गमन एवं संचलन किसे कहते हैं ? movement and locomotion in hindi मानव शरीर में गमन क्या होता हैं ?

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movement and locomotion in hindi गमन एवं संचलन किसे कहते हैं ? मानव शरीर में गमन क्या होता हैं ?

गमन और गति

सभी जीवित प्राणी (पादप और जन्तु) एक प्रकार की हलचल अथवा गति प्रदर्शित करते हैं | बहुकोशिकीय प्राणी दो प्रकार की गति दर्शाते हैं |

  • गमन
  • शरीर भागों का गमन
  • गमन – गमन एक जीव की एक स्थान से दूसरे स्थान पर स्थिति परिवर्तित करने की प्रक्रिया है | इसमें चलने , दौड़ने , तैरने , रेंगने (crawling)उछलने , कूदने और उड़ने के तौर तरीके शामिल है |

निम्न उद्देश्यों के लिए गमन आवश्यक है –

  • यह जन्तु को शत्रु से अथवा अनैच्छिक स्थान से दूर जाने के योग्य बना देता है |
  • यह जंतु को लैंगिक जनन के लिए अपने सहयोगी को ढूंढने के योग्य बनाता है |
  • यह भोजन और पानी खोजने में मदद करता है |
  • यह जन्तुओं को भोजन , शिकार और अंडे देने के लिए उपयुक्त स्थान और भोजन की उपस्थिति की अधिक उपयुक्त स्थिति में प्रवास करने में सहायता देता है |
  • शरीर भाग की गति – शरीर अक्ष के अनुसार शरीर भाग की गति प्राणी में गति का अन्य रूप है | यह गति निम्न उद्देश्य युक्त होती है |
  • विभिन्न विसरल अंग विभिन्न प्रकार की गति दर्शाते है | आंतरिक अंगों की गति के कारण प्राणी श्वसन , आहार नाल में भोजन के पाचन , मूत्र उत्सर्जन और शरीर में रक्त को पम्प और परिसंचरित करने में सक्षम होता है |
  • विभिन्न जीवों में भोजन को पकड़ने और इसके अंतर्ग्रहण में जीभ , जबड़े , टेन्टेकल , भुजाओं और उपांगों की गति होती है |
  • भुजाओं , उपांगों , सिर और धड़ की गति शरीर स्थिति में परिवर्तन करती है जिससे गुरुत्वाकर्षण के विरुद्ध साम्य बनाये रखा जा सके |

श्वसन प्रणाली के ऊपरी भाग , फेलोपियन नलिका और वासा इफरेन्शिया में सिलियरी गति देखी जाती है | स्तनियों का स्पर्म , मादा जाना तंत्र में कशाभिक गति द्वारा आगे बढ़ता है | सिलिया पैरामिशियम में गमन में सहायक होते हैं | कशाभ युग्लिना में गमन में सहायक होते हैं | वही अमीबा स्यूडोपोडिया की सहायता से गति करता है |

वर्टीब्रेट में पादीय गति और गमन पेशियों और कंकाल तंत्र पर निर्भर करता है | पेशीय संकुचन से कंकाल की हड्डियों में levers के समान गमन होता है | जिससे limbs और उपांगों की गति होती है | इनबर्टीब्रेट जैसे हाइड्रा , जोंक , केंचुआ और जेलीफिश में कंकाल तंत्र अनुपस्थित होता है |

गमन अथवा गतियों के मूल प्रकार

गमन दो श्रेणियों में विभाजित होता है |

  1. नॉन पेशीय गमन – इस गति में प्रोटोप्लाज्म की धारा रेखीय गति , कूटपादीय , प्रोटोजोअन की कशाभीय और सिलियरी गति सम्मिलित है | यह प्राणियों की कुछ कोशिकाओं में पायी जाती है |
  • प्रोटोप्लाज्मिक धारा रेखीय गति – प्रोटोप्लाज्म का धारा प्रवाह , साइक्लोसिस कहलाता है | यह अधिकांश कोशिकाओं जैसे ल्यूकोसाइट , अमीबा और अन्य एक कोशिकीय प्राणियों में देखी जाती है |
  • कूटपादीय गति – ग्लूकोसाइट और मेक्रोफेज उत्तकों में अमीबा की तरह कूटपाद की सहायता से गति करती है |
  • कशाभिक गति – कुछ कोशिकाओं (g. पोरीफेरन्स की कोएनोसाइट्स) के कशाभ स्थिति रहित कम्पन्न , स्पंज के नाल तंत्र द्वारा जल का नियमित प्रवाह आदि नियंत्रित करते हैं | कुछ गैस्ट्रोडर्मल कोशिकाओं के कशाभ नियमित स्पंदन द्वारा हाइड्रा के सिलेंट्रोन में द्रव परिसंचरित करते है | शुक्राणु कशाभिक गति द्वारा ही जल में तैरते है अथवा मादा जनन प्रणाली में गति करते हैं |
  • सिलियरी गति – कोशिकाओं के सिलिया , ट्रेकिया , अंडनलिका और वासा इफरेन्सिया को स्तरित करते हैं | ये धूलकणों , अण्डों और शुक्राणु को विशिष्ट दिशा में इनके अंगों तक लैसिंग गति द्वारा धकेलते हैं | चपटे कृमि में ज्वाला कोशिकाओं के सिलिया व्यर्थ पदार्थों को उत्सर्जी नाल में धकेलते हैं |

नॉन पेशीय सिलियरी गति कुछ जन्तु लार्वा जैसे सीलेंट्रेटा का Planula larva और एनेलिड का Trochophore और कुछ वयस्क जैसे प्लेनेरियंस में देखी जाती है |

  1. पेशीय गति – यह पेशीय तंतुओं के उपयोग पर निर्भर करता है | जिनमें एकांतर संकुचन और शिथिलन द्वारा बल लगाने की क्षमता होती है | अधिकांश बहुकोशिकीय प्राणियों में विभिन्न शरीर भागों की गति के लिए पेशीय तंतु होते हैं |

एक पेशीय संकुचन हमेशा केवल गति नहीं दर्शाता है | यह quo स्टेटस नियमन के समय भी हो सकता है , जब स्वच्छ जलीय सीपी की सुरक्षा के लिए आवरण (shell) को बंद रखने के लिए पेशियों में संकुचन करती है |

अकशेरूकीयों में गति

  1. हाइड्रा में गति – हाइड्रा में पेशीय तंतुओं की अनुपस्थिति होती है | इसकी शरीर भित्ति में दो प्रकार की संकुचनशील कोशिकाएँ होती है | शरीर की बाह्य परत में एपिथिलियो पेशीय कोशिका और आंतरिक परत में पोषक पेशीय कोशिका | दो पेशीय प्रक्रम शरीर भित्ति की संकुचनशील कोशिकाओं से उत्पन्न होते हैं |
  • Longitudinal muscular processes – यह एपीडर्मिस की एपिथिलियों पेशीय कोशिकाओं से उत्पन्न होते हैं | ये शरीर की अनुदैधर्य अक्ष के साथ गति करते है | इनका संकुचन शरीर को छोटा बना देता है |
  • Circular muscular processes – यह गैस्ट्रोडर्मिस की पोषक पेशीय कोशिकाओं से उत्पन्न होती है | यह शरीर चारों तरफ गति करती है | इसके संकुचन से शरीर में संकरापन उत्पन्न होता है |

Hydra में गमन लूपिंग , somersaulting , gliding और climbing द्वारा होता है |

  1. ऐनेलिड्स में गति – केंचुआ और जोंक में शरीर भित्ति में अनुदैधर्य और वृत्तीय पेशीय तंतु पाए जाते हैं | अनुदैधर्य और वृत्तीय पेशियों के एकांतर संकुचन और शिथिलन द्वारा फैलने और सिकुड़ने की तरंग उत्पन्न करती है जो जन्तु को आगे की तरह धकेलती है | केंचुआ में protrusible pharynx भी अध: स्तर से चूषक की तरह चिपककर गमन में सहायता करती है | शरीर की भित्ति पर उपस्थित सीटी गमन में एक सहायक की भूमिका निभाती है | चूषक हिरुड़ो में गमन में सहायक होते हैं |

याद रखने योग्य : मानव कंकाल कुल 206 अस्थियों से मिलकर बना होता है | ये विभिन्न आकार की मध्य कर्ण की छोटी कर्ण अस्थिका से लेकर जांघ की बड़ी अस्थि फीमर तक होती है |