रूपायन संस्थान जोधपुर के संस्थापक कौन थे | रूपायन संस्थान बोरुंदा की स्थापना किसने की कहाँ है

By   March 5, 2021

rupayan sansthan borunda in hindi रूपायन संस्थान जोधपुर के संस्थापक कौन थे | रूपायन संस्थान बोरुंदा की स्थापना किसने की कहाँ है ?

प्रश्न: स्वर्गीय डॉ. कोमल कोठारी
उत्तर: रूपायन संस्थान (बोरून्दा जोधपुर) के संस्थापक डॉ. कोमल कोठारी ने कलाकारों, लोकसंगीत, लोक वाद्य, लोकगायन एवं लोक साहित्य को अन्तर्राष्ट्रीय मंच पर लाने का उल्लेखनीय कार्य किया है।

प्रश्न: मध्यकालीन राजस्थान में भक्ति संतों एवं लोकदेवताओं का वर्णन कीजिए। 
प्रश्न: प्रो. मदनमोहन शर्मा
उत्तर: इनका जन्म 1 मई, 1937 को जोधपुर में हुआ। इन्होंने अपनी शिक्षा जोधपुर, बम्बई और केम्ब्रिज विश्वविद्यालय से प्राप्त की तथा 27 वर्ष की उम्र में बम्बई विश्वविद्यालय में डिपार्टमेन्ट ऑफ कैमिकल टेकनोलॉजी में प्रोफेसर नियुक्त हुए। उन्होंने निम्नलिखित सिद्धान्त और व्यवहार. प्रतिपादित किया – तरल रिएक्शन्स, गैस-तरल रिएक्शन्स, फेज ट्रांसफर कैटोलिसिस माइक्रोफेज कैटोलिसिस आदि। इनके 235 शोध पत्र प्रकाशित हुए। रसायन उद्योग के परामर्शदाता के रूप में भारत सरकार के सलाहकार के रूप में और सार्वजनिक एवं निजी क्षेत्र की कम्पनियों के निदेशक के रूप में उन्होंने योगदान किया।
16 अप्रैल, 2010 को भारत सरकार ने इन्हें फैलो चुना है। 1990 में डॉ. मनमोहन शर्मा फैलो ऑफ रॉयल सोसाइटी लंदन (एफ.आर.एस.) चुने गए। प्रो. शर्मा न केवल राजस्थान के वरन् भारत के पहले इंजीनियर थे जो एफ.आर.एस. चुने गए। इनके अलावा इन्हें लेवरहूमे मैडल ऑफ रॉयल सोसाइटी (एल.एम.आर.एस.), एस.एस.भटनागर प्राइज इन इंजिनियरिंग साइंसेज (1977), फिक्की अवार्ड (1981), विश्वकर्मा मैडल ऑफ द इंडियन नेशनल साइंसेज एकेडमी (आई.एन.एस.ए., 1985), जी.एम. मोदी अवार्ड, 1991, मेघनाथशाह मैडल (1994) पदम् भूषण (1987), पदम् विभूषण (2001) तथा ऑनरेरी डॉ. साइंसेज डिग्री फ्रॉम इंडियन इंस्टीट्यूट टेक्नोलॉजी, दिल्ली 2001 चुने गए। प्रो. शर्मा 1976 में फैलो आॅफ इंडियन नेशनल साइंस एकेडमी (आइ.एन.एस.) के लिए चुने गए।
प्रश्न: डॉ. वीरबाला भवसार और डॉ. कन्हैयालाल वर्मा
उत्तर: राजस्थान ललितकला अकादमी (जयपुर) की ओर से कला के क्षेत्र में लाइफ टाइम अचीवमेंट के लिए दिया जाने वाला राज्य का सर्वोच्च कला अलंकरण ‘कला विद्‘ 14 वर्ष पश्चात् (1999 में अंतिम बार) राज्यपाल माग्रेट अल्वा ने 2013 में चित्रकार डॉ. वीरबाला भवसार एवं डॉ. कन्हैयालाल वर्मा को प्रदान किया।
प्रश्न: बजरंगलाल ताखर
उत्तर: सीकर के ताखर ने एशियाड 2010 ग्वाग्झ में नौकायन की सिंगल रोईंग स्पर्धा में 2000 मीटर की दूरी 7 मिनट 04.78 सैकण्ड में तय कर सवर्ण पदक जीता। एशियाई खेलों के इतिहास में स्वर्ण पदक जीतने वाले बजरंग लाल ताखर प्रथम भारतीय रोवर बन गए हैं। इन्हें 64वें गणतंत्र दिवस पर पद्मश्री 2013 से सम्मानित किया गया है।
प्रश्न: एस. शकीर अली
उत्तर: 1993 के राष्ट्रीय अवार्ड से सम्मानित जयपुर के एस. शकीर अली को 64वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर मुगल एवं प्रशियन पेंटिंग में विशेषज्ञता हासिल करने के लिए पद्मश्री 2013 से सम्मानित किया गया है।
प्रश्न: डॉ. महावीर गोलेच्छा
उत्तर: राजस्थान मूल के डॉ. महावीर गोलेछा को नारिन्जिन नामक दवा की खोज व उसकी मस्तिष्कीय रोगों के इलाज में उपयोगिता के अनुसंधान के लिए विश्व के श्रेष्ठ 25 वैज्ञानिकों को दिए जाने वाले अल्झाइमर युवा वैज्ञानिक पुरस्कार-2012 से सम्मानित किया गया है। गोलेछा भारत सरकार के इंस्पायर फेलो हैं। लंदर स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में स्वास्थ्य नीति निर्धारण का प्रशिक्षण ले रहे गोलेछा को 9 अंतरराष्ट्रीय व 7 राष्ट्रीय अवार्ड मिल चुके हैं।
प्रश्न: निर्मोही व्यास
उत्तर: बीकानेर के नाट्य लेखक व रंगकर्मी निर्मोही व्यास (79) का लंबी बीमारी के बाद, 12 जनवरी, 2013 को बीकानेर में निधन हो गया। व्यास ने जीवन काल में 56 नाटक लिखे थे। अनामिका, समय के साये, शब्दों की बौछार, प्रतिशोध, भोळो भेरूं आदि नाटक अनेक स्थानों पर मंचित हुए और चर्चा में रहे। उन्हें रंगमच के सर्वोच्च पुरस्कार व अन्य पुरस्कारों से सम्मानित किया गया था।
प्रश्न: प्रेम भंडारी
उत्तर: अखिल भारतीय राजस्थानी मान्यता संघर्ष समिति के अंतरराष्ट्रीय संयोजक प्रेम भंडारी मायड़ भाषा राजस्थानी को मान्यता दिलाने के लिए अथक प्रयास कर रहे हैं।
प्रश्न: जस्टिस दलवीर भण्डारी
उत्तर: सूर्यनगरी निवासी जस्टिस दलवीर भण्डारी इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस में 2012-18 के लिए जज निर्वाचित हुए है। दो दशक बाद कोई भारतीय इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस में जज चुना गया है।
प्रश्न: मेहंदी हसन
उत्तर: लूणी (झंझन) निवासी एवं पाकिस्तान वासी प्रसिद्ध गजल सम्राट मेहंदी हसन का 13 जून, 2012 को इंतकाल हो गया। बेमिसाल गजल गायिकी ने उन्हें ‘खुदा की आवाज‘ कहलवाया। तेरी महफिल में लेकिन हम न होंगे, दिले नादान तुझे आदि इनकी प्रसिद्ध गजलें हैं।
प्रश्न: लिम्बाराम
उत्तर: अर्जुन अवार्डी, राजस्थान खेल रत्न (1994) से सम्मानित एवं भारतीय तीरदांजी संघ के प्रशिक्षक उदयपुर निवासी लिम्बाराम को 2012 में पदमश्री से सम्मानित किया गया।
प्रश्न: शाकर खान
उत्तर: ख्याति प्राप्त लोकवाद्य कमायचा वादक जैसलमेर निवासी शाकर खान मैरासी (हमीरा) को लोक संगीत के लिए कला क्षेत्र में वर्ष 2012 में पदमश्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।
प्रश्न: मोहनलाल कुम्हार
उत्तर: नाथद्वारा निवासी मोहन लाल कम्हार को लोक संगीत के लिए कला क्षेत्र में वर्ष 2012 में पदमश्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।
प्रश्न: फकीरा खान
उत्तर: बाड़मेर निवासी मांगणियार फकीरा खान को अन्तर्राष्ट्रीय लोक गायकी एवं सूफी गायकी के लिए वर्ष 2012 में राष्ट्रीय बिस्मल्लाह खान युवा पुरस्कार (2010) से सम्मानित किया गया है।
प्रश्न: फरीदुद्दीन डागर
उत्तर: उदयपुर निवासी फरीदुद्दीन डागर को उनकी ध्रूपद गायन शैली के लिए संगीत क्षेत्र में वर्ष 2012 में पदमश्री पुरस्कार सम्मनित किया गया है।
प्रश्न: कृपालसिंह शेखावत
उत्तर: ‘कलाविद‘, ‘पदमश्री‘ एवं ‘पदमभूषण‘ से सम्मानित सीकर के कृपालसिंह शेखावत भारतीय पारम्परिक कला के युग पुरुष एवं ब्ल्यू पॉटरी के पर्याय थे। इन्होंने ब्ल्यू पॉटरी में 25 रंगों का प्रयोग कर ‘कृपाल शैली‘ ईजाद की।