विश्व कवि किसे कहते हैं who is world poet in hindi काबुलीवाला का लेखक कौन हैं who is writer of kabuliwala in hindi

By   August 15, 2021

who is writer of kabuliwala in hindi विश्व कवि किसे कहते हैं who is world poet in hindi काबुलीवाला का लेखक कौन हैं ?

हफीज कॉन्ट्रैक्टर
वह बॉम्बे धरोहर समिति की मुख्य हस्तियों में से एक हैं और प्रभावशाली तथा वास्तुकला के क्षेत्र में वे मौलिकता से कहीं ऊपर हैं। वे संरक्षणवाद विरोधी रहे हैं और उनका मानना है कि ‘हरित‘ भवन भारत में स्थान की कमी का समाधान नहीं हैं। वे गगनचुंबी भवनों में विश्वास रखते हैं और इंपीरियल प्रथम और द्वितीय, जो भारत में सबसे ऊंचे भवन (मानव निर्मित) हैं, के वास्तुकार हैं। उनकी कुछ सबसे प्रभावशाली परियोजनाओं में मुंबई में डी.वाई. पाटिल स्टेडियम, जयपुर में मणिपाल यूनिवर्सिटी कैम्पस आदि सम्मिलित हैं।

साहित्य
रवीन्द्रनाथ टैगोर
रवीन्द्रनाथ टैगोर बुद्धिजीवियों की लंबी श्रृंखला से आते हैं। वह न केवल लेखक, बल्कि स्वतंत्रता सेनानी, चित्रकार, और प्रमुख बुद्धिजीवी भी थे। वे ‘गीतांजलि‘ नामक कविताओं के अपने संग्रह के लिए वर्ष 1913 में साहित्य का नोबेल पुरस्कार जीतने वाले कुछ भारतीयों में हैं। उन्होंने लगभग 12 उपन्यासों, 35 गीतों और कई लघु और दीर्घ कहानियों का लेखन किया था। इस उपलब्धि के कारण उन्हें ‘विश्व कवि‘ कहा जाता है।
उनकी कुछ सबसे बड़ी रचनाओं में ‘घरे बायरे‘, ‘काबुलीवाला‘, ‘गोरा‘ आदि सम्मिलित हैं। उन्होंने हमारे राष्ट्र गान ‘जन गण मन‘ का भी लेखन किया है। उन्हें ब्रिटिश सरकार से कई पुरस्कार मिले थे, उदाहरण के लिए, उन्होंने उन्हें ‘सर‘ (Kinght) की उपाधि दी गई थी। लेकिन जलियाँवाला बाग नरसंहार के बाद उन्होंने अपनी नाइट की पदवी लौटा दी। उन्की अधिकांश रचनाएं 12 से भी अधिक विदेशी भाषाओं में अनुवादित की गई हैं।

अमिताव घोष
वह कुशल कथाकार हैं। उन्होंने अंग्रेजी और बंगाली में कई पुस्तकें लिखी हैं। उन्होंने अपनी रचनाओं में शिक्षाविदों, अंग्रेजी, इतिहास और भाषा विज्ञान का संयोजन किया है। उन्हें ‘द शैडो लाइन्स‘, ‘द कलकत्ता क्रोमोजोम‘ और अफीम के व्यापार के संबंध में उनकी हाल ही की ‘आईबिस ट्राईलॉजी‘ के लिए सम्मानित किया गया है। उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार जैसे कई पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है। उनकी पुस्तक सी ऑफ पॉप्पीज को प्रतिष्ठित मैन बुकर पुरस्कार के लिए चुना गया था।

चेतन भगत
हो सकता है कि साहित्यिक आलोचक उन्हें स्वीकार न करें, लेकिन चेतन भगत वर्तमान समय में अंग्रेजी में सबसे लोकप्रिय लेखक हैं। वह समानतः अपने जीवन की घटनाओं पर आधारित नाटकीय उपन्यास लिखते हैं। वे आईआईटी दिल्ली से स्नातक और आईआईएम अहमदाबाद से एमबीए हैं। इस बात ने दो प्रमुख उपन्यासों में बड़ी भूमिका निभाई है जिसपर आगे चलकर फाइव प्वाइंट समवन और टू स्टेट्स फिल्में बनाई गईं। उन्होंने अंग्रेजी समाचार-पत्रों में कई स्तम्भ भी लिखे हैं जो आम जनता में लोकप्रिय प्रतीत होते हैं।
अरुंधति रॉय
अरुंधति रॉय वर्ष 1997 में अपनी पुस्तक ‘गॉड ऑफ स्मॉल थिंग्स‘ के लिए मैन बुकर पुरस्कार जीतने वाली पहली भारतीय हैं। वे सामाजिक कार्यकर्ता रहीं हैं और बड़ी बांध परियोजनाओं का खुलकर विरोध करती रहीं हैं जिन्होंने नर्मदा बांध परियोजना की भांति कई लाख गरीब किसानों को विस्थापित किया है। वह परमाणु लामबंदी के विरूद्ध विरोध करती रहीं हैं। उन्होंने इन मुद्दों के लिए अथक कार्य किया है और अपनी पुस्तक ‘अल्जेब्रा ऑफ इन्फिनिट जस्टिस‘ के लिए वर्ष 2006 में प्रतिष्ठित साहित्य अकादमी पुरस्कार‘ ठुकरा दिया।

सलमान रुश्दी
सलमान रुश्दी भारतीय साहित्यिक क्षेत्र से जुड़े सबसे विवादास्पद लेखकों में से एक हैं। उनकी कश्मीरी जड़ें हैं और कट्टरपंथी धार्मिक प्रवृत्तियों के विरूद्ध वह लिखते रहे हैं। उनकी कुछ सुविदित रचनाएं ‘मिडनाइट्स चिल्ड्रेन‘, ‘हारून एंड द सी ऑफ स्टोरीज‘ आदि हैं।
उन्होंने अपनी पुस्तक ‘द सैटेनिक वर्सेज‘ से विवादों का पिटारा खोल दिया, जिसने उनके विरूद्ध विरोध प्रदर्शनों का तांता लगा दिया और ईरानी नेता ‘अयातुल्ला खुमैनी‘ ने उन्हें मृत्यु दंड की सजा सुना दी। इस समय, वह ग्रेट ब्रिटेन में रह रहे हैं। रुश्दी की पुस्तक ‘मिडनाइट्स चिल्ड्रेन‘ को वर्ष 1993 में मैन बुकर पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

विक्रम सेठ
वह प्रसिद्ध लेखक बनने से पहले एक विद्वान और बौद्धिक व्यक्ति थे। उन्होंने ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में दर्शनशास्त्र, राजनीति और अर्थशास्त्र का अध्ययन किया था। उन्होंने लंबे समय तक लंदन में निवास किया फिर भी वे अधिकांशतः भारतीय मूल के लोगों के विषय में लिखते हैं। उनके उपन्यास ‘अ सुटेबल बॉय‘ ने डब्ल्यु.एच. स्मिथ पुरस्कार जीता है। वे इतने लोकप्रिय हैं कि वर्ष 2001 में महारानी एलिजाबेथ द्वितीय ने उन्हें कमांडर ऑफ दी आर्डर-प्प्प् से सम्मानित किया।

खुशवंत सिंह
वे अपनी पीढ़ी के सबसे प्रिय और व्यंग्यात्मक लेखकों में से एक थे। उनका जन्म लाहौर में हुआ था और विभाजन के बाद उनका परिवार दिल्ली आ गया था। इस घटना ने असंख्य प्रकार से उनके जीवन को आकार दिया और उनकी दो सबसे प्रसिद्ध रचनाओं के आधार का गठन कियाः ‘द टेन ट द पाकिस्तान‘ और ‘टोबा टेक सिंह‘। वह एक सक्रिय सामाजिक टीकाकार भी थे और राज्य सभा के सदस्य भी रहे थे।
वर्ष 1974 में उन्हें पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था लेकिन जघन्य ऑपरेशन ब्लूस्टार, जिससे कई सिखों का नरसंहार हुआ, उन्होंने अपना पुरस्कार लौटा दिया। वर्ष 2007 में भारत सरकार ने पद्म विभूषण से सम्मानित किया। उनकी आत्मकथा ‘सत्य, प्रेम और थोड़ा-सा द्वेष‘ सबसे अधिक स्पष्टवादी आत्मकथाओं में से एक है।

आर.के. नारायण
वे अंग्रेजी साहित्य के सबसे प्रसिद्ध लेखकों में से एक हैं और ‘मालगुडी डेज‘ के रचनाकार के रूप में हमारे संपूर्ण बचपन में अमर हो गए हैं। उन्हें ‘स्वामी एंड हिज फ्रेंडस‘ के लिए भी जाना जाता है जिस पर टेलीविजन सीरियल भी बनाया गया है, जो बहुत लोकप्रिय रहा था और उन्हें घर-घर में पहचाना जाने वाला नाम बना दिया।
उन्हें उनके उपन्यास ‘द गाइड‘ जिस पर देव आनंद की सफल फिल्म भी बनाई गई थी, के लिए भारतीय साहित्य अकादमी के राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया। उन्हें वर्ष 2000 में पद्म विभूषण से भी सम्मानित किया था। उन्हें दिल्ली, लीड्स और मैसूर विश्वविद्यालय द्वारा डॉक्टरेट की मानद उपाधि भी दी गई

प्रेमचंद
प्रेमचंद हिंदी और उर्दू में सबसे अच्छे नाटककारों में से एक थे। हिन्दी भाषा पर उनके अधिकार के लिए उन्हें ‘मुंशी‘ की मानद उपाधि दी गई थी। उन्होंने लघु कथाओं और नाटकों और कई निबंधों का लेखन किया था। वे स्वतंत्रता संग्राम से अत्यधिक प्रभावित थे और इसने उनकी रचनाओं को भी प्रभावित किया। उन्होंने जाति समस्या के विषय में भी लिखा। उनकी सर्वोत्कृष्ट रचनाओं में वरदान, सेवा सदन, गोदान, गबन आदि सम्मिलित हैं। उनके नाटक ‘शतरंज के खिलाड़ी‘ का बार-बार मंचन किया गया है। वे इतने बहुश्रुत हैं कि ‘मुंशी प्रेमचंद पुरस्कार‘ उनके नाम पर स्थापित किया गया है।

हरिवंशराय बच्चन
वे नई कविता साहित्यिक आंदोलन की उपज थे, जो हिंदी साहित्यिक वृत्त में एक रोमांटिक लहर लाया था। वे न केवल प्रतिभाशाली कवि थे बल्कि एक अच्छे शिक्षक भी थे। वे अपनी ‘मधुशाला‘ के लिए प्रसिद्ध हैं, जिसे मन्ना डे द्वारा संगीतात्मक संस्करण में रिकार्ड किया गया है। भारत सरकार ने उन्हें पद्म भूषण और साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया।

अनीता देसाई
अनीता देसाई भारत की सबसे प्रसिद्ध महिला उपन्यासकारों में से एक है। उन्होंने लगभग तीन दशकों तक प्रसिद्ध मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नालॉजी (एमआईटी) में रचनात्मक लेखन का अध्यापन किया। उनकी सबसे प्रसिद्ध रचनाओं में फायर ऑन द माऊंटेन, जिसके लिए उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला सम्मिलित है। वह उन बहुत कम भारतीयों में है जिनकी रचना का प्रतिष्ठित मैन बुकर पुरस्कार के लिए चयन किया गया है। उनकी तीन पुस्तकों क्लियर लाइट ऑफ द डे, इन कस्टधडी एंड फीस्टिंग, फास्टिंग को बुकर पुरस्कार के लिए नामांकित किया गया था। वर्ष 2014 में उन्हें भारत सरकार की ओर से पद्म भूषण मिला ।
रस्किन बॉण्ड
वह भारत में बच्चों की पुस्तकों के सबसे अधिक प्रिय लेखकों में से एक है। उन्होंने प्रकृति और जानवरों के विषय में कई पुस्तकें लिखी हैं। वह सुविदित संरक्षणवादी भी हैं। उनकी पुस्तक ‘अवर ट्रीज स्टिल ग्रो इन देहरा‘ को साहित्य अकादमी पुरस्कार दिया गया है।
उन्होंने हमेशा हिमालय की तलहटी के विषय में उपन्यास लिखा है। उन्होंने वैग्रेटस इन द वैली, फनी साइड अप, द लैम्प इज लिट जैसे कई सफल उपन्यासों का लेखन किया है। द ब्लू अम्ब्रेला और ए फ्लाइट ऑफ पीजियन जैसी उनकी कुछ पुस्तकों पर फिल्म और नाटक बनाए गए हैं। उन्हें क्रमशः वर्ष 1999 और 2014 में पद्म श्री और पद्म भूषण से सम्मानित किया गया। वे अभी भी लण्डोर, उत्तराखंड में प्रकृति के निकट रहते हैं।

झुपा लाहिड़ी
झुंपा लाहिड़ी बंगाल में जन्मी भारतीय-अमेरिकी लेखक हैं। ‘दी इन्टरप्रेटर ऑफ मैलॉडीज‘ शीर्षक से उनकी प्रथम रचना जो लघु कहानियों का संग्रह थी, को पुलित्जर प्राइज ऑफ फिक्शन से सम्मामनित किया था। यह बहुत ही प्रतिष्ठित सम्मान है और बहुत ही कम भारतीयों को दिया गया है। उनके पहले पूर्ण विकसित उपन्यास द नेमसेक ने उनके लिए कई पुरस्कार और सम्मान जीते। मीरा नायर ने इस पर एक फिल्म भी बनाई है। उनकी नवीनतम रचना ‘द लोलैण्ड‘ को प्रतिष्ठित मैन बुकर पुरस्कार के लिए नामांकित किया गया था। इसे साहित्य अकादमी द्वारा नेशनल बुक अवार्ड फॉर फिक्शन से सम्मानित किया गया था।

महादेवी वर्मा
वह भारत की सबसे प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानियों और कवयित्रीयों में से एक थीं। वह महिलाओं के मुक्ति आंदोलन और उनकी शिक्षा के क्षेत्र में अपनी रुचि के लिए भी सुविदित थीं। उन्हें ‘आधुनिक मीरा‘ के रूप में प्रस्तुत किया जाता है। छायावादी युग या हिंदी रोमांटिकवादी आंदोलन में भी उनकी प्रमुख भूमिका थी। उनकी कुछ प्रसिद्ध रचनाओं में नीहार, संध्यागीत, दीपशिखा, नीरजा आदि सम्मिलित हैं। आजीवन उपलब्धि के लिए उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार और फैलोशिप से सम्मानित किया गया था। भारत सरकार ने भी उन्हें साहित्यिक उत्कृष्टता के लिए ज्ञानपीठ पुरस्कार वर्ष 1988 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया था।

हजारी प्रसाद द्विवेदी
वह हिंदी साहित्य के सबसे बड़े साहित्यिक जवाहरातों में से एक थे। वह उपन्यासकार, निबंधकार, आलोचक के साथ ही इतिहासकार थे। उन्होंने न केवल हिंदी के काल्पनिक रिपर्टायर (त्मचमतजवपेम) में योगदान दिया बल्कि, नाथ सम्प्रदाय, कबीर, आदि जैसे भारत के मध्ययुगीन धार्मिक आंदोलनों पर भी ऐतिहासिक ग्रंथ लिखे हैं।
उन्होंने संस्कृत, बंगाली, गुजराती, प्राकृत और पंजाबी में भी लिखा है। उनकी कुछ सबसे प्रतिष्ठित रचनाओं में साहित्य की भूमिका, बाणभट्ट की आत्मकथा, अनामदास का पोथा, चारु चन्द्र-लेखा आदि सम्मिलित हैं। वह महान शिक्षाशास्त्री थे और उनकी पुस्तक कल्पलता (शिरीष के फूल और अन्य निबंध) एनसीईआरटी की हिंदी की 12वीं कक्षा के छात्रों के लिए हिंदी की पुस्तक बन गई है। उन्हें वर्ष 1957 में पद्म भूषण और वर्ष 1973 में साहित्य अकादमी पुरस्कार जैसे कई पुरस्कारों से सम्मानित किया गया।