सिख धर्म की स्थापना किसने की थी , सिख धर्म के संस्थापक गुरु कौन थे who is the founder of the sikh religion in hindi

By   September 10, 2021

who is the founder of the sikh religion in hindi सिख धर्म की स्थापना किसने की थी , सिख धर्म के संस्थापक गुरु कौन थे ?

सिख धर्म
उत्तर भारत में भक्ति आंदोलन की धारा में गुरु नानक का नाम ऐसा है, जिसे बहुत ही श्रद्धा के साथ लिया जाता है। इनका समय 1469-1538 माना गया है। ऐसा माना जाता है कि इन्होंने ही सिख धर्म की स्थापना की। ‘सिख’ शब्द संस्कृत के ‘शिष्य’ से लिया गया है।
गुरु नानक ने हिंदू-मुस्लिम एकता पर बल देते हुएऐसे मत का प्रवर्तन किया, जिसमें दोनों की समर्पण भावना झलकती है। उन्होंने ईश्वर को निराकार माना। वे मूर्ति पूजा के खिलाफ थे। उन्होंने अंधविश्वासों का जमकर विरोध किया, चाहे वे हिंदुओं के हों या मुसलमानों के। उन्होंने यह बताने का प्रयास किया कि सच्चे धार्मिक मूल्य क्या हैं। गुरु नानक ने जगह-जगह घूमकर अंधविश्वासों से बचने व उस सच्चे निरंकार के प्रति समर्पित होने का संदेश दिया। उन्होंने अपनी कविताओं व गीतों के माध्यम से भाईचारा, सहिष्णुता, प्रेम एवं भक्ति का प्रकाश फैलाया। उनके विचारों, गीतों व कविताओं का संकलन ही ‘आदि ग्रंथ’ कहलाया।
गुरु नानक ने हिंदुओं के आत्मा के अमरत्व के सिद्धांत को माना, पुगर्जन्म एवं कर्म पर भी सहमति जताई। किंतु उन्होंने ईश्वर को एक माना। उन्होंने जाति पांति को नकारा और मानव की समानता पर बल दिया। ‘गुरु का लंगर’ उनकी ही देन थी, जहां सब साथ बैठकर खाते थे।
गुरु नानक के बाद नौ गुरु हुए। दसवें और आखिरी गुरु गोविन्द सिंह थे। इनके बाद गुरु की परंपरा समाप्त हो गई। इन्होंने मुगलों के खिलाफ लड़ाका फौज तैयार की, जिसे ‘खालसा’ के नाम से जागा गया। पाहुल संस्कार के बाद ही कोई व्यक्ति खालसा में शामिल हो सकता था। इसमें शामिल पुरुष अपने नाम के आगे ‘सिंह’ और महिलाएं ‘कौर’ लगाने लगे। खालसा में जो भी शामिल होता था, उसे पांच ‘क’ धारण करने पड़ते थे केश, कंघा, कच्छा, कड़ा और कृपाण।
इस्लाम धर्म
अरबी मूल के शब्द ‘इस्लाम’ का अर्थ है, ‘आत्म-समर्पण’ और इसके प्रवर्तक थे हजरत मोहम्मद। उनका जन्म 570 ई. में अरब की कुरैश जाति में हुआ। इस्लाम की उत्पत्ति इसी अरब भूमि में हुई। 622 ई. में मोहम्मद आत्मरक्षार्थ मक्का से मदीना गए। उन्होंने सेना तैयार कर पूरे अरब पर अपना अधिकार जमा लिया। उन्होंने अरबवासियों को एकता के सूत्र में बांधा और उन्हें धार्मिक जोश व उन्माद से भर दिया। मोहम्मद ने दार्शनिकता की पेचीदगियों से बचते हुए एक सीधे-सादे धर्म को जन्म दिया। उनके अनुसार अल्लाह एक है और
मोहम्मद उसका पैगंबर है। इस धर्म को मानने वाले निम्नलिखित पांच बातों में मूल रूप से विश्वास करते हैं
(i) कलमा पढ़ना (कि अल्लाह एक है)
(ii) नमाज पढ़ना (पांच वक्त की)
(iii) रमजाग के महीने में रोजा रखना
(iv) जकात (अपनी आय का 2)ः दान देना)
(v) हज़ करना
मोहम्मद मूर्तिपूजा के सख्त विरोधी थे। उन्होंने अरब में प्रचलित आचार-विचारों का खंडन किया और खुदा के हुक्म को मानने को परम कर्तव्य बताया। इनका मक्का छोड़कर मदीना जागा ‘हिज़रत’ कहलाता है। यहीं से हिज़री सम्वत् प्रारंभ होता है। यथरिव में आकर वे रुक, इसीलिए उस नगर का नाम मदीनतुन्नबी (नबी का नगर) पड़ा। उनका धर्म अत्यंत सरल और सुलभ था। इस्लाम की लोकप्रियता बराबरी वाले सिद्धांत के कारण काफी बढ़ गई। प्रारंभ में इस्लाम एक क्रांतिकारी धर्म था। एक ओर इसने मनुष्य को अंधविश्वास से बचाया और दूसरी तरफ दार्शनिक उलझनों को दूर रखा।
भारत में यह धर्म नौवीं शताब्दी के समाप्त होने के पूर्व ही मालाबार के राजा चेरामन पेरूमल, जो मुसलमान हो गया था, की मेहरबानी से आया और उसे फैलाने का कार्य प्रारंभ हो गया।
इस्लाम में दो मत हैं शिया और सुन्नी। भारत में मुसलमानों की अधिकतम संख्या सुन्नियों की है। अपने आगमन के समय से लेकर वर्तमान काल तक इस्लाम लगभग हर क्षेत्र में भारतीय संस्कृति को प्रभावित करता रहा है। कला, संगीत, साहित्य, स्थापत्य कला के क्षेत्र में इस्लामी संस्कृति का व्यापक प्रभाव पड़ा। सूफी आंदोलन मध्य भारत के भक्ति आंदोलन और इस्लामी विचारों के संसग्र का ही प्रभाव था।