रासायनिक बल गतिकी : ऊष्मागतिकी , रासायनिक साम्य , अभिक्रिया के प्रकार , अभिक्रिया का वेग (rate of reaction)

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रासायनिक बल गतिकी : रसायन विज्ञान की वह शाखा जिसमे रासायनिक अभिक्रियाओ के वेग , वेग को प्रभावित करने वाले कारक तथा अभिक्रियाओं की क्रियाविधि का अध्ययन किया जाता है , रासायनिक बलगतिकी कहलाती है।

रासायनिक अभिक्रिया के लिए आवश्यक सूचनाओ की प्राप्ति :-
1. ऊष्मागतिकी : ऊष्मा गतिकी यह बताती है कि कोई रासायनिक अभिक्रिया संभव होगी या नहीं , इसके अनुसार ,
यदि  △G = -Ve तो अभिक्रिया संभव होगी।
△G = +Ve तो अभिक्रिया नही होगी।
△G = 0 तो अभिक्रिया साम्य अवस्था में होगी।
2. रासायनिक साम्य : रासायनिक साम्य यह बताता है कि अभिक्रिया किस सीमा तक होगी।
3. रासायनिक बलगतिकी : यह किसी रासायनिक अभिक्रिया के वेग तथा अभिक्रिया के साम्यावस्था में पहुँचते में लगे समय को बताती है।

अभिक्रिया के प्रकार

यह तीन प्रकार की होती है।
(i) तीव्र या तात्क्षणिक अभिक्रियाएँ : ऐसी अभिक्रियाएँ जो अति-अल्प समय (10-10
से 10-16 second) में पूर्ण हो जाती है , तीव्र या तात्क्षणिक अभिक्रियाएँ कहलाती है।
इन अभिक्रियाओ की रासायनिक बल गतिकी का अध्ययन नहीं किया जा सकता है।
अम्ल -क्षार अभिक्रियाएँ तीव्र अभिक्रिया है।
AgCl का अवक्षेप बनना भी तीव्र अभिक्रिया है।
AgNO3 + NaCl → AgCl + NaNO3
(ii) मंद अभिक्रियाएँ : ऐसी अभिक्रियाएँ जो मापन योग्य समय में पूर्ण होती हो , मन्द अभिक्रियाएँ कहलाती है।
इन अभिक्रियाओ की रासायनिक बल गतिकी का अध्ययन किया जा सकता है।
उदाहरण :
एस्टर का अपघटन
CH3COOC2H5 + NaOH → CH3COONa + C2H5-OH
सुक्रोज का अपघटन
C12H22O11 + H2O → C6H12O6 + C6H12O6
सूर्य प्रकाश रासायनिक अभिक्रिया
(iii) अतिमंद अभिक्रियाएँ : ऐसी अभिक्रियाएँ जो कुछ दिनों , कुछ महीनो , कुछ वर्षो में पूर्ण होती हो , अतिमन्द अभिक्रियाएँ कहलाती है।
इन अभिक्रियाओ की रासायनिक बलगतिकी का अध्ययन भी परिशुद्धता से नहीं होता है।
उदाहरण : जैव ईंधन का बनना
नाभिकीय क्षय
चट्टानों का अपक्षय
कार्बन का हीरे में रूपान्तरण
लोहे का संक्षारण
भूपर्पटी में परिवर्तन

अभिक्रिया का वेग (rate of reaction)

जब कोई रासायनिक अभिक्रिया होती है तो उसमे अभिकारकों की सांद्रता घटती है एवं उत्पादों की सांद्रता बढती है अर्थात समय के साथ साथ अभिकारकों या उत्पादों की सान्द्रता में परिवर्तन होता है।
अत: प्रति इकाई सान्द्रता समय में अभिकारको या उत्पादों की सांद्रता में होने वाला परिवर्तन ही उस रासायनिक अभिक्रिया का वेग कहलाता है।
अभिक्रिया का वेग = अभिकारकों / उत्पादों की सांद्रता में होने वाला परिवर्तन/परिवर्तन में प्रयुक्त समय
लेकिन अभिक्रिया वेग अभिकारको की सांद्रता के समानुपाती होता है अर्थात अभिकारको की सांद्रता घटने से अभिक्रिया वेग घटता है।
प्रारम्भ में अभिक्रिया वेग तेजी से घटता है फिर धीरे धीरे घटता है और अन्त में जाकर वेग स्थिर हो जाता है लेकिन अभिक्रिया वेग कभी शून्य नहीं होता क्यूंकि अभिक्रिया कभी पूर्ण नहीं होती है।
सांद्रता समय वक्र
वेग-समय वक्र

अत: अभिक्रिया -वेग समय वक्र से स्पष्ट है कि समय के साथ साथ अभिक्रिया वेग में परिवर्तन होता है अत: इस अभिक्रिया वेग को औसत अभिक्रिया वेग माना जाता है।
औसत अभिक्रिया वेग = ±△C/△t
△C = (C2 – C1) = अभिकारक / उत्पाद की सांद्रता में सूक्ष्म परिवर्तन
△t = (t2 – t1) = समय में सूक्ष्म परिवर्तन
जैसे R→P अभिक्रिया के लिए औसत अभिक्रिया वेग –
(i) यदि अभिकारको की सांद्रता ले तो -Ve चिन्ह लगाते है क्योंकि अभिकारको की सान्द्रता घटती है।
अत: औसत अभिक्रिया वेग = (-△R/△t)
(ii) यदि उत्पादों की सांद्रता ले तो +Ve चिन्ह लगाते है क्योंकि उत्पाद की सान्द्रता बढती है।
अत: औसत अभिक्रिया वेग = (+△P/△t)
औसत अभिक्रिया वेग को अभिकारक या उत्पाद के सान्द्रता समय वक्र में निम्न प्रकार दर्शाते है –
1. अभिकारक का सांद्रता समय वक्र :-

औसत अभिक्रिया वेग = -[R2-R2]/[t2-t1] = (-△R/△t)
2. उत्पाद का सांद्रता समय वक्र :-

औसत अभिक्रिया वेग = +[P2-P1]/[t2-t1]  = (+△P/△t)
अभिक्रिया वेग व स्टाइकियोमीट्रिक सम्बन्ध 
कोई रासायनिक अभिक्रिया में उपस्थित किसी भी अभिकारक या उत्पाद अणु के आधार पर अभिक्रिया वेग ज्ञात कर सकते है लेकिन इसके लिए उस अभिक्रिया की संतुलित समीकरण की आवश्यकता पड़ती है।
जैसे निम्न अभिक्रियाओ के लिए अभिक्रिया वेग के सूत्र इस प्रकार है –
(i) A + B → C + D
अभिक्रिया वेग = △[A]/ △t = – △ [B]/ △t = + △[C]/ △t  = + △[D]/ △t
यहाँ A व B के विलुप्त होने की दर C व D के बनने की दर के बराबर है।
(ii)  2A →  B + C

अभिक्रिया वेग =  -1/2 △[A]/ △t = +△[B]/ △t = +△[C]/ △t
यहाँ A के विलुप्त होने की दर B व C के बनने की दर से दुगुनी है।

तात्क्षणिक वेग

किसी रासायनिक अभिक्रिया में समय के साथ अभिक्रिया वेग में परिवर्तन होता है अत: यह अभिक्रिया वेग औसत अभिक्रिया वेग होता है लेकिन इसे वास्तविक वेग नहीं माना जाता है।
अत: एक निश्चित समय या एक निश्चित क्षण t पर अभिक्रिया का वास्तविक वेग ही तात्क्षणिक वेग कहलाता है।
तात्क्षणिक वेग = ±dC/dt
dC = अभिकारको या उत्पादों की सांद्रता में अन्नत सूक्ष्म परिवर्तन।
dt = समय में अत्यंत सूक्ष्म परिवर्तन।
लेकिन प्रायोगिक रूप से समय में अनंत सूक्ष्म परिवर्तन संभव नहीं है अत: तात्क्षणिक वेग को निम्न प्रकार करते है –
एक निश्चित समय t पर अभिकारक या उत्पाद का सान्द्रता समय ग्राफ जिस बिंदु पर घटता है उस बिंदु से स्पर्श रेखा खींचकर उसकी ढाल ज्ञात करके तात्क्षणिक वेग ज्ञात कर सकते है।
आरम्भिक वेग : t = 0 समय पर अभिक्रिया के वेग को आरंभिक वेग कहते है।
आरम्भिक वेग = -dC/dt
t = 0 समय पर अभिकारक का सांद्रता -समय ग्राफ जिस बिंदु पर घटता है उस बिन्दु से स्पर्श रेखा खीचकर उसकी ढाल ज्ञात करके आरम्भिक वेग ज्ञात कर सकते है।
अभिक्रिया वेग की इकाई :- अभिक्रिया वेग = △C/△t = सांद्रता/समय  = सांद्रता समय-1
यदि सान्द्रता मोल/लीटर में ले व समय सेकंड में ले तो इकाई अभिक्रिया वेग की इकाई = मोल लीटर-1 सेकंड-1
गैसीय अभिक्रिया के लिए =
अभिक्रिया वेग की इकाई = Atm/सेकंड = atm.S-1