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उत्प्रेरकों का वर्गीकरण – विविध उदाहरण (classification of catalysis – miscellaneous examples) : उत्प्रेरक के प्रभाव की दृष्टि से उत्प्रेरण चार प्रकार के होते है जिनका संक्षिप्त विवरण निम्न प्रकार है :

  • धनात्मक उत्प्रेरण (positive catalysis) : जिस उत्प्रेरक की उपस्थिति से अभिक्रिया के वेग में तेजी आती हो वह धनात्मक उत्प्रेरण कहलाता है | H2SO4 के निर्माण में प्लेटिनम युक्त एस्बेस्टोज एक धनात्मक उत्प्रेरक का कार्य करता है | सामान्य अर्थों में उत्प्रेरण का तात्पर्य इस वर्ग के उत्प्रेरकों से ही होता है |
  • ऋणात्मक उत्प्रेरण (Negative catalysis) : कुछ उत्प्रेरकों की उपस्थिति अभिक्रिया के वेग को कम कर देती है , उन्हें ऋणात्मक उत्प्रेरण कहते हैं | उदाहरणार्थ , फास्फोरिक अम्ल की उपस्थिति में H2O2 के अपघटन का वेग कम हो जाता है , अत: इस क्रिया में फास्फोरिक अम्ल एक ऋणात्मक उत्प्रेरण हुआ |
  • स्वत: उत्प्रेरण (autocatalysis) : कुछ अभिक्रियाओं में बना हुआ उत्पाद ही उत्प्रेरक का कार्य करता है , अत: उसे स्वत: उत्प्रेरण कहते हैं | उदाहरणार्थ , तनु H2SO4 की उपस्थिति में ऑक्सेलिक अम्ल और KMnO4 की अभिक्रिया प्रारंभ में बहुत मंद होती है परन्तु जैसे ही कुछ अभिक्रिया संपन्न होती है तथा उत्पाद के रूप में मैंगनस सल्फेट बनता है , वह उत्प्रेरक के रूप में कार्य करने लगता है तथा अभिक्रिया की गति तीव्र हो जाती है |

2KMnO4 + 5(COOH)2 + 3H2SO4 → 2MnSO4 + K2SO4 + 10CO2 + 8H2O

2KMnO4 + 5(COOH)2 + 3H2SO4 → K2SO4 + 2MnSO4 + 10CO2 + 8H2O

  • प्रेरित उत्प्रेरण (induced catalysis) : कभी कभी उत्प्रेरक के रूप में कोई पदार्थ विद्यमान नहीं होता वरन कोई एक अभिक्रिया किसी दूसरी अभिक्रिया को प्रेरित करती है , इसलिए इसे प्रेरित उत्प्रेरण कहते हैं | उदाहरणार्थ , सोडियम आर्सेनाइट वायु द्वारा ओक्सिकृत नहीं होता परन्तु सोडियम सल्फाईट वायु की ऑक्सीजन से ऑक्सीकृत हो जाता है | यदि इनके मिश्रण में वायु को प्रवाहित किया जाए तो सोडियम सल्फाईट का तो ऑक्सीकरण होगा ही , उसके प्रेरण में सोडियम आर्सेनाइट का भी ऑक्सीकरण हो जायेगा |

उत्प्रेरक की आधुनिक अवधारणा के अनुसार यह एक ऐसा पदार्थ है जो अभिक्रिया में भाग लेकर माध्यमिक यौगिक बनता है तथा अंत में वह मुक्त हो जाता है तथा ऐसा होने से अभिक्रिया की सक्रियण ऊर्जा का मान कम हो जाता है | अत: उत्प्रेरक की अनुपस्थिति में क्रिया

2SO2 + O2 → 2SO3

अत्यंत मंद गति से संपन्न होती है लेकिन यही क्रिया यदि उत्प्रेरक NO की उपस्थिति में सम्पन्न करवाई जाए तो इसका वेग बहुत बढ़ जाता है | उस स्थिति में अभिक्रिया निम्न पदों में संपन्न होती है :

2NO + O2 → 2NO2

NO2 + SO2 →  NO + SO3

उत्प्रेरक के लक्षण (characteristics of catalysts)

उत्प्रेरकों के मुख्य रूप से निम्नलिखित लक्षण होते है

  1. अभिक्रिया की समाप्ति पर उत्प्रेरक के द्रव्यमान और संघटन में कोई परिवर्तन नहीं होता है |
  2. विषमांगी उत्प्रेरण में उत्प्रेरक की अत्यंत अल्प मात्रा की आवश्कता होती है , जबकि समांगी उत्प्रेरक में अभिक्रिया का वेग उत्प्रेरक की सांद्रता पर निर्भर करता है |
  3. उत्क्रमणीय अभिक्रियाओं में उत्प्रेरक की उपस्थिति से साम्य अवस्था शीघ्र आती है , साम्य स्थिरांक k के मान और साम्यावस्था के संघटन में उत्प्रेरक का कोई योगदान नहीं होता है |
  4. उत्प्रेरक का रासायनिक अभिक्रिया में भाग लेना अत्यंत आवश्यक है | वस्तुतः उत्प्रेरक की परिभाषा ही यह है कि ये अभिक्रिया में भाग लेकर किसी अन्य पद में वापस मुक्त हो जाए |
  • उत्प्रेरक और प्रवर्धक (catalysts and promoters) : उत्प्रेरक उन पदार्थों को कहते हैं जो किसी अभिक्रिया की क्रियाविधि में भाग लेकर उसके वेग को प्रभावित करते हो जबकि प्रवर्धक वे पदार्थ होते हैं , जो अभिक्रिया के वेग को तो प्रभावित करते हैं लेकिन उसकी क्रियाविधि में भाग नहीं लेते |
  • उत्प्रेरकीय विष (catalyst poison) : कुछ पदार्थ ऐसे होते है जो किसी उत्प्रेरकीय अभिक्रिया के दौरान यदि उपस्थित हो तो उत्प्रेरक की सक्रियता को कम कर देते है या उत्प्रेरक को नष्ट कर देते है , ऐसे पदार्थों को उत्प्रेरकीय विष कहा जाता है |