ब्रूस्टर का नियम , बूस्टर का नियम क्या है (brewster’s law in hindi)

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(brewster’s law in hindi) ब्रूस्टर का नियम , बूस्टर का नियम क्या है : स्कॉटलैंड के भौतिक वैज्ञानिक डेविड ब्रूस्टर ने 1811 में प्रकाश के ध्रुवण की मात्रा और आपतन कोण के मध्य एक सम्बन्ध स्थापित किया , चूँकि यह नियम सर डेविड ब्रूस्टर ने दिया था इसलिए इस ध्रुवण की मात्रा और आपतित प्रकाश के कोण के सम्बन्ध को ब्रूस्टर का नियम कहते है।
ब्रूस्टर ने अपने नियम में बताया कि परावर्तित प्रकाश में ध्रुवित प्रकाश की मात्रा , आपतन कोण पर निर्भर करता है अर्थात ध्रुवित प्रकाश की मात्रा इस बात पर निर्भर करती है कि डाला गया प्रकाश किस कोण पर आपतित किया गया है।

ब्रूस्टर के नियम के अनुसार एक कोण ऐसा होता है जिस पर परावर्तित प्रकाश पूर्णतया समतल ध्रुवित होता है , एक विशेष कोण पर प्रकाश के कम्पन्न आपतन तल के लम्बवत होते है इसे ध्रुवण कोण कहते है। ध्रुवण कोण को ब्रूस्टर कोण भी कहते है।
ब्रूस्टर ने प्रयोगों के आधार पर एक निष्कर्ष निकाला और बताया कि पारदर्शी माध्यम के अपवर्तनांक का मान ध्रुवण कोण के टेंजेंट (स्पर्शरेखा) के बराबर होता है इसे सूत्र के रूप में निम्न प्रकार लिखा जा सकता है –
अत: ब्रूस्टर के नियम के अनुसार –
μ = tan(i)
यहाँ μ = पारदर्शी माध्यम का अपवर्तनांक
i = ध्रुवण  कोण
स्नेल का नियम हमने पढ़ा था जिसके अनुसार अपवर्तनांक और कोण में निम्न सम्बन्ध होता है –

ब्रूस्टर और स्नेल के नियमों की तुलना करने पर –

समीकरण 1 और समीकरण 2 की तुलना करने पर –

ब्रूस्टर के नियम के उपयोग या अनुप्रयोग (uses of brewster’s law)

ब्रुस्टर के नियम का सबसे अधिक उपयोग सूर्य के चश्मों में किया जाता है , जिन चश्मों को धुप से आखों को बचाने के लिए बनाया जाता है उनमें ब्रूस्टर के नियम का उपयोग किया जाता है जिससे सूर्य से आने वाली प्रकाश की चमक से आँखों को बचाया जा सके।
ठीक इसी प्रकार कैमरा से आने वाली चमक से बचने के लिए भी इसके अन्दर ब्रूस्टर का नियम काम में लिया जाता है जिससे कैमरा की चमक से आँखों को हानि न हो।