विद्युत चुंबकीय विकिरण , ऊर्जा संरक्षण का नियम law of energy conservation

By   January 12, 2018

विद्युत चुंबकीय विकिरणों की विशेषताएं :

1. इनका वेग प्रकाश के वेग के बराबर होता है।

2. ये निर्वात में भी गमन कर सकती है।

3. इनके सापेक्ष चुंबकीय क्षेत्र व विद्युत क्षेत्र एक दूसरे के लंबवत होते है तथा ये क्षेत्र तरंग संचरण की दिशा के भी लंबवत होते है।

नोट : विद्युत चुंबकीय विकिरण निम्न है

Y किरणे

X किरणे

U , V

दृश्य क्षेत्र

IR

micro

radio wave

ऊपर से निचे आवृत्ति बढ़ती है।

निचे से ऊपर जाने पर λ अधिक हो जाता है।

प्रोटॉन या क्वांटा किसे कहते है ?

ऊर्जा के छोटे छोटे बण्डल को प्रोटोन या क्वान्टा कहते है।

प्रोटॉन की ऊर्जा प्लांक समीकरण से ज्ञात की जाती है

E = HV

यहाँ h = प्लांक नियतांक 6.626 x 10-34 J sec

प्रकाश विद्युत प्रभाव : जब किसी धातु की सतह पर उपयुक्त आवृत्ति वाला प्रकाश डाला जाता है तो धातु की सतह से इलेक्ट्रॉन बाहर निकल जाते है इसे प्रकाश विद्युत प्रभाव कहते है।

नोट : निम्न धातुये प्रकाश विधुत प्रभाव प्रदर्शित करती है Rb , Cs , K

इस प्रभाव के मुख्य बिंदु निम्न है।

1. आपतित प्रकाश की तीव्रता जितनी अधिक होती है उतने ही अधिक इलेक्ट्रॉन बाहर निकलते है।

2. उपयुक्त आवृति का प्रकाश डालने पर इलेक्ट्रॉन तुरंत निकल जाते है।

3. इलेक्ट्रॉन को बाहर निकालने के लिए न्यूनतम आवृत्ति वाले प्रकाश का होना आवश्यक है इस न्यूनतम आवृति को देहली आवृत्ति कहते है।

ऊर्जा संरक्षण का नियम (law of energy conservation):

आपतित प्रकाश ऊर्जा = इलेक्ट्रॉन की देहली ऊर्जा + इलेक्ट्रॉन की गतिज ऊर्जा

note : धातु की सतह से इलेक्ट्रॉन बाहर निकालने के लिए निश्चित न्यूनतम ऊर्जा की आवश्यकता होती है इस ऊर्जा को देहली ऊर्जा या कार्य फलन कहते है।

One Comment on “विद्युत चुंबकीय विकिरण , ऊर्जा संरक्षण का नियम law of energy conservation

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