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आवास किसे कहते हैं उत्तर | habitat definition in hindi आवास किसे कहते हैं उदाहरण सहित समझाइए

habitat definition in hindi meaning आवास किसे कहते हैं उत्तर |  आवास किसे कहते हैं उदाहरण सहित समझाइए  ?

पारिस्थितिकी एवं उसकी शाखाएं (Ecology and its Branches)
पारिस्थितिकी (Ecology) में जीवों के निवास स्थान का अध्ययन किया जाता है- अंग्रेजी शब्द “Ecology” यूनानी भाषा के शब्द ष्वपावेष् से बना जिसका अर्थ है निवास और दूसरा शब्द है “logos” जिसका अर्थ है अध्ययन।

वह स्थान जहां जीव रहता है उसका आवास (habitat) कहलाता है। यह वह स्थान होता है जहां हमें जीव को ढूंढने के लिए जाना होगा। उदाहरणतः चावल के तना छेदक का आवास धान का खेत होता है। जीव का आवास मानो किसी व्यक्ति का डाक-पता जैसा होता है।

पीड़क स्पीशीज का आवास और भी कई जीवों के साथ सम्मिलित रूप में होता है – जैसे पौधों, अन्य पीड़क स्पीशीज, (प्रजातियों) परभक्षियों, परजीवियों तथा रोगजनकों (प्राकृतिक शत्रु) आदि के साथ। फसल-पौधे पीड़कों को भोजन तथा आश्रय प्रदान करते हैं। उसी पीड़क स्पीशीज की व्यष्टियाँ या आपस में भोजन, स्थान तथा संगमन साथी के लिए, जब कभी ये कम हो तो प्रतिस्पर्धा करती हैं। प्राकृतिक शत्रु पीड़कों पर आहार करते और उनकी समष्टियों को सीमित बनाए रखते हैं। साथ ही इनके प्राकृतिक शत्रुओं की विभिन्न स्पीशीज के बीच भी भोजन एवं आश्रय के लिए प्रतिस्पर्धा रहती है। और सबसे बड़ी बात यह है कि विभिन्न जीवों पर मौसम-विज्ञानीय यानी भौतिक कारकों का भी प्रभाव पड़ता है जैसे तापमान, वर्षा, आर्द्रता, वायु वेग, खुली धूप की अवधि आदि का। इस प्रकार ऊपर बताए गए सभी घटक किसी कीट स्पीशीज की पारिस्थितिकी के समेकित भाग होते हैं।

इस प्रकार पारिस्थितिकी (Ecology) की परिभाषा के रूप में कह सकते हैं कि यह एक ओर जीवों के तथा दूसरी ओर उनके भौतिक पर्यावरण के बीच के परस्परसंबंधों का अध्ययन होता है। उदाहरण के लिए, चावल के तना छेदक की पारिस्थितिकी में ये सब अंश आएंगे चावल का पौधा, चावल के खेत में विभिन्न खरपतवारें, चावल पर संग्रसित अन्य पीड़क स्पीशीज, उसके प्राकृतिक शत्रु जैसे मकड़ियाँ, कॉक्सीनेलिड्स तथा अन्य बीटल, विभिन्न परजीवी रोगजनक तथा पर्यावरण के भौतिक कारक।

पारिस्थितिकी की शाखाएं

पारिस्थितिकी को दो शाखाओं में विभाजित किया जा सकता है – स्वपारिस्थितिकी तथा संपारिस्थितिकी

पद्ध स्वपारिस्थितिकी (Autecology) में व्यष्टिगत पीड़क स्पीशीज के उनके आवास के साथ संबंघ का अध्ययन आता है।
पपद्ध संपारिस्थितिकी (Synecology) में किसी आवास विशेष में रह रहे सभी स्पीशीज के जीवों के परस्परसंबंधों का अध्ययन किया जाता है। इसे जैविक समुदाय (biotic community) की पारिस्थितिकी भी कहा जाता है।

बोध प्रश्न 1
प) पारिस्थितिकी से क्या अभिप्राय है?
पप) संपारिस्थितिकी किसे कहते हैं?
पपप) आवास किसे कहते हैं?

उत्तरमाला

1) प) एक ओर सजीव जीवधारियों एवं दूसरी ओर भौतिकी पर्यावरण के बीच के संबंध के अध्ययन को पारिस्थितिकी कहते हैं।
पप) अनेक स्पीशीज (प्रजातियों) की पारिस्थितिकी या दूसरे शब्दों में ये कहें कि जैविक समुदाय की पारिस्थितिकी को संपारिस्थितिकी कहते हैं।
पपप) आवास वह स्थान होता है जहां कोई जीव रहता है।

प्रस्तावना
पिछली इकाइयों में आपने पीड़कों के विभिन्न प्रकारों, उनके द्वारा होने वाली क्षति के स्वरूप एवं उनके द्वारा होने वाली हानियों के प्रतिशत के विषय में पढ़ा। इस इकाई में आप पारिस्थितिकी संकल्पनाओं जैसे कि पारितंत्र, खाद्य श्रृंखला, जैविक विभव, पर्यावरण प्रतिरोध तथा प्रकृति के संतुलन के विषय में अध्ययन करेंगे। साथ ही आप उन विधियों के विषय में जान सकेंगे जिनके द्वारा पीड़कों से होने वाली फसल हानि का मूल्यांकन किया जा सकता है। इस इकाई में प्राकृतिक पारितंत्रों तथा कृषि-पारितंत्रों (agro ecosystems) के संदर्भ में पीड़क परिस्थिति के आधारभूत सिद्धातों के विषय में वर्णन किया गया है। साथ ही यह भी समझाया गया है कि किस प्रकार इन आधारभूत सिद्धातों की जानकारी के द्वारा पारितंत्र प्रक्रियाओं में न्यूनतम बाधा डाल कर पीड़क प्रबंधन को किस प्रकार बेहतर बनाया जा सकता है। इस इकाई में पीड़क समष्टि में पीड़क मूल्यांकन की जो विधियां बतायी गयी हैं वे पीड़क प्रबंधन कार्यक्रमों में व्यापक इस्तेमाल की जाती हैं।

उद्देश्य
इस इकाई का अध्ययन करने के बाद आप –

ऽ पीड़कों की पारिस्थितिकी की परिभाषा दे सकेंगे,
ऽ कृषि-पारितंत्र की परिभाषा दे सकेंगे,
ऽ प्राकृतिक पारितंत्र तथा कृषि-पारितंत्र में अंतर बता सकेंगे,
ऽ खाद्य श्रृंखलाओं तथा खाद्य जालों का स्पष्टीकरण कर सकेंगे,
ऽ जीवों में समष्टि वृद्धि के विभिन्न प्रकारों का वर्णन कर सकेंगे,
ऽ प्रकृति में संतुलन समझा सकेंगे,
ऽ विविध प्रतिचयन विधियों का वर्णन कर सकेंगे,
ऽ जीवों की समष्टि गतिकी की परिभाषा कर सकेंगे,
ऽ पीड़कों के मात्रात्मक आकलन की विधियां समझा सकेंगे, और
ऽ फसल हानि मूल्यांकन की विधियों का वर्णन कर सकेंगे।