राजपूताना मध्य भारत सभा की स्थापना कब हुई | राजपूताना मध्य भारत सभा किसने की Rajputana central india assembly in hindi

By   February 2, 2021

Rajputana central india assembly in hindi राजपूताना मध्य भारत सभा की स्थापना कब हुई | राजपूताना मध्य भारत सभा किसने की ?

प्रश्न : राजपूताना मध्य भारत सभा ?

उत्तर : 1919 ईस्वीं के राष्ट्रीय कांग्रेस के दिल्ली अधिवेशन के दौरान विजयसिंह पथिक , गणेश शंकर विद्यार्थी , चांदकरण शारदा आदि ने राजपूताना मध्य भारत सभा की स्थापना की। इसका प्रथम अधिवेशन दिल्ली में महामहोपाध्याय पं. गिरधर शर्मा के नेतृत्व में हुआ। इसके प्रथम अध्यक्ष जमनालाल बजाज और उपाध्यक्ष गणेश शंकर विद्यार्थी चुने गए। इसका प्रधान कार्यालय कानपुर में खोला गया। इसका मुख्य उद्देश्य रियासती जनता को राष्ट्रीय कांग्रेस की गतिविधियों से परिचित करवाकर राजनितिक चेतना जागृत करना था। सभा ने ‘सेवा समिति’ की स्थापना कर दलितोद्धार , सामन्ती जुल्मों के विरुद्ध कृषक आंदोलनों का संचालन कर किसानों को जागृत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
प्रश्न : राजपूताना देशी राज्य परिषद् ?
उत्तर : अखिल भारतीय देशी राज्य लोक परिषद् की एक शाखा के रूप में राजपूताना देशी राज्य परिषद् की स्थापना 1928 ईस्वीं में विजयसिंह पथिक , रामनारायण चौधरी , केसरी सिंह बारहठ , दामोदर लाल राठी आदि के द्वारा की गयी। इसका प्रथम अधिवेशन अजमेर में 23-24 नवम्बर , 1928 ईस्वीं को हुआ। जिसका सभापतित्व अमृतलाल सेठ ने किया। इस संस्था ने शासकीय संस्थाओं के नियमों को परिवर्तित करने का मार्ग प्रशस्त किया और स्वायत्त शासन प्रणाली के लिए जनमत जागृत करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
यद्यपि यह परिषद् सामूहिक समस्याओं को हल करने में सफल नहीं हुई लेकिन इसके माध्यम से निकले एकता के स्वर ने जनता में चेतना जागृत की और राजाओं को भी शासन नियमों में परिवर्तन करने पड़े क्योंकि इसके पीछे प्रबल जनसमर्थन था।
प्रश्न : मित्रमण्डल , बिजौलिया। 
उत्तर : साधु सीतारामदास ने बिजौलिया के किसानों में जागृति उत्पन्न करने और उनके हितों के संरक्षण के लिए ‘मित्रमण्डल’ नामक संगठन की स्थापना की। श्री ब्राह्मण दाधिच , श्री फतहकरण चारण , श्री भंवरलाल स्वर्णकार आदि संगठन के कार्यकर्ता थे , जो जागीरदारों की निरंकुशता और अत्याचारों का विरोध करते और किसानों को संगठित करते थे। मित्रमण्डल ने अपने जनजागरण अभियान द्वारा किसानों को ठिकाने के विरुद्ध आन्दोलन के लिए तैयार किया।
प्रश्न : मारवाड़ यूथ लीग , जोधपुर ?
उत्तर : 1931 ईस्वीं में जयनारायण व्यास के निवास पर ‘मारवाड़ यूथ लीग’ की स्थापना की गयी। इसका उद्देश्य जनता के अधिकारों की मांग करना और राज्य के दमन का विरोध करना था। मई 1931 ईस्वीं में लीग के कार्यकर्त्ताओं ने सर्राफा बाजार में राष्ट्रीय झंडे को फहराया और विदेशी माल की बिक्री को रोका। मारवाड़ यूथ लीग ने स्वायत्त शासन , नागरिक अधिकार , शिक्षा और चिकित्सा सुविधा आदि के मुद्दे उठाकर जनमत को जागृत करने का कार्य किया।
प्रश्न : महिला मण्डल , उदयपुर ?
उत्तर : दयाशंकर श्रोत्रिय ने 1935 ईस्वीं को उदयपुर में ‘महिला मण्डल’ की स्थापना की। इस संस्था को उद्देश्य शिक्षा के माध्यम से महिलाओं में राजनैतिक चेतना और राष्ट्रीयता की भावना उत्पन्न करना था। महिला मंडल के सञ्चालन में दयाशंकर श्रोत्रिय की पत्नी कमला श्रोत्रिय का भी महत्वपूर्ण योगदान था। ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं में राष्ट्रीयता की भावना उत्पन्न करने के लिए ‘प्रशिक्षण शिविर’ भी आयोजित किये जाते थे।
प्रश्न : प्रताप सभा , उदयपुर ?
उत्तर : महाराणा प्रताप की स्मृति में 1915 ईस्वीं में उदयपुर में प्रताप सभा की स्थापना की गयी। श्री बलवंत सिंह मेहता वर्षो तक प्रताप सभा के संचालक रहे। इस सभा का उद्देश्य लोगों में स्वाभिमान और स्वातंत्रय प्रेम की भावना पैदा करना था। इसके लिए प्रताप पुस्तकालय की स्थापना भी की गयी। यह सभा स्वाधीनता संघर्ष विषयक वीररसपूर्ण साहित्य का प्रकाशन तथा वितरण भी करती थी। प्रजामंडल की स्थापना से पूर्व मेवाड़ में राजनैतिक जागृति उत्पन्न करने की दिशा में प्रताप सभा से सराहनीय कार्य किया।
प्रश्न : राजस्थान सेवा संघ ?
उत्तर : जागीरदारों और उनकी प्रजा में मैत्री सम्बन्ध स्थापित करना , कृषक आन्दोलन का संचालन और जनजागृति पैदा करने के लिए विजयसिंह पथिक और उनके सहयोगियों ने वर्धा में 1919 ईस्वीं में राजस्थान सेवा संघ की स्थापना की। 1920 में इसे अजमेर स्थानांतरित किया गया। अर्जुन लाल सेठी , केसरी सिंह बारहठ , रामनारायण चौधरी आदि संघ के प्रमुख कार्यकर्त्ता थे। संघ का मुख्य उद्देश्य उपरोक्त के अलावा जनता के कष्टों का निवारण करना था। संघ द्वारा वर्धा से “राजस्थान केसरी” (साप्ताहिक) तथा बाद में अजमेर से ‘नवीन राजस्थान’ नाम से (समाचार पत्र) प्रकाशित कर जनता को जागृत करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।