कंप्यूटर नेटवर्किंग इन हिंदी नोट्स क्या हैं ? computer networking notes in hindi pdf download

By  

computer networking notes in hindi pdf download कंप्यूटर नेटवर्किंग इन हिंदी नोट्स क्या हैं ?

कम्प्यूटर नेटवर्किंग
1. कम्प्यूटर नेटवर्क / डाटा नेटवर्क दृ यह एक दूरसंचार नेटवर्क है जो कम्प्यूटर डाटा के आदन प्रदान करने की अनुमति देता है।
2. डेटा साझा करने के लिए सबसे आम संसाधन – इंटरनेट
3. नेटवर्क कनेक्शनध् लिंक्स – इसमें ट्रांसमिशन मीडिया से कम्प्यूटर नेटवर्क को आपस में जोडा जाता है।
4. ट्रांसमिशन मीडिया – यह मुख्यत बिजली की केबल (ईथरनेट, बिजलीलाइन), ऑप्टीकल फाइबर (फाइबर ऑप्टिक संचार) और रेडियो तंरगो (वायरलेस नेटवर्किंग) के रूप में होता है।
5. स्।छ में व्यापक रूप से इस्तेमाल किये गये प्रसारण मीडिया को सामूहिक रूप से ईथरनेट के रूप में जाना जाता है।
6. ईथरनेट दोनों तांबा (Copper) और फाइबर (Fiber) केबल पर डेटा स्थानान्तरित करता है।
7. IEEE 802.3 – मीडिया और प्रोटोकॉल मानको का ईथरनेट पर नेटवर्क उपकरणों के बीच संचार व्यवस्था।
8. IEEE 802.11 – वायरलैस लेन मानक – ये रेडियो तरंगों का उपयोग करते है तथा दूसरे माध्यम के रूप में इंफ्रांरेड वेव्स का उपयोग करते है।
9. वायर्ड भौतिक (फिजिकल) नेटवर्क लिंक – ट्विस्टेड पेयर वायर, को-एक्सील केबल, ऑप्टिकल फाइबर, T1 – T3 लाइन्स आदि।
10. Twisted Pair Wire – यह केबल का एक प्रकार है जिसमें दो स्वतन्त्र इन्सुलेटेड तारों को एक दूसरे से मोड कर बनाया जाता है। जिससे क्रास टाक ओर विद्युत चुम्बकीय प्रेरण (इलेक्ट्रोमैग्नेटिक इंडक्शन) को कम करने में मदद मिलती है।
11. Co – Axial Cable यह तार का एक प्रकार है जिसमें एक केन्द्रीय तार चारों ओर इन्सुलेशन से घिरा होता है। और उसके ऊपर ब्रेडेड वायर की ग्राउडेंड शील्ड लगी होती है। यह शील्ड बिजली और रेडियो आवृति के हस्तक्षेप को कम करती है।
12. Optical Fibre – यह ग्लास धागों का बंडल है, जिसका प्रत्येक धागा प्रवाहित तंरगों पर संग्राहक संदेशों को प्रसारित करने के लिए सक्षम होता है।
13. ऑप्टिकल फाइबर – इनकी बैंड विड्थ अधिक होती है तथा इनमें अनोलोजिकली के बजाय डिजिटल तरीके से डाटा प्रेषित किया जा सकता है।
14. T1 तथा T3 लाइन्स – (टीचर 1 तथा टीचर 3) – इनका उपयोग निजी और व्यवसायों में किया जाता है।
15. DSL का विस्तृत नाम – डिजिटल सब्स्क्राइबर लाइन
16. T1 की स्पीड Download and Upload – 1.5m bits per sec.
17. T3 की स्पीड में Download and Upload – 44m bits per sec.
18. T1 और T3 का उपयोग – दूरसंचार मे लीज लाइनों के तौर पर।
19. वायरलेस लिंक के प्रकार – इलेक्ट्रोमैग्नेटिक (EM) स्पेक्ट्रम, स्थलीय माइक्रोवेव उपग्रह, रेडियो वेव्स,सेल्यूकर नेटवर्क, इन्फ्रारेड ब्लू टूथ, वाई-फाई, RFID , GPRS A – WIMAX
20. RFID का विस्तृत नाम – रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन
21. GPRS का विस्तृत नाम – General Packet Radio Service
22. GPS का विस्तृत नाम – ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम
23. Terestrial microwave – ये पाइंट यू पाइंट संचार के लिए इस्तेमाल होते है यह दृष्टि प्रसार से सीमित है इसलिए पहाड़ियों और पहाडों के आसपास पारित नहीं हो सकती।
24. संचार उपग्रह – यह एक कृत्रिम उपग्रह जो ट्रासपोंडर के माध्यम से रेडियो दूरसंचार संकेतो का प्रवर्धन और पुर्नप्रसारण करता है, यह पृथ्वी पर स्थित विभिन्न स्थानों के रिसीवर और एक स्त्रोत ट्रांसमीटर के बीच एक संचार चैनल बनाता है।
25. Radio Waves – यह विद्युत चुम्बकीय विकिरण है, जिनका स्पेक्ट्रम इंफ्रारेड तरंगों से ज्यादा लम्बा होता है।
26. WLAN – यह उच्च एवं कम आवृति रेडियो प्रोद्योगिकी का उपयोग करता है। यह Spread spectrum प्रोद्योगिकी का उपयोग करता है।
27. Radio Waves की अधिकतम आवृति – 300 गीगा हर्टज
28. Radio Waves न्यूनतम आवृति – 3KHZ (किलो हर्टज)
29. Radio Waves dh Wave length -1mm (0.039 इंच) से 100 Km (62 मील) तक होती है।
30. रेडियो तंरगों का इस्तेमाल – मोबाइल रेडियो संचार, प्रसारण रडार, संचार उपग्रहों, कम्प्यूटर नेटवर्क आदि।
31. सेलुलर नेटवर्क – यह आवृत क्षेत्र में विभाजित होते है जिसे सेल (कोशिका) कहा जाता है। प्रत्येक सेल में एक ट्रांस रिसीवर होता है जिसे सेलसाइट या बेस स्टेशन कहा जाता है यह बेस स्टेशन सेल नेटवर्क कररेज देता है।
32. पोर्टेबल ट्रांससीवर्स – N: मोबाइल, फोन, पेजर आदि।
33. IR (Infrared)- इसमें IR विकिरण के द्वारा डेटा सम्प्रेषण किया जाता है।
34. I.R.वायरलेस लघु और मध्यम दूरी के संचार और नियन्त्रण के लिए प्रयोग किया जाता है।
35. LOS का विस्तृत नाम – लाइन ऑफ साईट
36. BER का विस्तृत नाम – Bit Error Rate
37. I.R.वायरलेस प्रणाली में स्त्रोत और गंतव्य एक दूसरे के सामने न हो तो भी डाटा सम्प्रेषण किया जा सकता है।
38. I.R. मुख्यत: पाइंट एट शूट के सिद्धान्त पर काम करता है।
39. IR का प्रयोग – मोबाइल फोन, लैपटॉप, कैमरा, प्रिंटर, चिकित्सा उपकरणों टी.वी रिमाल नियन्त्रण, पोर्टेबल उपकरणों आदि मे।
40. ब्लूटूथ – यह एक रिप्लेसमेंट संचार प्रोटोकॉल है। यह कम दूरी पर डेटा का आदान प्रदान और मोबाइल उपकरणों से 2.4 से 2,845 गीगा बैंड में लघु तरंग दैर्ध्य, UHF रेडियो तरंगो का उपयोग और पर्सनल एरिया नेटवर्क (PAN) के निर्माण के लिए एक वायरलेस तकनीक मानक है।,
41. वाई-फाई -यह लोकल एरिया वायरलेस कम्प्यूटर नेटवर्किंग तकनीक है, जिसमें उपकरणों को नेटवर्क से कनेक्ट करने के लिए मुख्य रूप से 2.4 गीगाहर्टज (12cm) UHF और 5 गीगा हर्ट्ज (6सेमी) SHF रेडियो बैंड का उपयोग होता है।
42. वाई-फाई अनायस – यह वाई-फाई उपयोग करने की अनुमति देता है।
43. हॉटस्पॉट की रेंज धर में 20 मीटर (66फुट) होती है।
44. RFID – यह विद्युत चुम्बकीय क्षेत्र के वायरलेस उपयोग, स्वचालित रूप से पहचान करने और वस्तुओं से जुड़ी टैग पर नजर रखने के प्रयोजनों के लिए, डेआ स्थानान्तरित करने के लिए किया जाता है।
45. RFID का उपयोग टैग रसद, शॉपिंग माल आदि में किया जाता है।
46. GPRS – यह एक डेटा सेवा प्रौद्योगिकी को सक्षम बनाता है जो 2G दूरसंचार नेटवर्क, टवपबम काल के साथ – ईमेल, मल्टीमीडिया सन्देश, आदि में उपयोग होता है।
47. GPS यह एक ग्लोबल पोजीशन सिस्टम है, जो स्थान निर्धारण के लिए सैटेलाइट से समय का उपयोग करता है। इसका GSM या GPRS से कोई संबंध नहीं है।
48. WIMAX – माइक्रोवेब को एक्सेस करने के लिए दुनिया भर में इंटरआपरेबलिटी।
49. Wimax यह 30 से 40 मेगाबिट प्रति सेकंड की दर से डेटा स्थानान्तरित करता है।
50. वाइमैक्स – यह एक मानक आधारित केबल और DSL के एक विकल्प के रूप में लास्ट माईल वायरलेस ब्रॉडबैड एक्सेस के वितरण की सक्षम तकनीक है।
51. सेलुलर – यह सबसे अधिक लचीला और कुशल प्रोटोकॉल है।
52. इंटरनेट प्रोटोकॉल सुईट – यह कम्प्यूटर नेटवर्किंग मॉडल और संचार के प्रोटोकाल का समूह है जो इंटरनेट और नेटवर्क पर इस्तेमाल किया जाता है।
53. AM Radio की फ्रिक्वेंसी रेंज – 500 KHz to 30 MHz
54. FM Radio की फ्रिक्वेंसी रेंज – 80 MHz-110 MHz
55. TV Radio की फ्रिक्वेंसी रेंज – 100 MHz to 1 GHz
56. Microwave की फ्रिक्वेंसी रेंज – 500MHz &40GHz
57. Satellite Communication of food पद निज. – 1 – 50GHz
58. Mobile Phone की फ्रिक्वेंसी रेंज – 500 MHz to 2 GHz
59. Wireless LAN – 2.4, 5 THz
60. Infrared की फ्रिक्वेंसी रेंज – 1 to 100 THz
61. Visible Light – 1014 to 5 x 1014 Hz
62. Ultraviolet – 5 x 1014 Hz to 10 Hz
63. Copper UTP का फ्रिक्वेंसी बैण्ड – 0- 100MHz
64. Co Axial Cable का फ्रिक्वेंसी बैंण्ड – 100Khz to 750 MHz
65. Microwave Links का फ्रिक्वेंसी बैण्ड – 500 MHz to 20 Ghz
66. Satellite Links की फ्रिक्वेंसी बैण्ड – 1 GHz to 50 GHz
67. Fibre Optic cable की फ्रिक्वेंसी बैण्ड – 100 THz to 1000TH7.
68. Wireless Lan की फ्रिक्वेंसी बैण्ड – 2.4 GHz
69. Mobile Phone की फ्रिक्वेंसी बैण्ड – 900 MHz & 2 G, 2GHz – 3G
70. TCP का विस्तृत नाम – ट्रांसमिशन कंट्रोल प्रोटोकॉल
71. IP का विस्तृत नाम -. इंटरनेट प्रोटोकॉल
72. नेटवर्क प्रोटोकॉल को चार लेयर्स में विभाजित कर सकते है।
A – नेटवर्क एक्सेस लेयर (Network Access Layer)
B- इंटरनेट लेयर
C- ट्रांसपोर्ट लेयर ।
D- एप्लीकेशन लेयर
73. नेटवर्क एक्सेस लेयर – यह सुनिश्चित करती है कि डेटा को फिजिकल रूप में हार्डवेयर में कैसे भेजा जाएगा, जहाँ हार्डवेयर सीधा नेटवर्क मीडिया से सीधा जुडा हो।
74. IP डाटाग्राम – डाटा को डाटा पेकेट में पैक करना।
75. इंटरनेट लेयर – यह IP डाटाग्राम को रॉउट करता है तथा होस्ट को किसी भी नेटवर्क पर डेस्टिनेशन पर डेस्टिनेशन पर डिलीवर करने की अनुमति देता है।
76. ट्रांसपोर्ट लेयर – यह डाटा ट्रांसपोर्ट हेतु सर्विस का लेवल तथा कनेक्शन का स्टेटस को बताता है।
77. एप्लीकेशन लेयर – यह ऐप्लीकेशन प्रोटोकॉल और होस्ट प्रोग्राम के साथ ट्रांसपोर्ट लेयर के साथ इंटरफेस नेटवर्क का उपयोग करता है।
78. DNS का विस्तृत नाम – डोमेन नेमिंग सिस्टम
79. HTTP का विस्तूत नाम – हाइपर टेक्स्ट ट्रांसफर प्रोटोकॉल
80. FTP का विस्तृत नाम – फाइल ट्रांसफर प्रोटोकॉल
81. SNMP का विस्तृत नाम – Simple Netwrok management Protocol
82. SMTP का विस्तृत नाम – सिंपल मेल ट्रांसफर प्रोटोकॉल
83. DHCP का विस्तृत नाम – डायनामिक होस्ट कॉन्फिगरेशन प्रोटोकॉल।
84. OSI का विस्तृत नाम – ओपन सिस्टम, इंटरकनेक्शन
85. आकार और फैलावा के आधार पर नेटवर्क के प्रकार – PAN, LAN, WLAN, MAN, -WAN,
86. PAN (पर्सनल एरिया नेटवर्क) – इस तरह के उपकरण एक व्यक्ति की सीमा पर ही संवाद कर सकते है। उदाहरण – ब्लूटूथ, RFID, एंबेडेड मेडिकल डिवाइस ऑपरेशन आदि ।
87. LAN (लोकल एरिया नेटवर्क) – यह निजी नेटवर्क है जो कि घर या बिल्डिंग के भीतर, आस-पास संचालित हो सकता है। उदाहरण -Wi-Fi
88. वायरलैस लैन (WLAN) – इसका उपयोग वहां होता है, जहां केबल इन्स्टॉल करने में समस्या आती है।
89. MAN (मैट्रोपोलिटन एरिया नेटवर्क) – इस नेटवर्क का फैलाव लगभग एक शहर में होता है। उदाहरण -टी.वी. केबल्स,
90. WAN (वाइड एरिया नेटवर्क) – इसका फैलाव एक देश या Continent तक होता है। उदाहरण – VPN, ISP, सेलुलर टेलीफोन नेटवर्क, 3G, उपग्रह संचार।
91. VPN का विस्तृत नाम – वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क।
92. नेटवर्क टोपोलाजी – नेटवर्क के विभिन्न तत्वों (लिंक्स, नोट्स) आदि की व्यवस्था है।
93. भौतिक टोपोलॉजी – यह डिवाइस का स्थान और केबल इंन्स्टालेशन का प्लेसमेंट दर्शाता है।
94. लॉजिकल टोपोलॉजी – यह बताता है कि डाटा कैसे एक नेटवर्क के भीतर ट्रांसमिट होता है।
95. नेटवर्क टोपोलॉजी के प्रकार – बस टोपोलॉजी, स्टार टोपोलॉजी, रिंग टोपोलॉजी, ट्री. टोपोलाजी, हाइब्रिड टोपोलॉजी, मेश टोपोलॉजी।
96. बस टोपोलॉजी – इसमें इंटरफेस कनेक्टर्स की मदद से प्रत्येक नोड एक की केबल से जुडा होता है यह केन्द्रीय केबल नेटवर्क की रीढ़ है। बस के रूप में जाना जाता है। इसमें संकेत बस केबल से जुडी मशीनों से होता हुआ दोनों दिशाओं में यात्रा करता हुआ Destination मशीन तक पहुंचता है।
97. बस टोपोलॉजी में किसी प्रकार की समस्या होने पर पूरा नेटवर्क फैल हो सकता है।
98. स्टार टोपोलॉजी – इसमे प्रत्येक नेटवर्क होस्ट (host) एक पॉइंट टू पॉइंट कनेक्शन के साथ केन्द्रीय हब (Hub) के साथ जुड़ा होता है। इसमें प्रत्येक नोड हब, राउटर या स्विच नामक केन्द्रीय नोड से जुड़ा होता है। इसमें स्विच सर्वर है और उपकरण (पेरिफेरल) क्लांइट की भांति कार्य करते है।
99. स्टार टोपोलॉजी में केन्द्र की विफलता पर कोई भी नोड आपस में संचार नहीं कर सकता।
100. रिंग टोपोलॉजी – यह बन्द लूप प्रकार से सेट की जाती है। इसमें डेटा सिर्फ एक ही दिशा में रिंग के चारों ओर चक्कर लगाता है। त्पदह पर स्थित प्रत्येक डिवाइस (Node) एक रिपीटर के रूप में कार्य करता है।जिससे सिग्नल मजबूत बने रहे।
101. रिंग टोपोलॉजी में प्रत्येक छवकमे पर रिसीवर और ट्रांसमीटर लगा होता है।
102. रिंग टोपोलॉजी में सभी नोड्स एक सर्वर के रूप में काम करते है।
103. रिंग टोपोलॉजी में यदि एक नोड काम करना बन्द कर दे तो पूरा नेटवर्क प्रभावित होता है।
104. ट्री टोपोलाजी (Tree Topology) – यह बस टोपालॉजी और स्टार टोपोलॉजी का महत्वपूर्ण संयोजन है। इसमें बस टोपोलाजी का प्रत्येक नोड, एक स्टार टोपोलॉजी पर आधारित नेटवर्क के द्वारा रिप्लेस कर दिया जाता है।
105. हाइब्रिड नेटवर्क – दो या दो से अधिक नेटवर्क टोपोलॉजी का संयोजन जिसके परिणामस्वरूप निर्मित नेटवर्क किसी भी मानक नेटवर्क टोपोलॉजी में कोई समानता प्रदर्शित नहीं करता है। उदाहरण – स्टार रिंग नेटवर्क और स्टार बस नेटवर्क।
106. मेश टोपोलॉजी – इसमें प्रत्येक नोड, नेटवर्क के लिए डेटा रिले करता है। सभी मेश नोड्स नेटवर्क में डेटा के वितरण ध्संचरण में सहयोग करते है।
107. मेश नेटवर्क – सेल्फ हीलिंग अल्गोरिथम का उपयोग कर या तो एक Flooding Technique या एक रूटिंग तकनीक (Routing )के द्वारा संदेशों को रिले करता है।
108. Routing Based Network – यह नोड नेटवर्क टूट जाने पर भी नेटवर्क संचालित कर पाता है। क्योंकि नेटवर्क में स्त्रोत और Destination के मध्य एक से अधिक मार्ग होते है।
109. नेटवर्क रणनीति (strategy)- सूचना और संसाधन को आपस में साझा करने के लिए उपयोग होने वाली रणनीति ।
110. स्ट्रेटजी के प्रकार – टर्मिनल सर्वर, क्लाइट सर्वर, पी2पी (पियर 2 पियर)।,
111. टर्मिनल सर्वर – यह एक बड़े कम्प्यूटर पर सारी प्रोसेसिंग क्षमता को केन्द्रीयकृत करता है जिसमें बहुत सारे कनेक्शन संभालने की क्षमता होती है।
112. टर्मिनल सर्वर – इस कम्प्यूटर से जुडने वाले अधिकतर नोड या टर्मिनल होते है, जिसमें प्रोसेसिंग न के बराबर होती है, या माइक्रो कम्प्यूटर होते है जिनमें विशेष Terminal Emulsion सॉफ्टवेयर install होते है।
113. टर्मिनल सर्वर – इसके साथ सभी मशीनों पर प्रोग्राम इन्स्टाल करने की जरूरत नहीं होती, सिर्फ मॉनिटररू की बोर्ड, माऊस और नेटवर्क एडेप्टर के साथ एक कम्प्यूटर की जरूरत होती हैं।
114. क्लाइट सर्वर – इसका उपयोग नेटवर्क पर केन्द्रीय कम्प्यूटर से अन्य नोडस के लिए सेवाएं के समन्वय हेतु होता है।
115. क्लाइंट सर्वर – यह दो कम्प्यूटर प्रोग्राम के बीच कनेक्शन को परिभाषित करता है, जिसमें एक प्रोग्राम (क्लाइट) एक अन्य प्रोग्राम (सर्वर) को प्रोग्राम पूर्ण करने का निवेदन देता है।
116. क्लाइट सर्वर – यह नोड के संसाधनों के उपयोग को जरूरी अनुमति प्रदान करता है तथा फैले हुए प्रोग्राम्स को आसानी से जाड़ता है।
117. पियर टू पियर (P2P) – यह एक distributed Application आर्किटेक्चर है जो च्ममत के बीच ॅवता स्वंक विभाजन का कार्य करता है। इसमें सभी एक समान अधिकार प्राप्त समान रूप से समर्थ प्रतिभागी होते है।
118. पीयर अपने संसाधनों जैसे – प्रोसंसिंग पॉवर, डिस्क स्टोरेज, नेटवर्क बैडविड्थ को अपने नेटवर्क के अन्य प्रतिभागियों हेतु सीधे उपलब्ध करवाता है इसके लिए उन्हें किसी स्थायी होस्ट या सर्वर ब्ववतकपदंजपवद की आवश्यकता नहीं होती है।
119. Peer (पीयर) – यह संसाधनों के User तथा Supplier की भूमिका निभाता है।
120. ट्रमिनल सर्वर – केन्द्रीयकृत प्रोसेसिंग शक्ति, स्थान और नियन्त्रण, इसमें माइक्रोकम्प्यूटर के प्रोसेसिंग शक्ति का पूर्ण उपयोग नहीं होने पर उपयोग किया जाता है।
121. क्लांइट सर्वर – क्लाइंट के द्वारा सर्विस हेतु अनुरोध किया जाता है सर्वर सेवा और समन्वय प्रदान करते है, कुशल नेटवर्क प्रबंधन, मंहगा।
122. पियर टू पियर – आसान, सस्ती, सुरक्षा नियन्त्रक का अभाव, इसमें सभी नोट्स क्लाइट और सर्वर के रूप में काम करते है।
123. संगठनात्मक विषय क्षेत्र (Organçational Scope) के प्रकार – इंट्रानेट (Intranet), एक्स्ट्रानेट (Extranet) फॉयरवॉल।
124. इंट्रानेट – यह आर्गेनाइजेशन का स्वयं का निजी इंटरनेट है।
125. एक्स्ट्रानेट – यह एक से अधिक आर्गेनाइजेशन को जोड़ने वाला निजी नेटवर्क है। यह एक आर्गेनाइजेशन के इंट्रानेट का एक्सेस (उपलब्धता) बाहर प्रदान करता है।
126. फायरवॉल (Firewell) – यह एक विशेष सिक्योरिटी सिस्टम है, जो नेटवर्क को बाहरी खतरों से सुरक्षा करता है।
127. IT हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर के उपयोग से बना सिस्टम है जो एक कम्पनी के इंट्रानेट या अन्य आंतरिक नेटवर्क को ।बबमेे करता है।
128. प्रॉक्सी सर्वर – यह नेटवर्क एप्लीकेशन हेतु गेटवे के प्रकार से काम करता है। यह इनपु. पेकैट के साथ रिस्पांड कर, अन्य पैकेट को ब्लॉक कर, फायरवॉल के रूप में कार्य करता है।
129. नेटवर्क बैडविड्थ का वर्गीकरण – नैरो बैंड (Narrow Band), वोइस बैण्ड (Voice banक), ब्रॉड बैड ध्वाइड बैंड आदि।
130. प्रसारणध्संचार चैनल – यह सेन्डर और रिसीवर के बीच लिंक ध्पॉथ है।
131. नैरो बैंड (Narrow band) – इसका उपयोग टेलीग्राफ लाइन और कम गति वाले टर्मिनलो के लिए किया जाता है। इससे डेटा संचरण की गति 45-300 bps (बिट्स प्रति सैकण्ड) होती है।
132. वॉइस बैंड (Voice band) – इनका उपयोग टेलीफोन voice Communication में होता है। इसमें डेटा संचरण की गति 9600 bps होती है।
133. ब्राडबैंड ध्वाइड बैंक – इनका उपयोग कम्प्यूटर से कम्प्यूटर के बीच उच्च गति के डेटा संचार के लिए किया जाता है। इनमें डेटा संचरण की गति 10 लाख bps (बिट्स प्रति सेकण्ड) होती है।
134. कम्प्यूटर नेटवर्किंग के उपयोग – कम्युनिकेशन (संचार), शेयरिंग, सेंट्रलाइज्ड सपोर्ट एण्ड एडमिनिस्ट्रेशन आदि।
135. कम्युनिकेशन – कम्प्यूटर नेटवर्क द्वारा व्यक्तिगत communication उपलब्ध कराना।
136. शेयरिंग – नेटवर्क के उपयोग से संसाधनों, सॉफ्टवेयर और डेटा को साझा (शेयर) किया जा सकता है।
137. Centraçed Support and Administration – कम्प्यूटर नेटवर्क नेटवर्किंग प्रशासन और नेटवर्क सपोर्ट सम्बन्धित कार्यों को केन्द्रीकृत करता है। यह नेटवर्क हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर की एरर (Error) का समाधान करने में सहायता प्रदान करता है।
138. नेटवर्क एडमिनिस्ट्रेटर, नेटवर्क के माध्यम से डेटा इंटीग्रिटी / अखण्डता को सुरक्षित तथा सिस्टम विकसित कर सूचना की विश्वसनीयता को बनाये रखता है।
139. नेटवर्क सुरक्षा के कारण – सुरक्षा, गोपनीयता और सम्पूर्णता।
140. सुरक्षा – यह सूचना की गोपनीयता, अखंडता, और सिस्टम संसाधनों की रक्षा करने की एक योग्यता है।
141. गोपनीयता – यह सुनिश्चित करना कि सूचना किसी अनधिकृत व्यक्ति की पहुंच में नहीं है।
142. सम्पूर्णता – यह सुनिश्चित करना कि अनधिकत व्यक्ति द्वारा सचना में कोई फेरबदल न किया सके।
143. नेटवर्क में खतरों के स्त्रोत अथवा खतरा के स्त्रोत अथवा प्रकार – निष्क्रिय हमले, सक्रिय हमले।
144. निष्क्रिय हमले – निष्क्रिय हमले, जिसमें हमलावर का प्रमुख उद्देश्य नेटवर्क से गान – सूचनाओं को प्राप्त होता है।
145. निष्क्रिय हमले – इसमें हमलावर सामग्री को संशोधित नही करता है।
146. सकिय हमले (Active Attack)- इसमें हमलावर मूल संदेश को संशोधित करता है।
147. सूचना की सुरक्षा के मुख्य क्षेत्र –
A. गोपनीयता (confidentiality) – इसमें सूचना केवल अधिकृत लोगों को ही एक्सेय होनी चाहिए।
B. सम्पूर्णता (Integrity) – केवल अधिकृत व्यक्तियों द्वारा ही सूचना में सशोधन किया जा सकता है।
C. प्रमाणीकरण (Authentication) – यह प्रेषक की पहचान साबित करने में मदद करता है।
148. अवरोधन (Interception) – गोपनीयता की हानि।
149. संशोधन (Modification) – अखंडता को नुकसान।
150. फेब्रिकेशन (Fabrication) – प्रमाणीकरण की अनुपस्थिति Fabrication (नकली) कहा जाता है।
151. हैकर्स द्वारा घर के कम्प्यूटर का हाइक करने के उपयोग- ट्रोजन हार्स कार्यक्रम, पीछे के दरवाजे ओर दूरस्थ प्रशासन कार्यक्रम, सेवा से वंचित, असुरक्षित विडोंज शेयरों, मोबाइल कोड, क्रास साइट स्क्रिप्टिंग, ईमेल स्पूफिंग, ईमेल जनित वायरस, चैट क्लाइट पैकेट स्निफिंग आदि ।
152. WWW – वर्ल्ड वाइट वेब – सबसे बडा साझा संसाधन।
153. नेटवर्क व्यवस्थापक – एक पारंगत व्यक्ति जो संसाधनों को configures कर सकता है।
154. राउटर्स (फायरवाल) आईडीएस (घुसपैठ का पता लगाने वाली प्रणाली) युक्त है।
155. एण्टीवायरस – यह कम्प्यूटर्स पर आने वाले हानिकारक संदेशों या सूचनाओं से रक्षा करते है। वायरस वर्तमान में Worm के रूप में होते हैं, जिन्हें मेजबान सिस्टम या नेटवर्क को नुकसान करने के लिए ही संचालित किया जाता है।

महत्वपूर्ण प्रश्न
1. यह एक दूरसंचार नेटवर्क हैं जो डाटा को आदान प्रदान करने की अनुमति देता हैं –
(अ) कम्प्युटर नेटवर्क (ब) डाटा नेटवर्क
(स) (अ) और (ब) (द) उपरोक्त मे से कोई नहीं
2. डाटा साझा करने के लिए सबसे आम साधन हैं-
(अ) इंटरनेट (ब) ब्लुटूथ (स) पैन ड्राइव (द) उपरोक्त मे से कोई नहीं
3. वह केबल जिसमे एक केंद्रिय तार के ऊपर ब्रांडेड वायर की ग्राउंडेड शील्ड लगी होती हैं, कहलाती हैं-
(अ) Twisted Pair Wire (ब) Co-axial Cable
(स) Optical Wire (द) उपरोक्त मे से कोई नहीं
4. DSL का विस्तारित रूप हैं –
(अ) Digital Subscriber Lane (ंब) Digital Substitute Line
(स) Digital Subscriber Line (द) उपरोक्त मे से कोई नहीं
5. पॉइंट टू पॉइंट संचार के लिए इस्तेमाल होते हैं –
(अ) Terestrial Microwave (ंब) Radio Wave
(स) Satellite (द) उपरोक्त मे से कोई नहीं
6. IR (Infrared) का प्रयोग मुख्यतः होता हैं –
(अ) Mobile, Laptop (ब) Camera, Printer
(स) TV Remote, Portable Devices (द) उपरोक्त सभी
7. यह एक रिप्लेसमेंट संचार प्रोटोकॉल हैं –
(अ) इंटरनेट (ब) ब्लुटूथ (स) पैन ड्राइव (द) उपरोक्त मे से कोई नहीं
8. यह माइक्रोवेब को एक्सैस करने के लिए दुनिया भर मे इंटरआपरेबलिटी हैं –
(अ) WIMAX (ब) GPS (स) GPRS (द) उपरोक्त मे से कोई नहीं
9. यह इंटरनेट प्रोटोकॉल डाटाग्राम को त्वनजकरता हैं तथा किसी भी destination पर डिलीवर करने की अनुमति देता हैं-
(अ) Internet Layer (ब) Transport Layer
(स) Application Layer (द) Network Access Layer
10. यह एप्लिकेशन प्रोटोकॉल और होस्ट प्रोग्राम के साथ ट्रांसपोर्ट लेयर के साथ इंटरफेस नेटवर्क का प्रयोग करता है-
ं((अ) Internet Layer (ब) Transport Layer
(स) Application Layer (द) Network Access Layer
11. SMTP का विस्तारित रूप हैं –
(अ) Simple Mail Transfer Protocol (बं) Special Mail Transfer Protocol
(स) Simple Mail Transmission Protocol (द) उपरोक्त मे से कोई नहीं
12. DHCP का विस्तारित रूप हैं –
(अ) Digital Host Configuration Protocol
(बं) Dynamic Host Configuration Protocol
(स) Dynamic Host Configuration Prgramme
(द) उपरोक्त मे से कोई नहीं
13. यह नेटवर्क व्यक्ति की सीमा पर ही संचालित हो सकता हैं, जैसे – ब्लूटूथ, RFID
(अ) LAN (ब) WLAN (स) MAN (द) PAN
14. यह निजी नेटवर्क हैं जो घर या बिल्डिंग के आस पास संचालित होता हैं, जैसे -Wi-Fi
(अ) LAN (ब) WLAN (स) MAN (द) WAN
15. इस नेटवर्क का फैलाव लगभग एक शहर में होता हैं, जैसे – TVCable,WIMAX
(अ) LAN (ब) WLAN (स) MAN (द) WAN

16. इस नेटवर्क का फैलाव एक देश या ब्वदजपदमदज में होता हैं, जैसे –VPN, ISP, 3G
(अ) LAN (ब) WLAN (स) MAN (द) WAN

17. इस टोपोलोजी मे इंटरफेस कनेक्टर की मदद से प्रत्येक नोड एक ही केबल से जुड़ा होता है-
(अ) बस टोपोलोजी (ब) स्टार टोपोलोजी (स) रिंग टोपोलोजों (द) ट्री टोपोलोजी
18. इस टोपोलोजी मे प्रत्येक नेटवर्क होस्ट पॉइंट टू पॉइंट कनैक्शन के साथ केंद्रीय हब से जुड़ा होता हैं –
(अ) बस टोपोलोजी (ब) स्टार टोपोलोजी (स) रिंग टोपोलोजों (द) ट्री टोपोलोजी
19. इस टोपोलोजी मे सभी नोडस सर्वर के रूप में काम करते हैं-
(अ) बस टोपोलोजी (ब) स्टार टोपोलोजी (स) रिंग टोपोलोजों (द) ट्री टोपोलोजी
20. यह बस टोपोलोजी और स्टार टोपोलोजी का संयोजन है-
ं(अ) बस टोपोलोजी (ब) स्टार टोपोलोजी (स) रिंग टोपोलोजों (द) ट्री टोपोलोजी
21. दो या दो से अधिक टोपोलोजी का संयोजन कहलाता है-
ं(अ) बस टोपोलोजी (ब) स्टार टोपोलोजी (स) रिंग टोपोलोजों (द) हाइब्रिड नेटवर्क
22. मेश टोपोलोजी मे प्रत्येक नोड नेटवर्क के लिए डेटा निम्न तकनीक से संदेशो को रिले करता है-
(अ) Self Healing Algorithum (ब) Flooding Technique
(स) Routing Technique (द) उपरोक्त सभी
23. एक से अधिक संस्थाओं को जोड़ने वाला निजी नेटवर्क कहलाता हैं-
(अ) Intranet (ब) Ectranet (स) फायरवाल (द) उपरोक्त सभी
24. यह नेटवर्क एप्लिकेशन हेतु गेटवे के प्रकार से काम करता हैं-
(अ) Client सर्वर (ब) Terminal सर्वर (स) प्रोक्सी सर्वर (द) उपरोक्त सभी
25. इस नेटवर्क बैंड का उपयोग टेलीग्राफ लाइन और कम गति वाले टेर्मिनल मे किया जाता है-
(अ) Narrow Band (ब) Voice Band (स) Broad Band (द) उपरोक्त सभी
26. इस नेटवर्क बैंड का उपयोग टेलीफोन वॉइस कम्युनिकेशन मे किया जाता हैं-
(अ) Narrow Band (ब) Voice Band (स) Broad Band (द) उपरोक्त सभी
27. इस नेटवर्क बैंड का उपयोग कम्प्युटर से कम्प्युटर के बीच डेटा संचार के लिए किया जाता है-
(अ) Narrow Band (ब) Voice Band (स) Broad Band (द) उपरोक्त सभी
28. इनमें से एक भौतिक नेटवर्क लिंक नहीं है ?
(अ) मुड़ जोडी (ब) समाक्षीय केबल
(स) ऑप्टिकल फाइबर (द) ऑप्टिकल डिस्क
29. निम्नलिखित में से कौन सा नेटवर्क टोपोलॉजी का एक प्रकार है –
(अ) बस (ब) ट्री (स) रिंग (द) वृत
30. कम्प्यूटर नेटवर्क में नोड्स क्या होते हैं –
(अ) कम्प्यूटर से निकलती डेटा (ब) कंम्प्यूटर के मार्गों पर चालित डेटा
(स) कम्प्यूटर जो कि डेटा को समाप्त करता है (द) वर्णित सभी
31. संचार चैनल में नेटवर्क पर सभी मशीनों द्वारा साझा किया जाता है-
(अ) ब्रॉडकास्ट नेटवर्क (ब) यूनिकास्ट नेटवर्क
(स) बहुस्त्पीय नेटवर्क (द) उल्लेख नेटवर्क
32. ब्लूटुथ का एक उदाहरण है –
(अ) पर्सनल एरिया नेटवर्क (ब) लोकल एरिया नेटवर्क
(स) वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क (द) उपरोक्त में से कोई भी
33. एक …….एक डिवाइस है जो कि पैकेट में शामिल राउटिंग सूचनाओं प्रसंस्करण द्वारा नेटवर्क के बीच पैकेट भेज देता है-
(अ) ब्रिज (ब) फायरवॉल (स) रूटर (द) वर्णित सभी
34. निम्न में से कौन सा नेटवर्क का एक प्रकार नही है-
(अ) MAN (ब) TAN (स) PAN (द) WAN
35. नेटवर्क जाम कब होता है –
(अ) यातायात के मामले में अधिक भार (ब) जब एक सिस्टम टर्मिनल हो
(स) जब दो नोंड्स के बीच कनेक्शन समाप्त हो जाता है (द) उल्लेख में काई भी नहीं
36. BAN का पूर्ण रूप है ?
(अ) शरीर एरिया नेटवर्क (ब) बेस्ट एरिया नेटवर्क
(स) को बढावा देने के एरिया नेटवर्क (द) इनमें से कोई भी नहीं
37. कौन सा नेटवर्क टोपोलॉजी का एक प्रकार नहीं है ?
(अ) स्टार (ब) रिंग (स) मेश (द) षट्कोण