एल्किन (एथिलीन) : असंतृप्त हाइड्रोकार्बन , alkene in hindi chemistry , सैतजैफ नियम या सैटजैफ नियम

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असंतृप्त हाइड्रोकार्बन : वे हाइड्रोकार्बन जिनमें कम से कम दो कार्बन परमाणुओं के मध्य द्विबंध या त्रिबंध उपस्थित होता है , वे ‘असंतृप्त हाइड्रो कार्बन’ कहलाते है।

उदाहरण : एल्किन (एथिलीन)

एल्काइन (एसिटीलीन)

असंतृप्त हाइड्रो कार्बन दो प्रकार के होते है –

[I] एल्किन

[II] एल्काइन

[I] एल्किन

एलिफैटिक असंतृप्त हाइड्रोकार्बन जिनमें कार्बन-कार्बन के मध्य द्विबंध उपस्थित होता है , एल्किन या ऑलीफिन कहलाते है।

एल्किन का सामान्य सूत्र : CnH2n

एल्किन का नामकरण : साधारण पद्धति में एल्किन के नाम से -ane के स्थान पर इलीन आता है तथा IUPAC पद्धति में -ane के स्थान पर -ene (ईन) आता है।

एल्किन बनाने की विधियाँ

(1) एल्कोहल के निर्जलीकरण द्वारा :

(a) सान्द्र H2SO4 द्वारा निर्जलीकरण : जब प्राथमिक एल्कोहल को सान्द्र H2SO4 की उपस्थिति में 170′-180’C ताप पर गर्म किया जाता है तो एल्किन का निर्माण होता है।

सैतजैफ नियम या सैटजैफ नियम : जब किसी असनुमित एल्कोहल का निर्जलीकरण किया जाता है तो वह एल्किन अधिक मात्रा में बनती है जिससे द्विबंधित कार्बन परमाणु से अधिक प्रतिस्थापी समूह जुड़े हुए होते है।

(b) एलुमिना द्वारा निर्जलीकरण : जब प्राथमिक एल्कोहल को एलुमिना की उपस्थिति में 350’C ताप पर गर्म किया जाता है तो एल्केन का निर्माण होता है।

(2) एल्किल हैलाइडो के वि-हाइड्रो हैलोजनीकरण द्वारा : जब किसी एल्किल की क्रिया एल्कोहली KOH के साथ की जाती है तो एल्किन का निर्माण होता है।

नोट : जब द्वितीयक एल्किल हैलाइड का वि-हाइड्रोहैलोजनीकरण किया जाता है तो अभिक्रिया सैतजैफ के नियम के अनुसार होती है।

(3) डाई हैलाइडो वि-हैलोजनीकरण द्वारा : जब 1,2-डाई हैलाइड की क्रिया Zn के साथ की जाती है तो एल्किन का निर्माण होता है।

(4) एल्केनो के वि-हाइड्रोजनीकरण द्वारा : जब एल्केन को क्रोमियम ऑक्साइड व एलुमिना उत्प्रेरक की उपस्थिति में 500’C ताप पर गर्म किया जाता है तो एल्किन का निर्माण होता है।

CH3-CH3 → CH2=CH2 + H2

(5) एल्काइन के हाइड्रोजनीकरण द्वारा : लिंडलार उत्प्रेरक की उपस्थिति में एल्काइन H2 से क्रिया करके एल्किन का निर्माण करती है।

H-C ≡C-H + H2 → CH2=CH2

नोट : त्रिविम विशिष्ट योग : जब एल्काइन का हाइड्रोजनी करण लिंडलार उत्प्रेरक की उपस्थिति में किया जाता है तो मुख्य उत्पाद समपक्ष एल्किन होता है। तथा सोडियम द्रव अमोनिया की उपस्थिति में हाइड्रोजनीकरण किया जाता है तो मुख्य उत्पाद विपक्ष एल्कीन प्राप्त होती है।

भौतिक गुण

  • एल्किन जल में लगभग अविलेय तथा कार्बनिक विलायको में विलेय होती है।
  • अणुभार बढने के साथ साथ एल्किनो के गलनांक , क्वथनांक व आपेक्षिक घनत्व बढ़ते जाते है।

रासायनिक गुण

एल्कीन में एक पाई बंध की उपस्थिति के कारण ये बहुत अधिक क्रियाशील होती है तथा इनमें मुख्य इलेक्ट्रॉन स्नेही योगात्मक अभिक्रिया होती है।

[I] हाइड्रोजन का योग : जब एल्किन की क्रिया H2 के साथ निकल (Ni) उत्प्रेरक की उपस्थिति में की जाती है तो एल्केन का निर्माण होता है।

CH2=CH2 + H2 → CH3-CH3

[II] हैलोजन का योग : अक्रिय विलायक CCl4 की उपस्थिति में एल्किन , हैलोजन के साथ क्रिया करके एल्किन डाई हैलाइड (विस डाई हैलाइड) बनाती है।

[III] हाइड्रोजन हैलाइड (H-X) का योग : जब एल्किन की क्रिया हाइड्रोजन हैलाइड के साथ की जाती है तो एल्किल हैलाइड बनते है।

CH2=CH2 + HX → CH3-CH2-X

नोट : जब किसी असममित एल्किन की क्रिया हाइड्रोजन हैलाइड (H-X) के साथ की जाती है तो अभिक्रिया “मार्कोनीकॉक” नियम के अनुसार होती है।

मारकोनी कॉक नियम

जब किसी असममित एल्किन की क्रिया H-X के साथ की जाती है तो H-X का ऋण भाग उस द्विबंधित कार्बन परमाणु पर जुड़ता है जिस पर हाइड्रोजन परमाणुओं की संख्या कम होती है।

[IV] परॉक्साइड प्रभाव या खराश प्रभाव : जब किसी असममित एल्किन की क्रिया HBr के साथ O2 या परॉक्साइड की उपस्थिति में की जाती है तो अभिक्रिया मार्कोनी कॉक नियम के विपरीत होती है इसे एंटी-मार्कोनीकॉक नियम कहते है तथा इस प्रभाव को परॉक्साइड प्रभाव या खराश प्रभाव कहते है।

[V] जल का योग : तनु H2SO4 की उपस्थिति में एल्किन , जल से क्रिया करके एल्कोहल बनाती है , यह अभिक्रिया मार्कोनीकॉक नियम के अनुसार होती है।

[VI] बहुलकीकरण : वह प्रक्रम जिसमें बड़ी संख्या में सरल अणु आपस में संयुक्त होकर उच्च अणुभार का वृहद अणु बनाते है तो उसे “बहुलकीकरण” कहते है।  इस प्रक्रम में बने उच्च अणुभार के पदार्थ को बहुलक कहते है तथा सरल अणु को एकलक कहते है।

उदाहरण : O2 की उपस्थिति में उच्च ताप व दाब पर एथीन के बहुत सारे अणु आपस में जुड़कर “पोलीथिन” बहुलक कहते है।

CH2=CH2  → [-CH2-CH2-]n

[VII] ओजोनीअपघटन : जब एल्किन की क्रिया ओजोन (O3) के साथ CCl4 की उपस्थिति में की जाती है तो ओजोननाइड बनता है जिसका Zn की उपस्थिति में जल अपघटन करने पर कार्बोनिल यौगिक (एल्डीहाइड व कीटोन) बनता है।

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