भौतिक विज्ञान तथा रसायन विज्ञान में सहसम्बन्ध (Correlation between Physics and Chemistry in hindi)

By  

प्रश्न . रसायन विज्ञान का किन्हीं पाँच विषयों से सह-सम्बन्ध ।
Correlation of Chemistry with any five subjects.
उत्तर-किसी भी विषय को पृथक रूप में नहीं पढ़ाया जा सकता है। तब विज्ञान विषय के लिये तो यह सोचना और भी बड़ी भूल होगी कि विज्ञान शब्द के अन्तर्गत निहित इसकी विभिन्न शाखायें जैसे भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान, जन्तु विज्ञान, वनस्पति विज्ञान भू-विज्ञान तथा कृषि विज्ञान को एक-दूसरे से पृथक करके स्वतन्त्र रूप से पढ़ाया जा सकता है। इस प्रकार विज्ञान शिक्षण का उद्देश्य ही समाप्त हो जायेगा क्योंकि इस विषय अर्थात विज्ञान की स्थापना ही इस आधार पर हुई है कि विज्ञान के उप विषयों को सम्पूर्ण इकाइयों के रूप में ही प्रस्तुत किया जाये। रसायन विज्ञान विषय को सरल तथा सुगमता से ग्रहण करने योग्य बनाने के लिए उसको पाठशाला के अन्य विषयों से सम्बन्धित करना भी अत्यन्त आवश्यक है।
रसायन विज्ञान शिक्षण में सहसम्बन्ध के रूप (Kinds of Correlation in Chemistry) – रसायन विज्ञान में सहसम्बन्ध का रूप अत्यन्त ही विस्तृत है। रसायन का सहसम्बन्ध विज्ञान की स्वयं की शाखाओं के साथ ही अन्य विषयों तथा दैनिक जीवन से भी है। रसायन विज्ञान का अन्य विषयों से सम्बन्ध निम्न प्रकार से है-
1. भौतिक विज्ञान तथा रसायन विज्ञान में सहसम्बन्ध (Correlation between Physics and Chemistry) – भौतिक विज्ञान तथा रसायन विज्ञान में गहरा सम्बन्ध है। रसायन विज्ञान पढ़ाते समय भौतिक विज्ञान के ज्ञान के अभाव में अधूरा है, ऐसा निम्न उदाहरणों से स्पष्ट है-
यदि रसायन विज्ञान में ऑक्सीजन गैस तैयार करने के विषय में अध्ययन करते है तब उसमें यह बताया जाता है कि ऑक्सीजन गैस तैयार करने के पश्चात निकास नली को जल से अलग कर देना चाहिये। इस सावधानी के अन्दर भौतिक विज्ञान का कारण है क्योकि यदि पहले बर्तन को हटा दिया जायेगा तो ताप गिरने से गैस ठण्डी होकर सिकुड़ेगी। इसस गैस का दाब कम हो जायेगा और पानी ऊपर खिंचकर परखनली में पहुंच जायेगा जिसस सम्भव है, परखनली टूट जाये।
भौतिक विज्ञान में हम विभिन्न प्रकार के सेल, जैसे-वोल्टीय सेल, लैक्लांशे सेल आदि का अध्ययन करते हैं। वोल्टीय सेल में हम तनु सल्फ्यूरिक अम्ल लेते हैं जो कि जस्ते की पद्रिका से क्रिया करके हाइड्रोजन गैस उत्पन्न करता है। इस विषय को पढ़ाते समय भौतिक विज्ञान के शिक्षक के लिये रसायन विज्ञान का ज्ञान आवश्यक है।
2. रसायन विज्ञान तथा जीव विज्ञान में सह-सम्बन्ध (Correlation between Chemistry and Bioloon) – यह भौतिक विज्ञान के समान है। रसायन विज्ञान का भी जीव विज्ञान से गहरा सम्बन्ध है। निम्न उदाहरणों से इसे समझा जा सकता है-
जीव विज्ञान में जन्तुओं में श्वसन क्रिया समझाते समय बताया जाता है कि उक्त क्रिया में ऑक्सीजन अन्दर ली जाती है जो शरीर में फेफड़ों में जाकर रक्त को शुद्ध करती है। परन्तु ऑक्सीजन द्वारा रक्त का शुद्धिकरण पूर्णरूपेण रासायनिक क्रिया है। इसी प्रकार पाचन क्रिया में पाचक रसों का बनना तथा इनकी क्रिया भी रसायन विज्ञान से सम्बन्धित है।
पेड़-पौधों में प्रकाश संश्लेषण की क्रिया, श्वसन क्रिया आदि की व्याख्या रसायन विज्ञान के ज्ञान के बिना अधूरी है। जीव जगत के लिये विभिन्न रासायनिक तत्त्वों की आवश्यकता तथा उनकी क्रिया सभी कुछ रसायन विज्ञान से सम्बन्धित है ।
3. भू-विज्ञान तथा भौतिक विज्ञान और रसायन विज्ञान का सह-सम्बन्ध (Correlation between Geology and Physics-Chemistry)– भौतिक विज्ञान व रसायन विज्ञान का भू-विज्ञान से उतना ही गहरा सम्बन्ध है जितना जीव विज्ञान से। भौतिक व रसायन विज्ञान का ज्ञान भू-विज्ञान के ज्ञान को सुगम बनाता है, जैसे-भू-विज्ञान में हम चट्टानों, भूमि के अन्दर पाये जाने वाले खनिज लवणों, धातुओं तथा उनको प्राप्त करने के विषय में अध्ययन करते हैं जबकि रसायन विज्ञान इनके गुणों का विश्लेषण करता है और भौतिक विज्ञान ताप, दाब व गुरुत्व बल के ज्ञान से भू-रचना को समझने में सहायता करता है।
4. रसायन विज्ञान, भौतिक विज्ञान तथा कृषि विज्ञान में सह-सम्बन्ध (Correlation between Chemistry, Physics and Agriculture) – कृषि विज्ञान में भूमि की उर्वरता बढ़ाने में विभिन्न रासायनिक पदार्थों का उपयोग, भूमि की प्रकृति, ताप, आर्द्रता, मौसम की जानकारी, हवा का वेग, भूमि स्थित जल की स्थिति, यूरिया, फॉस्फेट, अमोनिया, सल्फेट, नाइट्रेट आदि का उपयोग, खेती के आधुनिकतम उपकरण, जैसे-ट्रेक्टर, ट्यूबवैल, विभिन्न प्रकार के थेशर. कीटनाशक रसायन व उनके उपयोग के यन्त्र आदि सभी का ज्ञान कृषि विज्ञान का अभिन्न अंग है।
5. रसायन विज्ञान एवं पर्यावरण (Chemistry and Environment) – रसायन विज्ञान में विभिन्न पदार्थों की रासायनिक संरचना का स्पष्टीकरण किया जाता है, उसी प्रकार पर्यावरण में भी प्राकृतिक व भौतिक पदार्थों की रासायनिक क्रियाओं का विवेचन उपलब्ध होता है। परन्तु पर्यावरण में इन रासायनिक क्रियाओं के पारस्परिक प्रभाव व अन्य पदार्थों पर प्रभाव का भी विवेचन किया जाता है।
6. रसायन विज्ञान एवं समाज (Chemistry and Society) – रसायन विज्ञान साहत विज्ञान विषय सामाजिक जीवन के सांस्कृतिक पक्ष को प्रभावित करते हैं। इस प्रकार के प्रभावों के लिए 3 स्तरों की पहचान आसानी से की जा सकती है-नवाचार, प्रसरण और निर्वचन । नवाचार स्तर में नयी खोज उपकरण, रसायन, सिद्धान्त, विधि, तकनीक आदि का प्रमुखता है। प्रसरण स्तर पर इनसे सामाजिक अन्तक्रिया स्वाभाविक रूप में होती है। यही सामाजिक परिप्रेक्ष्य में व्यक्ति या समह द्वारा निर्णय लिये जाते हैं। निर्वचन स्तर पर नही खोज को वर्तमान व्यवस्था में अनकलिल किया जाता है।
यह एक सामान्य एवं सर्वविदित तथ्य है कि विज्ञान रूढ़ियों और अन्धविश्वासों की जंजीरों से समाज को मुक्त करता है। इसी प्रकार सामाजिक रूढ़ धारणाओं और धर्म जाति रंग आदि सांस्कृतिक बन्धनों को विज्ञान कमजोर बनाता है। विज्ञान की प्रगति के साथ साथ मानब के बौद्धिक क्षेत्र में प्रसार होता है। विज्ञान का ही प्रभाव है कि अगस्त कॉस्टे ने समाजशास्त्र को अस्तित्व प्रदान किया। मनोविज्ञान का उद्भव व विकास हुआ। राजनीति में प्रजातन्त्र, लोक-कल्याणकारी, समाजवादी, समझौता जैसी अवधारणाएँ पनपी। दर्शन में मानवतावाद प्रयोगवाद, अस्तित्त्ववाद जैसी नवीन विचारधाराएँ उद्विकसित हुई। कला साहित्य आदि में यथार्थवादी विचार विज्ञान की ही देन है। पेंटिंग में क्यूविजय प्रत्यक्षत विज्ञान का प्रभाव है। शिक्षा में तो विज्ञान की बढ़ती हुई भूमिका अपने आप में स्वयंसिद्ध है।
स्वास्थ्य के क्षेत्र में विज्ञान और प्रौद्योगिकी का प्रभाव व्यावहारिक और अतिव्यापी है। रोगों के सम्बन्ध में प्रभावित धारणाओं एवं तकनीकों और विधियों के बारे में रुढियों को समाप्त करने की दिशा में विश्वभर में पर्याप्त सफलता मिली है। विकसित समाजों में भी इनके नियन्त्रण को काफी सीमा तक कमजोर किया जा रहा है। माइक्रोब्ज की पहचान और उनकी कालोनियों को रसायनों द्वारा नष्ट करने के प्रयास, ऐपटीबॉडीज, कैक्सिन्स, रोगों के जीवाणु सिद्धान्त, एण्टीबायोटिक्स, स्वास्थ्य के कैमॉथेरापियुटिक उपागम, साइकोथैरेपी, रेडियोलॉजी से रोग निदान, इलैक्ट्रोकार्डियोग्राफी, कम्प्यूटराज्ड डायाग्निसिस, एण्डोस्कॉपी, हॉलोग्राफी आदि के अनुसन्धान विकास और प्रयुक्ति से स्वास्थ्य के स्तर में सुधार को नये आयाम मिले हैं। यहाँ रसायन, भौतिकी, जीव विज्ञान और गणित के समाकलन की तस्वीर स्पष्ट होती है। रासायनिक उर्वरकों, कीटनाशकों, सिंचाई प्रौद्योगिकी, बीज प्रौद्योगिकी, क्रॉप रोटेशन, मल्टीक्रॉप आदि के उपयोगों से कृषि उत्पाद में अतुल वृद्धि सम्भव हुई।
7. रसायन विज्ञान एवं सामाजिक अध्ययन (Chemistry and Social Studies) – आज का मनुष्य विज्ञान और टैक्नोलोजी के युग में रहता है। उसे आधुनिक युग के विभिन्न कार्य क्षेत्रों को समझने तथा उसके विकास में सहयोगात्मक भूमिका निभाने के योग्य बनाने के लिए उसे विज्ञान की शिक्षा देना आवश्यक है। यही कारण है कि शिक्षा विशारद तथा सामाजिक नेता प्राथमिक स्तर के विज्ञान की शिक्षा देने पर जोर देते हैं, परन्तु विज्ञान को शिक्षा केवल विज्ञान के लिए नहीं दी जाती अपितु मानवीय तत्वों को सामने रखकर इसकी शिक्षा दी जाती है । विद्यार्थियों को केवल विज्ञान के विभिन्न सिद्धान्तों, सूत्रों तथा अनुसन्धानों का ही ज्ञान प्रदान नहीं किया जाता बल्कि उन्हें यह भी समझाया जाता है कि विज्ञान मानवता के लिए कितना उपयोगी है और कितना हानिकारक ?
अणु बम बनाना विज्ञान का विषय है, परतु इस बम के प्रयोग के विनाशकारी परिणाम सामाजिक अध्ययन का विषय है। विज्ञान ने मशीन बनाई और विश्व को उद्योगीकरण की ओर अग्रसर कर दिया, परन्तु इस उद्योगीकरण से मानव समाज को कितना लाभ हुआ और किन विकट समस्याओं का सामना करना पड़ा यह ‘सामाजिक अध्ययन‘ का विषय है। रेडियो, फिल्म, दूरदर्शन, कम्प्यूटर, प्रेस आदि विज्ञान के चमत्कारी आविष्कार हैं परन्तु इनका मानव समाज पर क्या प्रभाव पड़ा इस प्रश्न का उत्तर विज्ञान को सामाजिक अध्ययन के निकट ले आता है। अतः इसमें तनिक भी सन्देह नहीं कि विज्ञान और सामाजिक अध्ययन का परस्पर गहरा सम्बन्ध है।

प्रश्न 2. विभिन्न स्तरों पर रसायन विज्ञान शिक्षण के सामान्य उद्देश्य क्या-क्या हो सकते हैं, स्पष्ट कीजिये।
What can be the general objectives of chemistry teaching at various levels \ Clarify-
उत्तर- प्राथमिक स्तर पर रसायन विज्ञान शिक्षण के सामान्य उद्देश्य –
1. छात्र अन्वेषण विधि सीख सके और जीवन में विज्ञान और तकनीकी के महत्व को समझना शुरू करे।
2. छात्र सफाई से और स्वस्थ रहने की आदत डाल सकें और अपने आस-पास स्वच्छता तथा स्वास्थ्य विज्ञान (Hygiene) की उपयोगिता समझ सकें।
3. छात्र अन्य लोगों के साथ सहयोग कर कार्य करना सीख सकें और छात्रों में ईमानदारी, नेतृत्व, पहल करने आदि गुणों का विकास हो सके।
4. छात्र सृजनात्मक गतिविधियों के माध्यम से अपने विचारों को अभिव्यक्त कर सकें।
उच्च प्राथमिक स्तर पर रसायन विज्ञान शिक्षण के सामान्य उद्देश्य
1. छात्र वैज्ञानिक ज्ञान का दैनिक जीवन में उपयोग कर सकें।
2. छात्र विज्ञान के क्षेत्र में नये ज्ञान को खोज सकें।
3. छात्रों में वैज्ञानिक अभिवृत्ति का विकास हो सके।
4. छात्र अपने परिवेश में समस्याओं का हल खोज सकें।
5. छात्र वैज्ञानिक प्रक्रियाएँ (Scientific Processes) सीख सकें।
6. छात्र सृजनशील बन सकें।
माध्यमिक स्तर पर रसायन विज्ञान शिक्षण के सामान्य उद्देश्य
1. छात्र अपने परिवेश में कृषि और तकनीकी में विज्ञान के महत्व को समझ सकें।
2. छात्र अपने ज्ञान को समस्या के समाधान को ढूंढने में उपयोग कर सकें।
3. पर्यावरणी संरक्षण, प्रदूषण में कमी, समुदाय में स्वास्थ्य आदि क्षेत्रों में छात्र सार्थक रूप से सहयोग कर सकें।
4. कार्य के क्षेत्र में प्रवेश करने के लिए आवश्यक ज्ञान और कौशल प्राप्त कर सकें।
5. जीवन में आत्मविश्वास के साथ प्रवेश के लिए आवश्यक ज्ञान तकनीकी क्रियाएं आदि छात्र ग्रहण कर सकें।
6. विभिन्न प्रकार की गतिविधियों के माध्यम से सृजनात्मकता वैज्ञानिक दृष्टिकोण ईमानदारी, नेतृत्व, सहयोग आदि गुणों का छात्रों में विकास हो सके।
7. छात्रों में घर के रख-रखाव और बच्चों की देखभाल के लिए समुचित अभिवृत्ति ज्ञान और कुशलता का विकास करना।