सूर्य ग्रहण किसे कहते हैं बताइए solar eclipse in hindi definition meaning सूर्यग्रहण की परिभाषा अर्थ क्या है

By   May 31, 2021

solar eclipse in hindi definition meaning सूर्यग्रहण की परिभाषा अर्थ क्या है सूर्य ग्रहण किसे कहते हैं बताइए ?

सूर्यग्रहण और चन्द्रग्रहण (Solar eclipse and Lunar eclipse)
ऽ जब सूर्य तथा पृथ्वी के मध्य चन्द्रमा आ जाता है तो इसके फलस्वरूप अमावस्या (New Moon) होती है। अमावस्या को सूर्य ग्रहण होता है।
ऽ जब पृथ्वी की स्थिती सूर्य तथा चन्द्रमा के बीच होती है तो इसे पूर्णमासी (Full Moon) कहा जाता है ऐसे में पृथ्वी को सूर्य का प्रकाश नहीं मिलता है। इसी स्थिति में चन्द्रग्रहण होता है।
ऽ सूर्य, पृथ्वी तथा चन्द्रमा की सापेक्षिक स्थिति में परिवर्तन से सूर्य के प्रकाश को परावर्तित करने वाले चन्द्रमा के धरातल का क्षेत्रफल बदलता रहता है, जिसे ‘चन्द्रमा की कला‘ कहते हैं।
मंगल (Mars)
ऽ यह शुक्र एवं पृथ्वी से छोटा ग्रह है जिसका व्यास 4014 किमी है। यह अपने अक्ष पर 24.6 घंटे (लगभग पृथ्वी के बराबर) में एक बार घूम जाता है।
ऽ आयरन ऑक्साइड की उपस्थिति के कारण यह लाल दिखाई देता है। इसलिए इसे ‘लाल ग्रह‘ कहा जाता है।
ऽ मंगल पर ‘निक्स ओलम्पिया‘ पर्वत स्थित है जो माउण्ट एवरेस्ट से तीन गुना ऊंचा है।
ऽ फोबोस तथा डिमोस इसके दो उपग्रह हैं।
ऽ इस ग्रह के लिए बहुत सारे अंतरिक्ष मिशन भेजे गए हैं। जैसे-विकिंग्स, पाथफाइन्डर, मार्स ओडेसी, मंगलयान आदि।
ऽ पृथ्वी के बाद एकमात्र ग्रह जहां पानी के संकेत मिले हैं तथा जीवन की संभावना व्याप्त है। इसका एक पतला वायुमंडल है जिसमें नाइट्रोजन व आर्गन हैं।
बृहस्पति (Jupiter)
ऽ सौरमंडल का सबसे बड़ा ग्रह, इसका व्यास तथा क्षेत्रफल क्रमशः पृथ्वी से 11 गुना तथा 120 गुना है।
ऽ इसे ‘स्वर्ग का देवता‘ (Lord of the Heavens) तथा मास्टर ऑफ गॉड्स (Master of Gods) की उपमा प्रदान की गई है।
ऽ पृथ्वी की तुलना में इसका गुरुत्व बहुत अधिक है और यह सबसे तेज घूमने वाला ग्रह है।
ऽ सूर्य से दूरी: 77.2 करोड़ किमी
ऽ अपने अक्ष पर घूर्णन: 10 घंटे में ।
ऽ सूर्य की परिक्रमा: 11 वर्ष एवं 10 माह ।
ऽ सूर्य से बहुत दूर होने के कारण अत्यधिक शीतल वातावरण(-14° से.)।
ऽ इसकी सतह ठोस नहीं है तथा वायुमंडल हाइड्रोजन, हीलियम, अमोनिया एवं मीथेन से बना है और बहुत सघन है।
ऽ बृहस्पति के 63 उपग्रह हैं। यूरोपा, गेनीमेड, केलिस्टो बृहस्पति के प्रमुख उपग्रह हैं। गेनीमेड सौर मंडल का सबसे बड़ा उपग्रह है जो बुध ग्रह से बड़ा है।
ऽ इस ग्रह की एक प्रमुख विशेषता बड़े लाल धब्बे (Great red spot) हैं।
शनि (Saturn)
ऽ सौरमंडल का यह दूसरा सबसे बड़ा ग्रह है। यह सूर्य से 141.7 करोड़ किमी दूर है। यह सूर्य की परिक्रमा 29 वर्ष, 6 माह में करता है।
ऽ शनि की एक मुख्य विशेषता यह है कि इसके चारों ओर एक वृत्ताकार वलय विद्यमान है जो शनि की सतह को स्पर्श नहीं करता है।
ऽ शनि का निर्माण हल्की गैसों से हुआ है जिनमें 63% हाइड्रोजन है।
ऽ शनि के ज्ञात उपग्रहों की संख्या सबसे अधिक 60 है। इसकी घोषणा 3 मार्च 2009 को अन्तर्राष्ट्रीय खगोलीय संघ (International Astronomical Union) ने की। टाइटन (Titan) इसका सबसे बड़ा उपग्रह है।
अरूण (Uranus)
ऽ 1781 ई. में इस ग्रह की खोज विलियम हर्शेल ने की।
ऽ यह सूर्य से 286.7 करोड़ किमी दूर है। यह अपने अक्ष पर 11 घंटे में एक चक्कर लगाता है तथा सूर्य की परिक्रमा 84 वर्षों में करता है।
ऽ यह अपने अक्ष पर पूर्व से पश्चिम दिशा में घूर्णन करता है।
ऽ इसका वायुमंडल अत्यंत सघन है जिसमें मीथेन गैस पायी जाती है।
ऽ इसके उपग्रह विपरित दिशा में परिक्रमा करते हैं।
ऽ इसके 27 उपग्रह हैं।
ऽ इसका अक्ष काफी झुका हुआ है अतः यह लेटा हुआ दिखाई देता है। अतः इसे लेटा हुआ ग्रह कहा जाता है।
वरुण (Neptune)
ऽ यह सूर्य से 447 करोड़ किमी दूर अवस्थित है।
ऽ यह अपने अक्ष पर 15 घंटे 40 मिनट में एक चक्कर लगाता है। तथा 165 वर्षों में सूर्य की परिक्रमा करता है।
ऽ मीथेन की उपस्थिति के कारण यह हरा प्रतीत होता है तथा ‘‘हरा ग्रह‘‘ कहलाता है।
ऽ यह अत्यधिक ठंठा ग्रह है जिसका अधिकतम तापमान -200° सेंटीग्रेड है।
ऽ इसके 13 उपग्रह हैं।
ऽ इसकी खोज जर्मन खगोलविद् जहॉन गाले ने 1846 में की।
बौना ग्रह-प्लूटो
ऽ 1930 में इसकी खोज की गयी थी। यह सूर्य से 559 करोड़ किमी दूरी पर स्थित है। इसका व्यास 2,222 किमी है।
ऽ अगस्त 2006 तक प्लूटो को भी एक ग्रह माना जाता था। किन्तु अंतर्राष्ट्रीय खगोल संघ (IAU) की एक बैठक में यह निर्णय लिया गया कि हाल में खोजे गए अन्य खगोलिय पिण्डों की भांति प्लूटो को भी बौना ग्रह कहा जाएगा।