परासरण का जैविक महत्व तथा परासरण दाब ज्ञात करने की विधि सह चित्र वर्णन कीजिये

परासरण दाब ज्ञात करने की विधि सह चित्र वर्णन कीजिये तथा परासरण का जैविक महत्व Describe the picture with the method of determining osmotic pressure and biological significance of osmosis in hindi

प्रश्न 1  :  परासरण का जैविक महत्व बताइये। 

उत्तर : 1. रुधिर कोशिकाओं के अन्दर स्थिति द्रव की सान्द्रता 9% w/v NaCl विलयन के समान होती है अर्थात दोनों विलयनों की सांद्रता समान होने के कारण ये सम परासरी विलयन कहलाते है।

यदि रुधिर कोशिकाओं को 9% w/v NaCl से अधिक सान्द्रता वाले विलयन में रख दिया जाए तो परासरण की क्रिया के द्वारा रुधिर कोशिकाओं में जल की कमी हो जाती है।  अतः वे व्यक्ति जो अधिक नमक का सेवन करते है उनमे जल हानि के कारण सूजन आ जाती है।

यदि रुधिर कोशिकाओं को 0.9% w/v NaCl के विलयन से कम सांद्रता वाले विलयन में रखा जाए तो परासरण की क्रिया के द्वारा जल के अणु रुधिर रुधिर कोशिकाओं में प्रवेश कर जाते है जिससे रुधिर कोशिकाएं फूल जाती है।

2. सूखे मटर , चने , गाजर आदि को जल में रखने पर वे ताजा ताजा दिखाई देते है क्यूँकि परासरण की क्रिया द्वारा इनमे जल प्रवेश कर जाता है।

प्रश्न 2 : परासरण दाब ज्ञात करने की विधि सह चित्र वर्णन कीजिये। 

उत्तर : एक थिसेल कप में शर्करा का जलीय विलयन भरकर उसके मुँह पर अर्द्ध पारगम्य झिल्ली बाँध देते है तथा चित्रानुसार जल से भरे बीकर में व्यस्थित कर देते है।

परासरण की क्रिया द्वारा जल के अणु बीकर में से शर्करा विलयन में प्रवेश करते है जिससे शर्करा विलयन ऊपर की ओर चढ़ने लगता है।

कुछ उचाई पर जाकर यह स्थिर हो जाता है क्योंकि शर्करा विलयन का द्रव स्थितिक दाब परासरण दाब के बराबर हो जाता है अतः वह स्थितिक दाब जो परासरण द्वारा उत्पन्न होता है उसे परावरण दाब कहते है इसका मान निम्न सूत्र द्वारा ज्ञात करते है।

π = Hdg 

यहाँ d = शर्करा विलयन का घनत्व।

g = गुरुत्वीय त्वरण है।

डायग्राम ?? 

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