अतिचालकता की परिभाषा क्या है , उदाहरण , क्रांतिक ताप , मेसनर प्रभाव , अतिचालक पदार्थ

super conductivity in hindi अति चालकता की परिभाषा क्या है : ऐसे पदार्थ या धातु जिनमे एक निश्चित ताप पर प्रतिरोधकता का मान बहुत तेजी से घटता है और शून्य हो जाता है इन पदार्थो या धातुओं को अतिचालक पदार्थ या धातु कहते है तथा इनके इस गुण को अतिचालकता कहते है। तथा जिस ताप पर अति चालकता की घटना होती है उस ताप को क्रांतिक ताप (critical temperature ) कहते है।

अतिचालकता प्रभाव को सर्वप्रथम पारे में देखा गया , जब पारे को 4.2 K ताप पर ठंडा किया गया तो पारा ने अति चालकता गुण दर्शाया।
अतिचालकता की अवस्था में पदार्थ में चुंबकीय क्षेत्र का मान भी शून्य हो जाता है इस प्रभाव को मेसनर प्रभाव (Messner effect ) कहते है।
यह घटना बहुत कम ताप पर घटित होती है।
उपयोग : इनका उपयोग अधिक चुम्कीय क्षेत्र वाली चुम्बक बनाने में , ट्रांसफॉर्मर एवं सुपर कंप्यूटर बनाने में किया जाता है।
अति चालकता की खोज डच ने April 8, 1911 में की थी , इन्होने सबसे पहले इसके बारे में बताया की जब पदार्थ को क्रांतिक ताप से निचे ताप पर ठंडा किया जाता है तो पदार्थ अति चालकता प्रदर्शित करता है और इस अवस्था में पदार्थ का प्रतिरोध और चुंबकीय क्षेत्र शून्य हो जाते है इस प्रभाव को उन्होंने पदार्थ की अति चालकता नाम दियातथा इन पदार्थो को अति चालक पदार्थ नाम दिया गया।
प्रतिरोध तथा ताप में ग्राफ खींचने पर यह निम्न प्रकार प्राप्त होता है

ग्राफ में देख सकते है की अति चालक पदार्थो में क्रांतिक ताप से कम ताप पर प्रतिरोध का मान शून्य दर्शाया गया है।

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