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प्राथमिक प्रदूषक और द्वितीयक प्रदूषक क्या है | प्राथमिक प्रदूषक और द्वितीयक प्रदूषक में अंतर primary pollutants

primary pollutants and secondary pollutants in hindi प्राथमिक प्रदूषक और द्वितीयक प्रदूषक क्या है | प्राथमिक प्रदूषक और द्वितीयक प्रदूषक में अंतर स्पष्ट कीजिये ? परिभाषा , उदाहरण किसे कहते है ?

प्राथमिक प्रदूषक (primary pollutants )

सस्पेन्ड पर्टीकुलेट मैटरः कभी कभी हवा में धुआं-धूल वाष्प के कण लटके रहते हैं। यही धुंध पैदा करते हैं तथा दूर तक देखने की सीमा को कम कर देते हैं। इन्हीं के महीन कण,सांस लेने से अपने फेंफड़ों में चले जाते हैं, जिससे श्वसन क्रिया तंत्र प्रभावित हो जाता है।

कार्बन मोनो ऑक्साइडः यह गंधहीन, रंगहीन गैस है, जो कि पेट्रोल, डीजल तथा कार्बन युक्त ईंधन के पूरी तरह न जलने से उत्पन्न होती है। यह हमारे प्रतिक्रिया तंत्र को प्रभावित करती है और हमें नींद में ले जाकर भ्रमित करती है।

क्लोरो-फ्लोरो कार्बनः यह वे गैसें हैं जो कि प्रमुखतः फ्रिज तथा एयरकंडीशनिंग यंत्रों से निकलती हैं। यह ऊपर वातावरण में पहुंचकर अन्य गैसों के साथ मिल कर ओजोन पर्त को प्रभावित करती है जो कि सूर्य की हानिकारक अल्ट्रावायलेट किरणों को रोकने का कार्य करती है।

सल्फर डाई ऑक्साइडः यह कोयले के जलने से बनती है। विशेष रूप से तापीय विद्युत उत्पादन तथा अन्य उद्योगों के कारण पैदा होती रहती है। यह धुंध, कोहरे, अम्लीय वर्षा को जन्म देती है और तरह-तरह की फेफचे की बीमारी पैदा करती है।

सल्फर ऑक्साइडः विशेष रूप से सल्फर डाइऑक्साइड कोयले और तेल के जलने से उत्सर्जित होती है.

नाइट्रोजन ऑक्साइडः यह धुआं पैदा करती है। अम्लीय वर्षा को जन्म देती है। यह पेट्रोल, डीजल, कोयले को जलाने से उत्पन्न होती है। यह गैस बच्चों को, सर्दियों में सांस की बीमारियों के प्रति, संवेदनशील बनाती है।

ऽ उच्च तापमान पर दहन से नाइट्रोजन ऑक्साइड विशेष रूप से

नाइट्रोजन डाइऑक्साइड से उत्सर्जित होते हैं.

द्वितीयक प्रदूषक (secondary pollutants)

फोटोकेमिकल धूम कोहराः यह वायु प्रदूषण का एक रूप है। ‘स्मोगश् का अर्थ धुएं और कोहरे का मिला-जुला रूप है। किसी क्षेत्र में धूम कोहरा वहां वृहद मात्रा में कोयले के दहन का परिणाम है और यह धुएं और सल्फर डाइऑक्साइड के मिश्रण द्वारा उत्पन्न होता है।

ओजोनः यह वायुमंडल की ऊपरी सतह पर पायी जाती है। यह महत्वपूर्ण गैस, हानिकारक अल्ट्रावायलेट किरणों से पृथ्वी की रक्षा करती हैं। लेकिन पृथ्वी पर यह एक अत्यन्त हानिकारक प्रदूषक है। वाहन तथा उद्योग, इसके सतह पर उत्पन्न होने के प्रमुख कारण है। उससे आंखों में खुजली जलन पैदा होती है, पानी आता है। यह हमारी सर्दी और न्यूमोनिया के प्रति प्रतिरोधक शक्ति को कम करती हैं।

लैडः यह पेट्रोल, डीजल, लैड बैटरियां, बाल रंगने के उत्पादों आदि में पाया जाता है और प्रमुख रूप से बच्चों को प्रभावित करता है। यह रासायनिक तंत्र को प्रभावित करता है। कैंसर को जन्म दे सकता है तथा अन्य पाचन सम्बन्धित बीमारियां पैदा करता है।

अम्लीय वर्षा (acid rain)

वह वर्षा जिसमें वायुमंडल में निहित रासायनिक तत्व अथवा प्रदूषक मिल गये हों तथा जो पृथ्वी पर एक हल्के अम्लीय सांद्रण के रूप में गिरती है।

अम्लीय वर्षा, प्राकृतिक रूप से ही अम्लीय होती है। इसका कारण यह है कि पृथ्वी के वायुमंडल में सल्फर डाइऑक्साइड और नाइट्रोजन ऑक्साइड जल के साथ क्रिया करके नाइट्रिक अम्ल और गंधक का तेजाब बन जाता है।

अम्लीय वर्षा पर्यावरण के सभी घटकों (भौतिक एवं जैविक) को खतरे में डाल देती है। जब मानव जनित स्रोतों से उत्सर्जित सल्फर डाई ऑक्साइड एवं नाइट्रोजन ऑक्साइड गैस वायुमंडल की जल वाष्प के साथ मिलकर सल्फ्यूरिक एसिड व नाइट्रिक एसिड का निर्माण करती हैं तथा यह अम्लश जल के साथ पृथ्वी के धारातल पर पहुंचता है, तो इस प्रकार की वर्षा को अम्लीय वर्षा कहते हैं।

अम्लवर्षा के दुष्परिणाम

अम्लवर्षा के कारण जलीय प्राणियों की मृत्यु खेतों और पेड़-पौधों की वृद्धि में गिरावट, तांबा और सीसा जैसे घातक तत्वों का पानी में मिल जाना, ये सभी दुष्परिणाम देखे जा सकते हैं। जर्मनी व पश्चिम यूरोप में जंगलो का नष्ट होने का कारण अम्लवर्षा है । प्राकृतिक पर्यावरण को नष्ट करने में अम्लीय वर्षा की प्रमुख भूमिका होती है।

अम्लीय वर्षा से जल प्रदूषण बढ़ता है, जिससे इसमें रहने वाले जीव-जंतु नष्ट होने लगते हैं।

पौधों में प्रकाश संश्लेषण वृध्दि, श्वसन, जनन, वाष्पोत्सर्जन आदि सारी जैविक क्रियाए मंद पड़ जाती हैं।

अम्लीय वर्षा से मिट्टी में अम्लीयता बढ़ जाती है। मिट्टी की उत्पादकता घट जाती है क्योंकि अधिक अम्लता के कारण मिट्टी में स्थित खनिज एवं अन्य पोषक तत्व नष्ट हो जाते हैं।

अम्लीय वर्षा से मानव में सांस एवं त्वचा की बीमारियां हो जाती हैं। आंखों में जलन होने लगती है तथा सल्फर डाइऑक्साइड की अधिक सांद्रता के कारण क्षति होती है।

चेरनोबिल आपदा

चेरनोबिल परमाणु ऊर्जा घर में विस्फोट वास्तव में विश्व की सबसे दुखद परमाणु आपदा थी। मृत रेडियोक्टिव पदार्थ वातावरण में घुल गये थे। चेरनोबिल के निवासी ही रोशिमा विस्फोट से सौ गुना ज्यादा रेडियोएक्टिविटी के प्रभाव में आ गये थे। रूग्ण बच्चों ने जन्म लिया था और लोग टायफाइड कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों से ग्रस्त हो गए थे।

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