संवेदांग किसे कहते हैं ? sensory organ in hindi Neuroepithelial receptors एपीथिलियम ग्राही

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एपीथिलियम ग्राही संवेदांग किसे कहते हैं ? sensory organ in hindi Neuroepithelial receptors ? 

संवेदांग (sensory organ) : संरचना और तंत्रिका कोशिकाओं से सम्बन्ध के आधार पर कोशिकाएं तीन प्रकार की होती है :-

  • Neuroepithelial receptors : इसमें संवेदी कोशिकाएं रूपांतरित तंत्रिका कोशिकाएँ होती है | जिनके कोशिका काय या साइटोन संवेदी सतह के नजदीक परिधीय भाग में पाए जाते है और लम्बे एक्सोन CNS तक विस्तारित होते हैं |

अकशेरुकियों में मुख्यतः इस तरह के ग्राही होते है | कशेरुकियों में केवल घ्राण एपिथिलियम में इस तरह के ग्राही होते हैं |

  • एपीथिलियम ग्राही : इसमें संवेदी कोशिकाएं संवेदी सतह की एपिथिलियम कोशिकाओं का रूपान्तरण होती है | ये न्यूरोन के डेन्ड्राइटस से सम्बन्धित होते है , जिसके कोशिकाकाय अधिकांश बाहर की तरह CNS के समीपस्थ स्थित होते है | संवेदी कोशिकाएं आवेग को सिनेप्टिक अंतराल के आर पार संवेदी तंत्रिका तंतुओं तक स्थानान्तरित करते हैं | स्वाद कलिका (= gustatory receptors) , अंतकर्ण का कोक्लिया और आँख का रेटिना एपिथिलियम ग्राही के उदाहरण है | स्वाद कलिका और काक्लिया में ग्राही कोशिका worn out होती है परन्तु रेटिना में नहीं और नियमित रूप से पास वाली एपिथिलियम कोशिका से विस्थापित होती है |
  • तंत्रिकीय ग्राही : इसमें कूट द्विध्रुवीय तंत्रिका कोशिकाएं होती है जिसमें से प्रत्येक इसके एकल मुक्त पृथक सिरे पर प्रत्यक्ष उद्दीपन ग्रहण करते है | लम्बे द्रुमाक्षीय प्रोप्रियोसेप्टर जैसे (कंकालीय पेशी , संधि और टेन्ड्रोन में सूक्ष्म ग्राही) तंत्रिकीय ग्राही है | कोशिका काय CNS के बाहर कपाल और ganglia में स्थित होते है | कुछ स्थानों पर लम्बे डेंड्राइटस के अंतिम मुक्त संवेदी सिरे विशिष्टीकृत परन्तु उत्तेजनशीलता रहित , मीर्जोडर्मल और एक्टोडर्मल ऊतक से सम्बन्धित अथवा घिरे रहते है |

ग्राही (receptors) का सामान्य वर्गीकरण : ग्राही अन्य तरीके से भी वर्गीकृत किया जा सकते है इन्हें mechanoreceptors (सम्पर्क दाब के द्वारा उत्तेजनशील ) , chemoreceptors (रासायनिक परिवर्तन द्वारा उत्तेजनशील ) , thermoreceptors (तापमान में परिवर्तन से उत्तेजनशील) , Osmoreceptors (परासरण दाब में परिवर्तन से उत्तेजनशील) आदि उद्दीपन प्राप्ति के प्रकार के आधार पर वर्गीकृत किये गए है |

अन्य वर्गीकरण में आंतरिक ग्राही (interoreceptors) , स्वाम्यग्राही और exteroreceptors को उनकी स्थिति के आधार पर वर्गीकृत किया गया है –

  • Interoreceptors (= visceral receptors) : इसमें आंतरिक अंगों और रक्त वाहिनियों की भित्ति में प्रचुरता से बिखरे हुए तंत्रिका ग्राही की संवेदी तंत्रिकाओं के सिरे (endings) सम्मिलित है | ये गाँठ , लूप , वलय और tendril जैसे नग्न तंत्रिका (सभी आंतरिक अंगों की भित्ति में) Lamellated corpuscles (ह्रदय , रक्त वाहिनी की पेरिटोनियम में) और arborized terminals (एंडोकार्डियम संयोजी ऊतक और पेशी की एंडोमाइसियम में) के रूप में पायी जाती है | मुख्यतया तंत्रिकाओं के सिरे visceral pain (= algesireceptors) के ग्राही होते है | रक्त वाहिनी की भित्ति में रसायन ग्राही और दाब ग्राही भी सम्मिलित होते है |
  • स्वाम्यग्राही (proprioreceptors) : शरीर की प्रत्येक एच्छिक क्रिया में कंकालीय पेशियों का तात्क्षणिक संकुचन शामिल है | अनेक पेशियों के साथ समन्वित संकुचन करने के लिए सूक्ष्म दैहिक ग्राही कंकालीय पेशी संधि , डेंड्रान और लिगामेंट में बिखरे रहते है | ये स्वाम्यग्राही कहलाते है | अन्तकर्ण के ग्राही vestibular receptors और statoreceptors भी स्वाम्यग्राही ही माने जाते है |
  • Exteroreceptors : बाह्य उद्दीपनों को ग्रहण करने के लिए शरीर की सतह पर अथवा नजदीक दैहिक ग्राही स्थित होते है | ये सामान्य , त्वचीय ग्राही और विशिष्ट संवेदांग अथवा ग्राही में विभाजित होते है |

Cutaneous sense organs or general receptors

स्तनियों में सभी त्वचीय संवेदांग संवेदी न्यूरोन के नग्न और सम्पूट युक्त डेंड्राइटिक सिरे होते हैं | कार्यात्मक रूप से ये चार श्रेणियों में विभक्त होते हैं –

  • pain receptors (Algesireceptors) : इसमें त्वचा की डर्मिस और एपिडर्मिस में शाखित और नग्न सिरे शामिल होते है | दर्द के अतिरिक्त संभवतया ये खुजली और जलन के लिए भी संवेदी होते हैं |
  • स्पर्श ग्राही (Tangoreceptors) : ये रोम पुटिका के ऊपर पाए जाने वाले शाखित और नग्न सिरे होते है | होंठ की त्वचा , चूचक , पेनिस , हथेली , तलवा , अंगुली आदि में नजदीकी संयोजी ऊतक द्वारा बेलनाकार स्पर्श कणिका का निर्माण होता है जिसे meissner’s corpuscle कहते हैं | आयु बढ़ने पर इन कणिकाओं की संख्या घटती है | पानी में मछली के संवेदी अंग पाशर्व में रोम पुटिका में दाब तरंग और प्रवाह में कार्य संपादित करते हैं | इन्हें rheoreceptors भी कहते हैं |

स्पर्शाणुओं के अन्य प्रकार में Merkel’s discs को सम्मिलित करते हैं जो संभवतया , मानव , सूअर और अन्य स्तनियों की रोम पुटिका और रोम रहित त्वचा की एपिडर्मिस में पाए जाते है | ये फूले हुए कप जैसी चकती के रूप में छोटे समूह में पाए जाते हैं |

Pacinian corpuscles : ये हथेली की त्वचा की डर्मिस की गहरी परत में , तलवे में , अंगुली , बाह्य जननांग , चूचक , भुजा , गर्दन जोड़ आदि में पाए जाते हैं | ये संरचना में अत्यधिक लाक्षणिक , अंडाकार , गोलाकार और अनियमित कुण्डलाकार होते हैं | ये कणिका कम्पन्न , शक्तिशाली दबाव और सम्पर्क के द्वारा उत्तेजित हो जाते हैं |

नर में glans penis की त्वचा और मादा में कलाइटोरिस में विशिष्ट प्रकार के बल्ब स्पर्श कणिका होती है जिन्हें genital corpuscles कहते हैं |

  • ताप ग्राही (Thermoreceptors) : रोम रहित त्वचा की डर्मल पैपिला जैसे आँख की conjunctiva , external genitals आदि | अग्रबाहु की त्वचा में रोम पुटिका और अन्य निश्चित स्थानों पर छोटे , गोलाकार और अंडाकार बल्ब जैसे ग्राही उपस्थित होते हैं , जिन्हें bulbs of Krause कहते हैं | प्रत्येक बल्ब में संपुट युक्त सीधे , कुंडलित और शाखित माइलिन युक्त संवेदी तंत्रिका तन्तु होते हैं | ये कणिका ठंड द्वारा उत्तेजित होते है अत: इन्हें frigidoreceptors भी कहते हैं |

End organs of Ruffini डर्मिस की गहरी परत में होते हैं जिनमें संवेदी न्यूरोन के संपुट युक्त डेंड्राइट होते हैं | ये ऊष्मा के संवेदना ग्राही (caloreceptors) होते है |

  • Vibroreceptors : खरगोश में गलमुच्छे (vibrissae) की पुटिका के ऊपर नग्न संवेदी सिरे उपस्थित होते हैं और गलमुच्छे में सूक्ष्म कंपन द्वारा उत्तेजित हो जाती है अत: इन्हें vibroreceptors कहते हैं |