पाटन का युद्ध कब हुआ था ? पाटन का युद्ध किसके बीच हुआ था battle of patan in hindi who won

By   December 28, 2020

who won the battle of patan in hindi पाटन का युद्ध कब हुआ था ? पाटन का युद्ध किसके बीच हुआ था ?

प्रश्न : पाटन का युद्ध ?

उत्तर : पाटन का युद्ध 20 जुलाई 1790 को महादजी सिंधिया और राजपूत शासकों (जयपुर और मारवाड़) के मध्य हुआ। सिन्धियाँ की सेना का नेतृत्व लकवा दादा और डी. बोइन ने किया , जबकि अफगान नेता इस्माइल बेग राजपूतों के साथ था। इस युद्ध में राजपूतों की पराजय हुई। युद्ध का प्रमुख कारण महादजी सिंधिया की तुंगा के युद्ध के कारण खोई हुई प्रतिष्ठा को पुनः प्राप्त करना था। पाटन के युद्ध के बाद सिंधिया की प्रतिष्ठा पुनर्स्थापित हो गयी और मराठों ने अजमेर पर अधिकार कर लिया और राजपूत शासकों से एक बड़ी धनराशि हर्जाने के रूप में वसूल की।

प्रश्न : जालौर के बारे में प्राचीन जानकारी अथवा इतिहास बताइए ?

उत्तर : बिजौलिया शिलालेख के अनुसार जालौर का प्राचीन नाम जाबालिपुर तथा इसके दुर्ग का नाम सुवर्णगिरि (सोनगढ़) था। जालौर का अर्थ है जाल (पेड़) + लौर (सीमा) अर्थात जाल के पेड़ों की सीमावाला क्षेत्र। दसवीं सदी में यहाँ परमार वंश तत्पश्चात चौहान वंश का शासन रहा। जालौर कान्हड़ दे चौहान की कीर्ति का साक्षी रहा है। यह ऋषि मांडव्य की तपोभूमि रहा और राजस्थान का ग्रेनाइट सिटी नाम से प्रसिद्ध है। इसके सांचौर को राजस्थान का पंजाब कहते है और सांचोरी नस्ल का गोधन प्रसिद्ध है। इसबगोल और जीरा उत्पादन में जालौर देश में प्रथम है।

प्रश्न : नाडौल के बारे में बताइये ?

उत्तर : शाकम्भरी नरेश वाक्पतिराज के पुत्र लक्ष्मण चौहान ने जोधपुर की सीमा पर 960 ईस्वी में नाडौल राज्य की स्थापना की और नाडौल दुर्ग का निर्माण करवाया। यह चौहानों की सबसे प्राचीन शाखा थी जो शाकम्भरी से निकली। कल्हण चौहान ने सुवर्ण तोरण का निर्माण करवाया। यहाँ शिव , विष्णु , नेमीनाथ , ऋषभदेव , महावीर आदि अनेक हिंदु और जैन देवताओं के विशाल मंदिर है।

प्रश्न : हाड़ौती का एक भौगोलिक और सांस्कृतिक स्थल के रूप में वर्णन कीजिये। 

उत्तर : राजस्थान के दक्षिण पूर्वी अंचल का पठारी भाग जिसमें कोटा , बूंदी (बारां और झालावाड सहित) शामिल है। यह पहले बूंदा मीणा के नाम पर बूंदी और बाद में हाडा चौहानों का अधिकार हुआ तो हाड़ौती कहलाया। यहाँ बाडौली , केशोरायपाटन और अटरू के शिव मंदिर अपनी स्थापत्य और तक्षणकला के बेजोड़ और अद्वितीय नमूने है। हाड़ौती स्कूल की बूंदी शैली और कोटा शैली की चित्रकला अपनी अलग ही विशेषता रखती है। रंगमहल , चित्रशाला आदि हाड़ौती अंचल की भित्ति चित्रकला के लिए विश्वविख्यात है। यहाँ की बोली हाड़ौती कहलाती है जिस पर गुर्जरी का प्रभाव स्पष्ट झलकता है। इस प्रकार हाडौती राजस्थान का एक प्रमुख सांस्कृतिक क्षेत्र है।

प्रश्न : कोटा राज्य की स्थापना कैसे हुई ?

उत्तर : जब जहाँगीर के पुत्र खुर्रम को बंदी बनाया गया तो उसे बूंदी के राव रतनसिंह और उसके पुत्र माधोसिंह की देखरेख में रखा गया। माधोसिंह ने बंदी शहजादे खुर्रम के साथ बहुत अच्छा बर्ताव किया और अंतिम समय में बंदीगृह से गुप्त रूप से मुक्त किया। इसे शहजादे खुर्रम ने बहुत बड़ा एहसान माना। जब खुर्रम मुग़ल सम्राट बना तो उसने माधोसिंह हाडा के नाम कोटा राज्य का फरमान जारी कर दिया। 1631 ईस्वी में राव रतन सिंह की मृत्यु के बाद माधोसिंह को पृथक रूप से कोटा का शासक स्वीकार कर लिया। माधोसिंह ने मुग़ल सेवा में अपना नाम कमाया।