क्षोभमंडल किसे कहते है , क्षोभ मंडल का हमारे लिए क्या महत्व है छोभ मंडल की ऊंचाई troposphere in hindi

By   June 7, 2021

troposphere in hindi definition distance from earth क्षोभमंडल किसे कहते है , क्षोभ मंडल का हमारे लिए क्या महत्व है छोभ मंडल की ऊंचाई कितनी है ?

वायुमंडल की संरचना
वायुमंडल में वायु की विभिन्न संकेन्द्रित परतें पायी जाती हैं। जिनके तापमान और घनत्व में भिन्नता होती है। पृथ्वी की सतह के पास घनत्व सर्वाधिक होता है और ऊंचाई बढ़ने के साथ कम होता जाता है। तापमान के ऊर्ध्वाधर वितरण के आधार पर वायुमंडल को निम्नलिखित भागों में वर्गीकृत किया जा सकता है:

क्षोभमंडल (Troposphere)
ऽ क्षोभमंडल वायुमंडल की सबसे निचली एवं सघन परत है। यह परत संपूर्ण वायुभार का लगभग 75ः स्वयं में समाविष्ट किए हुए है।
ऽ भूतल से इसकी औसत ऊंचाई लगभग 14 किमी है। यह ध्रूवीय क्षेत्रों में लगभग 8 किमी की ऊंचाई तक तथा विषुवत रेखा के समीप 18 किमी की ऊंचाई तक विस्तृत है।
ऽ क्षोभमंडल की मोटाई विषुवत रेखा के समीप सर्वाधिक पाई जाती है क्योंकि इन क्षेत्रों में तापमान का स्थानांतरण संवहन तरंग के कारण अधिक ऊंचाई तक होता है। इन कारणों से इसे संवहन परत (Convectional Layer) भी कहा जाता है।
ऽ चूंकि धूलकण और जलवाष्प इसी मंडल में पाए जाते हैं, अतः सारी मौसमी घटनाएं जैसे कुहरा, धुंध, बादल, ओस, वर्षा, ओलावृष्टि, तड़ित-गर्जन, आदि इसी मंडल में घटित होती हैं।
ऽ ऊंचाई बढ़ने के साथ तापमान में कमी 165 मीटर की ऊंचाई पर 1°C अथवा 1000 फीट पर 3.6°F अथवा 6.5°C /किमी. की दर से होती है। इसे सामान्य ताप हास दर कहते हैं।
ऽ उबड़-खाबड़ हवा के पैकेटों की उपस्थिति के कारण जेट विमान के चालक इस परत से बचते हैं।
ऽ क्षोभमंडल एवं समतापमंडल के मध्य एक संक्रमण क्षेत्र पाया जाता है जिसे ट्रोपोपॉज (Tropopause) कहते हैं।
समतापमंडल (Stratosphere)
ऽ समतापमंडल क्षोभमंडल के ऊपर 50 किमी की ऊंचाई तक विस्तृत है।
ऽ इस परत के निचले भाग में लगभग 20 किमी की ऊंचाई तक तापमान स्थिर पाया जाता है। तत्पश्चात् यह 50 किमी की ऊंचाई तक क्रमिक रूप से बढ़ता जाता है।
ऽ तापमान में वृद्धि, इस परत में ओजोन की उपस्थिति के कारण होती है जो सूर्य से आने वाली पराबैंगनी किरणों को अवशोषित कर लेती है।
ऽ ओजोन का सर्वाधिक घनत्व 20 से 35 किमी के मध्य पाया जाता है। इसलिए इसे ‘‘ओजोन परत‘‘ भी कहा जाता है।
ऽ समताप मंडल में बादल बिल्कुल नहीं के बराबर पाए जाते हैं और बहुत कम धूल व जलवाष्प पाए जाते हैं। अतः यह जेट विमानों के उड़ने हेतु आदर्श होता है।
ऽ समतापमंडल के बिल्कुल ऊपरी भाग में तापमान 0°ब् तक पाया जाता है।
ऽ समतापमंडल एवं मध्यमंडल के बीच एक संक्रमण क्षेत्र पाया जाता है, जिसे स्ट्रेटोपॉज (ैजतंजवचनंेम) के नाम से जानते हैं।

मध्यमंडल (Mesosphere)
ऽ समतापमंडल के ऊपर 80 किमी की ऊंचाई तक मध्यमंडल का विस्तार पाया जाता है। इस परत में ऊंचाई में वृद्धि के साथ तापमान में कमी होती है और 80 किमी की ऊंचाई पर तापमान -100° से. होता है।
ऽ इसके ऊपरी हिस्से को मेसोपॉज (Mesopause) कहते हैं।

तापमडल (Thermosphere)
ऽ मेसोपॉज के ऊपर स्थित वायुमंडलीय परत को तापमंडल कहते हैं। इस मंडल में ऊंचाई बढ़ने के साथ तापमान तेजी से बढ़ता है।
इसे दो भागों में विभाजित किया गया है:
(प) आयनमंडल (Ionosphere)
ऽ इसके सबसे ऊपरी भाग को मेसोपॉज कहते हैं।
ऽ आयनमंडल का विस्तार 80 से 400 किमी के बीच है।
ऽ इस परत में तापमान में त्वरित वृद्धि होती है तथा इसके ऊपरी भाग में तापमान 1000°ब् तक पहुंच जाता है।
ऽ इसी परत से रेडियो तरंगें परावर्तित होकर पुनः पृथ्वी पर वापस आती हैं।
(पप) बाह्यमंडल (Exosphere)
ऽ आयनमंडल के बाद का बाहरी वायुमंडलीय आवरण, जो 400 किमी के बाद का ऊपरी वायुमंडलीय भाग है, बाह्यमंडल कहलाता है।
ऽ यह परत काफी विरलित है और धीरे-धीरे अंतरिक्ष में मिल जाती है।
ऽ इस परत में ऑक्सीजन, हाइड्रोजन व हीलियम के परमाणु पाए जाते हैं।

वायुमंडल का तापमान
वायुमंडल के लिए ऊर्जा का मुख्य स्रोत सौर ऊर्जा है।
ऽ सूर्याताप (Insolation) आपतित सौर्य विकिरण है । यह लघु तरंगों के रूप में प्राप्त होता है। पृथ्वी की सतह एक मिनट में एक वर्ग सेमी सतह पर 2 कैलोरी ऊर्जा (2 कैलोरी/सेमी2/मिनट) प्राप्त करती है। यह सौर्य स्थिरांक कहलाता है।
ऽ आपतित सौर विकिरण एक प्रकाशपुंज के रूप में होता है जिसमें विभिन्न तरंगदैर्ध्य वाली किरणें होती हैं। सूर्य से निकलने वाली ऊर्जा विद्युत चुम्बकीय तरंग के रूप में होती है।
ऽ दीर्घ तरंगदैर्ध्य वाली किरणें वायुमंडल में अधिकांशतः अवशोषित हो जाती हैं, जिन्हें इन्फ्रारेड किरण कहते हैं। लघु तरंग वाली किरणें अल्ट्रावायलेट कहलाती हैं।

वायुमंडल का तापन एवं शीतलन
ऽ हवा भी अन्य पदार्थों की तरह तीन तरह से गर्म होती है-विकिरण, चालन एवं संवहन।
ऽ विकिरण में कोई भी वस्तु या पिंड सीधे तौर पर ऊष्मा तरंग को प्राप्त कर गर्म होता है। यही एकमात्र ऐसी विधि है जिसमें निर्वात में भी ऊष्मा का संचरण होता है। यह ऊष्मा स्थानांतरण का सबसे महत्वपूर्ण तरीका है।
ऽ पृथ्वी सौर विकिरण को लघु तरंग के रूप में ग्रहण करती है एवं इसे दीर्घ तरंग के रूप में मुक्त करती है, जिसे पार्थिव विकिरण (Terrestrial Radiation) कहते हैं।
ऽ पृथ्वी का वायुमंडल सौर विकिरण के लिए पारदर्शी है परन्तु पार्थिक विकिरण के लिए लगभग अपारदर्शी की तरह कार्य करता है। कार्बन डाइऑक्साइड तथा जलवाष्प दीर्घ तरंगों के अच्छे अवशोषक हैं।
ऽ वायुमंडल आपतित सौर विकिरण की तुलना में पार्थिव विकिरण से ज्यादा ऊष्मा प्राप्त करता है।
ऽ जब किसी वस्तु में ऊष्मा का स्थानांतरण अणुओं में गति के कारण होता है, तो यह चालन (Convection) कहलाता है। संवहन में वस्तुओं के एक स्थान से दूसरे स्थान पर पहुंचने के कारण ऊष्मा का स्थानांतरण होता है।

जलवायु विज्ञान

जलवायु विज्ञान विज्ञान की एक शाखा है जिसमें वायुमंडल के घटक एवं उनकी विशेषताओं का अध्ययन किया जाता है।
वायुमडल
पृथ्वी के चारों तरफ व्याप्त गैसीय आवरण जो पृथ्वी की आकर्षण शक्ति के कारण टिका हुआ है, वायुमंडल (।जउवेचीमतम) कहलाता है। स्ट्राहलर के अनुसार वायुमंडल की ऊंचाई लगभग 16-29 हजार किमी तक है। अनुमानतः संपूर्ण वायुमंडलीय संगठन का 97ः भाग 29 किमी की ऊंचाई तक ही अवस्थित है। पृथ्वी के वायुमंडल का निर्माण विभिन्न अवयवों से हुआ है जिनमें गैसीय कण, जलवाष्प तथा धूलकण सम्मिलित हैं।

वायुमंडलीय वायु का संघटन
विभिन्न गैसें आयतन (प्रतिशत में)
नाइट्रोजन 78.8
ऑक्सीजन 20.24
आर्गन 0.93
कार्बन डाइऑक्साइड 0.036
निऑन 0.018
हीलियम 0.0005
ओजोन 0.00006

ऽ ऑक्सीजन एक ज्वलनशील गैस है। नाइट्रोजन ऑक्सीजन को तनु करती है एवं इसकी ज्वलनशीलता को नियंत्रित करता है। (120 किमी की ऊंचाई पर ऑक्सीजन की मात्रा नगण्य होगी)
ऽ कार्बन डाइऑक्साइड एक ग्रीन हाउस गैस है। यह सौर विकिरण के लिए पारदर्शी है परन्तु पार्थिक विकिरण के लिए यह अपारदर्शी की तरह कार्य करती है। )कार्बन डाइऑक्साइड और जलवाष्प पृथ्वी की सतह से केवल 92 किमी की ऊंचाई तक पाए जाते हैं)
ऽ ओजोन परत सूर्य से आने वाली लगभग सभी पराबैंगनी किरणों को अवशोषित कर पृथ्वी को अत्यधिक गर्म होने से बचाती है। (यह पृथ्वी की सतह से 10 से 50 किमी की ऊंचाई तक पाई जाती है)
ऽ कार्बन डाइऑक्साइड, ऑक्सीजन तथा नाइट्रोजन जैसी भारी गैसें निचले वायुमंडल में पाई जाती हैं (कार्बन डाईऑक्साइड 20 किमी तक और नाइट्रोजन 100 किमी तक) जबकि हीलियम, निऑन, क्रिप्टान एवं जेनॉन जैसी हल्की गैसें वायमंडल में अधिक ऊंचाई पर (ऊपरी वायुमंडल) पाई जाती हैं।
ऽ जलवाष्प पृथ्वी के लिए एक कंबल की तरह कार्य करता है जो इसे न तो अत्यधिक गर्म और न ही अत्यधिक ठंडा होने देता है यह सौर्य विकिरण को अवशोषित करने के साथ-साथ पार्थिव विकिरण को भी सुरक्षित रखता है।
ऽ सूर्य से आने वाली किरणों में प्रकीर्णन के कारण ही आकाश का रंग नीला प्रतीत होता है।
ऽ जलवायु के दृष्टिकोण से ये ठोस कण बहुत ही महत्वपूर्ण होते हैं क्योंकि ये ठोस कण ही आर्द्रताग्राही नाभिक का कार्य करते हैं जिनके चारों तरफ संघनन के कारण जलबूंदों का निर्माण होता है।
ऽ बादल तथा वर्षण एवं संघनन के विभिन्न प्रतिरूप इन जलवाष्प कणों के कारण ही अस्तित्व में आते हैं।