शर्ली मंदिर या शर्ले टेम्पल कौन है ? who is Shirley Temple in hindi on google doole today

By   June 8, 2021

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बायोग्राफी : शर्ले टेम्पल एक अमेरिकन अभिनेत्री, गायिका, नर्तकी और राजनयिक के रूप में जानी जाती है | इनका पूरा नाम शर्ले टेम्पल ब्लैक था और यह वर्ष 1935 से लेकर वर्ष 1938 तक हॉलीवुड में नंबर एक ही अभिनेत्री रही थी , अर्थात उनके जैसा अभिनय उस ज़माने में शायद ही किसी को आता होगा | साथ ही इनमें अन्य गुण भी कूट कूट के भरे थे जैसे वह एक गायिका भी थी , नर्तकी भी थी और साथ ही साथ वह एक राजनायिक के रूप में भी जानी जाती है |

वह उस ज़माने की बेहद सुन्दर अभिनेत्री रही थी और उन्होंने अपने अभिनेत्री का करियर मात्र 3 साल की उम्र में ही शुरू कर दिया था |

देखिये शर्ली मन्दिर की यह बेहद सुन्दर फोटो –

(द)
दशमलव संख्या ‘3’ का बाइनरी कोड = 0011 एक्सेस 3 कोड के लिए दिये गये बाइनरी कोड में 0011 जोड़ने पर,
0011
$ 0011
$ 0110
अतः एक्सेस 3 कोड, दशमलव 3 का 0110 होगा।
Note : In excess-3 code adding 3 to each Binary code
(ब)
जॉनसन काउंटर एक प्रकार का संशोधित रिंग काउंटर है जहाँ पिछले फ्लिप-फ्लॉप से उल्टे (inverted) आउटपुट, पहले इनपुट से जुड़ा होता है। द फ्लिप फ्लॉप उपयोग किये जाने पर जॉनसन काउंटर के MOD या States की संख्या = 2द
यहाँ n = 3 है. अतः MOD की संख्या = 2×3=6
(ब)
CMOS में अधिकतम फैन आउट क्षमता होती है। CMOS चालन अवस्था में MOSFET की आउटपुट प्रतिबाधा कम हो जाती है। CMOS की आउटपुट प्रतिबाधा कम होने के कारण यह 50 से अधिक (750 तक) CMOS इनवर्टर को समान्तर में प्रचालित कर सकता है। CMOS का यह गुण Fan out कहलाता है। यह इस प्रकार कहा जायेगा कि CMOS परिपथ का Fan out 50 हैं।
(द)
(स)
(द) J  = 1, K = 1 के लिये J-K- Flip&Flop पर 2 परिपथ विभाजित के रूप में applied किया जा सकता है जहाँ पल्स ट्रेन को विभाजित किया जा सकता है ताकि clocked input लागू किया जा सके।
(द) एक लैच तथा फ्लिप-फ्लॉप का अन्तर यह है कि लैच विषमकालिक होते है जैस जैसे इनपुट दिया जाता है आउटपुट परिवर्तित होते जाते है। जबकि फ्लिप-फ्लॉप एज ट्रिगर है यह केवल तब ही स्थिति बदलता है जब कंट्रोल सिग्नल उच्च से कम या कम से उच्च होती है।
(ब)
(स) तीन फेज, 4 वायर ए.सी. प्रणाली वितरण प्रणाली का उपयोग संयुक्त शक्ति और कम भार के लिए होता है।
(स)
(1) Sunbber परिपथ प्रतिरोध (Rs) तथा संधारित्र (Cs) के सीरीज ब्वउइपदंजपवद तथा थायरिस्टर के साथ समान्तर Combination से बना होता है।
(2) संधारित्र युक्ति के समान्तर में होता है जो अनवांछित SCR के dv/dt ट्रिगरिंग से रोकता है।
(3) अत्यधिक डिस्चार्ज धारा को रोकने के लिए सीरीज में प्रतिरोध लगाते हैं।
(ब)
(द)
दो ट्रांजिस्टरो का तुल्य SCR परिपथ होगा।
ऊपर वाला परिपथ P-N-P Transistor है तथा नीचे वाला परिपथ छ-च्-छ ज्तंदेपेजवत है।
(स)
क थायरिस्टर डी.सी. चॉपर में भार दिक्परिवर्तन सर्वोत्तम निष्पादन के लिए होता है। वो चॉपर परिपथ जिनका उपयोग स्थिर वोल्टता डी.सी. शक्ति से परिवर्तित वोल्टता डी.सी. शक्ति प्राप्त करने के लिए किया जाता है दिष्ट धारा चॉपर कहलाते है। इनमें स्विचन युक्ति के रूप में SCR का उपयोग किया जाता है।
(ब)
एम्प्लिफायर का बार्कहाउजन मापदण्ड बताता है कि दोलन आवृत्ति पर लूप लाभ का फेज 180° तथा लाभ यूनिटी 1 होना चाहिए।
। 1
बार्कहाउजन criteria द्वारा किसी Amplifier ckt (Positive feedback) में 180° का फेज शिफ्ट प्रदान करता है।
(अ)
DC संचरण में कोरोना हानियाँ न्यूनतम होती है। ट्रांसमिशन लाइन में संचरण वोल्टता अधिक उच्च हो जाने पर चालक तल पर प्रतिबल इतना बढ़ जाता है कि चालक के चारों ओर की वायु का ब्रेक डाउन हो जाता है तथा वह सुचालक बन जाती है तथा वह सुचालक परत भी चालक के एक अंग की भाँति व्यवहार करती है इसके फलस्वरूप चालक की प्रभावी त्रिज्या बढ़ जाने से चालक की सतह पर अधिकतम प्रतिबल का मान कम हो जाता है। चालक के चारों ओर उच्च वोल्टेज पर वायु भंजन को कोरोना कहते है।
(स)
ऐम्प्लीफायर में ऋणात्मक पुनर्भरण विरूपण कम करता है। यदि पुनः निविष्ट के प्रभाव इनपुट सिगनल में ऐसे परिवर्तन हो कि प्रवर्धक की कुल निर्गत वोल्टेज में कमी आ जाए तब यह ऋणात्मक पुनः निविष्ट कहलाता है। ऋणात्मक पुनः निविष्ट में पुनः निविष्ट वोल्टेज तथा इनपुट सिगनल वोल्टेज परस्पर विपरीत कला में होते हैं।
(ब)
Hartley Oscillator एक LC Oscillator होता है। इसमें दो Inductor और एक Capacitor Parallel में जुड़ा होता है।

Advantage – 1. इस Oscillator को बहुत आसानी से बहुत अधिक Wide Range में Vary करा सकते हैं।
2. यह few Hz से Several Hz तक व्चतंजम होता है।
(द)
हानिरहित L-C परिपथ में क्षणिक धारा जब AC स्रोत से उत्तेजित होता है, तो अनडैम्पेड साइन तरंग होता है चूंकि LC परिपथ हानिरहित है इसलिए क्षणिक धारा अनडैम्पेड साइन तरंग है।
(स)
एक आदर्श व्च-।उच की पदचनज प्रतिबाधा अनन्त तथा आउटपुट प्रतिबाधा शून्य होती है।
(द)
उत्पादन इकाई के उत्तेजन सुरक्षा के लिए ऑफसेट म्हो रिले का उपयोग किया जाता है।
1. प्राइममूवर के लिए रिवर्स शक्ति रिले का उपयोग किया जाता है।
(स)
(द)
क्लिस्ट्रॉन एम्पलीफायर में वोल्टेज वेग मॉडूलेशन उत्पन्न करता है एन्टीना में दी जाने वाली समस्त त्थ् चैनल की अन्तिम स्टेज द्वारा निर्धारित होती है। यह सामान्यतः पुशपुल टाइप वर्ग-C ट्यून्ड पावर एम्पलीफायर होता है। यदि मॉडुलेटिंग वोल्टेज RF स्टेज के सप्लाई की जाती है तब यह High Level माडुलेशन कहलाता है। यदि मॉडुलेटिंग वोल्टेज अन्तिम स्टेज से पहले एम्प्लीफायर को दी जाती है जो एक Low Level एम्पलीफायर होता है।

Class-B पुश-पुल एम्प्लीफायर आउटपुट वेवफार्म में क्रास ओवर डिस्टार्शन होता है। Class-B पुश-पुल एम्पलीफायर में जब एक ट्रॉजिस्टर टर्न ऑफ होता है तो दूसरा ट्रॉजिस्टर तुरन्त टर्न ऑन नहीं हो पाता है। इसीलिए थोड़े समय के लिये दोनों ट्रॉजिस्टर ऑफ रहते हैं जिसकी वजह से आउटपुट करेन्ट zero हो जाता है। इसीलिए आउटपुट वेवफार्म का Shape sinsoidal नहीं हो पाता है। क्रासओवर डिस्टार्शन की class-AB पुश-पुल एम्प्लीफायर द्वारा हटाया जाता है।
(ब)
(प) धातु का हॉल गुणांक शून्य होता है।
(पप) n प्रकार अर्द्धचालक के लिए हाल वोल्टेज (VH) तथा हाल गुणांक (RH) ऋणात्मक होता है।
(पपप) P प्रकार अर्द्धचालक के लिए हाल वोल्टेज (VH) तथा हाल गुणांक (RH) धनात्मक होता है।
(पअ) धातु कि तुलना में अर्द्धचालक का हाल वोल्टेज अधिक होता है।
VH ∝ RH or VH ∝.
(अ) LED विकरण का उत्सर्जन करता है। यह प्रकाश उत्सर्जन डायोड होता है। यह एक P-N Junction diode ही है। इसको अग्र बायस करने पर फोटान अर्थात् प्रकाश उत्सर्जन करता है। यह LED का प्रचालन विभव मान लगभग (1.5 v से 5v) तक अर्थात् बहुत कम Volt पर प्रचालित होती है।
(स)
किसी अर्धचालक में जानबूझकर अशुद्धियों को मिलाने की क्रिया को डोपिंग कहते है। अर्धचालक के प्रायोगिक दृष्टि से उपयोगी बनाने के लिए अशुद्धि मिलाई जाती है ये अशुद्धियाँ पाँच अथवा तीन संयोजकता वाली होती है। अर्धचालक में अशुद्धियाँ मिलाने की क्रिया डोपिंग कहलाती है। अशुद्धि मिलाने पर प्राप्त अर्धचालक एक्सट्रॅजिक अर्धचालक कहलाता है।
(ब)
σ = (nμn ़ pμp)ु
= (3800 ़1800)×2.5×1013×1.6×10.19
= (5600)×2.5×1.6×106
= 0.0224 S/cm
(द)
पिन डायोड एक प्रकार का PN डायोड होता है इसकी डोपिंग उच्च होती है जिसके कारण पश्च अभिनत में इसका डिप्लेशन क्षेत्र बढ़ जाता है। एक पिन डायोड में बहुत उच्च डोप्ड P और बहुत उच्च डोप्ड N के बीच इन्ट्रिन्जिक अर्धचालक सैण्डविच रहता है।
इनका प्रयोग RF स्विचिंग, फोटो डिटेक्टर, फास्ट स्विचिंग, उच्च आवृत्ति (GHz) स्विचिंग के लिए किया जाता है।
(द)
तुल्यकाली जनरेटर के टर्मिनल पर दोष है, तो दोष धारा अधिकतम होने के लिए दोष का प्रकार लाइन से भू-दोष होना चाहिए। लाइन से भू-दोष में तीनों अनुक्रम धारा का मान समान होगा। तथा दोष धारा क्रम धारा कि 3 गुना होती है।

(स)
च्छ जंक्शन में बाहरी वोल्टता के बिना, एक्सेप्टर और डोनर आयनो के बीच उत्पन्न विद्युत क्षेत्र बैरियर कहलाता है। ।बबमचजवत तथा क्वदवत आयन के आवेश के कारण सन्धि पर एक विद्युत क्षेत्र स्थापित हो जाता है। इस विद्युत क्षेत्र को बैरियर कहा जाता है। इस विद्युत क्षेत्र की विभव के कारण ही सन्धि पर विसरण की क्रिया समाप्त होने के पश्चात् इलेक्ट्रॅन तथा होल्स सन्धि को पार नहीं कर सकते। यह विभव बैरियर वोल्टेज कहलाता है।
(द)
डायोड क्1 ऑफ स्थिति में होगा क्योंकि कोहनी वोल्टेज (Knee Voltage) डायोड क्1 का रोधिका विभव -2V है अतः अग्रअभिनति को वह न्यूनतम वोल्टता होती है जब इस स्थिति में डायोड D1 का चालन प्रारंभ होता है इससे कम अग्र वोल्टता -2V पर डायोड D1 में चालन नहीं होगा।
तथा D2 डायोड ऑन स्थिति में होगा।
(ब)
डार्क क्षरण धारा वह धारा है, जो फोटो डायोड के द्वारा बढ़ती है। जिससे प्रकाश डिटेक्टर का प्रयोग नहीं किया जाता है। फोटो डायोड को ऐसे पारदर्शक प्लास्टिक कवर में बन्द किया जाता है, जिससे P-N जंकशन के एक ओर प्रकाश आने के लिए कुछ स्थान छोड़ दिया गया हो। प्लास्टिक कवर को छोड़कर शेष स्थान पर काला पेंट कर दिया जाता है।
(ब)
ट्रांजिस्टर के CB विन्यास में इनपुट प्रतिरोध न्यूनतम होता है तथा ब्ब् विन्यास में इनपुट प्रतिरोध हाई होता है।
S.N Characteristic Common
base Common
emitter Common
collector
Input
resistance Low (about 100Ω) Medium (about 750Ω) Very high (about 750Ω)
Output resistance Very (about 450kΩ) High (about 45kΩ) Low (about 50Ω)
Voltage gain about 150 about 500 less then 1
Applications For high frequency application For audio frequency applications for impedance matching
(स)
(ब)
(अ)
(द)
क्लॉस C प्रवर्धक एक ऐसा प्रवर्धक है जहाँ सक्रिय तत्व इनपुट सिग्नल के अर्द्ध चक्र से कम के लिए आउटपुट देते हैं, इनका चालन कोण (Conduction angle) 180° से कम होता है लगभग 90° से 150।
(ब)
जब MOSFET – स्वींच ‘ON’ रहता है तो वह हमेशा C (Capacitor) जैसा काम करता है, क्योंकि MOSFET का प्रयोग VCO (Voltage controlled amplifier) में किया जाता है और इसमें छवपेम बहुत कम होता है।
(स)
गेट वोल्टता VGS, 0 वोल्ट्स के समान रहने पर N-चैनल में ड्रेन धारा अधिकतम रहता है।
ड्रेन अभिलक्षण VDS एवं ID सम्बन्ध दर्शाते हैं, जबकि VGS को पैरामीटर माना गया है अर्थात प्रत्येक अभिलक्षण के लिए एक विशेष मान पर स्थिर है अर्थात् VGS = 0 = VDS  = 0
(ब)
CMOS की प्रचालन वोल्टेज रेंज अधिक है। यह ़3V से ़15V सप्लाई वोल्टेज तक कार्य कर सकता है। CMOS को IC तथा चिप पर बड़ी सरलता से फैब्रिकेट किया जा सकता है।
(ब)
माइक्रोइलेक्ट्रानिक सर्किट बनाने वाले इंटरकनेक्शन के लिए उच्च चालकता के साथ धातु का व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है। मेटालिजेशन वफर की सतह पर धातु की एक परत को जोड़ने की प्रक्रिया है।
(स)