बंध्य कीट तकनीक क्या होती है (Sterile Insect Technique in hindi) SIT in hindi बंध्यता सिद्धांत

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 (Sterile Insect Technique in hindi) SIT in hindi  बंध्य कीट तकनीक क्या होती है या बंध्यता सिद्धांत किसे कहते है ? 

बंध्य कीट तकनीक (SIT)
बंध्य कीट तकनीक (Sterile Insect Technique) को दो और नामों से भी जाना जाता है, ये हैं ष्बंध्य नर तकनीकष् (Sterile Male Technique) तथा ष्बंध्य कीट मोचन विधिष् (Sterile Insect Relesae Method, SIRM)।

परिभाषा
बंध्य कीट तकनीक (SIT) पीड़क-दमन की एक आनुवंशिक विधि है जिसमें संगमनक्षम (capable fo mating) परंतु बंध्य कीटों के एक साथ बड़ी संख्या में एक बाहरी प्राकृतिक जननशील पीड़क समष्टि में छोड़ा जाता है ताकि समष्टि की जनन क्षमता का दमन हो सके, और इस विधि से अक्सर अंततरू उस कीट का लगभग पूरा सफाया अथवा विलोप हो जाता है।

बंध्य कीट तकनीक (SIT) जैविकीय पीड़क नियंत्रण की एक बहुत ही कारगर एवं पर्यावरण-सौहाद्ययी क्षेत्र-व्यापी विधि है। SIT का आधार है विकिरण द्वारा बहुत बड़ी संख्याओं में कीटों का बंध्यकरण ।

 SIT की परिघटना
कीटों को आयनीकारी विकिरण की बंध्यकारी मात्रा से उद्भासित किया जाता है। इसके परिणामस्वरूप विभाजनशील जनन कोशिकाओं के DNA में (जीनोम में, यानी कोशिका के आनुवंशिक अंतःभाग में) परिवर्तन आ जाता है, और इस प्रकार वे दोषपूर्ण हो जाती हैं। इसके परिणामस्वरूप बने कीटों में परिवर्धनशील युग्मकों (गैमीटों) में घातक उत्परिवर्तन पैदा हो जाते हैं, और फिर इन कीटों को SIT में बाहर छोड़ दिया जाता है।

बंध्यकरण कार्यक्रमों में सामान्यतरू नर कीटों को ही लिया जाता है क्योंकि इन्हें प्रभावकारी रूप में बंध्यकृत किया जा सकता है और SIT कार्यक्रमों में इन्हें अधिक क्रियाशील तरीके से इस्तेमाल किया जा सकता है। बंध्यकरण रासायनिक तरीके से अथवा विकिरणों द्वारा किया जा सकता है।

रासायनिक बंध्यकरण (Chemical sterlçation) : बंध्य कीट मोचन कार्यक्रमों में कीटों के बंध्यकरण के लिए उत्परिवर्तजनी (mutagenic) रसायनों के उपयोग पर भी विचार किया गया क्योंकि बंध्यता लाने में यह विधि अधिक प्रभावकारी जान पड़ती थी। उदाहरणतः रासायनिक बंध्यकारकों को या तो कीट-पालन आहारों में डाल दिया जा सकता था या ऐसे रसायन को अण्डों अथवा प्यूपों में उस समय जब उन्हें सामान्य पालन-क्रिया में उठाया या छुआ जाता हो लगाया जा सकता था। परंतु वर्तमान में रासायनिक बंध्यकारकों का इस्तेमाल निम्नलिखित तीन कारणों से बहुत सीमित रखा गया है :
(प) कैंसरजनी पदार्थ को धारण किए हुए कीटों के द्वारा पर्यावरण संदूषण का खतरा ।
(पप) कीटों के भीतर रसबंध्यकारी (chemosterilant) को पहुंचाने में काम आने वाले भोजन अथवा उनके वहन साधनों का निपटारा। (पपप) रसोबंध्यकृत कीटों का अन्य जीव-जंतुओं द्वारा खाया जाना। इस विषय में शोधकर्ताओं के लिए चुनौती रही है कि वे कुछ ऐसे
सुरक्षित रसायनों की खोज करें जिन्हें बंध्यकारकों के रूप में इस्तेमाल किया जा सके।

विकिरण बंध्यकरण (Radiation sterilçation) : SIT के अंतर्गत कीटों को बंध्यकृत करने में आयनकारी विकिरणों का उपयोग किया जाता है, और इसमें प्रायरू गामा किरणें इस्तेमाल की जाती हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि विकिरण में पर्यावरण खतरा नहीं होता। गामा विकिरण के साथ की जाने वाली खोजों में सामान्यतरू उपलब्ध कोबाल्ट-60 तथा सीसियम-137 के रूप में गामा विकिरण स्रोतों की उपलब्धता ने भारी योगदान दिया है।

उसके बाद, इन बंध्य कीटों को बहुत बड़ी संख्या में (क्षेत्रवासी कीटों की संख्या 10 से 100 गुना अधिक संख्या में) परिवेश में छोड़ा जाता है ताकि वे परिवेश में मौजूद क्षेत्रवासी कीटों के साथ संगम-मैथुन कर सकें। बंध्य नर के साथ संगम करने वाली मादा अण्डे तो देगी मगर इन अण्डों से बच्चे नहीं निकलेंगे (चित्र 15.1)। चूंकि वहां की कीट समष्टि में बंध्य कीटों की संख्या स्थानीय कीटों की संख्या की अपेक्षा 10 से 100 गुना अधिक होती है इसलिए अधिकतर संगम बंध्य (अजननकारी) होंगे। जैसे-जैसे समय बीतता जाएगा क्षेत्रवासी कीटों की संख्या घटती जाएगी और सामान्य कीटों के अनुपात में बंध्य कीट अधिक होते जाएंगे और इस प्रकार स्थानीय पीड़क समष्टि का विलोप होता जाएगा।

बंध्यता सिद्धांत के सफल उपयोग के अनिवार्य घटक इस प्रकार हैं :
(प) लक्ष्य कीटों का बड़ी संख्या में उत्पादन । (परिपालन घटक, Rearing component)
(पप) लक्ष्य कीटों का बड़ी संख्या में बंध्यकरण। (उपचार घटक, Treatment component)
(पपप) बंध्यकरण के बाद छोड़े गए कीटों की संगम स्पर्धा को कायम बनाए रखना। (स्पर्धाघटक, Competitivenes component) (पअ) उपचार क्षेत्र में कीटों के छोड़े जाने एवं उनके वितरण के लिए आर्थिक दृष्टि से मित्वययी प्रणालियां । (विमोचन घटक, Relesae
component)
(अ) उपचारित कीटों के छोड़े जाने से पूर्व और बाद में क्षेत्रवासी समष्टियों का सही-सही मूल्यांकन करने हेतु साधन । (मूल्यांकन
घटक, (Evaluation component)
(अप) विमोचन क्षेत्र में वीर्यसेचित मादाओं के आप्रवास (immigration) की संभावनाओं को दूर रखना। (पुनर्ग्रसन घटक,
Re-infetation component)

विभिन्न कीट स्पीशीज में बंध्यता एवं मृत्युता लाने के लिए संबद्ध साधन की आवश्यक मात्रा अलग-अलग होती है। उदाहरणतः स्कू-वर्म मक्खियों में 100ः बंध्यता लाने के लिए 5500 तंक (55 Gy) की मात्रा पर्याप्त होती है। वहीं दूसरी ओर 25,000 – 50,000 तंक (25-50 Krad अथवा 250 Gy – 500 Gy) से ज्यादा की मात्रा से भी कुछ लेपिडॉप्टेरन पीड़क F1 संतति पैदा करते ही रहते हैं। शोधकर्ताओं ने पाया कि F1 संतति में उनके उपचारित जनकों के ही बराबर अथवा उनसे ज्यादा बंध्यता स्तर पाए जाते हैं। सुझाव दिया गया है कि यह वंशागत (अथवा विलम्बित) बंध्यता नियंत्रण कार्यक्रमों में उपयोगी होगी।

कीट पीड़कों का सामूहिक पालन-पोषण

कीटों का बंध्यकरण

विकिरण-बंध्यकृत कीटों का विमोचन

बंध्यकृत नर × सामान्य मादाएं
(जीनोमी दोष से (सामान्य क्छ।
युक्त शुक्राणु) से युक्त अण्डा)

अजननशील संगमन

जीवन-अक्षम (बंध्य) F1 अण्डों का बनना
(जनकीय बंध्यता दशति हैं)
चित्र 15.1 : SIT के कार्य करने का योजना-आरेख

 पीड़क प्रबंधन में SIT
SIT के द्वारा पीड़क समष्टि की क्रियाविधि ने पीड़क समष्टि के उन्मूलन, उसके सीमा-नियंत्रण एवं प्रबंधन में एक नया आयाम जोड़ दिया है और खास तौर से जब इसे अन्य दमनकारी उपायों के साथ समाकलित कर दिया जाता है। यह एक अति परिष्कृत विधि है तथा इसके विकास एवं व्यावहारिक उपयोग में अनेक तकनीकी एवं कार्यान्वयन समस्याएं आती हैं।

सबसे पहला और सर्वाधिक सफल एवं सर्वोत्तम ज्ञात कार्यक्रम स्क्रू-वर्म उन्मूलन कार्यक्रम (screw worm eradication programme) रहा है, जो 1958 से चल रहा है। संयुक्त राज्य अमेरिका तथा मेक्सिकों के कुछ भागों से इस स्पीशीज का सफाया हो गया है। इससे धन की भारी बचत हुई और 80 के दशक के अंतिम वर्षों तक लगभग 4 अरब अमेरिकी डालर की बचत हुई आंकी गयी है।

स्कू-वर्म के विरुद्ध बंध्य कीट तकनीक की सफलता से वैज्ञानिकों को प्रोत्साहन मिला कि क्यों न इस तकनीक को अन्य पीड़क कीटों से निपटने के लिए भी इस्तेमाल किया जाए। पहला सघन खोज प्रयास मेलन-फ्लाई (तरबूज-मक्खी) बैक्ट्रोसेरा कुकुरबिटी (Bactrocera cucurbitae) तथा पूर्व की फल मक्खी (oriental fruit fly) बैक्ट्रोसेरा डार्सेलिस (Bactrocera dorsalis) पर किया गया। विश्व के अनेक भागों में मेडिटरेनियन फ्रूट फ्लाई (संक्षेप में मेडफ्लाई, उमकसिल) सेरेटाइटिस कैपिटैटा (Ceratitis capitata) के नियंत्रण में ैप्ज् की प्रमुख भूमिका चल रही है। मेक्सिकों में मेडफ्लाई कार्यक्रम की सफलता ने वहां की इस मक्खी की समष्टियों में भारी गिरावट पैदा की है और 30 लाख हेक्टेयर क्षेत्र से इस पीड़क का पूरा सफाया हो गया। SIT के द्वारा मेक्सिको में, ग्वाटेमैला के कुछ भागों में तथा संयुक्त राज्य अमेरिका में कई छोटे-छोटे क्षेत्रीय संग्रसन समाप्त कर दिए गए हैं। जापानी वैज्ञानिक और भी आगे बढ़ गए, उन्होंने SIT का उपयोग करके ओकिनावा से मेलन-फ्लाई समाप्त कर दी। ऐसा करने से वहां के द्वीपों की शाक-सब्जी अर्थव्यवस्था लगभग दोगुनी हो गयी। SIT को सेट्सी मक्खी (ग्लौसाइना स्पी०, Glosina sp.) के उन्मूलन के लिए भी स्थापित किया जा रहा है।

आयनीकारी विकिरण (गामा किरणों) का उपयोग करके SIT के संभावित उपयोग का भारत में क्यूलेक्स फैटिगैन्स (Culexf atigans) के नियंत्रण एवं प्रबंधन में सफलतापूर्वक परीक्षण किया गया है। साथ ही ैप्ज् के बंध्यता सिद्धांत का और आगे उपयोग ताड़ की लाल सुरसरी रिंकोफोरस फेरुगिनियस (Rhynchophorus ferrugineus) तथा आटे के बीटल ट्राइबोलियम कैस्टेनियम (Tribolium csataneum) के मामले में भी सफल पाया गया है।

लेपिडॉप्टेरा में, गुलाबी डोंडा कृमि (pink bollworm) उन शुरू के लेपिडॉप्टेरन कीटों में से है जिनका SIT के विकास के संबंध में अध्ययन किया गया है और यह कार्य दिशा कैलियोफोर्निया में सैन जोआक्विन घाटी में भी अपनायी गयी है। सैन जोआक्विन घाटी में 24 वर्षों के दौरान एक लगातार जारी रहती समष्टि का स्थापित होना रोका जा सकता है। सफलतापूर्वक चलाए गए SIT कार्यक्रमों द्वारा पश्चिम कनाडा से कॉड्लिग मॉथ साइडिया पोमोनेला (Cydia pomonella) तथा संयुक्त राज्य अमेरिका से जिप्सी मॉथ लिमैंट्रिया डिस्पार (Lymantria dispar) की समष्टियों का दमन किया जा सका है। भारत में SIT की, जैवप्रभावकारिता एवं सम्भाविता का आलू के ट्यूबर मॉथ फ्थोरिमिया ऑपकुलेला (Phthorimaea operculella) तथा तम्बाकू के केटरपिलर स्पोडॉप्टेरा लिटुरा (Spodoptera litura) के मामलों में अध्ययन किया गया था। इस प्रकार, अनेक महत्वपूर्ण पीड़क कीट समस्याओं से निपटने की दिशा में SIT एक सतत् बढ़ती जाती तकनीक की भूमिका निभा रही है।

बोध प्रश्न 1
प) SIT में कीटों के बंध्यकरण की दो तकनीके कौन सी हैं?
पप) SIT का एक योजना प्रतिदर्श बनाइए।

 उत्तर
बोध प्रश्न
1. (प) क) उत्परिवर्तजनी रसायनों का उपयोग
ख) आयनकारी विकिरणों का उपयोग
(पप) देखिए चित्र 15.1
2. (प) SIT को डिप्टेरन पीड़कों पर उपयोग किया जा सकता है जबकि F1 बंध्यता लेपिडॉप्टेरन पीड़कों पर लागू हो सकती है। SIT में संगमन में पूर्णतरू बंध्यकारी मात्रा से विघ्न लाया जा सकता है जबकि F1 बंध्यता उपबंध्यकारी मात्रा को कीटों की संगमन अक्षमता को कायम बनाए रखने के उद्देश्य से इस्तेमाल किया जाता है।
(पप) देखिए चित्र 15.2 3. संकर बंध्यता से अभिप्राय है उस बंध्यता से जिसके द्वारा प्रभेदों, उपजातियों अथवा निकटतरू संबंधित स्पीशीजों में प्रसंकरण तो किया जा सकता है मगर उनसे जीवनक्षम संतति पैदा नहीं हो सकती।