प्रोटीन क्या है , परिभाषा , प्रकार , प्रोटिन के कार्य , संरचना , पॉलीपेपटाइड Protein in hindi

प्रोटीन (Protein) : प्रोटिन अमीनो अम्ल का बहुलक है जो पेप्टाइड बन्धो (bonds) द्वारा श्रृंखला में जुडी रहती है , अनेक पेप्टाइड बंध बनने के कारण प्रोटीन को पोलीपेप्टाइड भी कहते है | अमीनो अम्लो की प्रकृति के आधार पर प्रोटीन दो प्रकार के होते है –

  1. समबहुलक प्रोटीन : ये प्रोटीन एक ही प्रकार के अमीनो अम्ल से निर्मित होती है |
  2. विषम बहुलक प्रोटीन : ये प्रोटीन भिन्न भिन्न अमीनो अम्ल के संयोजन से बनती है |

उपलब्धता के आधार पर अमीनो अम्ल दो प्रकार के होते है –

  1. अनानिवार्य : ये हमारे शरीर में निर्मित होती है , इन्हें बाहर से ग्रहण करने की आवश्यकता नहीं होती है |
  2. अनिवार्य : ये हमारे शरीर में निर्मित नहीं होती है , इनकी आपूर्ति खाद्य पदार्थो द्वारा होती है |

प्रोटीन के कार्य : प्रोटीन शरीर की वृद्धि के आवश्यक है |

प्रोटीन पोषक पदार्थो को कोशिका झिल्ली से अभिगमन में सहायक होते है |

कुछ प्रोटीन संक्रामक जीवों से सुरक्षा करती है |

एम्जाइम प्रोटीन के बने होते है जो उपापचय में सहायक है

प्रोटीन की संरचना : अमीनो अम्लों के संगठन व व्यवस्था के आधार पर प्रोटीन की संरचना चार प्रकार की होती है –

  1. प्राथमिक संरचना : इस संरचना में पेप्टाइड बंध के अतिरिक्त अन्य कोई बन्ध नहीं होता है , इसमें एक पॉलीपेप्टाइड श्रृंखला यह दर्शाती है की किसी प्रोटीन विशेष में अमीनों अम्ल किस अनुक्रम में जुड़े है |
  2. द्वितीयक संरचना : इस संरचना में पॉलीपेप्टाइड श्रृंखला कुकलित होकर लड़ी के रूप में व्यवस्थित होती है ,यह घुमती हुई सीडी की तरह प्रतीत होती है , इसमें पेप्टाइड बंध के अतिरिक्त हाइड्रोजन बंध भी पाये जाते है | कुकलित कुण्डलन के कारण अमीनों अम्ल एक दूसरे के पास / समीप आ जाते है तथा श्रृंखला नियमबद्ध पुनरावर्ती के रूप में पाये जाते है |
  3. तृतीयक संरचना : इस संरचना में पॉलीपेप्टाइड श्रृंखला मुड़कर कुंडलित होकर अपने ऊपर ही खोखले गोले निर्माण कर लेती है तथा त्रिआयामी संरचना प्रकट करती है , इसमें हाइड्रोजन बन्ध , डाई सल्फाइड बंध व आयनिक बंध भी पाये जाते है जैविक क्रिया कलापों के लिए प्रोटीन की तृतीयक संरचना आवश्यक है |
  4. चतुष्क संरचना : इस संरचना में एक से अधिक पॉलीपेप्टाइड श्रृंखलाए होती है , जो एक दूसरे के सापेक्ष व्यवस्थित होती है , जैसे – मनुष्य के हिमोग्लोबिन प्रोटीन |

पॉलीपेपटाइड : सजीव उत्तकों में पॉलीसेकेराइड भी वृहत जैव अणुओ के रूप में मिलते है , पोली सेकेराइड को कार्बोहाइड्रेट या शर्करा भी कहते है , ये मोनोसेकेराइड जैसे ग्लूकोज , गेलेक्टोस , राइबोज , लोक्टोज , मोनो फ्रक्टोज आदि की एक लम्बी श्रृंखला के रूप में जुड़ने से बनती है जैसे – सेलुलोज एक पोलीसेकेराइड है ,

जो ग्लूकोज नामक मोनो सेकेराइड से बना होता है | प्राणियों में ग्लूकोज के बहुलक को ग्लाइकोजन कहते है ये खाद्य भण्डार के रूप में संग्रहित होते है , मोनोसेकेराइड की प्रकृति के आधार पर पॉलीसेकेराइड है –

ये दो प्रकार के होते है –

  1. समबहुलक पॉली सेकेराइड : ऐसे पोली सेकेराइड जो एक ही प्रकार के मोनो सेकेराइड से बने हो जैसे सेलुलोज आदि |
  2. विषमबहुलक पॉलीसेकेराइड : ऐसे पोलीसेकेराइड जो भिन्न भिन्न मोनो सेकेराइड अणुओं से बना हो जैसे स्टार्च आदि |

मंड (स्टार्च) की संरचना कुण्डलीदार होती है जिसमें आयोडीन अणु जुड़े रहते है जिससे मंड का रंग नीला होता है |

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