पेप्टाइड बंध क्या है , परिभाषा , Peptide bond in hindi , ग्लाइकोसिडिक बंध , फास्फोडाइएस्टर Glycosidic bond

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Glycosidic bond in hindi , पेप्टाइड बंध क्या है , परिभाषा Peptide bond in hindi , फास्फोडाइएस्टर बन्ध phosphodiester bond ?

बहुलक में एकलकों को जोड़ने वाले बन्धो की प्रकृति : बहुलकी जैव अणुओं के निर्माण में तीन अलग अलग प्रकार के बंध पाए जाते है।

1. पेप्टाइड बंध

2. ग्लाइकोसिडिक बंध

3. फास्फोडाइएस्टर बंध

आइये अब इन तीनों बंध के बारे में विस्तार से अध्ययन करते है –

1. पेप्टाइड बंध : इन्हें एमाइड बंध भी कहा जाता है। एक पेप्टाइड बंध का निर्माण एक अमीनो अम्ल के अमीनो समूह (-NH2) की दुसरे अमीनो अम्ल के कार्बोक्सिलिक समूह (-COOH) के साथ क्रिया से होता है। इसमें जल के एक अणु का loss होता है अर्थात जल अपघटन संश्लेषण होता है। जिससे -CONH- बंध का निर्माण होता है। पेप्टाइड बंध ओलिगोपेप्टाइड और पोलीपेप्टाइड के निर्माण के दौरान विकसित होता है।

2. ग्लाइकोसिडिक बंध : ये कार्बोहाइड्रेट और कार्बोहाइड्रेट रखने वाले जटिल यौगिको में पाया जाता है। ये बन्ध किसी भी प्रकार के समूह जैसे -COOH , -CNH , -CNH2 द्वारा समीपस्थ एकलकों के कार्बन परमाणुओं के बीच में बनते है जो कि जल संश्लेषण के लिए हाइड्रोक्सिल (-OH) और हाइड्रोजन (-H) प्रदान करते है।  ग्लाइकोसिडिक बंध सामान्यतया -C , O , C- या -C,N, C- होते है।

3. फास्फोडाइएस्टर बंध : फास्फेट मुलकों और न्युक्लियोटाइड के दो समीपस्थ पेन्टोस शर्कराओं के मध्य में दो एस्टर बंध बनते है। एक जल का अणु loss होता है अर्थात जल अपघटन संश्लेषण होता है। फास्फोडाईएस्टर बंध (O-HPO2-O) पोलीन्युक्लियोटाइड के निर्माण के लिए न्यूक्लिओटाइड के बहुलकीकरण में मदद करते है।

कुछ महत्वपूर्ण तथ्य

  • ऑटोनॉमिक जिनोम सिस्टम माइटोकॉन्ड्रिया और क्लोरोप्लास्ट में पाया जाता है।
  • कोशिका चक्र का समय बैक्टीरिया में 20 मिनट , प्याज की जड़ कोशिकाओं में 20 घंटे , यीस्ट में 2 से 3 घंटे और मनुष्य में 24 घंटे।
  • माइटोटिक क्रोसिंग ओवर परालैंगिक चक्र में होता है।
  • जड शीर्ष में माइटोसिस का अध्ययन करने के लिए उन्हें एसिटिक अम्ल और मिथेनोल के 1:3 के अनुपात में रखा जाता है।
  • जैनसीन्स (1909) में सर्वप्रथम क्याज्मेटा को खोजा।
  • ब्रेंकीमियोसिस : इसमें मियोसिस-II नहीं होती है। यह कवको का लाक्षणिक गुण है।
  • माइटोसिस में प्लेक्टोनेमिक कुण्डलन होता है , जिमसे सिस्टर क्रोमेटिडस एक दुसरे पर कुंडलित हो जाते है जिन्हें आसानी से अलग नहीं किया जा सकता है। मियोसिस में पेरानिमिक कुण्डलन पाया जाता है।
  • कैरियोकोरियोसिस : यह कवक में माइटोसिस का एक प्रकार है जिसमे अंतरकेन्द्रकीय केन्द्रक खाँच निर्माण द्वारा विभाजित होता है।
  • माइटोसिस इंडेक्स विभाजित और अविभाजित कोशिकाओं का अनुपात होता है।
  • शब्द “क्रोमेटोफोर” शिमिटस ने प्रदान किया था।
  • प्रोकेरियोटिक कोशिका में जीवद्रव्य कला के वलयित होने से मिजोसोम नामक संरचना बनती है जो कि यूकैरियोटिक कोशिका के माइटोकॉन्ड्रिया के समान संरचना है। दोनों श्वसन में भाग लेते है।
  • लेहनिन्जर ने ऑक्सीजन को खोजा।
  • यीस्ट में छोटे लक्षण और मक्का में कोशिकाद्रव्यी नर बंध्यता , माइटोकॉन्ड्रिया  की वंशागति के उदाहरण है।
  • सिंगर और निकोलसन मॉडल रोबर्टसन मॉडल से प्रोटीन की व्यवस्था के कारण भिन्न है।
  • निहार और सैकमान : इन्होने जीवद्रव्य कला में आयन चैनल की खोज की इसके लिए उन्हें 1971 में नोबल पुरस्कार प्रदान किया गया था।
  • पक्षियों की ओवेरी की फोलीकुलर कोशिकाओं में ट्रांजोसोम्स पाए जाते है। इनमे ट्रिपल यूनिट मेंब्रेन होती है इसे सर्वप्रथम प्रेस 1964 में रिपोर्ट किया।
  • कला का ऋण आवेश N-एसिटिल न्यूरामिनिक अम्ल (NANA) या सैलिक अम्ल के कारण होता है।
  • प्लूरो निमोनिया जैसे जीव (PPLO) को सूक्ष्मतम (माइकोप्लाज्मा गेलीसेप्टीकम 0.1 माइक्रो) कोशिका समझा जाता है।
  • ट्रेसर आइसोटॉप / रेडियोएक्टिव आइसोटोप : इनके कार्य सामान्य तत्वों के समान होते है लेकिन ये विकिरणों को निकालते है इस कारण इन्हें गिगर मूलर काउंटर या सिंटीलेशन काउंटर और ऑटोरेडियोग्राफी द्वारा ज्ञात किया जाता है उदाहरण : 3H , 14C , 32P , 35S आदि।
  • स्कैनिंग इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी और एक्स रे क्रिस्टेलोग्राफी की सहायता से त्रिविमीय प्रतिबिम्ब प्राप्त किये जाते है जबकि अन्य सभी सूक्ष्मदर्शी द्विविमीय प्रतिबिम्ब प्रदान करते है।
  • कोनफोकल माइक्रोस्कोप में , लेजर पुंज के द्वारा स्पेशीमेन को प्रकाशयुक्त किया जाता है।
  • HPCL का पूरा नाम हाई परफॉरमेंस लिक्विड क्रोमेटोग्राफी है।
  • इंटरकाइनोसिस : मियोसिस I और मोयोसिस II के मध्य की अवस्था होती है।