वाष्प दाब में आपेक्षिक अवनमन क्या है , वाष्प दाब का अवनमन , सूत्र (relative lowering of vapour pressure in hindi)

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(relative lowering of vapour pressure in hindi) वाष्प दाब में आपेक्षिक अवनमन क्या है , वाष्प दाब का अवनमन , सूत्र : यह किसी विलयन का अणु संख्यक गुण है जिसका अध्ययन हम आगे करने जा रहे है।

वाष्प दाब : जब किसी द्रव को ताप दिया जाता है तो यह द्रव और निश्चित ताप पर द्रव अवस्था से वाष्प अवस्था में परिवर्तित होने लग जाता है , द्रव और वाष्प की साम्यावस्था की स्थिति में वाष्प द्वारा द्रव की सतह पर डाला गया दाब , द्रव का वाष्प दाब कहलाता है। किसी द्रव का वाष्पदाब मान का द्रव की प्रकृति तथा द्रव को दिए गये ताप पर निर्भर करता है।
वाष्प दाब में आपेक्षिक अवनमन : जब किसी विलायक में कोई अवाष्पशील पदार्थ मिला दिया जाता है तो बने विलयन का वाष्प दाब , शुद्ध विलायक से कम होता है।
इसे हम निम्न उदाहरण द्वारा समझ सकते है –
माना एक शुद्ध द्रव है , जब इसे ताप दिया जाता है तो निश्चित ताप पर यह वाष्प अवस्था में बदलने लगता है और इस द्रव की वाष्प साम्यावस्था की स्थिति में द्रव की तरह पर दाब डालती है , चूँकि यह शुद्ध अवस्ता में है इसलिए द्रव की सतह पर केवल विलायक के कण उपस्थित है।

लेकिन जब इसमें कोई अवाष्पशील पदार्थ मिला दिया जाता है और इसे उतना ही ताप दिया जाता है तो हम पाते है कि इसका वाष्पदाब कम हो जाता है क्यूंकि इसकी सतह पर अब अवाष्पशील पदार्थ के कण भी उपस्थित है इसलिए वाष्प कम बनती है और इसलिए इस विलयन की सतह पर वाष्प द्वारा डाला गया दाब का मान भी कम हो जाता है।

अर्थात शुद्ध अवस्था में वाष्प दाब का मान अधिक होता है लेकिन अवाष्पशील विलेय घोलने पर इसका वाष्पदाब कम हो जाता है या इसके वाष्प दाब में कमी हो जाती है या इसके वाष्प दाब में अवनमन हो जाता है , इसे ही वाष्प दाब का आपेक्षिक अवनमन कहते है।
वाष्पदाब में आपेक्षिक अवनमन का मान मिलाये गए अवाष्पशील पदार्थ की सांद्रता या मात्रा पर निर्भर करता है तथा इसकी प्रकृति पर निर्भर करता है , चूँकि यह विलयन में उपस्थित विलेय की संख्या या सांद्रता पर निर्भर करता है इसलिए इस गुण को अणु संख्यक गुण कहते है।

गणितीय सूत्र

अब हम गणितीय रूप देखते है कि किस प्रकार वाष्प दाब का आपेक्षिक अवनमन होता है और इसके लिए सूत्र क्या होता है –
माना एक विलयन है जिसमें विलायक के मोल भिन्न x1 है , तथा विलेय के मोल भिन्न x2 है। जब विलायक शुद्ध अवस्था में होता है तो इसका वाष्प दाब p1o है , लेकिन चूँकि यहाँ यह शुद्ध अवस्था में नही है इसलिए विलायक का वाष्पदाब p1 है जो निम्न सूत्र द्वारा दिया जाता है –
p1=x1p1o
माना शुद्ध विलायक में विलेय पदार्थ मिलाने से वाष्प दाब में आपेक्षिक अवनमन हो जाता है जो ∆p1 है तो इसे निम्न प्रकार व्यक्त किया जा सकता है –
वाष्प दाब में आपेक्षिक अवनमन = शुद्ध विलायक का वाष्प दाब – विलयन में विलायक का वाष्प दाब
∆p1=p1o-p1
∆p1=p1o-p1ox1