हिंदी माध्यम नोट्स
रामायण का महत्व क्या है , रामायण से हमें क्या सीख मिलती है सामाजिक आवश्यकता ramayan importance in hindi
ramayan importance in hindi रामायण का महत्व क्या है , रामायण से हमें क्या सीख मिलती है सामाजिक आवश्यकता ?
उत्तर : रामायण की विलक्षण सांस्कृतिकता का जादू ही है कि उच्च और निम्न तथा बुद्धिजीवी व आम आदमी ने इसे पूर्णतः आत्मसात किया है और सदियों से यह महाकाव्य राष्ट्र की जीवनधारा में हृदय की भांति स्पंदित हो रहा है।
रामायण भारतीयता की सुंदर और सुस्पष्ट अभिव्यक्ति है। जिसमें आदर्शवाद की बुनियाद पर मानव चरित्र की शुभ और अशुभ वृत्तियों का संघर्ष दिखाया गया है। एक ओर मानववाद सद्गुण और नैतिकता का चित्रण है तो दूसरी और अमानुषिक अंहकार, उल्लासमय हिंसा की अराजकता और अनैतिकता का चित्रण है, जिसमें मानवता एवं नैतिकता की विजय दिखाई गई है जो आज भी भारतीय जनजीवन के मस्तिष्क में व्याप्त है।
रामायण में बल, सज्जनता, विश्वासपात्रता, भावुकता और आत्मोत्सर्ग के परिप्रेक्ष्य में राजा-प्रजा, पति-पत्नी, माता-पुत्र, बंध-बंधु और मित्र-मित्र के सम्बन्धों को राम, सीता, भरत, हनुमान, लक्ष्मण, सुग्रीव के पात्रों की दिव्यता में महत्व प्रदान किया गया है। यहां त्याग एवं उत्तरदायित्व की भावना दर्शायी गयी है जो आज भी भारतीय जनजीवन में व्याप्त है। भारतीय समाज के चरित्र में राजा द्वारा मर्यादा पुरुषोत्तम का आदर्श राजनीतिक संस्कृति के महत्व को प्रतिबिम्बित करता है। शबरी के बेर वर्ण-व्यवस्था की, सांस्कृतिक अनु-उत्कृष्टता पर वज्र बनकर टूटें। यह भारतीयों की समरसता के महत्व को सिद्ध करता है। उत्तर-दक्षिण संस्कृतियों का आत्मसंधिकरण, भाव और शक्ति, सामाजिक रचनाधर्मिता रामायण से ही महत्व प्राप्त कर सकी। आर्य-अनार्य संस्कृति का मिलन हुआ। इससे भारत में सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की रूपरेखा उभर कर सामने आयी।
इस प्रकार इसमें पित-भक्ति, पिताज्ञा, भ्रातृप्रेम, एक पत्नीव्रता, सतीव्रता नारी, भक्ति आदि वर्तमान में भी भारतीय समाज में जनसाधारण के विचारों एवं जीवन मूल्यों को प्रभावित किये हुए हैं। वर्तमान में समाज के मल्य और आदर्श रामायण पर आधारित हैं।
प्रश्न: प्राचीन भारतीय साहित्य में भारत की भौतिक आकृति एवं मौलिक एकता के दर्शन हो जाते हैं। इस कथन के पक्ष में प्रमाण दीजिए।
उत्तर: विभिन्न ग्रंथों में भारत की भौतिक आकृति का वर्णन मिलता है जो उसकी भौगोलिक एकता के ज्ञान का प्रमाण है। वराहमिहिर की वृहत्त संहिता भारत भूमि को कूर्म की आकृति का बताती है। पुराणों के भुवनकोष में इसे धनु आकृति का बताया है। जिसमें उत्तर भारत को धनुष का और दक्षिण को उसकी खींची हुई तीर की प्रत्यंचा की आकृति का बताया है। बौद्ध ग्रंथ दीर्घ निकाय में भारत देश की आकृति छकड़ें की भाँति बतायी है। जिसमें उत्तरी भारत को आयताकार तथा दक्षिण को छकड़े के संकीर्ण मुख की भाँति बताया गया है। महाभारत में इसे समभुजाकार त्रिभुज की भाँति बताया गया है। भारत की भौगोलिक विविधता में सांस्कृतिक एकता अधिक सुस्पष्ट रही। भाषा, साहित्य, सामाजिक तथा धार्मिक आदर्श इस एकता के प्रमुख माध्यम रहे हैं।
मौलिक एकता का दर्शन
भारतीय इतिहास के अति प्राचीन काल से हमें इस मौलिक एकता के दर्शन होते हैं। भारतीयों की प्राचीन धार्मिक भावनाओं एवं विश्वास से भी इस सारभूत एकता का परिचय मिलता है। यहां की 7 पवित्र नदियाँ, 7 पर्वत तथा 7 नगरिया देश के विभिन्न भागों में बसी हुई होने पर भी देश के सभी निवासियों के लिए प्राचीन काल से ही श्रद्धेय रही हैं। हमारे प्राचीन धार्मिक ग्रंथ वेद, पुराण, उपनिषद्, रामायण, महाभारत आदि का सर्वत्र सम्मान है। उत्तर से दक्षिण एवं पूर्व स पश्चिम तक सभी समयों में इन्हें अपना धर्मग्रंथ माना गया है। सम्पूर्ण देश में एक ही प्रकार के देवी-देवताओं जैसे शिव विष्ण, राम, गणेश, दुर्गा, पार्वती आदि की सर्वत्र पूजा की जाती है। हमारे धर्मशास्त्रों में जिस सामाजिक व्यवस्था का व मिलना है वह सर्वत्र एक ही समान है जैसे – वर्णाश्रम, पुरुषार्थ, विवाह, संस्कार आदि सभी कालों में सम्पूर्ण भारता समाज का आदर्श रहे हैं।
यद्यपि हमारे यहां हजारों भाषाएँ प्रचलित हैं जो सबसे बड़ी विविधता है। लेकिन दक्षिण से उत्तर तक या उत्तर से दक्षिण तक जितनी भी भाषाओं का विकास हुआ है उन सभी का उद्भव संस्कृत से हुआ अथवा संस्कृत से प्रभावित हैं।
प्राचीन भारतीय समय में जबकि आवागमन के साधनों का अभाव था। अनेक पर्यटक, धर्मोपदेशक, तीर्थयात्री, विद्य आदि ने इस एकता को स्थापित करने में सहयोग प्रदान किया। जैसे – गौतम ऋषि, अगस्त्य ऋषि, शंकराचार्य जैसे लोगों ने देश को सांस्कृतिक रूप से एक करने का प्रयास किया।
हमारे प्राचीन कालीन सम्राटों ने अपनी चक्रवर्तित एवं दिग्विजय की भावनाओं को व्यक्त करने के लिए अश्वमेघ, राजसूय जैसे यज्ञों का अनुष्ठान कर यह सिद्ध करने का प्रयास किया कि भारत का विशाल भू-खण्ड एक ही है। इस प्रकार यह स्पष्ट है कि भारतीयों में अपने देश की भौगोलिक एकता की भावना प्राचीन काल से ही विद्यमान रही है और आधुनिक काल में इस भावना को अतिरिक्त बल मिला है।
प्रश्न: दक्षिण-पूर्वी एशिया की भाषा व साहित्य पर पड़ने वाले भारतीय प्रभाव का वर्णन कीजिए।
उत्तर: भाषा व साहित्य पर पड़ने वाले भारतीय प्रभाव. का वर्णन निम्न बिंदुओं के अंतर्गत दिया जा सकता है –
ऽ दक्षिण-पूर्वी एशिया के विभिन्न राज्यों में भारत की संस्कृत भाषा का व्यापक प्रचार-प्रसार हुआ। कम्बोडिया, चम्पा, जावा, सुमात्रा, बाली, बोर्नियों आदि से संस्कृत भाषा में लिखे गये लेख प्राप्त होते हैं। लेखों की शैली काव्यात्मक है तथा इनमें संस्कृत के प्रायः सभी छन्दों का प्रयोग हुआ है। लेखक संस्कृत व्याकरण के सभी नियमों से पूर्ण परिचित लगते है।
ऽ अभिलेखों से पता चलता है कि इन देशों में वेद, वेदांत, स्मति, रामायण, महाभारत, पुराण आदि ब्राह्मण ग्रंथों के साथ ही साथ विभिन्न बौद्ध एवं जैन ग्रंथों का भी अध्ययन किया जाता था।
ऽ कालिदास का भी वहां के साहित्य पर गहरा प्रभाव दिखाई देता है तथा अनेक नाटक कालिदास के नाटकों से प्रभावित हैं।
ऽ जावा के निवासियों ने न केवल संस्कृत का अध्ययन किया अपितु इन्होंने भारतीय साहित्य के अनुकरण पर अपना एक विस्तृत साहित्य निर्मित किया, जिसे इण्डो जावानी साहित्य कहा जाता है।
ऽ यहां महाभारत के आधार पर अनेक ग्रंथों की रचना हुई। जिनमें अर्जुनविवाह, भारत युद्ध, सुमन जातक आदि उल्लेखनीय है।
ऽ भारतीय स्मृति तथा पुराणों पर भी अनेक ग्रंथों का प्रणयन किया गया। अर्जुनविवाह, कृष्णायन, रघुवंश के आधार पर सुमनसांसक, कालिदास के कुमार सम्भव के आधार पर स्मरदहन लिखे गये।
ऽ महाभारत के उद्योग, भीष्म, द्रोण, कर्ण आदि पर्वो के आधार पर ‘भारत युद्ध‘ नामक ग्रंथ की रचना की जो उनका प्रमुख ग्रंथ था। इस प्रकार जावानी साहित्य मूल भारतीय रचनाओं, उनके अनुवाद आदि से भरा पड़ा है।
Recent Posts
Question Tag Definition in english with examples upsc ssc ias state pcs exames important topic
Question Tag Definition • A question tag is a small question at the end of a…
Translation in english grammer in hindi examples Step of Translation (अनुवाद के चरण)
Translation 1. Step of Translation (अनुवाद के चरण) • मूल वाक्य का पता करना और उसकी…
Report Writing examples in english grammer How to Write Reports explain Exercise
Report Writing • How to Write Reports • Just as no definite rules can be laid down…
Letter writing ,types and their examples in english grammer upsc state pcs class 12 10th
Letter writing • Introduction • Letter writing is an intricate task as it demands meticulous attention, still…
विश्व के महाद्वीप की भौगोलिक विशेषताएँ continents of the world and their countries in hindi features
continents of the world and their countries in hindi features विश्व के महाद्वीप की भौगोलिक…
भारत के वन्य जीव राष्ट्रीय उद्यान list in hin hindi IAS UPSC
भारत के वन्य जीव भारत में जलवायु की दृष्टि से काफी विविधता पाई जाती है,…