रेडियोऐक्टिव समस्थानिकों के उपयोग (uses of radioactive isotopes in hindi)

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(uses of radioactive isotopes in hindi) रेडियोऐक्टिव समस्थानिकों के उपयोग : यहाँ हम रेडियो एक्टिव समस्थानिकों के उपयोग का अध्ययन करेंगे।
ये निम्न है –

  • ग्रहों की आयु का पता लगाने में रेडियोऐक्टिव समस्थानिकों का उपयोग किया जाता है।
  • तेल या पानी की पाइपलाइन में कोई रिसाव हो रहा है या नहीं इस बात का पता लगाया जाता है।
  • ट्रेसर तकनीक में किसी पेड़ या सजीवों के शरीर में हो रही सभी प्रकार की जैव रासायनिक अभिक्रियाओं का अध्ययन किया जाता है या पता लगाया जाता है।
  • चिकित्सा के क्षेत्र में भी इसके कई उपयोग है जैसे रक्त की जांच करने के लिए क्रोमियम-51 का उपयोग किया जाता है।
  • यदि किसी व्यक्ति के मस्तिष्क या सर में कोई ट्यूमर है तो इसका पता लगाने के लिए रेडियो पारा-203 का इस्तेमाल किया जाता है।
  • थाइराइड ग्रंथि की कई प्रकार की खराबी का पता लगाने के लिए अर्थात इसकी जांच के लिए आयोडीन-131 काम में लिया जाता है।
  • कैंसर रोग होने पर व्यक्ति को कोबाल्ट की थैरपी या कोबाल्ट-60 की थैरपी दी जाती है , ताकि उसको कुछ राहत मिले।
  • रक्त की जांच और विभिन्न रक्त सम्बन्धी रोगों में , सोना-189 का प्रयोग किया जाता है।
  • चर्म रोग अर्थात त्वचा से सम्बंधित रोगों से निदान में फोस्फोरस-31 का उपयोग किया जाता है।
  • किसी खनन अर्थात खुदाई में जब कोई पुराने समय की पुरातत्व चीज मिलती है तो उसकी आयु का पता लगाने में अर्थात वह वस्तू या सभ्यता की चीज किस काल की या कितने साल पूरानी है , इस बात का पता लगाने के लिए कार्बन-14 का उपयोग किया जाता है।
  • पृथ्वी की आयु का अनुमान लगाने या ज्ञात करने के लिए सीसे का उपयोग किया जाता है।
  • उल्का पिंडो की आयु का पता लगाने के लिए K-40 का प्रयोग किया जाता है।
  • कृषि के क्षेत्र में भी इनका बहुत अधिक योगदान है जैसे आलू की खेती को कीड़ो से बचाने के लिए कोबाल्ट-60 का उपयोग किया जाता है।
  • जब कभी आवश्यक हो तो कृत्रिम वर्षा करवानी पड़ती है और कृत्रिम वर्षा करने के लिए AgI का उपयोग किया जाता है।
  • विभिन्न प्रकार की फसलों का उत्पादन बढाने के लिए कृषि भूमि में उर्वरक डाले जाते है और उर्वरक के रूप में भी इनका उपयोग किया जाता है , अधिकतर P-32 का उपयोग उर्वरक के रूप में होता है।

इनके अलावा भी रेडियोएक्टिव (रेडियोसक्रीय) पदार्थों के कई उपयोग है लेकिन आपके कोर्स के हिसाब से ऊपर दिए गए उपयोग काफी है अगर परीक्षा में ऐसा कोई प्रश्न आता है और आप इन सबके बारे में भी लिख देते है तो आपका उत्तर प्रयाप्त होगा अर्थात इतना लिखने के बाद आपको पूरे नंबर मिलने के चांस होते है।