विभवमापी का मानकीकरण , विभव मापी की सुग्राहिता standardisation of potentiometer

By  
standardisation of potentiometer in hindi विभवमापी का मानकीकरण  : हम जानते है की लम्बाई के साथ साथ विभवान्तर में परिवर्तन को विभव प्रवणता कहते है हमने इसे यहाँ K से प्रदर्शित किया है , हमने विभवमापी क्या है में जब अज्ञात विद्युत वाहक बल ज्ञात किया तो प्राथमिक सेल तथा अज्ञात वि.धु.वा बल सेल का आंतरिक प्रतिरोध तथा तार का प्रतिरोध नगण्य माना।
लेकिन हम आपको बता दे की विभव प्रवणता का मान इन तीनो पर निर्भर करता है इसलिए हम इनको ध्यान में रखते हुए पहले विभव प्रवणता का मान ज्ञात करेंगे जिसके आधार पर अज्ञात वि.धु.वा ज्ञात्त करेंगे जो अधिक सही प्राप्त होगा इसको विभवमापी का मानकीकरण कहते है।
विभव मापी का मानकीकरण का सीधा उद्देश्य विभवमापी द्वारा अज्ञात वि.वा. बल का सही (यथार्थ) मान ज्ञात करना है।
 विभवमापी का मानकीकरण करने के लिए चित्रानुसार एक ज्ञात विद्युत वाहक बल का मानक सेल जोड़ देते है।
जो हमने मानक सेल जोड़ा है वह ऐसा सेल है जिसका विद्युत वाहक बल एक लम्बे समय तक नियत बना रहता है , सामान्तया: डेनियल सेल को मानक सेल की तरह काम में लिया जाता है।  डेनियल सेल का 20 डिग्री ताप पर विद्युत वाहक बल 1.08 V होता है।
मानक सेल लगाने के बाद सर्पी कुंजी को A से B की ओर तार को स्पर्श करवाते हुए खिसकाते है और धारामापी में शून्य विक्षेप की स्थिति ज्ञात करते है , मान लीजिये तार पर C बिंदु पर धारामापी में विक्षेप शून्य प्राप्त होता है यह तार पर l लम्बाई पर प्राप्त होता है। माना मानक सेल का वि.वा.बल E” है
अतः विभव प्रवणता K  = E”/l

विभवमापी की सुग्राहिता (sensitivity of potentiometer)

 सुग्राहिता से तात्पर्य है की विभव मापी की वह क्षमता की वह किसी अज्ञात विद्युत वाहक बल के छोटे से छोटे मान को भी यथार्थता से ज्ञात कर सके।
विभवमापी की सुग्राहिता का मान निम्न बातों पर निर्भर करती है
विभव प्रवणता अर्थात एकांक लम्बाई पर विभव पतन या विभवान्तर में परिवर्तन
अतः सुग्राहिता का मान बढ़ाने के लिए प्रयुक्त तार की लम्बाई को बढ़ा देना चाहिए क्योंकि तार पर विभव प्रवणता का मान जितना कम होगा विभव मापी की सुग्राहिता उतनी ही अधिक होगी।