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balathal civilization in hindi बालाथल सभ्यता कहाँ स्थित है | बालाथल किसे कहते है परिभाषा क्या है ?

प्रश्न : बालाथल के इतिहास के बारे में जानकारी दीजिये ?
उत्तर : यहाँ से 1933 में ईस्वीं 3000 से लेकर ईस्वीं 2500 तक की ताम्रपाषाण युगीन संस्कृति के बारे में पता चला है। बालाथल उदयपुर जिले की वल्लभनगर तहसील में स्थित है। यहाँ के लोग भी कृषि , पशुपालन और आखेट करते थे। ये लोग मिट्टी के बर्तन बनाने में निपुण थे और कपड़ा बुनना जानते थे। यहाँ से ताम्बे के सिक्के , मुद्राएँ और आभूषण प्राप्त हुए है। यहाँ से एक दुर्गनुमा भवन भी मिला है और ग्यारह कमरों वाला विशाल भवन भी प्राप्त हुआ है।

प्रश्न : बारी का युद्ध ?

उत्तर : खातोली युद्ध के दुसरे वर्ष सुल्तान इब्राहीम ने “मियाँ हुसैन फरमूली” और “मियाँ माखन” के साथ महती सेना को राणा के विरुद्ध पहली पराजय का बदला लेने भेजा। फ़ारसी तवारीखों में मियाँ हुसैन का इस अवसर पर राणा से मिल जाना तथा फिर मियाँ माखन के पत्र से सुल्तान की सेना का सहयोगी बनना आदि वर्णन लिखा है। इनमें इस युद्ध में राणा की हार होना भी उल्लेखित है लेकिन बाबर ने धौलपुर की लड़ाई में राजपूतों की विजय होना लिखा है। महाराणा सांगा ने धौलपुर के पास ‘बारी’ नामक स्थान पर 1518 ईस्वी में इम्ब्राहीम लोदी के सेनानायकों को पराजित किया। इस युद्ध के परिणामस्वरूप लोदी सुल्तान की शक्तिहीनता स्पष्ट हो गयी तथा राणा सांगा की महत्वाकांक्षा को बल मिला। इन विजयों से उत्तरी भारत का नेतृत्व भी उसे प्राप्त हो गया। दिल्ली के शासक को परास्त करने से राजनितिक धुरी मेवाड़ की तरफ घूम गयी तथा सभी शक्तियाँ देशी तथा विदेशी , सांगा की शक्ति को मान्यता देने लगी। मेवाड़ की शक्ति की यह चरम सीमा थी।
प्रश्न : राजमहल का युद्ध ?
उत्तर : राजमहल का युद्ध (1747 ईस्वी) जयपुर के उत्तराधिकार को लेकर सवाई जयसिंह के दोनों पुत्रों ईश्वरीसिंह और माधोसिंह के मध्य लड़ा गया। युद्ध में राणोजी सिंधिया , मराठा पेशवा तथा मुग़ल सम्राट ईश्वरीसिंह का समर्थन कर रहे थे , जबकि होल्कर , कोटा , बूंदी और मेवाड़ के शासक माधोसिंह के पक्ष में थे। 1747 ईस्वीं के युद्ध में ईश्वरी ने राजमहल के युद्ध में माधोसिंह और उसके समर्थकों को परास्त किया। इस युद्ध के परिणामस्वरूप मराठों का जयपुर की नहीं वरन राजस्थान की राजनीती में भी हस्तक्षेप बढ़ गया। वह धन को लेकर किसी भी पक्ष का समर्थन करने लगे। औचित्य , अनौचित्य के प्रश्न का कोई महत्व नहीं रहा।
प्रश्न : सारंगपुर का युद्ध कब तथा किनके मध्य लड़ा गया ? इसके परिणाम क्या रहे ?
उत्तर : राणा कुम्भा तथा मालवा सुल्तान (महमूद खिलजी) के मध्य 1437 ईस्वी में सारंगपुर का युद्ध लड़ा गया जिसमें राणा कुम्भा ने महमूद खिलजी को परास्त कर 16 माह चित्तौड़ में बंदी बनाकर रखा और इसकी स्मृति में विजय स्तम्भ बनवाया।
प्रश्न : खानवा युद्ध के बारे में बताइए ?
उत्तर : राणा सांगा और बाबर के मध्य 17 मार्च 1527 ईस्वीं को खानवा (भरतपुर) युद्ध हुआ। तोपखाने की वजह से बाबर विजयी हुआ और भारत में मुग़ल वंश स्थापित करने में सफल रहा। यह पहला और अंतिम अवसर था जब सभी राजपूत शासक एकजुट होकर शत्रु के विरुद्ध लड़े।
प्रश्न : कालीबंगा ?
उत्तर : घग्घर नदी (हनुमानगढ़) के किनारे अवस्थित कालीबंगा हड़प्पा सभ्यता कालीन प्रमुख पुरातात्विक स्थल है। जिसका उत्खनन कार्य अमलानन्द घोष , बी.बी. लाल आदि के निर्देशन में 1961 से 1969 ईस्वीं तक किया गया। यह स्थल प्राक हडप्पा और हडप्पा कालीन अवशेषों के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ से लाल काले रेखांकित मृदभाण्ड , हवन कुण्ड , क्रास जुताई , अलंकृत फर्श , सुव्यवस्थित नगर और आवास निर्माण योजना , सैन्धव लिपि , मेसोपोटामिया की मुहर , गढ़ी आदि प्रमुख अवशेष मिले है जो कम से कम 4300 वर्ष पुराने है। यह ताम्रपाषाण और ताम्र कांस्य कालीन सभ्यता का प्रमुख स्थल है।
प्रश्न : नोह ?
उत्तर : भरतपुर जिले में स्थित नोह गाँव में 1963 – 64 ईस्वीं में श्री रतनचन्द्र अग्रवाल के निर्देशन में की गयी खुदाई में लौह युगीन सभ्यता के अवशेष मिले है। रेडियो कार्बन तिथि के आधार पर यह सभ्यता 1100 ईस्वीं पूर्व से 900 ईस्वीं पूर्व की मानी गयी है। यहाँ उत्खनन में पांच सांस्कृतिक युगों के अवशेष मिले है। यहाँ से प्रस्तर की विशालकाय यक्ष प्रतिमा तथा चुनार के चिकने पत्थर के कुछ टुकडें प्राप्त हुए है जिन पर मौर्यकालीन पॉलिस है। एक मात्र में ब्रह्यी लिपि में चारों तरफ लेख अंकित है।