएडक्ट क्या होता है ?

What is diadduct?

  1. जीवों के डीएनए में SOS सुधार कब पाया जाता है ?

In organisms when does SOS repair in DNA occurs?

(F) निबन्धात्मक प्रश्न ( Essay Type Questions)

  1. डीएनए के क्षति एवं सुधार का वर्णन चित्रों के साथ कीजिये ।

Describe the damage and repair of DNA along with diagrams.

  1. डीएनए प्रोटीन पारस्परिक क्रियायें समझाते हुए विभिन्न प्रकार के प्रोटीन के संरचनात्मक अनुकल्पों का वर्णन कीजिये ।

Explain DNA protein interactions also describe different types of structural motifs of proteins.