समष्टि पारस्परिक क्रियाएं , पर भक्षण , स्पर्धा ,परजीविता ,सहभोजिता,सहोपकारिता ,अंतरजातीय

population interaction in hindi पर भक्षण , स्पर्धा ,परजीविता ,सहभोजिता,सहोपकारिता ,अंतरजातीय समष्टि पारस्परिक क्रियाएं : प्रकृति में प्राणी ,  पादप  और सूक्ष्म जीव जीवित रहने वह जैव समुदाय बनाने के लिए परस्पर क्रिया करते हैं जिन्हें समष्टि पारस्परिक क्रियाएं कहते हैं | लाभदायक परस्पर क्रियाओं के लिए ‘+’ तथा हानिकारक क्रियाओं के लिए ‘-’  तथा उदासीन के लिए ‘0’  दर्शाया जाता है |

कुछ समष्टि पारस्परिक क्रियाएं :

[1] पर भक्षण :  इस परस्पर क्रिया में एक जंतु दूसरे जंतु का भक्षण करता है इसमें केवल एक जाति [ परभक्षी को लाभ होता है]

अगर परभक्षी ना होते तो शिकार जातियों का सष्टि घनत्व ज्यादा होता अतः पर भक्षण एक जरूरी पारस्परिक क्रिया है |

जैसे 1920 के आरंभ में ऑस्ट्रेलिया में नागफनी ने लाखों हेक्टेयर भूमि में फैलकर तबाही मचा दी बाद में नागफनी खाने वाले परभक्षियों द्वारा इसका नियंत्रण किया गया |

परभक्षियों से बचने के लिए शिकार जातियों ने कुछ रक्षा विधियां अपना ही है जैसे

  1. मोनार्क नामक तितली के शरीर में विशेष रसायन होने के कारण यह अपने परभक्षी पक्षी के लिए स्वाद में खराब होने के कारण बस जाती है
  2. कुछ पादप कैलोट्रोपिस खरपतवार विषैला रसायन ग्लाइकोसाइड उत्पन्न करते हैं जिससे पशु इन्हें नहीं खाते हैं

[2] स्पर्धा :  सीमित संसाधनों के लिए आपस में संबंधित स्पर्धा करती है

कुछ  असंबंधित जातियां भी स्पर्धा जैसे :  दक्षिण अमेरिका की  झीलों की आवासी मछलियां बाहर से आने वाली फ्लेमिंगो जाति के साथ आहार के लिए प्रतिस्पर्धा करते हैं |

गॉसे का स्पर्धी अपवर्धन नियम :

इस नियम के अनुसार एक ही तरह के संसाधनों के लिए स्पर्धा करने वाले संबंधित जातियों में से घटिया जाति विलुप्त हो जाती है उदाहरण :  गैलापेगो द्वीप में बकरियां की अत्यधिक करने की क्षमता के कारण वहां की एबिंग्डन जाति 10 वर्ष में ही विलुप्त हो गई |

संसाधन विभाजन : जब 2 जातियां में से कोई एक जाति भिन्न-भिन्न समय पर अलग-अलग आहार चुनती है तो वह इस पर्दा से बच सकती है जैसे फुदकी (वार्बलर) की पांच संबंधित जातियों ने समय-समय पर आहार में परिवर्तन किया और आपस में स्पर्धा से बच गए |

[3] परजीविता : परजीविता एक ऐसी परस्पर क्रिया है जिसमें परजीवी अपना भोजन परपोषी से प्राप्त करता है और उसे हानि पहुंचाता है अतः परजीवी को लाभ व परपोषी को हानि होती है|

परजीविता अंतर्जातीय हो सकती है

मानव यकृत प्रणाभ  [लीवर फ्लूक] अपने जीवन चक्र को पूरा करने के लिए दो मध्यस्थ पोषकों पर निर्भर रहता है |

परजीवी दो प्रकार के होते हैं

  1. बाह्य परजीवी [  एक्टो  पैरासाइट] : वह परजीवी जो परपोषी की बाहरी सतह से भोजन प्राप्त करते हैं जैसे जू मनुष्य पर ,  कुत्तों पर चिचड़ी ,  पौधों पर अमरबेल वह समुद्री मीन पर  कॉपीपोट्स आदि बाह्य  परजीवी है
  2. अंतः परजीवी [ एंटो पैरासाइट] :  वे परजीवी जो परपोषी के शरीर के अंदर यकृत ,  फेफड़ों  व आरबीसी RBC आदि में रहते हैं अंतः परजीवी कहलाते हैं |

पक्षियों में अंड परजीविता : जब परजीवी पक्षी अपने अंडे परपोषी के घोंसले में देता है और परपोषी को अंडे देने देता है तो उसे अंडर परजीविता कहते हैं |

[4] सहभोजिता : ऐसी पारस्परिक क्रिया जिसमें एक जाति को लाभ होता है और दूसरी जाति को न तो लाभ होता है और न ही हानि होती है उदाहरण

  1. आम की शाखा पर पाए जाने वाले अधिपादप आर्केड और व्हेल मछली की पीठ पर रहने वाले बर्नेकल्स को फायदा होता है जबकि आम व व्हेल मछली को इनसे न तो लाभ होता है और न ही हानि
  2. जहां पशु चरते हैं उनके पास बगुले भोजन प्राप्ति के लिए रहते हैं क्योंकि जब पशु वनस्पतियां घास को हिलाते हैं तो कीट बाहर निकलते हैं और बगुले इनकी दो को खाते हैं |
  3. क्लाउन मछली दंशस्पर्शक वाले समुद्री एनीमोन  के बीच छुपी हुई रहती है जिससे कलाउन मछलियां को परभक्षियों से सुरक्षा मिलती है इससे समुद्री एनीमोन को महत्व लाभ होता है और न ही हानि |

 प्रश्न 1 : परजीवियों में परपोषियों  से पोषण प्राप्त करने के लिए क्या-क्या अनुकूल होते हैं ?

उत्तर :  इनमें चूसकांकपाए जाते हैं तथा उच्च जनन क्षमता इन्हें अपनी संख्या बढ़ाने में मदद करती है और इनमें हासिल पाचन तंत्र जैसे  रक्त आहार को शीघ्रता से अवशोषित करने में मदद करता है |

[5]  सहोपकारिता : इस पारस्परिक क्रिया में परस्पर क्रिया करने वाली दोनों जातियों को लाभ होता है

उदाहरण 1.  अंजीर के पेड़ों की अनेक जातियों बर्र की परागण कारी जातियों के बीच सहकारिता पाई जाती है ,  अंजीर की एक विशिष्ट जाति केवल एक विशिष्ट साथी बर्र  की जाति से ही परागित हो सकती है |

कोई दूसरी बर्र जाति उसे परागित नहीं कर सकती

मादा बर्र अंडे देने के लिए अंजीर पुष्प कर्म को परागित करती है बदले में अंजीर कुछ परिवर्धित बीज बर्र  के डिंब ( लार्बा) को आहार के रूप में देती है

उदाहरण 2 :  मेडिटेरेनियन आर्केड वह मक्षिका के बीच सहोपकारिता : मेडिटेरेनियन आर्किड पुष्प की पंखुड़ियां प्रतिरूप में मादा मक्षिका से मिलती-जुलती होती है इसलिए नर मक्षिका आर्केड पुष्प को  मादा मक्षिका समझ कर उस की पंखुड़ियों के साथ  कूट मैथुन करती है परंतु अगर मधुमक्षिका या आर्केड पुष्प की पंखुड़ी का रंग जरा सा भी परिवर्तित होता है तो नर  मक्षिका आर्केड पुष्प को परागित नहीं करता है अतः मेडिटेरेनियन आर्केड पुष्प अपनी पंखुड़ी को  मादा मक्षिका के समान बनाए रखते हैं |

[6]  अंतरजातीय परजीविता : 2 दिन जातियों के अलग-अलग जीवो में पाए जाने वाली परस्पर क्रिया जिसमें एक जाति को नुकसान होता है वह दूसरी जाति को इस से न तो लाभ होता है और न ही हानि होती है जैसे अखरोट की जड़ें Juglone नामक रसायन स्त्रावित करती है इस रसायन से इन जड़ों के संपर्क में रहने वाले पौधों को नुकसान होता है ,  उदाहरण में अखरोट को न तो लाभ होता है और न ही हानि होती है

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