mechanism of decarboxylation in hindi of carboxylic acid विकार्बोक्सिलीकरण की क्रियाविधि क्या है

विकार्बोक्सिलीकरण की क्रियाविधि क्या है mechanism of decarboxylation in hindi of carboxylic acid ?

अम्ल ऐमाइड का संश्लेषण (Synthesis of acid amides) —-

(1) कार्बोक्सिलिक अम्ल जलीय अमोनिया के साथ अभिक्रिया करके संगत अमोनियम लवण बनाते हैं।

कार्बोक्सिलेट आयन की नाभिक स्नेही प्रतिस्थापन के प्रति बहुत कम क्रियाशीलता होने के कारण आगे जलीय माध्यम में कोई अभिक्रिया नहीं होती। अतः जल को वाष्पित कर देते हैं तथा शुष्क लवण को गर्म करने पर उसमें से जल निकल जाता है जिससे ऐमाइड बनता है ।

ऐमाइड बनाने की यह अच्छी विधि नहीं है, क्योंकि इसमें ऐमाइड की कम मात्रा बनती है। यदि अभिक्रिया डाइसाइक्लोहेक्सिलकार्बोडाइइमाइड (DCC) की उपस्थिति में करें तो ऐमाइड की अच्छी लब्धि प्राप्त होती है ।

(2) अम्ल क्लोराइड से – अमोनिया, प्राथमिक ऐमीन एवं द्वितीयक ऐमीन अम्ल क्लोराइडों से शीघ्रता से अभिक्रिया करके ऐमाइड एवं प्रतिस्थापित ऐमाइड बनाते हैं। अभिक्रिया में बने HCI को उदासीन करने लिये अमोनिया या ऐमीन की अधिकता लेते हैं।

सामान्य अभिक्रिया की क्रियाविधि निम्न प्रकार है-

(3) कार्बोक्सिलिक ऐन्हाइड्राइड से अम्ल क्लोराइड के अनुरूप ही अम्ल ऐन्हाइड्राइड भी अमोनिया, प्राथमिक ऐमीन एवं द्वितीयक ऐमीन से अभिक्रिया करके ऐमाइड एवं प्रतिस्थापित ऐमाइड बनाते हैं।

अभिक्रिया की क्रियाविधि अम्ल क्लोराइड की अमोनिया से अभिक्रिया के अनुरूप ही है।

(4) एस्टर से- एस्टर भी अमोनिया, प्राथमिक ऐमीन एवं द्वितीयक ऐमीन से अभिक्रिया करके ऐमाइड तथा प्रतिस्थापित ऐमाइड बनाते हैं। ऐसिल क्लोराइड एवं अम्ल ऐन्हाइड्राइड की अपेक्षा अमोनिया की एस्टर से अभिक्रिया बहुत धीरे होती है।

6.7.5 अपचयन (Reduction )–

(1) ऐल्केन बनाना- (i) लाल फॉस्फोरस तथा HI से- सभी ऐल्केनोइक अम्लों का लाल फॉस्फोरस तथा HI से लगभग 433K ताप व उच्च दाब पर ऐल्केन में अपचयन हो जाता है।

(ii) उत्प्रेरित हाइड्रोजनीकरण (Catalytic hydrogenation)- ऐल्केनोइक अम्लों का हाइड्रोजन के साथ उत्प्रेरक की उपस्थित में हाइड्रोजनीकरण करने पर भी ऐल्केन बनते हैं।

(2) प्राथमिक ऐल्कोहॉल का बनाना- (i) लीथियमऐलुमिनियमहाइड्राइड से कार्बोक्सिलिक : लीथियमऐलुमिनियमहाइड्राइड से अपचयित होकर संगत प्राथमिक ऐल्कोहॉल बनाते हैं।

(ii) उत्प्रेरित हाइड्रोजनीकरण- यदि ऐल्केनोइक अम्लों का हाइड्रोजन द्वारा हाइड्रोजनीकरण उत्प्रेरक रूथेनियम अथवा कॉपर-क्रोमियम ऑक्साइड की उपस्थिति में किया जावे तो संगत प्राथमिक ऐल्केनॉल बनते हैं।

बेंजोइक अम्ल का Na/ ऐमिल ऐल्कोहॉल से अपचयन करने पर साइक्लोहेक्सेन कार्बोक्सिलिक अम्ल बनता है।

 विकार्बोक्सिलीकरण की क्रियाविधि (Mechanism of Decarboxylation)

कार्बोक्सिलिक अम्लों से कार्बनडाइऑक्साइड का निकलना विकार्बोक्सिलीकरण कहलाता है।

कार्बोक्सिलिक अम्लों के विकार्बोक्सिलीकरण पर ऐल्केन बनते हैं। उदाहरणार्थ-

(1) कार्बोक्सिलिक अम्लों का विकार्बोक्सिलीकरण सोडालाइम के साथ गर्म करके किया जा सकता

सोडियम ऐसीटेट के अतिरिक्त अन्य उच्च कार्बोक्सिलिक अम्लों के सोडा लाइम से विकार्बोक्सिलीकरण पर संगत ऐल्केन, कम अणुभार वाले ऐल्केन, ऐल्कीन एवं H2 बनते हैं ।

(2) कोल्बेवैद्युत संश्लेषण विधि- कार्बोक्सिलिक अम्लों सोडियम या पोटैशियम लवण के जलीय विलयन का वैद्युत—अपघटन करने पर कार्बोक्सिलिक अम्लों का विकार्बोक्सिलीकरण होकर ऐल्केन बनते है।

इसे सोडियम ब्यूटेनोएट का उदाहरण लेकर निम्न प्रकार समझा जा सकता है—

उप उत्पाद के रूप में निम्न यौगिक भी बनते हैं ।

साधारण कार्बोक्सिलिक अम्लों के विकार्बोक्सिलीकरण की अभिक्रिया बहुत धीरे-धीरे होती है। अतः विकार्बोक्सिलीकरण अभिक्रिया के सांश्लेषिक उपयोग हेतु – COOH समूह के साथ अन्य विशिष्ट समूह उपस्थित होने चाहिये।

ऐसे कार्बोक्सिलिक अम्ल जिनमें p-स्थिति पर कार्बोनिल समूह उपस्थित होते हैं अर्थात -कीटो अम्ल 100-150°C पर गर्म करने पर शीघ्रता से विकार्बोक्सिलीकृत हो जाते हैं।

अभिक्रिया की क्रियाविधि निम्न प्रकार दी जा सकती है-

यदि B-कीटो अम्ल में R समूह के स्थान पर कोई अन्य समूह उपस्थित हो तो भी विकार्बोक्सिलीकरण की क्रियाविधि उपर्युक्त प्रकार से दी जा सकती है-

असंतृप्त, मोनोकार्बोक्सिलिक अम्ल (Unsaturated Monocarboxylic Acids)

असंतृप्त मोनोकार्बोक्सिलिक अम्ल ऐल्कीन तथा ऐल्काईन के कार्बोक्सिलिक अम्ल व्युत्पन्न हैं। ये ऐल्कीन तथा ऐल्काईन के H-परमाणु का – COOH समूह से प्रतिस्थापित करने पर बनते हैं। ऐल्कीन के कार्बोक्सिलिक अम्ल का सामान्य सूत्र CH2n-1 COOH और ऐल्काईन के कार्बोक्सिलिक अम्ल का सामान्य सूत्र CnH2n-3 COOH होता है।

इनका IUPAC नाम देने के लिये द्विबंध या त्रिबंध एवं कार्बोक्सिलिक समूह युक्त C – परमाणु की दीर्घतम श्रृंखला का चयन करते हैं । – COOH के C- परमाणु को संख्या एक देते हैं और इसके सापेक्ष द्विबंध या त्रिबंध की स्थिति को नाम में दर्शा देते हैं। उदाहरणार्थ-

बनाने की विधियाँ (Methods of formation)

(1) नोवेनजैल अभिक्रिया द्वारा ऐल्डिहाइड एवं कीटोन अभिक्रियाशील मेथिलीन समूह युक्त यौगिकों जैसे मैलोनिक एस्टर, एथिलऐसीटोऐसीटेट एवं एथिलसायनोएसीटेट के साथ दुर्बल कार्बनिक क्षार की उपस्थिति में अभिक्रिया कर लेते हैं। प्राप्त उत्पाद का जल अपघटन करके गर्म करने पर a, B-असंतृप्त अम्ल प्राप्त होते हैं।

.

(2) असंतृप्त ऐल्कोहॉल से असंतृप्त ऐल्कोहॉल में द्विबंध को रक्षित करके उसका ऑक्सीकरण करने पर असंतृप्त अम्ल प्राप्त किये जा सकते हैं। उदाहरणार्थ –

(3) असंतृप्त ऐल्डिहाइडों का मृदु ऑक्सीकारकों जैसे टॉलेन अभिकर्मक से ऑक्सीकरण करने पर असंतृप्त अम्ल प्राप्त होते हैं।

(4) असंतृप्त मेथिलकीटोन का सोडियमहाइपोक्लोराइट से ऑक्सीकरण करने पर भी असंतृप्त अम्ल प्राप्त होते हैं।

असंतृप्त अम्लों की सामान्य रासायनिक अभिक्रियाऐं –

1. एस्टरीकरण – ये ऐल्कोहॉल से अभिक्रिया करके एस्टर बनाते हैं।

2. लवण बनाना ये धातुओं के साथ अभिक्रिया करके उनके लवण बना लते हैं।

2R-CH = CHCOOH + 2Na—>2R-CH=CHCOONa+H2O

3. क्षार के साथ अभिक्रिया जब असतृप्त अम्लों को क्षार के साथ उबाला जाता है तो द्विबंध का

स्थानान्तरण इस प्रकार होता है कि a, B- असंतृप्त अम्ल बन जाता है।

नोट :- जब ऐलिल सायनाइड का क्षारीय जल अपघटन क्षार के साथ उबालने पर किया जाता है तो 3-ब्यूटिनोइक अम्ल के स्थान पर 2-ब्यूटिनोइक अम्ल प्राप्त होता है। शायद पहले 3-ब्यूटिनोइक अम्ल बनता है जो 2-ब्यूटिनोइक अम्ल में बदल जाता I

अपचयन- (i) c, p- असंतृप्त अम्लों के एस्टर का बूवो ब्लांक अपचयन (Na/C2H5OH) या NaBH4/ CH3OH की अधिकता के साथ अपचयन करने पर संतृप्त ऐल्कोहॉल प्राप्त होते हैं।

(ii) LiAIH4 से अपचयन पर एस्टर के केवल एस्टर समूह का ही अपचयन होता है द्विबंध का नहीं और असंतृप्त ऐल्कोहॉल बनते हैं।

(iii) सभी असंतृप्त अम्ल उत्प्रेरित हाइड्रोजनीकरण पर संतृप्त अम्ल बनाते है अर्थात द्विबंध का हाइड्रोजनीकरण होता है।

5. हाइड्रोजन हैलाइड अम्लों से

– a, Bया BY – असंतृप्त अम्लों की HX से अभिक्रिया पर हैलोजन (X) परमाणु उस असंतृप्त C-परमाणु पर जुड़ता है जो – COOH समूह से दूरस्थ होता है। ऐक्रिलिक अम्ल में HX का योग मार्कोनिकॉफ के नियम के विपरीत होता है।

Y, 8- असंतृप्त अम्लों में HX का योग मार्कोनीकॉफ के नियम के अनुसार होता है।

हाइपोक्लोरस अम्ल से अभिक्रिया – a, B या BY – असंतृप्त अम्ल हाइपोक्लोरस अम्ल के साथ अभिक्रिया कर लेते हैं ।

7. तनु क्षारकीय KMnO4 से ऑक्सीकरण – ये तनु क्षारकीय KMnO4 विलयन से ऑक्सीकरण पर डाइहाइड्रॉक्सी ऐल्केनोइक अम्ल बनाते हैं।

(8) ca, B- असंतृप्त अम्लों के एस्टर ऐलिफैटिक डाइऐजो यौगिकों से अभिक्रिया करके पाइरेजोलीन व्युत्पन्न बनाते हैं।

(7) a, B- असंतृप्त अम्लों का निम्नीकरण (Degradation of a, B- unsaturated acids)

a, B – अम्लों के ऐमाइड के मेथेनॉलिक विलयन की अभिक्रिया सोडियम हाइपोक्लोराइट के क्षारीय विलयन से करने पर यूरिथेन बनते हैं जो अम्लीय विलयन में जल अपघटन पर ऐल्डिहाइड बनाते हैं।

(8) Y, 8– एवं 8, ६-असंतृप्त अम्ल सान्द्र H2SO4 के साथ गर्म करने पर क्रमशः y- एवं 8- लैक्टोन बनाते हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *