पदान्वय की परिभाषा क्या है ? पदान्वय कैसे किया जाता है ? meaning of पदान्वय इन हिंदी in english

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पदान्वय की परिभाषा क्या है ? पदान्वय कैसे किया जाता है ? meaning of पदान्वय इन हिंदी in english करना हिंदी व्याकरण |

पदान्चय

शब्द और पद वस्तुतः जब शब्द वाक्य से अलग रहता है तभी उसे ‘शब्द‘ कहते हैं । वाक्य में प्रयुक्त शब्द तो ‘पद‘ कहलाता है । ‘पद‘ अर्थ- संकेत करता है, जब कि ‘शब्द‘ सार्थक और निरर्थक दोनों हो सकता है।

पदान्वय

पदों का अन्वय अर्थात् विश्लेषण पदान्वय कहलाता है । इसे ‘पदपरिचय‘, ‘पदनिर्देश‘, ‘पदनिर्णय‘, ‘पदविन्यास‘, ‘पदच्छेद‘ आदि नामों से भी जाना जाता है । पदान्वय के अन्तर्गत वाक्यों में प्रयुक्त शब्दों (अर्थात् पदों) की व्याकरण से सम्बन्धित विशेषताएँ बतायी जाती हैं अर्थात् वाक्य के प्रत्येक पद को अलग-अलग कर उसका स्वरूप और दूसरे पद से सम्बन्ध बतलाना ‘पदान्वय‘ कहलाता है । प्रमुख पदों के अन्वय का सामान्य परिचय नीचे दिया जा रहा है-

(1) संज्ञा का पदान्वय-संज्ञापदों का पदान्वय करते समय संज्ञा, उसके भेद, लिंग, कारक और अन्य पदों का परिचय दिया जाता है । इसके साथ ही अन्य पदों के साथ उनका सम्बन्ध भी दिखलाया जाता है।

उदाहरण-श्याम कहता है कि मैं राम की किताब पढ़ सकता हूँ । इस उदाहरण में ‘श्याम‘, ‘राम‘ और ‘किताब‘ तीन संज्ञापद हैं‘ जिनका पदान्वय इस प्रकार होता है – श्याम-संज्ञा, व्यक्तिवाचक, पुल्लिंग, एकवचन, कर्त्ताकारक, श्कहता है‘ क्रिया का कर्ता । राम-संज्ञा, व्यक्तिवाचक, पुल्लिंग, एकवचन, सम्बन्धकारक, इसका सम्बन्ध ‘किताब‘ से है । किताबकृसंज्ञा, जातिवाचक, स्त्रीलिंग, एकवचन, कर्मकारक, ‘पढ़ सकता हूँ‘ क्रिया का कर्म ।

(2) सर्वनाम का पदान्वय- इसमें सर्वनाम, सर्वनाम का भेद, पुरुष, लिंग, वचन, कारक एवं उसका सम्बन्ध बतलाया जाता है ।

उदाहरण-मैं अपनी किताब पढ़ता हूँ। इस वाक्य में ‘मैं‘ और ‘अपनी‘ सर्वनाम हैं । इनका पदान्वय इस प्रकार होगा-

मैं-पुरुषवाचक सर्वनाम, उत्तमपुरुष, पुल्लिंग, एकवचन, कर्ताकारक, ‘पढ़ता हूँ‘ क्रिया का कर्ता। अपनी-निजवाचक सर्वनाम, उत्तमपुरुष, स्त्रीलिंग, एकवचन, संबंधकारक, श्किताबश् संज्ञा का विशेषण ।

(3) विशेषण का पदान्वय-विशेषण के पदान्वय में उसका प्रकार, लिंग, वचन, कारक और विशेष्य बतलाये जाते हैं।

उदाहरण-मैं तुम्हें नेहरूजी के अमूल्य गुणों की थोड़ी-बहुत जानकारी कराऊँगा। यहाँ ‘अमूल्य ‘ और ‘थोड़ी-बहुत‘ विशेषण हैं जिनका पदान्वय निम्नलिखित है-

अमूल्य- विशेषण, गुणवाचक, पुल्लिंग, बहुवचन, अन्यपुरुष, संबंधसूचक, ‘गुणों‘ इसका विशेष्य है।

थोड़ी-बहुत–विशेषण, अनिश्चित परिमाण वाचक, स्त्रीलिंग, अन्यपुरुष, कर्मवाचक, ‘जानकारी‘ इसका विशेष्य है।

(4) क्रिया का पदान्वय-इसमें क्रिया के प्रकार, वाच्य, पुरुष, लिंग, वचन, काल और वह शब्द जिससे क्रिया का संबंध है, आदि बातें बतलायी जाती हैं।

उदाहरण-मैं जाता हूँ । यहाँ ‘जाता हूँ क्रिया है जिसका पदान्वय होगा-

जाता हूँ-सकर्मक क्रिया, कर्तृवाच्य, सामान्य वर्तमान, उत्तमपुरुष, पुल्लिंग, एकवचन, ‘मैं‘ इसका कर्ता ।

(5) अव्यय का पदान्वय-अव्यय के पदान्वय में अव्यय, अव्यय के भेद और उससे संबंध रखनेवाले पद के उल्लेख किये जाते हैं ।

उदाहरण-राम अभी गया है।

‘अभी‘ अव्यय है जिसका पदान्वय होगा- अभी- कालवाचक अव्यय, ‘जाना‘ क्रिया का काल सूचित करता है, अतः श्जानाश् क्रिया का विशेषण ।

(6) क्रियाविशेषण का पदान्वय-इसमें क्रिया विशेषण के प्रकार और जिस क्रिया की विशेषता प्रकट करे, उस पद का उल्लेख होना चाहिए ।

उदाहरण-राम अपनी कक्षा में शान्तिपूर्वक बैठता है ।

‘शान्तिपूर्वक‘ क्रियाविशेषण है जिसका पदान्वय होगा- शान्तिपूर्वक- रीतिवाचक क्रियाविशेषण, ‘बैठता है‘ क्रिया की विशेषता बतलाता है । पूरे वाक्य का पदान्वय उदाहरण नीचे देखा जा सकता है।

उदाहरण-अच्छा लड़का कक्षा में शान्तिपूर्वक बैठता है-

अच्छा-गुणवाचक विशेषण, पुल्लिंग, एकवचन, इसका विशेष्य ‘लड़का‘ है।

लड़का-जातिवाचक संज्ञा, पुल्लिंग, एकवचन, अन्यपुरुष, कर्ताकारक, ‘बैठता है‘

क्रिया का कर्ता ।

कक्षा में—जातिवाचक संज्ञा, स्त्रीलिंग, एकवचन, अधिकरण कारक ।

शान्तिपूर्वक-रीतिवाचक क्रियाविशेषण, ‘बैठता है‘ क्रिया का विशेषण ।

बैठता है-अकर्मक क्रिया, कर्तृवाच्य, सामान्य वर्तमान काल, पुल्लिंग, एकवचन, अन्यपुरुष, इसका कर्ता ‘लड़का‘ है।

इसी प्रकार अन्य वाक्यों का भी पदान्वय किया जा सकता है ।