रदरफोर्ड प्रकीर्णन प्रयोग या रदरफोर्ड का अल्फा (α) प्रकीर्णन प्रयोग (rutherford alpha scattering experiment)

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(rutherford alpha scattering experiment in hindi) रदरफोर्ड प्रकीर्णन प्रयोग या रदरफोर्ड का अल्फा (α) प्रकीर्णन प्रयोग : थॉमसन का परमाणु मॉडल आने के बाद रदरफोर्ड ने इसकी सत्यता के लिए और परमाणु के मॉडल का अध्ययन करने के लिए एक प्रयोग किया जिसे रदरफोर्ड प्रकीर्णन प्रयोग कहते है।

परमाणु मॉडल समझाने के लिए रदरफोर्ड ने “सोने की पन्नी पर प्रयोग” किया और यहाँ हम इस सोने की पन्नी पर किये गए प्रयोग को , निष्कर्ष आदि को विस्तार से अध्ययन करेंगे।

रदरफोर्ड प्रकीर्णन प्रयोग

रदरफोर्ड ने सोने की एक पतली पन्नी ली और इस पर अल्फा (α) कणों की बौछार की , यहाँ सोने की पन्नी की मोटाई लगभग 5 ×10-7 मीटर रखी गयी और अल्फा कणों के लिये पोलोनियम, यूरेनियम जैसे पदार्थों का उपयोग किया गया।
जब अल्फा कणों को इस सोने की पतली पन्नी से गुजारा गया तो अल्फा कणों में विक्षेपण उत्पन्न हुआ या कहे कि इस पन्नी में अल्फा कणों के प्रकीर्णन का अध्ययन रदरफोर्ड ने किया और निम्न प्रेक्षण प्राप्त हुए।
  • अधिकांश अल्फा कण सीधे गुजर गए।
  • कुछ अल्फा कण कम विचलित हुए अर्थात कम कोण पर अपने मार्ग से विचलित हो गए।
  • लगभग 10000 कणों में से एक कण 90 डिग्री पर विचलित हो गए।
  • बहुत अधिक कणों में से एक अल्फा कण 180 डिग्री पर विचलित हो गया अर्थात जिस दिशा से आपतित किया गया उसी दिशा में लौट आया।

निष्कर्ष :

 थॉमसन के परमाणु मॉडल के आधार पर यह अनुमान लगाया जा रहा था कि सभी अल्फा कण सीधे गुजर जायेंगे लेकिन ऐसा नहीं हुआ और अपने इस प्रयोग के आधार पर उन्होंने निम्न निष्कर्ष निकाले।
  • परमाणु का अधिकतर भाग खोखला होता है इसलिए अधिकतर अल्फा कण सीधे निकल जाते है।
  • चूँकि अल्फा कण धनावेशित कण होते है और इनकी विचलन का कारण यह बताया कि परमाणु के केंद्र में परमाणु का सम्पूर्ण धनात्मक आवेश विद्यमान रहता है जिसके कारण अल्फा कण विचलित हो जाते है और जो जितना नाभिक के पास होता है वह उतना ही अधिक विचलित होता है।
  • नाभिक का आकार परमणु के आकार की तुलना में बहुत कम होता है इसलिए जो अल्फा कण इस पर गिरे वे वापस लौट आये।