धारावाही स्प्रिंग (current carrying spring in hindi) स्प्रिंग में धारा प्रवाहित करने पर इसकी लम्बाई में क्या परिवर्तन होता है

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if a current is passed through a spring, does the spring stretch or compress धारावाही स्प्रिंग (current carrying spring in hindi) स्प्रिंग में धारा प्रवाहित करने पर इसकी लम्बाई में क्या परिवर्तन होता है

धारावाही स्प्रिंग (current carrying spring in hindi) : जब किसी स्प्रिंग में धारा प्रवाहित की जाती है तो स्प्रिंग के सभी फेरों में धारा समान दिशा में बहने के कारण स्प्रिंग संकुचित हो जाती है अर्थात स्प्रिंग की लम्बाई में कमी हो जाती है।

इस विधि का प्रयोग भार को उठाने के लिए किया जाता है।
अर्थात
जब स्प्रिंग में धारा प्रवाहित की जाती है तो स्प्रिंग संकुचित हो जाती है अर्थात इसकी लम्बाई में कमी होने लगती है अर्थात यह सिकुड़ने लगती है जिसे यह भार को ऊपर उठा देती है जैसा चित्र में दिखाया गया है।

 

प्रश्न : स्प्रिंग में धारा प्रवाहित करने पर इसकी लम्बाई में क्या परिवर्तन होता है अर्थात बढती या कम होती है ?
उत्तर : जब किसी स्प्रिंग में विद्युत धारा प्रवाहित की जाती है तो इसकी लम्बाई में संकुचन उत्पन्न हो जाता है अर्थात स्प्रिंग की लम्बाई में कमी उत्पन्न हो जाती है। अर्थात स्प्रिंग की लम्बाई कम हो जाती है।
प्रश्न : चित्र सहित व्याख्या कीजिये क्या होता है जब किसी स्प्रिंग में विद्युत धारा प्रवाहित की जाती है ?
उत्तर : चित्रानुसार एक स्प्रिंग को परिपथ में सेट करते है।

 

यदि चित्र में दिखाए अनुसार परिपथ में स्विच (K) को दबाया जाता है तो स्प्रिंग से धारा बहने लगती है , चूँकि हम ऊपर पढ़ चुके है कि धारा बहने पर स्प्रिंग की लम्बाई में कमी या संकुचन होता है जिसके कारण यह Hg के विलयन के स्तर के ऊपर उठ जाती है और परिपथ खुला हो जाता है जिस कारण परिपथ में धारा बंद हो जाती है। अब स्प्रिंग भार के कारण पुनः निचे की तरफ गति करती है अर्थात स्प्रिंग भार के कारण निचे Hg के विलयन की तरफ जाने लगती है और जैसे ही यह स्प्रिंग Hg विलयन के सम्पर्क में आती है पुनः परिपथ पूर्ण हो जाती है और स्प्रिंग में धारा बहने लग जाती है और स्प्रिंग पुनः संकुचित होकर ऊपर की तरफ गति करती है।
यह प्रक्रिया बार बार होने लगती है जिसके कारण स्प्रिंग उधर्वतल में दोलन करने लगती है।
अर्थात स्प्रिंग ऊपर निचे गति करने लग जाती है।