परम ताप क्या है Absolute zero in hindi meaning definition परम शून्य ताप का मान है स्पष्ट कीजिए

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Absolute zero in hindi meaning definition परम ताप क्या है परम शून्य ताप का मान है स्पष्ट कीजिए ?

 चालक (Conductor)-चालक वे पदार्थ हैं जिनसे होकर विद्युत्धारा सरलता से प्रवाहित होती है।
 परम ताप (Absolute zero) -परम ताप वह न्यूनतम सम्भव ताप है जिसके नीचे कोई ताप संभव नहीं है। इस ताप पर गैसों के अणुओं की गति शून्य हो जाती है। इसका मान -273.15°C होता है। इसे केल्विन में व्यक्त करते हैं।

 बेकरल किरण (Bacquerel rays)-यूरेनियम यौगिकों से उत्सर्जित होने वाली अल्फा, बीटा व गामा किरणें, बेकरल किरणें कहलाती हैं।
 बीटा-कण (Bata particles)-बीटा-कण ऋणावेशित होते हैं, जोकि रेडियो सक्रियता के दौरान परमाणु के नाभिक से उत्सर्जित होते हैं।
 बीटाट्रॉन (Betatron)-बीटाट्रॉन एक त्वरक मशीन होती है, जिसके द्वारा इलेक्ट्रॉनों को अत्यधिक वेग पर त्वरित किया जाता है।
 कृष्णिका (Black body)-जो वस्तु अपने ऊपर गिरने वाले सभी प्रकार के विकिरण को अवशोषित कर लेती है, कृष्णिका कहलाती है।
 ब्लू आइस (Blue lce)-शुद्ध बर्फ जिसमें रोगाणु (जम्र्स) नहीं होते और जो 2000 से 3000 वर्ष पुरानी है, ब्लू आइस कहलाती है। इसका रंग नीला होता है तथा यह ग्रीनलैण्ड में पायी जाती है।
 क्वथनांक (Boiling Point)-क्वथनांक किसी द्रव का वह ताप है जिस पर द्रव का संतृप्त वाष्प दाब, बाह्य दाब के बराबर हो जाता है। इस ताप पर द्रव उबलने लगता है।
 ब्राउनियन-गति (Brownian motion)-पदार्थ के अणुओं में होने वाली अनियमित गति (random motion) को ब्राउनियन गति कहते हैं। जैसे-धुंए के कणों आदि में ब्राउनियन गति होती है।
 कैलोरीमीटर (Calorimeter)-इसके द्वारा तापीय ऊष्मा का मापन किया जाता है।
 केन्डेला (Candela)-केन्डेला ज्योति-तीव्रता (Luminous intensity) का मात्रक है।
 संधारित्र (Capacitor)-संधारित्र एक ऐसा समायोजन होता है जिस पर आवेश की पर्याप्त मात्रा संचित की जा सकती है।
 केशिकत्व (Capillarity)-पृष्ठ-तनाव (Surface tension) के कारण किसी बारीक नली में द्रव के ऊपर चढ़ने की घटना को केशिकत्व कहते हैं।
 सेल्सियस पैमाना (Celsius scale)-इस पैमाने पर ताप को सेन्टीग्रेड में मापा जाता है। इस पर बर्फ का गलनांक 0°C व पानी का क्वथनांक 100°C होता है।
 अपकेन्द्रीय बल (Centrifugal force)-वृत्ताकार पथ पर घूमती हुई वस्तु पर केन्द्र के बाहर की ओर लगने वाले बल को अपकेन्द्रीय बल कहते हैं। यह एक छद्म बल (Pseudo force) है।
 अभिकेन्द्रीय बल (Centripetal force)-किसी वृत्ताकार पथ पर घूमती हुई वस्तु पर वृत्त के केन्द्र की ओर लगने वाले बल को अभिकेन्द्रीय बल कहते हैं। इस बल के अभाव में वस्तु वृत्ताकार पथ पर नहीं घूम सकती।
 संचार उपग्रह (Communication Satellite)-यह कृत्रिम उपग्रह होता है, जो दूर-संचार जैसे-रेडियो, टेलीविजन एवं टेलीफोन के सिग्नल प्रसारित करता है।

 त्वरण (Acceleration)-किसी वस्तु के वेग परिवर्तन की दर को त्वरण कहते हैं। इसका मात्रक मीटर प्रति सेकण्ड होता है तथा यह एक सदिश राशि है।
 ध्वनिकी (Acoustics)-ध्वनिकी भौतिकी की वह शाखा है, जिसके अन्तर्गत ध्वनि तरंगों के प्रयोग व उनके गुणों का अध्ययन किया जाता है।
 अल्फा -कण (Alfa-particles)-अल्फा (αं) कण मुख्यतः हीलियम नाभिक होते हैं। इनकी संरचना दो प्रोटॉनों व दो न्यूट्रॉनों के द्वारा होती है। रेडियो ऐक्टिवता में ये कण नाभिक से उत्सर्जित होते हैं। इन पर धनावेश ऋऋहोता है व ये गैसों का आयनीकरण करते हैं।
 प्रत्यावर्ती धारा (Alternating current)-प्रत्यावर्ती धारा वह धारा है जो कि विद्युत् परिपथ में अपनी दिशा लगातार बदलती रहती है। घरों में प्रयुक्त प्रत्यावर्ती धारा की आवृत्ति 50 ह होती है।
 अमीटर (Ammeter)-अमीटर एक ऐसा यंत्र है, जिसकी सहायता से विद्युत् धारा को मापा जाता है।
 एम्पियर (Ampere)-एम्पियर विद्युत् धारा को मापने की इकाई है।
 एन्टीमैटर या प्रति कण (Antimatter)- उस पदार्थ को कहते हैं जिसके परमाणु में नाभिक, एन्टी-प्रोटॉन्स और एन्टी-न्यूट्रॉन्स होते हैं तथा नाभिक के चारों ओर पोजीट्रॉन्स घूमते रहते हैं।
 आर्किमिडीज का सिद्धान्त (Archimedes principle)-इस सिद्धान्त के अनुसार किसी वस्तु को द्रव में डुबोने पर उसके भार में कमी आ जाती है, यह कमी उसके द्वारा हटाये गये द्रव के भार के बराबर होती है। इस सिद्धान्त को यूनान के महान् वैज्ञानिक, आर्किमिडीज ने प्रतिपादित किया था।
 कृत्रिम उपग्रह (Artificial Satellite)-यदि किसी वस्तु को पृथ्वी तल से कुछ सौ किमी ऊपर अंतरिक्ष में पहुँचाकर, एक निश्चित क्षैतिज चाल दी जाए, तो वह एक नियत कक्षा में पृथ्वी के चारों ओर परिक्रमा करने लगती है, ऐसी वस्तु को कृत्रिम उपग्रह कहते हैं।
 एस्ट्रोनॉट (Astronaut)-विभिन्न ग्रहों का अध्ययन करने वाले व्यक्ति जो अन्तरिक्षयान में बैठकर जाते हैं, एस्ट्रोनॉट कहलाते हैं। इस शब्द को अमरीकन लोग प्रयोग करते हैं।
 परमाणु बम (Atom Bomb)-जब यूरेनियम (235) को न्यूट्रॉन के द्वारा बम्बार्ड किया जाता है, तो यूरेनियम के परमाणुओं का विखण्डन हो जाता है, इससे बहुत अधिक मात्रा में ऊर्जा निकलती है, जिससे समस्त वस्तुएँ एवं जीवित प्राणी पूर्णतः नष्ट हो जाते हैं।
 एटोमिक एनर्जी (Atomic Energy)-परमाणु विखण्डन द्वारा प्राप्त ऊर्जा को एटोमिक एनर्जी कहते हैं इसे एकत्रित कर शान्तिपूर्ण उद्देश्य से जैसे-कृषि, उद्योग, चिकित्सा, विद्युत् आदि में इसका उपयोग किया जाता है।
 एटोमिक फ्यूजन (Atomic Fusion)-परमाणु के नाभिक में धन-आवेश वाले प्रोटॉन और न्यूटॉन के विकर्षण को गति बढ़ाकर समाप्त कर देने से दोनों आपस में मिल जाते हैं, इसे एटोमिक फ्यूजन कहते हैं। इस क्रिया से अपार ऊर्जा उत्पन्न होती है और यह क्रम चलता रहता है। इसी से हाइड्रोजन बम बनाते हैं।

 संवेग-संरक्षण (Conservation of momentum)-यदि किसी निकाय पर कोई बाह्य बल कार्य न कर रहा हो तो निकाय का कुल संवेग नियत रहता है।
 कॉस्मिक रेज (Cosmic Rays)-अन्तरिक्ष से पृथ्वी की ओर आने वाले विद्युत् आवेशित कणों को कॉस्मिक रेज कहते हैं, इनमें अधिकतर प्रोटॉन्स होते हैं, परन्तु कुछ न्यूक्लीआई भी होते हैं जो जन-जीवन के लिए घातक माने जाते हैं।
 कॉस्मोनॉट (Cosmonaut)-रूसी लोग अपने अन्तरिक्ष यात्री को द्य कॉस्मोनॉट कहकर पुकारते हैं।
 उल्टी गिनती (Countdown)-अन्तरिक्ष यान जब लॉचिंग स्टेशन को छोड़ने को होता है तब उल्टी गिनती अर्थात् दस, नौ, आठ, …….शून्य, गिनने की प्रक्रिया को अपनाया जाता है और क्रमशःशून्य आने पर अन्तरिक्ष यान लॉचिंग स्टेशन को छोड़ देता है।
 कायोजेनिक्स (Cryogenics)-यह भौतिकी की वह शाखा है जिसके अन्तर्गत अत्यन्त निम्न तापों का उत्पादन किया जाता है व उनके गुणों का अध्ययन करते हैं।
 क्यूरी (Curie)-यह रेडियो ऐक्टिव पदार्थ की सक्रियता की इकाई है। यदि किसी रेडियो पदार्थ में 3.7×1010 विघटन प्रति सेकण्ड होते हैं तो उस पदार्थ की सक्रियता एक क्यूरी कहलाती है।
 साइक्लोदान (Cyclotron)-साइक्लोट्रान एक कण-त्वरण मशीन है जिसमें आवेशित कण वृत्ताकार पथ पर घूमते हैं।
 विवर्तन (ffDiusion)-जब प्रकाश या ध्वनि तरंगें किसी अवरोध से टकराती हैं, तो वे अवरोध के किनारों पर मुड़ जाती हैं, तरंगों के इस प्रकार मुड़ने की घटना को विवर्तन कहते हैं।
 डायोड (Diode)-डायोड एक ऐसी इलेक्ट्रॉनिक युक्ति है जिसमें केवल दो इलेक्ट्रोड-कैथोड व एनोड होते हैं। इसके द्वारा इलेक्ट्रॉनों का उत्सर्जन करके धारा प्रवाहित की जाती है।
 दिष्ट-धारा (Direct current)-दिष्ट धारा वह धारा है, जो सदैव एक द्य ही दिशा में बहती है व जिसका परिमाण नियत रहता है।
 विघटन (Disintegration)-विघटन वह प्रक्रिया है, जिसमें कोई नाभिक स्वतः या कृत्रिम रूप से रेडियो-ऐक्टिव किरणों का उत्सर्जन करता है।

 वर्ण-विक्षेपण (Dispersion)-जब प्रिज्म पर होकर श्वेत प्रकाश गुजारा जाता है तो वह विभिन्न रंगों की अनेक किरणों में विभाजित हो जाता है। इस घटना को वर्ण विक्षेपण कहते हैं।
 डर्टी आइस (Dirty ice)-अन्तरिक्ष में पाये जाने वाले लोहे के कणयुक्त मीथेन व अमोनिया के जमे हुए ठोस कण डर्टी आइस कहलाते हैं। इनका कार्य, ग्रह तथा उपग्रह निर्माण करने के लिए आवश्यक ठण्डा वातावरण उत्पन्न करना है।
 इकोसाउन्डिंग (Echo-sounding)-यह समुद्र की गहराई नापने की एक विधि है। इसमें ध्वनि की तरंगें पानी के भीतर भेजी जाती हैं जो समुद्र के तल से टकराकर लौट आती हैं। इन तरंगों द्वारा लिये गये समय से समुद्र तल की गहराई नापी जाती है।
 प्रत्यास्थता (Elasticity)-प्रत्यास्थता किसी वस्तु के पदार्थ का वह गुण है जिसके कारण वस्तु किसी विरूपक बल (Deforming force) के द्वारा हुये परिवर्तन का विरोध करती है व विरूपक बल हटा लेने पर अपनी पूर्व अवस्था को प्राप्त कर लेती है।
 इलेक्ट्रॉन (Electron)-इलेक्ट्रॉन एक ऋणावेशित मूल कण है जो परमाणु में नाभिक के चारों ओर चक्कर लगाता रहता है।
 वैद्युत-अपघटन (Electrolysis)-जब किसी लवण के जलीय विलयन में विद्युत् धारा प्रवाहित की जाती है, तो लवण ऋण व धन आयनों में टूट जाता है। इस प्रक्रिया को वैद्युत अपघटन कहते हैं।