हिंदी माध्यम नोट्स
प्रसारवादी विचारक किसे कहते है ? प्रसारवादी विचारक की परिभाषा नाम क्या है propagandist thinkers in hindi
propagandist thinkers in hindi प्रसारवादी विचारक किसे कहते है ? प्रसारवादी विचारक की परिभाषा नाम क्या है ?
प्रसारवादी विचारक
प्रसारवादी समाजशास्त्री एक मानव समूह से दूसरे समूह तक संस्कृति के प्रसार के ठोस प्रमाण से बहुत प्रभावित हुए। उनका प्रश्न था कि यदि समूह “क” की किसी सांस्कृतिक विशेषता और समूह “ख” की किसी सांस्कृतिक विशेषता में समरूपता है तो क्या उस तत्व का प्रसार एक से दूसरे समूह में हुआ है और इस प्रकार दोनों समूहों में किसी न किसी तरह का संबंध है? इस प्रश्न का उत्तर देते हुए प्रसारवादी समाजशास्त्रियों ने विश्वासों, रीति-रिवाजों, प्रौद्योगिकी, कला जैसे क्षेत्रों में समानता के तत्वों का उल्लेख किया। संस्कृति के तत्वों के एक समूह से दूसरे समूह तक फैलने का यह सिद्धांत प्रसारवाद के रूप में जाना गया।
घोर प्रसारवादी समाजशास्त्रियों ने संपूर्ण मानव संस्कृति के प्रसार की जटिल प्रक्रिया की व्याख्या करने का प्रयास किया। वे सांस्कृतिक विशेषताओं के मूल उद्गम का पता लगाना चाहते थे। उदाहरण के लिए, फादर विल्हम श्मिट (1888-1954) ने आदिम समुदायों की परिस्थितियों के अध्ययन के दौरान मानवता के प्राचीन चरण के अवशेषों की खोज को अत्यंत महत्वपूर्ण समझा। इंग्लैंड में जी ई. स्मिथ और डब्ल्यू जे पैरी ने भी मानव सभ्यता के प्रसार के एकमात्र स्रोत का पता लगाने का अतिवादी दृष्टिकोण अपनाया। मानव सभ्यता के मूल उद्गम की खोज की धुन में वे इस निष्कर्ष पर पहँचे कि प्राचीन मिस्र की सभ्यता से ही संसार में सभी सभ्यताएं फैली, (देखिए लोवी 1937)। 1920 के दशक में मिस्र से सभ्यता के फैलाव का यह सिंद्धात व्यापक चर्चा का विषय रहा, किंतु बौद्धिक जगत में इसका विशेष समर्थन नहीं हुआ। ब्रोनिस्लॉ मलिनॉस्की इस सिद्धांत का कट्टर आलोचक था।
अधिकतर प्रसारवादियों ने सांस्कृतिक तत्वों के एक संस्कृति से दूसरी संस्कृति तक विस्तार के आधार पर मानव समाजों के इतिहास की पुर्नरचना की। उन्होंने मानव समाज के विकास के अध्ययन के लिए भौगोलिक दृष्टिकोण विकसित किया। उन्होंने सांस्कृतिक विशिष्टता वाले क्षेत्रों के जन-समूहों और विभिन्न संस्कृतियों के बीच तुलना पर ध्यान दिया तथा मानव सभ्यता की विकासवादी प्रक्रिया का वर्णन किया। उन्होंने संस्कृतियों की देश और काल के बंधनों को लांघने वाली विशेषताओं के बीच संबंध के स्वरूप की जाँच-पड़ताल की। वे नृजातिशास्त्री (मजीदवसवहपेज) के रूप में भी जाने जाते थे। नृजातिशास्त्री मानव समूह के प्रजातियों में विभाजन, उनकी उत्पत्ति, प्रसार, संबंधों तथा सांस्कृतिक विशेषताओं जैसे पहलुओं का अध्ययन करते हैं। सांस्कृतिक विशेषताओं के अध्ययन की नृशास्त्रीय परम्परा से अमरीका में फ्रेंज बोआस के नेतृत्व में सांस्कृतिक नृशास्त्र (cultural anthropology) के विकास को प्रोत्साहन मिला।
नृजातिशास्त्र (ethnology) को सामान्यतया नृजातिविवरण (ethnography) से पृथक किया जाता है। नृजातिशास्त्र में कुछ समाजों की सांस्कृतिक विशेषताओं का तुलनात्मक अध्ययन होता है, जबकि नृजातिविवरण में किसी एक समाज विशेष की जीवन शैली का अध्ययन किया जाता है। यह भी कहा जा सकता है कि नृजातिशास्त्र में विभिन्न संस्कृतियों के सांस्कृतिक तत्वों की तुलना के लिए नृजातिशास्त्रियों को नृजातिविवरण से प्राप्त मूल तथ्यों पर निर्भर होना पड़ता है। इस तरह अलग होते हुए भी दोनों विषय परस्पर जुड़े हैं।
बीसवीं शताब्दी के प्रारंभिक चरण में नृजातिविवरण (ethnography) में विशिष्ट समाजों के विस्तृत अध्ययन के लिए बड़ा उत्साह था। फलस्वरूप अनेक नृजातिविवरण वाले ग्रंथ प्रकाशित हुए (देखिए कोष्ठक 22.3)। इन अध्ययनों से ब्रिटेन में एक नए विषय, सामाजिक नृशास्त्र के विकास की पृष्ठभूमि तैयार हुई। सामाजिक नृशास्त्र तथा समाजशास्त्र एक-दूसरे से बहुत जुड़े हुए विषय है। गैर-पश्चिमी समाजों के अध्ययन पर आधारित सामाजिक नृशास्त्र के निष्कर्ष प्रायः सभी प्रकार के समाजों के अध्ययन के लिए भी उपयुक्त होते हैं। यही कारण है कि 1920 और 1930 के बीच सामाजिक नृशास्त्र के विकास ने समाजशास्त्रीय चिंतन की प्रगति में भी मदद पहुँचाई। मलिनॉस्की के नेतृत्व में नृशास्त्रियों द्वारा अध्ययन के लिए प्रत्यक्ष प्रेक्षण को आधार बनाने पर बल दिए जाने से समाजशास्त्रीय सिद्धांत के विकास में महत्वपूर्ण मोड़ आया। सामाजिक नृशास्त्रियों का कहना है कि नृजातिविवरण समाज विशेष में स्वयं जाकर एक वर्ष अथवा उससे अधिक समय तक किए गए अध्ययन के आधार पर किए जाने चाहिए। उनकी यह भी मान्यता है कि मूलतः समाज विशेष का अध्ययन उसी समाज की पूरी जानकारी के लिए किया जाना चाहिए। उन्होंने ऐसे लोगों की आलोचना की, जिन्होंने मानवता के इतिहास की पुनर्रचना मात्र के लिए आदिम संस्कृतियों का अध्ययन करना जरूरी. समझा।
बीसवीं शताब्दी के प्रारंभिक वर्षों के नृजातिविवरण विशेषज्ञों में मान्यता उन विद्वानों को मिली, जिन्होंने आदिम समाज के बारे में स्वयं जाकर प्रत्यक्ष तथ्य एकत्र करने की मलिनॉस्की की परम्परा का अनुसरण किया। उनके नेता के रूप में मलिनॉस्की ने विकासवादियों तथा प्रसारवादियों दोनों का विरोध किया और नृशास्त्र को मानव समाजों के अध्ययन की वैकल्पिक विधि के रूप में प्रतिष्ठित करने का अपना अभियान जारी रखा।
आइए, अब हम यह जानने का प्रयास करें कि प्रत्यक्ष प्रेक्षण के आधार पर तथ्य एकत्र करने की इस नई प्रवृत्ति ने किस प्रकार मानव समाजों के अध्ययन की नई विधियों के लिए मार्ग प्रशस्त
कोष्ठक 22.3ः नृजातिविवरण प्रबंध
बीसवीं शताब्दी के शुरू में नृजातिविवरण करने वालों ने अध्ययन किये जाने वाले समाजों के संदर्भ में सामाजिक जीवन की व्याख्या करने की चेष्ठा की इन अध्ययनों के आधार पर जो कृतियाँ प्रकाशित हुईं, वे नृजातिविवरण प्रबंध (ethnographic monographs) कहलाई। ऐसी कृतियों के प्राथमिक उदाहरण के रूप में 1912-13 में प्रकाशित जुनोद के प्रबंध दि लाइफ ऑफ साउथ अफ्रीकन ट्राइब का उल्लेख किया जा सकता है। 1922 में प्रकाशित मलिनॉस्की की पुस्तक आर्गोनाट्स ऑफ दि वेस्टर्न पैसिफिक आदिम समाज के वैज्ञानिक अध्ययन का सर्वोच्च उदाहरण मानी जाती है। इस पुस्तक में ट्रोबिएण्ड द्वीप वासियों में उपहारों के आदान-प्रदान की कूला प्रथा का विश्लेषण किया गया है। इस पुस्तक के संबंध में विस्तृत रूप से जानने के लिए आप इस विषय पर तैयार किया गया श्रव्य कार्यक्रम अवश्य सुनिए।
अफ्रीका में नृशास्त्रीय शोधकार्य की शुरूआत 1909-10 में उस समय हुई, जब सैलिगमैन तथा उसकी पत्नी ने एंग्लो-मिस्त्रीय सूडान की यात्रा की। बाद में जिन लोगों ने अफ्रीका की जनजातियों का गहन सर्वेक्षण किया, उनकी लंबी सूची है। उदाहरण के लिए आई.ए. शपिरा ने बेचुआना जनजाति, मेयर फोर्टिस ने गोल्ड कोस्ट की तालेसी जनजाति, एस.एफ. नाडेल ने नाइजीरिया के न्यूप समुदाय, हिल्डा कूपर ने स्वाजी जनजाति तथा इवन्स प्रिचर्ड ने दक्षिणी सूडान की नुअर जनजाति का अध्ययन किया।
ये सभी अध्ययन छोटे-छोटे राजनीतिक समूहों के बीच किए गए। ऊपर बताए गए सभी अध्ययन आदिम समाज विशेष के बीच एक या डेढ़ साल रहकर क्षेत्रीय शोधकार्य के आधार पर किए गए। सामान्यतया इस अवधि में क्षेत्रीय शोधकार्य को दो चरणों में किया गया। पहले चरण के कुछ महीने बाद दूसरा लम्बा चरण पूरा किया गया। इस गहन क्षेत्रीय शोध कार्य के बाद शोधकर्ता को अपना अध्ययन प्रकाशित करने में लगभग पाँच साल लग जाते थे। इस प्रकार अधिकतर विवरण दस वर्ष बाद ही प्रकाशित हो पाए।
किया। तथ्य एकत्र करने की यह विधि आगे चलकर प्रत्यक्ष प्रेक्षण (participant observation) के रूप में जानी गई, क्योंकि इसमें अध्ययनकर्ता को उन लोगों के बीच जाकर रहना पड़ता था, जिनका अध्ययन किया जाना था। शुरू में इस विधि को अपनाने वालों ने आदिम जातियों के लोगों के जीवन के सभी पहलुओं पर ध्यान देते हुए उनका अध्ययन किया।
आइए, बोध प्रश्न 1 को पूरा कर लें और तब ही आगे बढ़ें।
बोध प्रश्न 1
प) अठारहवी शताब्दी के नैतिक दार्शनिकों और उन्नीसवीं शताब्दी के विकासवादी विचारकों के दृष्टिकोण में क्या अंतर था? चार पंक्तियों में उत्तर दीजिए।
पप) नृजातिशास्त्र (एथनोलॉजी) तथा नृजातिविवरण (एथनोग्राफी) में अंतर दो पंक्तियों में स्पष्ट कीजिए।
बोध प्रश्न 1 उत्तर
प) अठारहवीं शताब्दी के नैतिक दार्शनिकों ने मानव संस्थाओं के संबंध में अपने सिद्धांतों के लिए प्रमाण जुटाना आवश्यक नहीं समझा। उन्नीसवीं शताब्दी के विकासवादी विद्वानों ने यह आवश्यकता महसूस की और अव्यवस्थित ढंग से एकत्र की गई सामग्री के आधार पर प्रमाण प्रस्तुत किए।
पप) नृजातिविवरण (ethnography) में समाज विशेष के जन-जीवन का वर्णनात्मक ब्योरा दिया जाता है, जबकि नृजातिशास्त्र (ethnology) में अनेक समाजों में संस्कृति के तत्वों का तुलनात्मक अध्ययन किया जाता है।
Recent Posts
Question Tag Definition in english with examples upsc ssc ias state pcs exames important topic
Question Tag Definition • A question tag is a small question at the end of a…
Translation in english grammer in hindi examples Step of Translation (अनुवाद के चरण)
Translation 1. Step of Translation (अनुवाद के चरण) • मूल वाक्य का पता करना और उसकी…
Report Writing examples in english grammer How to Write Reports explain Exercise
Report Writing • How to Write Reports • Just as no definite rules can be laid down…
Letter writing ,types and their examples in english grammer upsc state pcs class 12 10th
Letter writing • Introduction • Letter writing is an intricate task as it demands meticulous attention, still…
विश्व के महाद्वीप की भौगोलिक विशेषताएँ continents of the world and their countries in hindi features
continents of the world and their countries in hindi features विश्व के महाद्वीप की भौगोलिक…
भारत के वन्य जीव राष्ट्रीय उद्यान list in hin hindi IAS UPSC
भारत के वन्य जीव भारत में जलवायु की दृष्टि से काफी विविधता पाई जाती है,…