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कॉकरोच तंत्रिका तंत्र क्या है , nervous system of cockroach in hindi संवेदांग (Sense Organs)

By   November 9, 2022

बताइए कॉकरोच तंत्रिका तंत्र क्या है , nervous system of cockroach in hindi संवेदांग (Sense Organs) ?

तंत्रिका तन्त्र (Nervous System)

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कॉकरोच के तंत्रिका तन्त्र को तीन भागों में बांटा जा सकता है

  1. केन्द्रीय तंत्रिका तन्त्र (Central nervous system)
  2. परिधीय तंत्रिका तन्त्र (Peripheral nervous system)
  3. अनुकम्पी तंत्रिका तन्त्र (Sympathetic nervous system) –
  4. केन्द्रीय तंत्रिका तन्त्र (Central nervous system) : केन्द्रीय तंत्रिका तन्त्र, मस्तिष्क या अधि ग्रसिका गुच्छकों (supradesophageal ganglia), अधोग्रसिका गुच्छकों (sub oesophageal ganglia) तथा गुच्छक युक्त अधर तंत्रिका रज्जु (ventral nerve cord), से मिलकर बना होता है।

मस्तिष्क या अधिग्रसिका गुच्छक (Brain or Supra oesophageal ganglia) : मस्तिष्क एक द्विपालित संरचना होती है। यह सिर में ग्रसिका के पृष्ठ में तथा मस्तिष्क छदि (tentorium) के नीचे स्थित होता है। यह सिर के प्रथम तीन जोड़ी गुच्छकों के समेकन से बना होता है। इसे स्पष्ट रूप से तीन भागों में विभेदित किया जा सकता है-प्रोटोसेरेब्रम (protocerebrum), ड्यूटेरोसेरेब्रम (dutero cerebrum) तथा ट्राइटोसेरेब्रम (trito cerebrum)। मस्तिष्क, ग्रसिका के दोनों तरफ एक-एक परिग्रसिका संयोजनी (circum-oesophageal connectives) द्वारा अधोग्रसिका गुच्छकों से जुड़ा रहता है।

अधोग्रसिका गुच्छक (Sub oesohageal ganglia): ये एक जोड़ी  गुच्छक है जो सिर में ही ग्रसिका के नीचे स्थित होते हैं। ये सिर के पश्च तीन जोड़ी गुच्छकों के समेकन से बने होते हैं। मस्तिष्क, परिग्रसिका संयोजनियाँ तथा अधोग्रसिका गुच्छक मिलकर क तंत्रिका वलय (nerve ring) का निर्माण करते हैं। जिसके बीचों-बीच से होकर ग्रसिका गुजरती है। अधोग्रसिका गुच्छक पीछे की तरफ एक गुच्छक युक्त अधर तंत्रिका रज्जु से जुड़े रहते हैं।

अधर तंत्रिका रज्जु (Ventral nerve cord): अधोग्रसिका गुच्छक से एक दोहरी, गुच्छक युक्त अधर, तंत्रिका निकल कर वक्ष तथा उदर खण्डों की मध्य-अधर रेखा पर शरीर के पश्च भाग तक फैली रहती है। अधर तंत्रिका रज्जु दोहरे धागेनुमा तंत्रिकाओं की बनी होती है। इसमें 9 खण्डीय गुच्छक पाये जाते हैं। इनमें से प्रथम तीन गुच्छक तो वक्षीय खण्डों में पाये जाते हैं तथा शेष छः गुच्छक उदरीय खण्डों में पाये जाते हैं। उदर खण्ड का अन्तिम गुच्छक काफी बड़ा होता है तथा ‘ यह शेष उदर खण्डों के गुच्छकों के समेकन से बना होता है।

2.परिधीय तंत्रिका तन्त्र (peripherel nervous system): केन्द्रीय तंत्रिका तंत्र से निकाल कर शरीर के विभिन्न अंगों तक जाने वाली तंत्रिकाएँ मिलकर परिधीय तंत्रिका तंत्र का  निर्माण करती है। मस्तिष्क के तीनों भागों से एक-एक जोड़ी तंत्रिकाएँ निकलती हैं- प्रोटोसेरेब्रम से दृष्टि तंत्रिकाएँ (optic nerves) निकल कर नेत्रों को ड्यूटेरोसेरेब्रम से शृंगिकीय तंत्रिकाएँ (antennary nerves) निकल कर शृंगिकाओं को तथा ट्राइटोसेरेब्रम से एक जोड़ी तंत्रिकाएँ निकल कर फ्रान्स तथा लेब्रम को जाती है। इसी तरह अधोग्रसिका गुच्छक से भी तीन जोड़ी तंत्रिकाएँ निकलती है। त्रिनुकीयय तंत्रिकायें मेन्डिबल को जम्भिकीय तंत्रिकायें जम्भिकाओं को तथा लेबियल तंत्रिकाएँ लेबियम या अधर ओष्ठ को जाती हैं। वक्षीय गुच्छकों से अधर तंत्रिकाएँ निकलकर अपने-अपने खण्ड की मांस पेशियों, टाँगों, पखों, श्वसन रन्ध्रों आदि को चली जाती हैं। उदर भाग की पहली पाँच जोड़ी गुच्छकों से एक-एक जोड़ी तंत्रिकाएँ निकल कर अपने-अपने खण्डों की देह भित्ति, पेशियों, श्वसन रन्ध्रों तथा हृदय को जाती है। छठे या अन्तिम उदर गुच्छक से तीन जोड़ी प्रमुख तंत्रिकाएँ निकलती हैं, जो अन्तिम तीन उदर खण्डों को पेशियों, जनन अंगों, मैथुन उपांगों तथा गुदालूमों (anal cirri) में जाती है।

  1. अनुकम्पीय तंत्रिका तंत्र (Sympathetic Nervous System) : यह तंत्रिका तंत्र न केवल तंत्रिकीय होता है वरन अन्तः स्रावी भी होता हैं यह मुख्य रूप से दो भागों में विभेदित किया जा सकता है- (i) मुख जठरीय तंत्र (stomogastric system) (ii) रिट्रो सेरेब्रल कॉम्पलेक्स (retro cerebral complex) |

(i) मुख जठरीय तन्त्र (Stomogastric system ) : यह तंत्र चार प्रमुख गुच्छकों तथा इससे सम्बन्धित तंत्रिकाओं से मिलकर बना होता है।

(a) ललाट गुच्छक (Frontal ganglion) : मस्तिष्क के ठीक सामने ग्रसनी की पृष्ठ सतह पर एक छोटा ललाट गुच्छक पाया जाता है। यह एक मध्यवर्ती संयोजनी द्वारा प्रोटोसेरेब्रम से तथा एक जोड़ी ललाट संयोजनियों द्वारा ट्राइटोसेरेब्रम से जुड़ा रहता है। इससे कुछ महीन तंत्रिकाएँ निकल कर ग्रसनी, क्लाइपियस तथा लेब्रम में जाती है। पीछे की तरफ ललाट गुच्छक से एक प्रत्यावर्ती तंत्रिका (recurrent nerve) निकल कर अधो मस्तिष्क गुच्छक से जुड़ती है।

(b) अधो मस्ष्कि गुच्छक (Hypo cerebral ganglion) : यह गुच्छक मस्तिष्क के पीछे ग्रसिका की पृष्ठ भित्ति पर स्थित होता है। यह प्रत्यावर्ती तंत्रिका (recurrent nerve) द्वारा ललाट गुच्छक से जुड़ा रहता है। यह गुच्छक पास में स्थित कॉरपोरा एलाटा (corpora allata) तथा कॉरपोरा कार्डिएका (corpora cardiaca) नामक अन्त:स्रावी ग्रन्थियों से भी जुड़ा रहता है।

(c) अन्तरांग गुच्छक या इग्लुविअल गुच्छक (Visceral ganglion or Ingluvial. ganglion) : यह गुच्छक अन्नपुट पर स्थित होता है अधो मस्तिष्क गुच्छक से एक मध्यवर्ती ग्रसिका तंत्रिका (oesophageal nerve) निकल कर इन्ग्लुविअल गुच्छक से जुड़ी रहती है। ग्रसिका तंत्रिका से महीन शाखाएँ निकल कर लार ग्रन्थियों एवं उनकी वाहिकाओं को जाती है।

(d) प्रोवेन्ट्रीकुलर गुच्छक (Proventricular ganglion) : इन्ग्लुविअल गुच्छक से एक पृष्ठीय तथा एक अधरीय तंत्रिकाएँ निकलकर अन्नपुट के पृष्ठ तथा अधर तल से होती हुई पीछे की तरफ प्रोवेन्ट्रीकुलर गुच्छक से जुड़ जाती है। यह गुच्छक प्रोवेन्ट्रीकुलस (proventriculus) पर स्थित होता है।

(ii) रिदो सेरेब्रल कॉम्पलेक्स (Retro cerebral complex) : यह कॉम्पलेक्स अधो मस्तिष्क गुच्छक के समीप स्थित होता है। यह दो युग्मित पिण्डों कॉरपोरा कार्डिएका (corpora cardiaca) तथा कॉरपोरा एलाटा (corpora allata), से मिलकर बना होता है। इनमें से कॉरपोरा कार्डिएका तंत्रिकी-नावी (neuro secretory) अंगों की तरह कार्य करता है। इससे सावित हारमोन्स हृदय स्पन्दन, पूर्व आंत्र तथा पश्च आंत्र में तरंग गति को नियंत्रित करते हैं। कॉरपोरा एलाटा (corpora allata) द्वारा स्रावित हारमोन्स वयस्क कॉकरोच में जनन क्रियाओं व उपापचयी क्रियाओं में सहायक होते हैं। वृद्धि प्रावस्था में इनके द्वारा स्रावित किशोरावस्था हारमोन (Juvenile hormone) ऊत्तकों की वृद्धि व विभेदन पर नियंत्रण रखता है. तथा रूपान्तरण को रोक कर किशोरावस्था को बनाये रखता है।

संवेदांग (Sense Organs)

वातावरण में होने वाले परिवर्तनों या उद्दीपनों को ग्रहण करने के लिए कॉकरोच में विभिन्न प्रकार . की संवेदी संरचनाएँ पायी जाती हैं जो निम्न प्रकार है- 1. प्रकाश ग्राही या संयुक्त नेत्र (Photoreceptors or compound eyes) 2. स्पर्श ग्राही (Thigmoreceptor), 3. रसायन ग्राही (Chemoreceptor) 4. श्रवण ग्राही (Auditory receptors), 5. प्रोप्रिओ रिसेप्टर (Proprio receptors) 6 ताप एवं घ्राण ग्राही (Thermo and olfactory receptors)।

प्रकाश ग्राही या संयुक्त नेत्र (Photo receptor or compound eyes): कॉकरोच  के सिर के पाश्वं भागों में एक जोड़ी गहरे काले रंग की वक्काकार संरचनाएँ पायी जाती है, इन्हें संयुक्त नेत्र कहते हैं। प्रत्येक नेत्र का तल उभरा हुआ होता है तथा लगभग 2000 षट भुजीय (hexagonal) क्षेत्रों में बंटा होता है, इन्हें फलक (facets) कहते हैं। प्रत्येक फलक के नीचे भ्रूणीय एक्टोडर्म से विकसित एक-एक दृष्टि इकाई या नेत्रांशक (ommatidium) पाया जाता है। प्रत्येक दृष्टि इकाई या नेत्रांशक अपने आप में स्वतंत्र दृष्टि इकाई होता है। इस तरह कॉकरोच का संयुक्त नेत्र लगभग 2000 दृष्टि इकाईयों या नेत्रांशकों का बना होता है। नेत्रांशक (Ommatidium) की संरचना

प्रत्येक नेत्रांशक अपने आप में स्वतंत्र दृष्टि इकाई होता है। यह एक ही पंक्ति में विन्यासित बहुत सारी कोशिकाओं का बना होता है। प्रत्येक नेत्रांशक को संरचना व कार्य के आधार पर दो भागों ‘ में बांटा जा सकता है।

  • अपवर्तन क्षेत्र (Dioptrical region)

(ii) ग्राही क्षेत्र (Receptor region)

(i) अपवर्तन क्षेत्र (Dioptrical region): पारदर्शी क्यूटिकल का एक फलक एक नेत्रांशक का कॉर्निया कहलाता है। यह भाग बीच से मोटा होकर उभयोत्तल लैंस (biconvex lens) का निर्माण करता है। इसके नीचे दो कार्निएजन (corneagen) कोशिकाएँ पायी जाती है। ये कोशिकाएँ कॉर्निया का स्रावण करती हैं। त्वकपतन (moulting) के दौरान संयुक्त नेत्र का पारदर्शी कॉर्नियाई क्युटिकल का आवरण भी नवीनीकृत किया जाता है व पुराने को उतार दिया जाता है। नये कॉर्निया का स्रावण ये कोशिकाएँ करती हैं। इन कोशिकाओं के नीचे एक शंक्वाकर संरचना पायी जाती है जो चार लम्बी शंकु कोशिकाओं (cone cells) अथवा विट्रेली (vitrellae) एवं क्रिस्टलीय शंकु (crystalline cone) की बनी होती है। क्रिस्टलीय शंकु एक पारदर्शी संरचना होती हैं, जिसे शंकु कोशिकाएँ घेरे रहती है तथा ये कोशिकाएं ही इसका स्रावण करती हैं। शंकु कोशिकाओं के पश्च सिरे पतले व नुकीले होते हैं तथा नेत्रांशक के ग्राही भाग पर टिके रहते हैं। नेत्रांशक का यह भाग प्रकाश की किरणों को ग्राही क्षेत्र पर फोकस करता है।

ग्राही क्षेत्र (Receptor Region) : ग्राही क्षेत्र में बीचों-बीच एक तङ रूपी लम्बी छड़ाकार संरचना पायी जाती है जिसे रेब्डॉम (rhabdome) कहते हैं। रेब्डोम पर अनुप्रस्थ धारियाँ दिखाई देती हैं तथा इसी पर अपवर्तन क्षेत्र की शंकु कोशिकाओं के पश्च सिरे टिके रहते हैं। रेब्डोम (Thabdome) को चारों तरफ से सात लम्बी कोशिकाएँ घेरे रहती हैं। इन्हें रेटिनल कोशिकाएँ (retinal cells) कहते हैं। ये रेटिनेल कोशिकाएँ ही इस छड़नुमा रेब्डोम का प्रावण करती हैं। रेटिनल कोशिकाओं तथा रेब्डोम के पश्च सिरे आधार झिल्ली पर टिके रहते हैं तथा दृक गुच्छकों के तंत्रिका तन्तुओं से जुड़े रहते हैं। ये गुच्छक फिर दृक् तंत्रिका (optic nerve) के द्वारा मस्तिष्क से जुड़े रहते हैं। नेत्रांशक का यह भाग ग्राही भाग (receptor part) कहलाता है।

प्रत्येक नेत्रांशक (ommatidium) अपने पड़ौसी नेत्रांशक से गतिशील वर्णक शीथ (pigment sheath) द्वारा पृथक रहते हैं। यह वर्णक शीथ गतिशील अमीबाभ वर्णक कोशिकाओं से बनी होती है। नेत्रांशकों के बीच पायी जाने वाली वर्णक शीथ को दो समूहों में विभक्त किया जा सकता है। वह समूह जो अपवर्तनी क्षेत्र (dioptrical region) में पाया जाता है आइरिस या उपतारा वर्णक समूह (iris pigment) कहलाता है तथा वह समूह जो प्रकाश ग्राही क्षेत्र (receptor region) में रेटिनी कोशिकाओं बीच पाया जाता है, रेटिनी वर्णक समूह (retinal pigment) कहलाता है।

संयुक्त नेत्र की क्रियाविधि

संयुक्त नेत्र कई नेत्रांशकों का बना होता है जो अपने आप में स्वतंत्र दृष्टि इकाई होते हैं। प्रत्येक नेत्रांशक में वस्तु के दिखाई पड़ने वाले छोटे से भाग का ही प्रतिबिम्ब बनता है। इस तरह किसी वस्तु को जितने नेत्रांशक मिल कर देखते हैं, उसका प्रतिबिम्ब उतने ही टुकड़ों में बनता है। प्रतिबिम्ब के ये छोटे-छोटे भाग ठीक उसी प्रकार परस्पर जुड़ते हैं जैसे फर्श पर टाइलें जुड़ी होती है। अतः इस तरह की दृष्टि को मोजेक दृष्टि (mosaic vision) कहते हैं। संयुक्त नेत्र में प्रतिबिम्ब की प्रकति प्रकाश की तीव्रता के अनुसार बदलती रहती है। तीव्र प्रकाश में बनने वाला प्रतिबिम्ब स्तराधान प्रतिबिम्ब (apposition image) कहलाता है तथा मन्द प्रकाश में बनने वाला प्रतिबिम्ब अध्यारोपण प्रतिबिम्ब (superposition image) कहलाता है।