(charles’s law in hindi ) चार्ल्स का नियम क्या है , चार्ल्स का नियम किसे कहते हैं , सूत्र , उदाहरण बताइए |

कथन : किसी गैस के द्रव्यमान का आयतन , तापमान के समानुपाती होता है , बशर्ते दाब को नियत रखा जाये।  इसी को ही चार्ल्स का नियम कहते है।

अर्थात

V  ∝ T

V = kT

यहाँ k= समानुपाती नियतांक है।

T = तापमान (केल्विन में)

V = गैस का आयतन

यह नियम पायनियर बल्लोनिस्ट जैक्वेस चार्ल्स ने दिया था , 1787 में में वे कई प्रयोग कर रहे थे और यह पता लगाने की कोशिश कर रहे थे की किसी भी गैस का आयतन , ताप पर किस प्रकार से निर्भर करता है।

 चार्ल्स का नियमः 1787 में चार्ल्स डार्विन ने बताया कि “स्थिर दाब पर किसी गैस किसी गैस के निश्चित मात्रा का आयतन उसके परम ताप के समानुपाती होता है।’’

 एवोगादो का नियमः एवोगाद्रो ने बताया कि ‘‘समान ताप एवं दाब पर सभी गैसों में समान आयतन में अणुओं की संख्या समान होती है’’ यह परिकल्पना सन् 1811 में इटली के रसायनशास्त्री एवोगाद्रो द्वारा बर्जीलियस की परिकल्पना को संशोधन करके दिया गया।

gay lussac law ने गैसीय आयतन संबंधी नियम दिया अथा गैसों के आयतन के पारस्परिक अनुपात संबंधी रासायनिक संयोग का नियम ने दिया। के अनुसार “स्थिर आयतन का किसी निश्चित मात्रा वाली गैस का दाब उनके आयतन के समानुपाती होता है।’’

 स्थिर ताप और दाब गैसों के मिश्रण की गतियां उनके घनत्व के वर्गमूल के व्युत्क्रनुपाती होता है। गैसों का अणुभार उनके दाब का दोगुना होता है।

 डाल्टन का आंशिक दाब का नियमः गैसों के आंशिक दाब का नियम 1801 में डाल्टन ने दिया। इस नियम के अनुसार, ‘‘परस्पर क्रिया न करने वाली गैसों का कुल दाब उन गैसों के आंशिक दाबों के योग के बराबर होता है।’’ यह नियम आदर्श गैसों पर लागू होता है। गैस का अणुभार उनकी वाष्प घनत्व का दोगुना होता है।

 जिस ताप पर गैसों का अणु गति करना बंद कर दें, उस ताप को परम शून्य ताप कहा जाता है। परम शून्य ताप का मान – 273.15 डिग्री सेल्सियस होता है।

 ग्राहम बेल का गैसीय विसरण नियमः निश्चित ताप एवं दाब पर गैसों के विसरण की आपेक्षिक गतियां उसके घनत्व या अणुभार के वर्गमूल के व्युत्क्रमानुपाती होती हैं।

 1833 में ग्राहमबेल ने बताया कि सामान्य ताप और दाब पर विभिन्न गैसों के 1 ग्राम अणु का आयतन 22.4 लीटर होता है तथा इस 22.4 लीटर में 6.022 ग 1023 अणु होते हैं।

 -273 डिग्री पर सभी गैसें आयतन घेरती हैं। चार्ल्स के नियम के अनुसार -273 डिग्री परम शून्य ताप पर गैस का आयतन शून्य हो जाना चाहिए, परंतु सभी वास्तविक गैसें इस ताप तक पहुंचने से पहले ही द्रवित हो जाती हैं।

 गैसों का विसरणः घनत्व में अंतर रहते हुए पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण बल के विरुद्ध गैसों की आपस में मिलने-जुलने की स्वाभाविक प्रक्रिया विसरण कहलाती है।

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