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Categories: chemistry

एकक कोष्ठिका क्या है , परिभाषा , एकक कोष्ठिका किसे कहते है , इकाई कोष्ठिका (unit cell in hindi)

(unit cell in hindi) एकक कोष्ठिका क्या है , परिभाषा , एकक कोष्ठिका किसे कहते है , इकाई कोष्ठिका : किसी क्रिस्टल जालक का वह छोटे से छोटा भाग जिसकी पुनरावर्ती से सम्पूर्ण क्रिस्टल का निर्माण होता है एकक कोष्ठिका या इकाई सैल कहलाता है , अर्थात एकक कोष्ठिका किसी क्रिस्टल का सबसे छोटा भाग होता है या हम कह सकते है एकक कोष्ठिका किसी ठोस की आधारभूत और सबसे छोटा आयतन घेरने वाली संरचना होती है।
निचे एक क्रिस्टल जालक का चित्र दर्शाया गया है इसमें एकक कोष्ठिका को गहरे काले रंग द्वारा प्रदर्शित किया गया है –

एकक कोष्ठिका या इकाई सेल के पैरामीटर (parameters of unit cell)

किसी भी एकक कोष्ठिका को प्रदर्शित करने के लिए कुछ पैरामीटर की आवश्यकता होती है , एकक कोष्ठिका के इन पैरामीटर को उसके अभिलक्षण गुण भी कहा जा सकता है।
ये पैरामीटर एकक कोष्ठिका की किनारों की लम्बाई और कोष्ठिका के किनारों के मध्य बना कोण होते है।
एकक कोष्ठिका के किनारों की लम्बाई को अक्षीय दूरी कहते है और किनारों के मध्य बने कोण को अक्षीय कोण कहते है , इन दोनों को निम्न प्रकार परिभाषित किया जाता है –
एकक कोष्ठिका के तीन किनारें होते है जिन्हें अक्षीय दूरी कहते है और इन्हें a , b और c द्वारा व्यक्त किया जाता है ये तीनों अक्ष या किनारें एक दुसरे के लम्बवत होते है।
एकक कोष्ठिका के किनारों अर्थात अक्षों के मध्य बने कोण को अक्षीय कोण कहते है इन्हें यहाँ α , β, γ द्वारा व्यक्त किया जाता है।
एकक कोष्ठिका के पैरामीटर को चित्र में प्रदर्शित किया गया है –

एकक कोष्ठिका या इकाई सेल या यूनिट सैल के प्रकार (types of unit cell)

इन्हें दो भागों में बांटा गया है –
1. आद्य एकक कोष्ठिका (primitive unit cell)
2. केन्द्रित एकक कोष्ठिका (centred unit cell)
अब हम यहाँ इनके बारे में विस्तार से अध्ययन करते है –
1. आद्य एकक कोष्ठिका (primitive unit cell)
वह एकक कोष्ठिका या इकाई सेल जिसमें अवयवी कण या जालक बिंदु , कोष्ठिका के कोनों पर उपस्थित होते है , उसे आद्य एकक कोष्ठिका या सरल एकक कोष्ठिका कहते है।
2. केन्द्रित एकक कोष्ठिका (centred unit cell)
जब किसी इकाई सेल या एकक कोष्ठिका में अवयवी कण कोनों के अलावा अन्य स्थितियों पर भी स्थित हो तो इन्हें केन्द्रित एकक कोष्ठिका कहते है।
केंद्रित एकक कोष्ठिका को तीन भागों में बांटा गया है –
i. अंत: केंद्रित एकक कोष्ठिका (body centred unit cell)
ii. फलक केंद्रित एकक कोष्ठिका (face centred unit cell)
iii. अन्त्य: केन्द्रित एकक कोष्ठिका (end centred unit cell)
i. अंत: केंद्रित एकक कोष्ठिका (body centred unit cell)
जब एकक कोष्ठिका में अवयवी कण कोनो के अतिरिक्त इसके केंद्र में भी स्थित हो तो इसे अंत: केंद्रित एकक कोष्ठिका कहते है।
ii. फलक केंद्रित एकक कोष्ठिका (face centred unit cell)
वह एकक कोष्ठिका जिसमें अवयवी कण इसके कोनों के अतिरिक्त इसके सभी फलको पर भी स्थित हो तो इसे फलक केंद्रित एकक कोष्ठिका कहते है।
iii. अन्त्य: केन्द्रित एकक कोष्ठिका (end centred unit cell)
जब एकक कोष्ठिका के अवयवी कण इसके कोनों के अतिरिक्त किन्ही दो विपरीत फलको पर भी स्थित हो तो इसे अन्त्य: केन्द्रित एकक कोष्ठिका कहा जाता है।

एकक कोष्ठिका की विमा सम्बन्धी गणनाएँ (dimension related calculation of a unit cell) : विभिन्न प्रकार की एकक कोष्ठिका में कणों (गोलों) की संख्या हम ज्ञात कर चुके है .अब विमाओं की सहायता से एक कोष्ठिका का आयतन , एकक कोष्ठिका के परमाणुओं का द्रव्यमान , एकक कोष्ठिका का घनत्व तथा आवोगाद्रो संख्या में सम्बन्ध स्थापित करेंगे।

इन गणनाओं के लिए भी हम घनीय एकक कोष्ठिका का चयन करते है।

माना कि एकक कोष्ठिका का किनारा (कोर) = a है।

अत: एकक कोष्ठिका का आयतन = a3

यदि एकक कोष्ठिका में उपस्थित एक कण (परमाणु) का द्रव्यमान m हो तो –

एकक कोष्ठिका का द्रव्यमान = एकक कोष्ठिका में परमाणुओं की संख्या x एक परमाणु का द्रव्यमान

= n x m

यहाँ n = एकक कोष्ठिका में परमाणुओं की संख्या है।

एकक कोष्ठिका में उपस्थित एक परमाणु का द्रव्यमान = M/NA = m

M = परमाणुओं का मोलर द्रव्यमान

NA = आवोव्रादों संख्या

एकक कोष्ठिका का घनत्व (d) = एकक कोष्ठिका का द्रव्यमान/एकक कोष्ठिका का आयतन

अत:

d = n x m/a3

अथवा

d = nM/a3.NA

यहाँ यह ध्यान रखना चाहिए कि –

एकक कोष्ठिका का घनत्व ही पदार्थ का घनत्व होता है।

एकक कोष्ठिका के घनत्व को सामान्यतया gm/cm3 (gm cm-3 or gm per co) में व्यक्त  करते है अत: मोलर द्रव्यमान को gm में तथा किनारे की लम्बाई का cm में लिया जाता है।

यदि किनारे की लम्बाई पिकोमीटर (pm) अथवा अंगस्ट्रम (A) में दी हो तो उसे cm (सेंटीमीटर) में परिवर्तित कर लेते है।

1 pm = 10-12 m = 10-10 cm

1A = 10-8 cm

घनत्व को ρ (Rho) द्वारा भी व्यक्त किया जा सकता है –

अत: ρ = nM/a3NA

यदि घन का किनारा = a pm

= a x 10-12 m

= a x 10-10 cm

अत: घनत्व का सूत्र निम्नलिखित प्रकार हो जाता है।

d = nM/(a x 10-10)3NA  gm/cm3

d = nM/(a3 x 10-30)NA  gm.cm-3

प्रश्न और उत्तर 

प्रश्न 1 : एक तल पर अवयवी कणों (गोलों) की कितनी व्यवस्थायें संभव है ? नाम लिखिए ?
उत्तर : एक तल पर अवयवी कणों की दो प्रकार की व्यवस्थाएँ संभव है।
(i) वर्ग निबिड़ संकुलन
(ii) षट्कोणीय निबिड़ संकुलन
प्रश्न 2 : सरल घनीय एकक कोष्ठिका में गोलों की उपसहसंयोजन संख्या तथा उनकी संकुलन क्षमता कितनी होती है ?
उत्तर :  सरल घनीय एकक कोष्ठिका में गोलों की उपसहसंयोजन संख्या 6 तथा संकुलन क्षमता 52.4% होती है।
प्रश्न 3 : सरल घनीय एक कोष्ठिका में अवयवी कणों की संख्या कितनी और क्यों होती है ?
उत्तर : सरल घनीय एकक कोष्ठिका में अवयवी कणों की संख्या एक होती है। इस एकक कोष्ठिका में अवयवी कण घन के कोनों पर स्थित होते है। प्रत्येक कोने का गोला 8 एकक कोष्ठिकाओं में सहभाजित होता है अत: एक एकक कोष्ठिका में अवयवी कणों की संख्या = 8 x 1/8 = 1
प्रश्न 4 : वर्ग निबिड़ संकुचन से बनने वाले त्रिविमीय जालक का नाम , उपसहसंयोजन संख्या तथा संकुचन क्षमता बताइये ?
उत्तर : वर्ग निबिड़ संकुलन से बनने वाले त्रिविमीय जालक को आद्य घनीय जालक अथवा सरल घनीय जालक कहते है। इसमें कणों की उपसंयोजन संख्या 6 तथा संकुलन क्षमता 52.4% होती है।
प्रश्न 5 : षट्कोणीय निबिड़ संकुचन से बनने वाले त्रिविमीय जालकों के नाम , कणों की उपसंयोजन संख्या तथा संकुलन क्षमता बताइये ?
उत्तर : षट्कोणीय निबिड संकुलन से बनने वाले त्रिविमीय जालकों के नाम षट्कोणीय निबिड़ संकुलन (hcp) ABABABABA . . . . . प्रकार और घनीय निबिड़ संकुलन (ccp) ABCABCABC . . . . . प्रकार है। इन दोनों में ही उपसहसंयोजन संख्या 12 और संकुलन क्षमता 74% होती है।
प्रश्न 6 : अंत: केन्द्रित घनीय (bcc) संरचना वाली धातुओं का घनत्व कम होता है। जबकि hcp तथा fcc संरचना वाली धातुओं का घनत्व अधिक होता है। समझाइये।
उत्तर : bcc संरचना में संकुलन क्षमता 68% होती है , अर्थात 32% स्थान खाली होता है अत: घनत्व कम होगा। hcp और ccp जालकों में संकुलन क्षमता 74% होती है अर्थात केवल 26% स्थान खाली होता है। इसलिए bcc संरचना घनत्व कम तथा hcp और ccp संरचना के घनत्व अधिक होता है।
प्रश्न 7 : hcp और fcc संरचना वाली धातुओं का गलनांक bcc संरचना वाली धातुओं की अपेक्षा अधिक होता है।  क्यों ?
उत्तर : hcp और ccp संरचना वाली धातुओं की संकुलन क्षमता 74% होती है अर्थात अवयवी कणों के मध्य दूरी कम होती है। अत: अन्तराणुविक आकर्षण बल प्रबल होते है तथा एक सघन संरचना बनती है। अत: गलनांक अधिक होता है। bcc संरचना में संकुलन क्षमता 68% है , अवयवी कणों के मध्य अन्तराणुविक आकर्षण बल hcp तथा ccp संरचना की तुलना में दुर्बल होते है , अत: गलनांक कम होता है।
प्रश्न 8 : एक क्रिस्टलीय जालक में चतुष्फलकीय रिक्तियों तथा अष्टफलकीय रिक्तियों की संख्या कितनी होती है ?
उत्तर : चतुष्फलकीय रिक्तियों की संख्या अवयवी कणों की संख्या से दो गुनी होती है। जबकि अष्टफलकीय रिक्तियों की संख्या अवयवी कणों की संख्या के समान ही होती है।
प्रश्न 9 : bcc संरचना रखने वाली धातुओं के नाम लिखिए।
उत्तर : सोडियम , पोटेशियम , रुबिडियम आदि प्रथम समूह के तत्व 1 bcc संरचना के है।
प्रश्न 10 : ccp तथा hcp संरचना वाली धातुओं के नाम लिखिए।
उत्तर : hcp संरचना की धातुएँ Be , Mg , Cd आदि fcc अथवा ccp संरचना की धातुएँ Fe , Ni , Cu , Ag आदि।
प्रश्न 11 : ताप बढाने पर धातु की संरचना में परिवर्तन सम्भव है , एक उदाहरण दीजिये।
उत्तर : सामान्य ताप (25 डिग्री सेल्सियस) पर Sr की ccp संरचना होती है। 350 डिग्री सेल्सियस पर यह संरचना hcp हो जाती है तथा 600 डिग्री सेल्सियस पर यह संरचना bcc में परिवर्तित हो जाती है।
प्रश्न 12 : द्विविमीय वर्ग निबिड़ संकुलन को AAAA…. प्रकार की व्यवस्था कहा जाता है , क्यों ?
उत्तर : द्विविमीय वर्ग निबिड संकुलन में अवयवी कणों की पंक्तियाँ एक समान ही होती है। यदि एक पंक्ति को A से प्रदर्शित किया जाए तो सभी पंक्तियाँ A के समान ही होंगी। अत: इन्हें AAAA…. प्रकार की व्यवस्था कहते है।
प्रश्न 13 : द्विविमीय षट्कोणीय निबिड़ संकुलन को ABAB. . . . . प्रकार की व्यवस्था कहा जाता है , क्यों ?
उत्तर : द्विविमीय षट्कोणीय निबिड़ संकुलन में द्वितीय पंक्ति के गोले प्रथम पंक्ति के गोलों से बने अवनमन में आते है। तीसरी पंक्ति को पहली पंक्ति के समान ही रखा जाता है। यदि पहली पंक्ति को A कहे तो दूसरी पंक्ति को B कहेंगे। तीसरी पंक्ति पहली के समान होने के कारण वह भी A कहलाएगी। अत: इस संरचना को ABABAB . . . . . . .  प्रकार की संरचना कहते है।
प्रश्न 14 : द्विविमीय वर्ग निबिड़ संकुलन तथा द्विविमीय षट्कोणीय निबिड़ संकुलन में गोलों का उपसहसंयोजन संख्या कितनी है ?
उत्तर : द्विविमीय वर्ग निबिड़ संकुलन में गोलों की उपसहसंयोजन संख्या 4 तथा द्विविमीय षट्कोणीय निबिड़ संकुलन में गोलों की उपसहसंयोजन संख्या 6 होती है।
प्रश्न 15 : चतुष्फलकीय छिद्र और अष्टफलकीय छिद्र (रिक्ति) की त्रिज्या का गोलों की त्रिज्या से सम्बन्ध बताइये ?
उत्तर : यदि छिद्रों (रिक्तियाँ) की त्रिज्या r तथा गोलों की त्रिज्या R हो तो –
चतुष्फलकीय रिक्ति में r = 0.225 R
अष्टफलकीय रिक्ति में r = 0.414 R
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