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bond in protein in hindi

प्रोटीन में कौन सा बंध पाया जाता है , पेप्टाइड बंधन किस प्रकार बनता है bond in proteins in hindi

bond in proteins in hindi प्रोटीन में कौन सा बंध पाया जाता है , पेप्टाइड बंधन किस प्रकार बनता है ?

प्रोटीन (Proteins)

जैसा कि पूर्व में बताया गया है कि प्रोटीन अमीनो अम्लों से निर्मित दीर्घ श्रंखला युक्त जटिल कार्बनिक यौगिक है जिनमें मुख्यतः C, H, O, N एवं कभी कभी 25 एवं P भी होते हैं। सामान्यतः ये उच्च अणुभार वाले यौगिक होते हैं। अतः प्रोटीन बहुपैप्टाइड अणु होते हैं। कभी-कभी प्रोटीन एक से अधिक पॉलीपेप्टाइड श्रृंखलाओं से भी बनते हैं।

प्रोटीन संरचना में महत्त्वपूर्ण विभिन्न बन्ध (Various bonds important for protein structure)

प्रोटीन संरचना के लिए सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण एवं आधारभूत बन्ध पैप्टाइड बन्ध होते हैं जिनके द्वारा अमीनो अम्लों की – रैखिक श्रृंखला बनती है। इनके अतिरिक्त विभिन्न बन्ध एवं विभिन्न समूहों के मध्य पारस्परिक क्रियाएं भी प्रोटीन की अंतिम एवं स्थायी (final) एवं त्रिआयामी (three dimensional) संरचना के लिए महत्त्वपूर्ण होते हैं।

  1. पेप्टाइड बन्ध (Peptide bonds)

विभिन्न अमीनो अम्ल आपस में पेप्टाइड बंध (peptide bond) द्वारा जुड़े रहते हैं जो विशेष प्रकार का सहसंयोजक बंध (covalent bond) होता है। यह बन्ध a अमीनो अम्ल अथवा श्रृंखला के अंतिम अमीनो अम्ल के कार्बोक्सिल समूह (-COOH) तथा अगले अमीनो अम्ल के अमीनो समूह (-NH2 ) के बीच एक जल के अणु की क्षति के फलस्वरूप (-CNH) बनता है। इस बन्ध से अनेकों (हजारों तक की संख्या में) अमीनो अम्लों की श्रृंखला बन जाती है जिसे पॉलीपेप्टाइड (polypeptide ) कहते हैं। पेप्टाइड बंध से जुडे दो, तीन, चार एवं कुछ अमीनो अम्लों की श्रृंखला क्रमशः डाइपैप्टाइड ( dipeptide ), ट्राइपैप्टाइड (tripeptide), टैट्रापैप्टाइड (tetrapeptide ) एवं ऑलिगोपेप्टाइड (oligopeptides) कहलाती हैं। दो अमीनो अम्लों के पैप्टाइड बन्ध द्वारा जुड़े अणु (C-CONH-C) समतलीय (coplanar) होते हैं। इस बन्ध के कारण R-समूहों की गति सीमित रह जाती है।

  1. हाइड्रोजन बन्ध (Hydrogen bonds)

अमीनो अम्लों की श्रृंखला में विभिन्न अमीनो अम्लों के R (कार्बनिक) समूहों के परमाणुओं के मध्य बनते हैं। ये बन्ध R समूहों के आंशिक रूप से ऋणात्मक आवेश युक्त परमाणु (अधिकांशतः O अथवा N) एवं किसी अन्य R समूह के आंशिक रूप से धनात्मक आवेशित हाइड्रोजन (H) परमाणु के मध्य बनते हैं। ऑक्सीजन अथवा नाइट्रोजन से जुड़े H परमाणु में आंशिक रूप से धनात्मक आवेशित हो जाने की प्रवृत्ति होती है। इस H परमाणु का किसी अन्य समूह के O अथवा N परमाणु के मध्य स्थिर वैद्युत आकर्षण (electrostatic attraction) के फलस्वरूप बने बन्ध H बन्ध अथवा हाइड्रोजन बन्ध कहलाते हैं। सामान्यतः ये बन्ध ध्रुवीय अणुओं के मध्य पाये जाते हैं।

कार्बन परमाणु से सहसंयोजी बन्ध द्वारा जुड़े H परमाणु इस प्रकार के हाइड्रोजन बन्ध निर्माण में भाग नहीं लेते क्योंकि इनमें आंशिक धनात्मक आवेश विकसित नहीं हो पाता। ये हाइड्रोजन बन्ध विशेषकर संबंधित प्रोटीन अणुओं को विशिष्ट त्रिआयामी स्वरूप (precise three dimensional structure) प्रदान करने में सहायक होते हैं।

  1. जलविरागी बन्ध (Hydrophobic bonds)

इस प्रकार के बन्ध विशेषतः जलविरागी समूह, अमीनो अम्लों के जलविरागी R समूहों अथवा पार्श्व श्रृंखलाओं के मध्य बनते हैं। ये जलविरागी समूह जल के साथ हाइड्रोजन बन्ध नहीं बनाते जबकि जल के अणु आपस में मजबूत हाइड्रोजन बन्ध बनाते हैं। इस कारण अमीनो अम्लों की विभिन्न जलविरागी हाइड्रोकार्बन पार्श्व श्रृंखलाएँ एकत्रित होने की प्रवृत्ति रखती है एवं प्रोटीन के अंदर की ओर धंस जाती हैं ताकि जल से कम से कम संपर्क में रह सके। अधिकांश प्रोटीनों की संरचनात्मक स्थायित्व में इनका महत्त्वपूर्ण योगदान होता है।

  1. सहसंयोजी क्रासबन्ध (Covalent cross linkages) :

इनमें मुख्यतया डाइसल्फाइड बन्ध (disulphide bonds-s-s-) शामिल है। अनेक प्रोटीनों के पॉलीपैप्टाइड श्रृंखला के समीपवर्ती लूप में सल्फर युक्त अमीनो अम्ल यदि निकट आ जाते हैं तो उनमें सहसंयोजी डाइसल्फाइड बन्ध बनाते हैं। ये बन्ध सिस्टाइन अवशेषों (cysteine residues) में एवं कभी-कभी सिस्टीन (cystine) एवं मीथीयोनीन (methionine) अवशेषों के मध्य भी बनते हैं। ये डाइसल्फाइड बन्ध एक ही पॉलीपेप्टाइड में अर्थात् अतः अणुक (intramolecular) अथवा दो भिन्न पॉलीपेप्टाइड के अमीनो अम्ल अवशेषों के मध्य अर्थात अंतरा – अणुक (intermolecular) भी बन सकते हैं। राइबोन्यूक्लियेज (Ribonuclease) एवं इन्सुलिन तथा अनेक प्रतिरक्षी ग्लोबुलिन (immunoglobulins) में डाइसल्फाइड बढ ा होते हैं। प्रतिरक्षी ग्लोबूलिन में अंतः अणुकी एवं अंतरा अणुकी दोनों प्रकार के बन्ध पाये जाते हैं। डाइसल्फाइड बन्ध तृतीयक प्रोटीन संरचना (tertiary protein structure) में वलय (fold) आदि को स्थायित्व एवं मजबूती प्रदान करते हैं। ये दो अथवा अधिक पॉलीपेप्टाइड को जोड़ने में भी सहायक होते हैं।

  1. आयनिक बन्ध (Ionic bonds)

इस प्रकार के बन्ध सामान्यतः उन R समूहों के मध्य विकसित होते हैं जिन पर विपरीत प्रकार के आवेश होते हैं। उदाहरणतया ग्लूटेमिक अम्ल के ऋणात्मक आवेशित COO- समूह से लाइसिन के धनात्मक आवेशित NH3 + समूह के मध्य आकर्षण के फलस्वरूप बना बन्ध । इसके अतिरिक्त वन्डरवॉल आकर्षण एवं लवण बन्धन भी त्रिविम प्रोटीन संरचना में सहायक होते हैं।

पोषण के आधार पर वर्गीकरण (Classification based on nutrition)-

पोषण की दृष्टि से अमीनो अम्लों को दो वर्गों में बाँटा गया है। अमीनो अम्ल हमारे शरीर के लिए परम आवश्यक हैं किंतु इनका संश्लेषण शरीर में नहीं हो पाता अतः इनकी आपूर्ति दैनिक भोजन में करना अति आवश्यक है। ये आवश्यक अमीनो अम्ल (essential amino acids) कहलाते हैं। आर्जीनीन हिस्टीडीन, आइसोल्यूसीन, ल्यूसीन, लायसीन, मिथीयोनीन फिनाइल एलेनीन, श्रीयोनीन, ट्रिप्टोफान एवं वेलीन आवश्यक अमीनो अम्ल है। शेष अनावश्यक अम्ल हैं एवं उनका संश्लेषण हो सकता है।

विभिन्न अमीनो अम्लों को संक्षेप में अंग्रेजी के तीन अक्षरों से निरूपित किया जा सकता है जो उसके संकेताक्षर · ( abbreviations) कहलाते हैं। प्राकृतिक प्रोटीन में सामान्यतः उपस्थित अमीनो अम्लों के संकेताक्षर तालिका में दर्शाये गये है।

तालिका 1: अमीनो अम्लों के सामान्य नाम एवं उनके संक्षिप्त संकेताक्षर

क्रम सं.अमीनो अम्लअंग्रेजी नामसंक्षिप्त रूप
1.

2.

3.

4.

5.

6.

7.

8.

9.

10.

11.

12.

13.

14.

15.

16.

17.

18.

19.

20 .

एलेनीन

आर्जीनी

एस्पार्टिक अम्ल

एस्पार्जिन

सिस्टीन

ग्लाइसीन

ग्लूटेमीन

ग्लूटेमिक अम्ल

हिस्टीडीन

आइसोल्यूसीन

ल्यूसीन

लायसीन

मिथियोनीन

फिनाइल एलेनीन

प्रोलीन

सीरीन

श्रीयोनीन

ट्रिप्टोफॉन

टायरोसीन

वेलीन

Alanine

Arginine

Aspartic acid

Aspargine

Cysteine

Glycine

Glutamine

Glutamic acid

Histidine

Isoleucine

Leucine

Lysine

Methionine

Phenylalanine

Proline

Serine

Threonine

Tryptophan

Tyrosine

Valine

Ala

Arg

Asp

Asn

Cys

Gly

Gln

Glu

His

Le

Leu

Lys

Met

Phe

Pro

Ser

Thr

Trp

Tyr

Val

अमीनो अम्लों के भौतिक गुण (Physical properties of aminio acids)

अधिकांशतः अमीनो अम्ल रंगहीन एवं क्रिस्टली प्रकृति के (crystalline) होते हैं। ये क्रिस्टल आकृति में भिन्न-भिन्न होते हैं एवं सूच्याकार (needle like) से लेकर षटकोणीय (hexogonal) तक हो सकते हैं। ये जल में अत्यधिक विलेय होते हैं जबकि एल्कोहल में कम विलेय तथा ईथर में अविलेय होते हैं। जल में अमीनो अम्लों की विलेयता पार्श्व, कार्बनिक अर्थात ‘R’ समूह की प्रकृति पर निर्भर करती हैं। ध्रुवीय पार्श्व शृंखला युक्त अमीनो अम्लों की जल में विलयेता अधिक होती है।

सभी अमीनो अम्लो (ग्लाइसीन छोड़कर) में ‘a कार्बन परमाणु असममित होता है अतः ‘अमीनो अम्ल ध्रुवीय घूर्णन समावयवता (optical isomerism) का गुण प्रदर्शित करते हैं । ग्लाइसिन में कार्बन पर दो H परमाणुओं की उपस्थिति के कारण ध्रुवीय घूर्णन समावयवता प्रदर्शित नहीं करता ।

अमीनो अम्लों के विद्युत रासायनी गुणधर्म (Electrochemical properties of amino acids)

अमीनो अम्लों में NH1⁄2 एवं – COOH समूह दोनों की उपस्थिति कारण वे अम्ल एवं क्षार दोनों से अभिक्रिया कर सकते हैं। अतः प्रकृति में उभयधर्मी (amphoteric) होते हैं। एक COOH एवं एक NH2 समूह युक्त अमीनो अम्लों में इन विपरीत प्रकृति के समूहों के कारण जलीय विलयन में इन पर दोनों प्रकार के आवेश होते हैं तथा आयनिक अवस्था में ये द्वियुग्म ध्रुवीय आयन (dipolar ion) अथवा उभयनिष्ठ आयन (Zwitter ion) के रूप में होते हैं। अमीनो अम्ल अणु में NH NH3+ के रूप में तथा COOH समूह – COO के रूप में होते हैं।

किन्तु एक निश्चित pH मान पर अमीनो अम्ल का कुल आवेश शून्य रहता है। यह pH मान समविभव बिन्दु (isoelectric point or pH) कहलाता है। इस pH पर अमीनो अम्ल पर धनात्मक आवेश तथा ऋणात्मक आवेश बराबर होते हैं। इसे pl द्वारा निरूपित किया जाता है। विभिन्न अमीनो अम्लों के सम विभव pH मान भिन्न-भिन्न होते हैं।

इस बिन्दु से न्यूनाधिक pH पर इन अमीनो अम्लों पर धनात्मक अथवा ऋणात्मक आवेश होता है। उदाहरणतः एलेनीन का समविभव बिन्दु 6.1 है इससे अधिक pH पर एलेनीन पर नेट ऋणात्मक आवेश होता है तथा वे विद्युत क्षेत्र में (electric field) एनोड की ओर गति करते हैं। समविभव बिन्दु से कम pH पर इस पर नेट धनात्मक आवेश रहता है तथा वे की ओर गति करते हैं।

तालिका 2 : विभिन्न अमीनो अम्लों के समविभव pH

क्रम सं.अमीनो अम्ल

समविभव pHक्रम सं.अमीनो अम्लसमविभव pH
एलेनीन

आर्जीनीन

एस्पार्टिक अम्ल

सिस्टीन

ग्लाइसिन

ग्लूटेमिक अम्ल

हिस्टीडीन

आइसोल्यूसीन

ल्यूसीन

6.1

10.8

3.0

5.0

4.1

3.1

7.7

6.0

6.0

10

11.

12.

13.

14.

15.

16.

17.

18.

लायसीन

मिथियोनीन

फिनाइल एलेनीन

प्रोलीन

सीरीन

श्रीयोनीन

ट्रिप्टोफॉन

टायरोसीन

वेलीन

9.5

5.7

5.9

6.3

5.7

5.7

5.9

5.6

6.0

अमीनो अम्लों के रासायनिक गुण (Chemical properties of amino acids)

  1. अम्ल एवं क्षारकों से अभिक्रिया (Reaction with acids or alkalis) :- अमीनो अम्लों में क्षार एवं अम्ल दोनों के गुण होने के कारण वे दोनों से ही क्रिया करते हैं एवं लवण बनाते हैं। अमीनो अम्लों का क्षारीय – NH2 समूह अम्ल से अभिक्रिया करता है जबकि क्षार के साथ इसका कार्बोक्सिल समूह क्रिया करता है।

अमीनो समूह द्वारा अभिक्रिया से बने लवण अमीनो अम्ल के – COOH समूह एल्कोहल के साथ क्रिया करके एस्टर बनाते। हैं। किन्तु इसके लिए आवश्यक है कि अमीनो समूह HCI से संबद्ध हो। ऐस्टर हाइड्रोक्लोराइड सोडियम कार्बोनेट (Na2CO3) विलयन की उपस्थिति में कम ताप पर ऐस्टर में बदल जाते हैं।

अमोनिया के साथ अभिक्रिया (Reaction with ammonia) :- अमीनो अम्ल अमोनिया के साथ अभिक्रिया करके एमाइड (amides) बनाते हैं।

सामान्यतः सजीवों में एस्पार्जिन एवं ग्लूटेंमीन (एमाइड्स) पाये जाते हैं। पादपों में ये अधिकांशतः बीजों में संचित होते

नाइट्रस अम्ल से अभिक्रिया (Reaction with HNO 2 ) :- जब अमीनो अम्ल नाइट्रस अम्ल से क्रिया करते हैं तब एमीनो समूह नाइट्रोजन के रूप में मुक्त होते हैं एवं हाइड्रॉक्सी अम्ल (hydroxy acids) प्राप्त होते हैं।

निनहाइड्रिन के साथ अभिक्रिया (Reaction with ninhydrin ) :- यह निनहाइड्रिन अभिक्रिया के नाम से जानी जाती है तथा अमीनो अम्लों की पहचान एवं आकलन ( estimation) के लिए उपयोगी है। जब अमीनो अम्लों को निनहाइड्रिन की अधिक मात्रा में गरम किया जाता है तब अमीनो अम्ल से एलडिहाइड बनते हैं तथा निनहाइड्रिन का अपचयन हो जाता है। अपचयित निनहाइड्रिन, अमीनो अम्ल से विमुक्त NH3 एवं निनहाइड्रिल जटिल संघनन उत्पाद बनाते हैं जो नीले बैंगनी रंग का होता है। प्रोलीन एवं हाइड्रॉक्सीप्रोलीन से पीले रंग का उत्पाद प्राप्त होता है।

सैंगर अभिकर्मक के साथ अभिक्रिया (Reaction with Sanger’s reagent ) :- यह अभिक्रिया विभिन्न अमीनो अम्लों की पहचान के लिए उपयोगी है तथा पैप्टाइडों में अमीनो अम्ल का अनुक्रम ज्ञात करने के लिए भी उपयुक्त है। क्षारीय माध्यम में अमीनो अम्ल 1-फ्लोरो 2, 4 डाइनाइट्रोबैन्जीन (1 fluoro-2, 4-dinitrobenzene, FDNB, सैगंर अभिकर्मक) के साथ क्रिया करके संघनन उत्पाद बनाते हैं।

एल्डिहाइडों के साथ अभिक्रिया (Reaction with aldehydes)

फार्मेल्डिहाइड (formaldehyde) अमीनो अम्ल के अमीनो समूह (-NH2 group) से अभिक्रिया कर एक मिथाइलीन यौगिक बनाता है जिससे अमीनो अम्ल अनायनीकृत (non-ionizable) हो जाता है। यह प्रक्रिया अमीनो अम्ल के परिमापन (Sorensen’s formal titration method) में काम आती है।

एरौमेटिक यौगिकों जैसे पायरीडॉक्सिल फॉस्फेट के एल्डिहाइड समूह के साथ अमीनो अम्ल उत्क्रमणीय (reversible) रूप से क्रिया करके संयोज्य यौगिक (additive compounds) बनाते हैं जिन्हें शिफ़ बेस (Schiff’s bases) कहते हैं।