बच्चा किसे कहते है | छोटे बच्चे की अवधारणा क्या है परिभाषा Child in hindi meaning definition

By   December 23, 2020

Child in hindi meaning definition बच्चा किसे कहते है | छोटे बच्चे की अवधारणा क्या है परिभाषा ?

जनसांख्यिकीय पहलू
‘‘बच्चा‘‘ शब्द के अनेक अर्थ हैं। कभी यह शारीरिक और मानसिक अपरिपक्वता के संदर्भ में प्रयुक्त होता है। परंतु व्यावहारिक रूप में ‘‘बच्चा‘‘ शब्द का अर्थ कालक्रमिक आयु से ही है। 15 वर्ष की आयु से नीचे का हर व्यक्ति बच्चा कहलाता है।

पिछले कुछ वर्षों में भारत में (0-14 वर्षीय) बच्चों की संख्या बढ़ती जा रही है। 1971 में 23 करोड़ 3 लाख बच्चे थे जो कि 1981 में बढ़कर 27 करोड़ 20 लाख हो गए। जनसंख्या प्रक्षेपण की विशेषज्ञ समिति के अनुमान के अनुसार 1991 में बच्चों की संख्या 29 करोड़ 77 लाख तक पहुंच गई है। परंतु पिछले कुछ दशकों में संपूर्ण जनसंख्या के प्रतिशत की तुलना में बच्चों की जनसंख्या कम हुई है। उदाहरण के लिए, 1971 में 42.02 प्रतिशत से घटकर 1981 में 39.7 रह गई। 1991 में जनसंख्या का लगभग 37ः इनका था। योजना आयोग के अनुसार 2000 में 33.61ः जनसंख्या बच्चों के आयु वर्ग की थी।

उद्देश्य
इस इकाई में भारत में बाल वर्ग की कुछ समस्याओं के समकालीन आयामों का विवरण दिया गया है। इस इकाई को पढ़ने के बाद आपके द्वारा संभव होगा:
ऽ बच्चों की जनसांख्यिकीय संविरचना और उनकी उत्तरजीविता से संबंधित मुद्दों का विवरण देना,
ऽ बेघर और अनाथ बच्चों की विशेषताएँ और उनकी समस्याओं के समाधान के लिए शुरू किए गए उपायों की विवेचना करना,
ऽ बाल मजदूर की अवधारणा, इसकी किस्में और भारत में बाल मजदूरों की संख्या का विवरण देना,
ऽ बाल अपराध की अवधारणा को प्रोत्साहित करने वाली स्थितियाँ और इसके सुधार के लिए किए गए उपायों का विश्लेषण करना,
ऽ अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं द्वारा घोषित बाल अधिकारों पर सूक्ष्म दृष्टि डालना।
ऽ भारत में बालिकाओं की स्थिति की संक्षिप्त रूपरेखा प्रस्तुत करना, और
ऽ भारत सरकार द्वारा 1974 में अंगीकृत राष्ट्रीय बाल नीति और उसमें किए गए प्रावधानों का विवरण देना।

 प्रस्तावना
पूरे इतिहास में ढूंढने पर बच्चों के बारे में बढ़ती दिलचस्पी का सूत्र अवश्य मिलेगा। परंतु बीसवीं शताब्दी के अंत में, विशेषकर प्रथम विश्व युद्ध के बाद पूरे संसार में बच्चों के अधिकारों की मान्यता के बारे में सम्मिलित प्रयास शुरू हुए। हम यह महसूस करने लगे है कि किसी देश का भविष्य उसके बच्चों पर निर्भर है। अब्राहम लिंकन के अनुसार, ‘‘आपने जो शुरू किया है उसे आगे भी जारी रखने वाला व्यक्ति बच्चा ही है। जहाँ आज आप हैं, कल वहाँ वह होगा और आपके बाद वह उन चीजों की देखभाल करेगा जो आपके लिए महत्त्वपूर्ण हैः मानवता का भविष्य उसी के हाथों में है।‘‘ जवाहरलाल नेहरू ने भी बच्चों के सर्वोच्च महत्त्व के बारे में हमें याद दिलाया था। उन्होंने कहा था, ‘‘अपनी योजनाओं और कार्यक्रमों के बारे में विचार करते समय हम यह तथ्य भूल जाते हैं कि अंत में, सभी बातें मानवीय दृष्टिकोण पर आधारित हैं। योजनाएँ भी जरूरी हैं पर आखिर में निःसंदेह मनुष्य ही महत्त्वपूर्ण है और अगर यह सच है तो वह एक वयस्क की तुलना में बाल रूप में अधिक महत्त्वपूर्ण है।‘‘

प्रस्तुत इकाई में, इस मानवीय पृष्ठभूमि में हम समकालीन भारत में बच्चों की सामाजिक समस्याओं की जाँच करेंगे। इस इकाई की शुरुआत हमने भारत में बच्चों की जनसांख्यिकीय संविरचना के बारे में संक्षिप्त विवेचना से की है। लड़के और लड़कियों के बीच बढ़ते असंतुलन की ओर यह हमारा ध्यान आकर्षित करती है। इसके बाद हम अनाथ और बेघर बच्चों और सरकार द्वारा उनके पुनर्वास के लिए किए जा रहे उपायों के बारे में विचार करेंगे।

बच्चों की एक बड़ी संख्या तरह-तरह के कामों में लगी हुई है। यह उनके मानसिक और शारीरिक विकास में बाधक है। बाल श्रम विषयक के भाग में हम इसी पहलू पर ध्यान केंद्रित करेंगे। इसके बाद इस इकाई में बच्चों के अपराधी प्रवृत्ति में लीन होने के अनेक कारणों के बारे में चर्चा करेंगे। अपराध-वृत्ति को रोकने के विभिन्न उपायों व अपराधियों के पुनर्वास के बारे में भी इस इकाई में विचार करेंगे।

इस इकाई में अलग-अलग समय पर घोषित बच्चों के अधिकारों के बारे में भी जानकारी दी गई है। इसमें विश्व में बाल श्रमिकों के बारे में बढ़ती दिलचस्पी के बारे में बताने का भी प्रयास किया गया है। इसके बाद बाल कल्याण में संलग्न संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों का उल्लेख किया गया है।

भारत में बच्चों की लगभग आधी जनसंख्या लड़कियों की है पर वे अपने जीवन के हर पहलू में उपेक्षित हैं। वर्तमान सामाजिक, सांस्कृतिक और धार्मिक प्रथाएँ उनके विरुद्ध भेदभाव को और प्रोत्साहित करती हैं। इसके बारे में हमने ‘‘अंतर्राष्ट्रीय वर्ष और बालिका वर्ष‘‘ नामक भाग में चर्चा की है। इकाई के अंत में हम अपना ध्यान राष्ट्रीय बाल नीति पर केंद्रित करेंगे।

सारांश
इस इकाई में हमने भारत के बच्चों की जनसांख्यिकीय संविरचना की चर्चा की। हमने बेघर तथा बेसहारा बच्चों के सामने आने वाली समस्याओं को देखा तथा सरकार द्वारा उनके पुनर्वास के लिए किए गए उपायों के बारे में जाना।

इसके पश्चात् हमने बाल मजदूरों को लिया तथा फिर बाल अपराध के बारे में जानकारी प्राप्त की। इसके बाद हमने बाल-कल्याण में लगी हुई संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों तथा संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा अपनाए गए बाल अधिकारों पर अपना ध्यान केंद्रित किया। फिर हमने बालिका के साथ होने वाले भेदभाव की चर्चा की। अंत में हमने राष्ट्रीय बाल नीति के बारे में पढ़ा।

 शब्दावली
जनसांख्यिकी (demography): यह जनसंख्या से संबंधित जैव सांख्यिकी जैसे जन्म, मृत्यु, विवाह आदि का विज्ञान है।
किशोर अदालत (juvenile court): यह एक कानून अदालत है जिसमें निश्चित आयु-वर्ग से कम आयु के बच्चों के मामलों का फैसला किया जाता है।
नीति (policy): कोई नियंत्रक सिद्धांत या कार्य करने की कार्यविधि।
योजना (scheme): किसी निश्चित योजना पर वस्तुओं का एक व्यवस्थित संयोजन।
कार्यक्रम (programme): किसी कार्य को करने की रूपरेखा।