टीनिया सोलियम (taenia solium meaning in hindi) , फीता कृमि चित्र टैनीया सोलियम क्या है ? Pork tapeworm

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Pork tapeworm or taenia solium meaning in hindi टीनिया सोलियम या फीता कृमि चित्र टैनीया सोलियम क्या है ? फीता कृमि का वैज्ञानिक नाम , फीता कृमि का वैज्ञानिक नाम के बारे में बताइये ?

टीनिया सोलियम (taenia solium) :-

वर्गीकरण

संघ – प्लैटीहेल्मिन्थीस

वर्ग – सिस्टोडा

गण – टिनीओइडिया या साक्लोफिलाइडिया

कुल – टीनिया

जाति – सोडियम

स्वभाव और आवास : सिस्टोडा वर्ग के जन्तु अपने लम्बे , चपटे , फीते के समान आकार के कारण फीताकृमि के नाम से जाने जाते है।

ये सभी अन्त:परजीवी होते है। टीनिया वंश में मनुष्य और उसके पालतू जंतुओं की अनेक परजीवी जातियाँ है। टीनिया सोलियम सूअर माँस फीताकृमि मनुष्य में संक्रमण करने वाली सामान्य जाति है।

यह द्विपोषी परजीवी है। इसका वयस्क अपने मुख्य परजीवी मनुष्य की छोटी आंत में रहता है। जहाँ यह अपने स्कोलैक्स द्वारा आंत्र म्युकोसा से चिपका रहता है। इसमें मुख और पाचन गुहिका का अभाव होने के कारण यह अपनी शरीर भित्ति द्वारा परपोषी के पचे हुए भोजन का अवशोषण करता है इसकी लार्वा अवस्था द्वितीय या मध्यस्थ परपोषी सूअर के उत्तक में पायी जाती है। यह लार्वा प्रावस्था सिस्टिसर्कस कहलाती है।

यह सिस्टिसर्कस केवल उसी दशा में वयस्क फीताकृमि में परिवर्धित हो पाता है जब वह मनुष्य परपोषी द्वारा अंतर्ग्रहित कर लिया जाता है।

सूअर का ऐसा माँस जिसमे सिस्टिसर्कस लार्वा अत्यधिक संख्या में उपस्थित हो मीजली सूअर मांस कहलाता है।

इस प्रकार के माँस में प्राय: लारवा प्रावस्था मर कर कैल्सिभूत हो जाती है।

यह सामान्यतया सफ़ेद रंग का होता है। इसकी पृष्ठ और अधर दोनों सतहे चपटी होती है लेकिन बाहर से देखने पर पृष्ठ और अधर सतहों की पहचान करना संभव नहीं है।

आंतरिक रचना में जो सतह वृषणों की तरफ से निकट होती है वह पृष्ठ और इसके विपरीत मादा जननांगो की निकटवर्ती सतह अधर होती है। इसका शरीर अगले सिरे पर सुकड़ा होता है और पीछे की ओर धीरे धीरे चौड़ा होता जाता है।

फीताकृमी का शरीर बहुत से भागों या विखण्डो में विभाजित होता है जिन्हें देहगुहा खण्ड कहते है। इस जन्तु में विखण्डन की प्रक्रिया कूट विखंडन कहलाती है। इसके शरीर को स्पष्ट रूप से तीन भागो में बांटा जा सकता है।

शरीर के अग्र छोर पर घुण्डीनुमा शीर्ष है , जिस पर आँतो की दिवार से चिपकने के लिए 4 चूषक और कुछ जातियों में नुकीले हुक पाए जाते है। सिर के पीछे छोटी सी धागेनुमा ग्रीवा होती है और ग्रीवा के नीचे के सम्पूर्ण भाग को स्ट्रोबिला कहते है।

यह भाग सामान्यतया 800-1200 देहखण्डो का बना होता है। प्रत्येक खण्ड में अपना पृथक द्विलिंगी जनन तंत्र होता है। ये खण्ड भी विकास के आधार पर सामान्यतया अपरिपक्व , परिपक्व और ग्रैविड देहखण्ड कहलाते है।

ग्रीवा के अग्र भाग में सक्रीय कोशा-विभाजन के कारण जीवन भर नये देहखंड बनते रहते है।

सामान्यतया इन कृमियों में पाचन तन्त्र , श्वसन तन्त्र और परिसंचरण तन्त्र का अभाव होता है।

उत्सर्जी तन्त्र प्राय: ज्वाला कोशिकाओं का बना होता है। तंत्रिका तंत्र विद्यमान होता है।

यह सामान्यतया टीनिऐसिस नामक रोग के लिए जाना जाता है।