बच्चों के अधिकार क्या है बच्चों के कानूनी अधिकार एवं संबंधित नियम child rights in hindi meaning

By   December 23, 2020

child rights in hindi meaning बच्चों के अधिकार क्या है बच्चों के कानूनी अधिकार एवं संबंधित नियम ?

बच्चों के अधिकार
बच्चों को अपनी शारीरिक और मानसिक अपरिपक्वता के कारण जन्म से पहले भी और बाद में भी, विशेष सुरक्षा उपायों और देखभाल की जरूरत पड़ती है। बहुत पहले ही, 1924 में सबसे पहले बाल अधिकारों की जेनेवा घोषणा में इन विशेष सुरक्षा उपायों की जरूरत के बारे में अभिव्यक्ति की गई। बाद में बाल निधि रक्षा अंतर्राष्ट्रीय इकाई (ैंअम जीम ब्ीपसकतमद थ्नदक प्दजमतदंजपवदंस न्दपज) द्वारा उसे आगे बढ़ाया गया। यह एक पाँच-सूत्रीय विषय था जिसे राष्ट्र संघ (स्मंहनम व िछंजपवदे) द्वारा दुनियाभर में पहुँचाया गया। आगे आने वाले वर्षों में इसका विस्तार हुआ जो आगे चलकर 1959 की बच्चों के अधिकारों की घोषणा बनी।

 1959 की संयुक्त राष्ट्र घोषणा
20 नवंबर 1959 को संयुक्त राष्ट्र जनरल ऐसेम्बली द्वारा अंगीकृत बाल अधिकारों की घोषणा, बच्चों को ष्मानव जाति जो सर्वोत्तम दे सकती है |  दिलाने की घोषणा करती है। यह इस बात का पुनः समर्थन करती है कि बच्चे अपनी भलाई, व समाज की भलाई के लिए अपने अधिकारों का उपभोग करें। यह माता-पिता, स्त्री-पुरुष और स्वैच्छिक संगठनों, स्थानीय अधिकारी वर्गों और राष्ट्रीय सरकारों सभी से इन अधिकारों को पहचानने और विधायी व अन्य उपायों द्वारा इनके अनुपालन के लिए प्रयास करने के लिए आह्वाहन करती है।

इस घोषणा में घोषित मुख्य नियम या अधिकार निम्नलिखित हैं –
i) सभी बच्चे, चाहे जो हो पर बिना किसी अपवाद के या जाति, लिंग, भाषा, धर्म, राजनीति या अन्य विचार, राष्ट्रीय और सामाजिक उद्भव, सम्पत्ति, जन्म आदि में बिना किसी भेदभाव के या अपनी और अपने परिवार की दूसरी स्थितियों के विभेदीकरण के बिना इस घोषणा में घोषित अधिकारों के लिए अधिकृत हैं।
ii) कानूनी रूप में या दूसरी तरह से, बच्चे को विशेष सुरक्षा, अवसर व सुविधाएँ मिलनी चाहिए, जिससे कि उसका शारीरिक, मानसिक, आध्यात्मिक और सामाजिक विकास हो सके, और यह विकास उसकी स्वतंत्रता व प्रतिष्ठा को बनाए रखते हुए एक स्वस्थ व सामान्य तरीके से हो।
iii) बच्चे को जन्म से ही एक नाम और एक राष्ट्रीयता पाने का अधिकार होना चाहिए।
iv) बच्चे को सामाजिक सुरक्षा के लाभों से लाभान्वित होना चाहिए और उसे एक स्वस्थ वातावरण में बढ़ने और विकसित होने का अधिकार मिलना चाहिए। यहाँ तक कि उसे और उसकी माता को विशेष देखभाल और सुरक्षा मिलने का प्रबंध होना चाहिए, जिसमें कि प्रसव-पूर्व और प्रसवोत्तर देखभाल भी शामिल है। उसे पर्याप्ति पोषण, रहने का प्रबंध, मनोरंजन और स्वास्थ्य सेवाओं के अधिकारों का उपभोग करने का अधिकारी होना चाहिए।
v) उस बच्चे को जो कि, शारीरिक, मानसिक या सामाजिक किसी भी रूप में अक्षम है, विशेष उपचार, शिक्षा मिलनी चाहिए और उसकी विशिष्ट स्थिति में आवश्यक देखभाल की जानी चाहिए।
vi) बच्चे को अपने व्यक्तित्व के संपूर्ण और सुसंगत विकास के लिए प्यार और सहानुभूति की जरूरत होती है। जैसे भी संभव हो, उसका विकास माता-पिता की जिम्मेदारी और देखभाल में होना चाहिए और हर हालत में एक स्नेहपूर्ण, नैतिक और भौतिक रूप से सुरक्षित वातावरण में ही होना चाहिए। कुछ अपवादपूर्ण परिस्थितियों के सिवाय एक कच्ची उम्र का बच्चा अपनी माँ से कभी अलग नहीं रखा जाना चाहिए। उन बच्चों की जिनके परिवार नहीं हैं या जिसके पास सहायता के पर्याप्त साधन नहीं है, विशिष्ट देखभाल करना समाज और सार्वजनिक अधिकारियों का कर्तव्य है।
vii) कम से कम, प्रारंभिक अवस्था में तो बच्चे को निःशुल्क व अनिवार्य शिक्षा प्राप्त करने का अधिकार होना चाहिए। उसे इस तरह की शिक्षा देनी चाहिए जो उसकी सामान्य संस्कृति को उन्नत कर सके, और समान अवसर के आधार पर, उसकी योग्यताओं के विकास, उसकी व्यक्तिगत निर्णय क्षमता, उसे नैतिक और सामाजिक उत्तरदायित्वों के प्रति समझ पैदा करने के योग्य बना सके और उसे समाज का एक उपयोगी सदस्य बना सके। बच्चे को खेल और मनोरंजन के पूरे अवसर मिलने चाहिए और शिक्षा के उद्देश्यों के समान खेल और मनोरंजन में भी वही भावना प्रकट होनी चाहिए।
viii) हालत में बच्चे को ही सबसे पहले सुरक्षा और सहायता मिलनी चाहिए।
ix) बच्चे की हर तरह की उपेक्षा, निर्दयता और शोषण से रक्षा की जानी चाहिए। उसे किसी भी रूप में व्यापार का विषय नहीं होना चाहिए। एक उपयुक्त अल्पतम उम्र तक उसे रोजगार में भर्ती नहीं करना चाहिए। उसे किसी भी ऐसे व्यवसाय या रोजगार में लगने की अनुमति व कारण विषय नहीं मिलने चाहिए जिनसे उसका स्वास्थ्य या शिक्षा प्रभावित हो या उसके शारीरिक, मानसिक और नैतिक विकास में बाधा पड़े।
x) बच्चे की ऐसी प्रथाओं से रक्षा की जानी चाहिए जिनसे जातिगत, धार्मिक या किसी और तरह के भेदभाव पनपते हों। सहानुभूति, सहनशीलता, मैत्री, शांति एवं विश्वबंधुत्व तथा संपूर्ण चेतना की भावनाओं के वातावरण में उसका पालन होना चाहिए और ताकि उसकी शक्ति व प्रतिभा उसके अपने साथियों की सेवा में समर्पित हो।

संक्षेप में कहा जा सकता कि 1959 की बाल अधिकारों की संयुक्त राष्ट्र घोषणा में बच्चे को निम्नलिखित अधिकार प्रदान किए गए, ये हैं- स्नेह का अधिकार, प्यार और सहानुभूति, पर्याप्त पोषण और स्वास्थ्य सेवा का अधिकार, निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार, खेल और मनोरंजन के पूरे अवसर मिलने का अधिकार, नाम और राष्ट्रीयता का अधिकार, विकलांग होने पर विशेष देखभाल का अधिकार, संकट के समय सबसे पहले राहत पाने का अधिकार, समाज के उपयोगी सदस्य बनने की शिक्षा पाने एवं व्यक्तिगत योग्यताओं का विकास करने का अधिकार, शांति एवं विश्व-बंधुत्व की भावना के साथ विकसित होने का अधिकार तथा जाति, रंग, लिंग, धर्म, राष्ट्रीय या सामाजिक उद्भव पर ध्यान दिए बिना इन अधिकारों का उपभोग करने का अधिकार।