कश्मीर में आतंकवाद पर निबंध क्या है , शुरुआत , कारण , इतिहास , समाधान Terrorism in Jammu & Kashmir

By   May 15, 2022
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Terrorism in Jammu & Kashmir in hindi कश्मीर में आतंकवाद पर निबंध क्या है , शुरुआत , कारण , इतिहास , समाधान ?
जम्मू-कश्मीर में अलगाववाद और आतंकवाद
(Separatism & Terrorism in Jammu & Kashmir)
’’’ (इस खंड का उल्लेख मुख्य परीक्षा के प्रश्नपत्र-3 के टॉपिक 17 में है। ‘दृष्टिश् द्वारा वर्गीकृत पाठ्यक्रम के 15 खंडों में से इसका संबंध भाग-12 से है।) जम्मू-कश्मीर का भारत में विलय, जम्मू-कश्मीर से संबंधित विशिष्ट संवैधानिक प्रावधान (अनुच्छेद 370) आदि के बारे में ‘भारतीय राजव्यवस्था‘ में चर्चा की गई है जबकि जम्मू-कश्मीर पर भारत व पाकिस्तान का दृष्टिकोण तथा अन्य विभिन्न मुद्दों के बारे में ‘अंतर्राष्ट्रीय संबंध‘ में विस्तार से बताया गया है। इस खंड में आंतरिक सुरक्षा के संदर्भ में जम्मू-कश्मीर की समस्याएँ एवं उनके समाधान पर चर्चा की गई है।

जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद भारत के लिए एक बड़ी चुनौती बन चुका है। जम्मू-कश्मीर में सक्रिय आतंकवादी संगठनों में जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट, हिजबुल-मुजाहिदीन, लश्करे तैयबा, अल-फरान, हरकत उल अंसार आदि प्रमुख हैं। यह किसी से छिपा नहीं है कि भारत में आतंकवाद का प्रसार करने के लिए आंतकियों को प्रशिक्षण हमारे पड़ोसी देशों में मिल रहा है। पाकिस्तान समर्थित आतंकवादी हमलों के कारण राज्य लंबे समय तक ‘युद्ध‘ जैसी स्थिति से जुझता रहा है।
जम्मू-कश्मीर में हिंसा विभिन्न रूपों में होती रही है। आंतकी एवं अलगाववादी गतिविधियों में 1989 के बाद से हजारों लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। इनमें नागरिक, भारतीय सुरक्षा सेवा के कमी तथा कश्मीरी और गैर कश्मीरी उग्रवादी शामिल हैं। 1980 के दशक के अंत से राज्य में उग्रवादी हिंसा में तेजी आई। इसका कारण पाकिस्तान से आए-मुजाहिदीन थे, जो सोवियत-अफगान युद्ध समाप्त होने के बाद पाकिस्तान के समर्थन से घार्टी में घुस आएँ। इनके आते ही हिंसा की घटनाओं में वृद्धि हो गई।
लेकिन सभी विद्रोही संगठन एक ही विचारधारा के अनुगामी नहीं हैं। कुछ धर्म के नाम पर ‘जेहाद‘ कर रहे हैं। तो कुछ पाकिस्तान में विलय के पक्ष में हैं और कुछ संगठन स्वतंत्र कश्मीर की बात करते हैं। अनेक राष्ट्र विरोधी संगठनों की आतंकी गतिविधियों के चलते भारत वहाँ अपनी सेना का बड़ा हिस्सा तैनात करने को विवश है।
जम्मू-कश्मीर में अलगाववाद का सबसे बड़ा पोषक पाकिस्तान है। वह नहीं चाहता कि भारत आंतरिक रूप से स्थिर हो एवं विकास की राह पर आगे बढ़े। पाकिस्तान में उग्रवादियों के लिए बड़ी संख्या में प्रशिक्षण शिविर संचालित होते हैं। कश्मीर मुद्दे का राष्ट्रीयकरण करने के लिए पाकिस्तान समय-समय पर इसे संयुक्त राष्ट्र सहित अन्य अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर उठाता रहता है। पाकिस्तान 1990 से प्रत्येक वर्ष पाँच फरवरी को कश्मीर एकजुटता दिवस मनाता है और कश्मीर के मुद्दे को मानवाधिकारों के हनन का मामला बताता है। पाकिस्तान की गुप्तचर संस्था आई.एस.आई. का मुख्य उद्देश्य भारत की आंतरिक सुरक्षा को छिन्न-भिन्न करना है। पाकिस्तान समय-समय पर आतंकवादियों को प्रशिक्षण देकर भारत की सीमा में भेजता रहता है। इस तरह जम्मू-कश्मीर सीमा पार से प्रायोजित और समर्थित आतंकवाद और अलगाववादी हिंसा से लगभग दो दशकों से प्रभावित रहा है।
लेकिन इस चुनौतियों का सामना करने के लिए सुरक्षा एजेंसियाँ समन्वित तरीके से काम कर रही हैं। कश्मीर में सुरक्षा परिदृश्य के संदर्भ में चुनौतियों का मुकाबला करने के लिए काम कर रही विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के बीच अच्छा तालमेल है। यही कारण है कि सीमा पार से घुसपैठ की संख्या में भी कमी आई है। जम्मू-कश्मीर में उग्रवाद शुरू होने से लेकर अब तक 1386 सिविलियन और 2.822 सुरक्षा बलों के कार्मिक मारे गए हैं (दिनांक 31.12.2012 तक)। वर्ष 2005 से 2012 तक के आँकड़े नीचे की सरणी में दर्शाये गए हैंः

इस सारणी से पता चलता है कि वर्ष 2012 में विगत वर्ष की तुलना में आतंकवादी घटनाओं और हातहत हुए सिविलियनों तथा सुरक्षा बलों के कार्मिकों की संख्या में काफी गिरावट आई है। वर्ष 2011 की तुलना में वर्ष 2012 में आतंकवादी घटनाओं की संख्या में 35.29ः की गिरावट और हताहत हुए सिविलियनों तथा एस एफ कार्मिकों में क्रमशः 54.54ः और 51.61ः की गिरावट आई है। वर्ष के दौरान 72 आतंकवादी भी निष्क्रिय किए गए। वर्ष के दौरान कश्मीर घाटी किसी बड़ी कानून और व्यवस्थाध्सिविल अशांति से अपेक्षाकृत रूप से मुक्त रही। तथापि, कैलेण्डरं वर्ष 2012 के दौरान घुसपैठ के प्रयासों में वृद्धि दिखाई दी है, जो 2011 के दौरान घुसपैठ के 247 प्रयासों को तुलना में 264 है।
वर्ष 2005 से 2012 तक जम्मू-कश्मीर में सूचित किए गए घुसपैठ के प्रयास नीचे की सारणी में दिए गए हैं-
वर्ष 2005 2006 2007 2008 2009 2010 2011 अक्टूबर 2012
कुल 597 573 535 342 485 489 247 249

समस्या के समाधान के लिए सरकार द्वारा किये जा रहे प्रयास
(efforts by the Government to Solve the Problem)
केन्द्र सरकार ने राज्य सरकार के साथ मिलकर सीमा पार की घुसपैठ रोकने के लिए बहु-आयामी दृष्टिकोण अपनाया है जिसमें, अन्य बातों के साथ-साथ, अंतर्राष्ट्रीय सीमा नियंत्रण रेखा के साथ साथ तथा हर समय बदल रहे घुसपैठ के मार्गाें के निकट सीमा पं्रधन को सुदृढ़ बनाना और बहुस्तरीय तथा बहु-मॉडल की तैनाती करता सीमा पर बोर्ड का निर्माण, करना, सुरक्षा बलों के लिए उन्नत प्रौद्योगिकी, हथियार और उपस्कर का प्रावधान करना बेहतर आसूचना और परिचालनात्मक समन्वय और घुसपैठ रोकने के लिए आसूचना का सुचारु प्रवाह सुनिश्चित करना तथा राज्य के अंदर आतंकवादियों के विरुद्ध कारवाई करना शामिल है।
राज्य को शांति में बाधा डालने के लिए उग्रवादियों के प्रयासों और क्षमताओं को निष्क्रिय करने हेतु सरकार ने आतंकवादियों के विरुद्ध विभिन्न रणनीतियाँ अपनाई है। सरकार ने युवाओं को मुख्य धारा में लाने की नीतियों को भी बढ़ावा दिया है और उग्रवाद में शामिल होने से स्थानीय युवाओं को हतोत्साहित किया है।
जम्मू-कश्मीर को सुरक्षा की स्थिति पर वहाँ के मुख्य मंत्री द्वारा एकीकृत/कमान में राज्य सरकार, सेना, केन्द्रीय संशस्त्र पुलिस बलों और अन्य सुरक्षा एजेंसियों के वरिष्ठ प्रतिनिधियों के साथ निगरानी रखी जाती है और समीक्षा की जाती है। गृह मंत्रालय भी राज्य सरकार और रक्षा मंत्रालय के साथ मिलकर सुरक्षा से संबंधित स्थिति की गहन और लगातार मानीटरिंग करता है।
सरकार का निम्नलिखित प्रयास रहा है-
पण् सीमा पार से आतंकवादियों की घुसपैठ कम करने के लिए सुरक्षा बलों द्वारा तुरंत उचित उपाय करना, और उन आतंक वादियांे की पहचान करना, पता लगाना और गिरफ्तार करना जो सीमा पार करे और उनके स्थानीय साथियों के विरुद्ध भी यही कार्रवाई करना।
पपण् यह सुनिश्चित करना किं प्रजातांत्रिक प्रक्रिया अपनाई जाए और राज्य में उग्रवाद के प्रभावों के कारण लोगों के सामने आ रही सामाजिक-आर्थिक समस्या को प्रभावी ढा से निपटाने के लिए सिविल प्रशासन की बहाली को प्राथमिकता दी जाए।
पपपण् स्थाई शांति सुनिश्चित की जाए और राज्य में सभी वर्गों को पर्याप्त अवसर प्रदान करना और उन्हें प्रभावी ढंग से अपने विचार प्रकट करने का अवसर प्रदान करना तथा उनकी वास्तविक शिकायतों को दूर करना।
राज्य सरकार की सहायता करने के लिए केंद्र सरकार यथा आवश्यक केन्द्रीय सशस्त्र पुलिस बल उपलब्ध करा रही है और राज्य पुलिस को सुदृढ़ बनाने में भी सहायता कर रही है। भारत सरकार, सुरक्षा से संबंधित विभिन्न उपायों पर राज्य सरकार द्वारा किए जा रहे व्यय को भी प्रतिपूर्ति करती है। इनमें सिपाहियों को लाने-ले-जाने में हो रहे व्यय, सामग्री की आपूर्ति, आवास का किराया, विशेष पुलिस अधिकारियों को मानदेय, कार्रवाई कार्यक्रम, एअर-लिफ्ट प्रभाव, इंडिया रिजर्व बटालियन गठित करने की लागत, परिवहन, ठहरने और खान-पान का व्यय, सुरक्षा बलों के लिए वैकल्पिक आवास आदि शामिल हैं। सुरक्षा से संबंधित व्यय (पुलिस) ख्एस आर ई (पी), के तहत प्रतिपूर्ति की गई कुल राशि (वर्ष 1989 से दिनांक 28.02.2012 तक) 4.187.87 करोड़ रुपए है। चालू वित्त वर्ष के दौरान जम्मू-कश्मीर सरकार को फरवरी, 2013 तक एस आर ई (पी) के तहत 249.95 करोड़ रुपए की राशि की प्रतिपूर्ति की जा चुकी है।

जम्मू-कश्मीर को केन्द्रीय सहायता (Central Assistance to Jammu & Kashmir)
केन्द्र सरकार, चहुँमुखी आर्थिक विकास करने के राज्य सरकार के प्रयासों और लोगों को लाभप्रद रोजगार के अवसर प्रदान करने में राज्य सरकार का निरंतर रूप से समर्थन और सहायता करती रही है जिसमें नियोजित और संतुलित क्षेत्रीय विकास पर ध्यान दिया जाता है। भौतिक, आर्थिक और सामाजिक अवसंरचना के निर्माण को प्राथमिकता दी जाती है जिसके द्वारा राज्य के लोगों की जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाने के अलावा संभावित उत्पादकता में सुधार किया जाता है।

जम्मू-कश्मीर के लिए प्रधानमंत्री की पुनर्निर्माण योजना (पी एम आर पी)-2004
(Prime Minister Reconstruction Plan for J&K (PMRP) – 2004
प्रधानमंत्री ने 17.11.2004 और 18.11.2004 के जम्मू-कश्मीर के अपने दौर के दौरान, लगभग 24,000 करोड़ रुपए के परिव्यय से जम्मू-कश्मीर के लिए एक ऐसी पुननिर्माण योजना की घोषणा की जिसमें मोटे तौर पर वे परियोजनाएँ/स्कीमें शामिल है जिनका उद्ेदश्य रोजगार और आय सृजन के कार्यकलापों पर जोर देते हुए आर्थिक आधारभूत संरचना का विस्तार करना और बुनियादी सेवाओं का प्रावधान करना तथा जम्मू-कश्मीर में उग्रवाद से प्रभावित विभिन्न ग्रुपों को राहत और पुनर्वास प्रदान करना है। प्रधानमंत्री को पुननिर्माण योजना में शामिल सभी स्कीमों की वर्तमान अनुमानित लागत 32,009 करोड़ रुपए है।
पुननिर्माण योजना-2004 में परिकल्पित परियोजनाओं/स्कीमों का कार्यान्वयन संबंधित प्रशासनिक मंत्रालयों द्वारा राज्य सरकार के साथ परामर्श करके किया जाता है। पी एम आर पी की 67 परियोजनाओं/स्कीमों के कार्यान्वयन की प्रगति पर, जिसमें 19 मंत्रालय शामिल हैं। गृह मंत्रालय और योजना आयोग द्वारा नियमित रूप से निगरानी रखी जा रही है। उक्त 67 परियोजनाओं/स्कीमों में से 33 परियोजनाएँ/स्कीमें पूरी हो चुकी हैं। शेष 34 परियोजनाओं/स्कीमों में से 29 परियोजनाएँ कार्यान्वयन के विभिन्न चरणों में हैं और बाकी 3 परियोजनाएं तैयारी की अवस्था में है और 2 परियोजनाएं संबंधित मंत्रालयों के कार्यक्रमों में शामिल कर ली गई हैं।
कुछ बड़ी परियोजनाएँ और. उनकी प्रगति की वर्तमान स्थिति निम्नलिखित सारणी में दी गई है-

जम्मू-कश्मीर के लिए विशेष उद्योग की पहल
(Special Industry Initiative for J&K)
प्रधान मंत्री को आर्थिक सलाहकार परिषद के अध्यक्ष डॉ. सी रंगराजन की अध्यक्षता में गठित विशेषज्ञ ग्रुप को जम्मू-कश्मीर राज्य के लिए जॉब प्लान तैयार करने का कार्य सौंपा गया था और उसने जम्मू-कश्मीर के लिए विशेष उद्योग की पहल की योजना की सिफारिश की है। इस योजना के द्वारा पाँच वर्ष की अवधि में 12वीं पंचवर्षीय योजना के दौरान अधिक वृद्धि वाले महत्त्वपूर्ण क्षेत्रों में प्रतिवर्ष जम्मू-कश्मीर में 8000 स्नातकों और अन्य शिक्षित युवकों को कौशल प्रदान करना और रोजगार के अवसरों में वृद्धि किया जाना है। कार्यक्रम में प्रशिक्षित मानव शक्ति को अच्छे वेतन वाले रोजगार प्रदान किए जाने का लक्ष्य रखा गया है। इस योजना का कार्यान्वयन, राष्ट्रीय कौशल विकास निगम (एन एस डी सी) और कारपोरेट क्षेत्र द्वारा पब्लिक प्राइवेट भागीदारी पद्धति पर किया जा रहा है।
उम्मीदवारों को प्रशिक्षित करने के लिए 27 कम्पनियों के प्रस्ताव अनुमोदित किए गए हैं। 1169 उम्मीदवार पहले से ही 11 कम्पनियों के साथ ‘उड़ान‘ योजना के विभिन्न चरणों में हैं। लगभग 8810 विद्यार्थियों ने एनएसडीसी की “उड़ान” वेबसाइट पर अपना पंजीकरण कराया है।

जम्मू और लद्दाख क्षेत्रों के लिए विशेष कार्यबल
(Special Task Force for Jammu and Laddakh Regions)
जम्मू और लद्दाख क्षेत्रों की विकासात्मक जरुरतों को पूरा करने के उद्देश्य से, जिसमें अवसंरचना की कमियों और उचित सिफारिशें करने का विशेष संदर्भ निहित है, जम्मू और लद्दाख क्षेत्रों के लिए क्रमशः योजना आयोग के सदस्य डॉ. अभिजीत सेन और डॉ. नरेन्द्र जाधव की अध्यक्षता में दो विशेष कार्य बलों (एसटीएफ) का गठन किया गया था। जम्मू और लद्दाख क्षेत्रों में 24 माह की समयावधि में तत्काल कार्यान्वित किए जाने के लिए क्रमशः 497 करोड़ रुपए और 416 करोड़ रुपए की कुल लागत की अल्पावधिक परियोजनाओं को सिफारिश की गई है। योजना आयोग ने दिनांक 13/07/2012 को हुई अपनी बैठक में वर्ष 2012-13 के लिए राज्य योजना में जम्मू के लिए 150 करोड़ रुपए और लेह के लिए 50 करोड़ रुपए तथा कारगिल प्राथमिकता प्राप्त परियोजनाओं के लिए 50 करोड रुपएं और स्थाई जीर्णोद्धार कार्यो के लिए 50 करोड़ रुपए का आवंटन का अनुमोदन किया है। अधिकांश परियोजनाओं में कार्य शुरू हो चुकी है।

कश्मीरी प्रवासियों को राहत और पुनर्वास
(Relief and Rehabilitations of kashmiri Migrants)
जम्मू-कश्मीर में आतंकवादी हिंसा/उग्रवाद की वजह से विशेषकर इसके पहले दौर में घाटी से कश्मीरी पंडितों का बड़े पैमाने पर जम्मू, दिल्ली और देश के अन्य भागों में प्रवास हुआ। वित्तीय सहायता/राहत तथा अन्य पहलों के माध्यम से विगत वर्षों से कई उपाय किए गए हैं ताकि एक वृहत् नीतिगत ढाँचे के अन्तर्गत-प्रभावित परिवारों को इस आधार पर सहायता एवं मदद दी जा सके कि जो लगे प्रवास कर गए हैं, वे आखिरकार घाटी में लौट आएंगे।
कुल 59,442 कश्मीरी प्रवासी परिवार हैं, जो जम्मू (38119), दिल्ली (19338) और अन्य राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों (1985) में हैं। राज्य सरकार, जम्मू क्षेत्र में रह रहे 17248 पात्र परिवारों को अधिकतम 6600 रुपए प्रति परिवार प्रतिमाह की सीमा तक प्रति व्यक्ति 1650 रुपए की नगद राहत और सूखा राशन प्रदान कर रही है। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार भी 3385 पात्र परिवारों को 6600 रुपए प्रति परिवार प्रतिमाह की सीमा तक प्रति व्यक्ति, 1650 रुपए की नगद राहत दे रही है। अन्य राज्य सरकारें/संघ राज्य क्षेत्र प्रशासन भी अपने राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों में रह रहे कश्मीरी प्रवासियों को उनके द्वारा निर्धारित किए गए मानदण्डों के अनुरूप प्रवासियों को राहत प्रदान कर रहे हैं।
सरकार ने इन प्रवासी परिवारों को पक्का आश्रय प्रदान करने के लिए उपाय किए हैं। प्रधान मंत्री की घोषणा और अंतर-मंत्रालयी टीम (आई एम टी) को सिफारिशों के अनुसरण में, जम्मू में इस समय शिविरों में रह रहे सभी प्रवासी परिवारों को खपाने के लिए 385 करोड़ रुपए के व्यय से दो कमरे वाले 5242 मकानों का निर्माण किया गया है।
कश्मीरी प्रवासियों की वापसी को आसान बनाने के लिए केन्द्र सरकार ने 22.90 करोड़ रुपए की लागत से प्रयोगात्मक आधार पर बडगम जिले में शेखपुरा में 200 फ्लैटों के निर्माण की स्वीकृति प्रदान की। फ्लैटों का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। मट्टन अनंतनाग में 18 और फ्लैटों का निर्माण पूरा हो चुका है। इन फ्लैटों का आबंटन साझा आधार पर उन प्रवासियों को किया गया है। जिनकी नियुक्ति पी एम पैकेज के रोजगार संघटक के तहत की गई है।

कश्मीरी प्रवासियों के लिए प्रधान मंत्री का पैकेज-2008
(PM’s Package for Kashmiri Migrants – 2008)
प्रधान मंत्री ने दिनांक 25.04.2008 को जम्मू-कश्मीर के अपने दौरे के दौरान, अन्य तथ्यों के साथ-साथ, घाटी में कश्मीर प्रवासियों की वापसी एवं पुनर्वास के लिए 1618.40 करोड़ रुपए के पैकेज की घोषणा की। इस पैकेज मे आवास, अस्थाई निवास, नगद राहत की निरन्तरता , छात्रों के लिए छात्रवृत्तियाँ, रोजगार, कृषकों/बागवानी करने वालों को सहायता तथा ऋणों पर ब्याज की माफी के लिए सहायता का प्रावधान शामिल है।
राज्य सरकार ने पैकेज के प्रभावी कार्यान्वयन की देखरेख करने के लिए जम्मू-कश्मीर के वित्त मंत्री की अध्यक्षता में सितम्बर, 2009 में एक शीर्ष सलाहकार समिति का गठन किया है। राज्य सरकार ने कश्मीर के प्रवासी बेरोजगार युवाओं के लिए 3000 अतिरिक्त पदों का सृजन किया है। भर्ती नियम भी अधिसूचित कर दिए गए हैं। अब तक 2184 प्रवासियों को नियुक्ति पत्र जारी किए जा चुके हैं जिनमें से 1446 उम्मीदवारों ने घाटी में पदों का कार्यभार ग्रहण कर लिया है। तथापि, यथा स्थिति बनाए रखने के उच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुसार प्रक्रिया रोक दी गई है।
कश्मीरी पंडितों को अस्थाई आवास प्रदान करने के संघटकं के तहत 505 यूनिटों का निर्माण शुरू किया गया है। 405 यूनिटों का निर्माण पूरा हो चुका है। शेष यूनिटों का निर्माण भी शीघ्र पूरा होने की आशा है। पूरी हुई यूनिटों का आवंटन साझा आधार पर उन कश्मीरी प्रवासियों को किया गया है जो रोजगार संघटक के तहत घाटी में आ गए हैं। भारत सरकार ने वित्तीय वर्ष 2011-12 के दौरान राहत और पुनर्वास व्यय के लिए 106.62 करोड़ रुपए की प्रतिपूर्ति की है।
उग्रवाद से पीड़ित लोगों को मनौवैज्ञानिक सहायता और आर्थिक पुनर्वास प्रदान करने के उद्देश्य से जम्मू-कश्मीर राज्य सरकार उग्रवाद से पीड़ित विधवाओं, अनाथों, विकलांग व्यक्तियों और वृद्ध लोगों के पुनर्वास के लिए वर्ष 1995 में एक परिषद का गठन किया था। इस परिषद का पंजीकरण जाम करमौर में विधवा अनाथ विकलांग और वृद्ध व्यक्तियों (उग्रवाद के पीड़ित) की ‘पुनर्वास परिषद‘ के नाम से सोसाइटी पंजीकरण अधिनियम के तहत सोसाइटी कला को किया गया है। भारत सरकार भी समय-समय पर कारपस/अनूदान के रूप में जम्मू-कश्मीर में पुनर्वास परिषद का सहायता प्रदान करता रहा है।
सरकार से प्राप्त सूचना के अनुसार वर्ष 2012-13 के दौरान जम्मू-कश्मीर पुनर्वास परिषद को योजनाओं के तहत 3,660 विधवाओं, 2,098 अनाथो, 2,400 वृद्ध व्यक्तियों और 997, शारीरिक रूप से विकलांग व्यक्तियों को शामिल किया गया है।