पदार्थ या द्रव्य की परिभाषा क्या है , उदाहरण , प्रकार , गुण , या गुणधर्म या विशेषताएं , matter in hindi

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(matter in hindi) पदार्थ या द्रव्य : विज्ञान में पदार्थ या द्रव्य उस वस्तु को कहते है जो कुछ न कुछ स्थान घेरती है और जिसका कुछ न कुछ द्रव्यमान अवश्य होता है।

याद रखिये यहाँ किसी वस्तु के स्थान घेरने से तात्पर्य है उस वस्तु का आयतन अर्थात उस वस्तु का कुछ न कुछ आयतन अवश्य होता है।
इसी प्रकार उस वस्तु के द्रव्यमान से तात्पर्य है उसका भार (वजन) , अर्थात उस वस्तु में कुछ न कुछ भार अवश्य विद्यमान रहता है।
अत: वह वस्तु जिसका आयतन और भार दोनों होते है वह पदार्थ या द्रव्य कहलाती है।
उदाहरण : हम हमारे चारों तरफ जो भी चीज देखते है जैसे किताब , पेन , टेबल , कुर्सी आदि सभी का कुछ न कुछ भार अवश्य होता है और इनका आयतन भी होता है इसलिए ये सभी पदार्थ या द्रव्य के उदाहरण है।
याद रखिये कि यहाँ आयतन और द्रव्यमान अलग अलग वस्तुओं का अलग अलग हो सकता है लेकिन चाहे उसका आयतन और भार कितना भी कम या ज्यादा क्यों न हो उसे पदार्थ और द्रव्य ही कहा जाता है।
जब किसी वस्तु का आयतन अधिक होता है तो वह अधिक स्थान घेरती है और यदि वस्तु का द्रव्यमान अधिक है तो इसका भार अधिक होगा।
माना गया कि पदार्थ और ऊर्जा दोनों अलग अलग है और दोनों में आपस में कोई सम्बन्ध नहीं होता है अर्थात आपस में दोनों को परिवर्तित नहीं किया सकता है।
प्रारम्भ में यह माना गया कि ऊर्जा की तरह पदार्थ भी अविनाशी होता है अर्थात जैसे ऊर्जा को न तो नष्ट किया जा सकता है और न ही उत्पन्न किया जा सकता है ठीक इसी प्रकार पदार्थ या द्रव्य को भी अविनाशी माना गया अर्थात प्रारंभ में यह माना गया कि पदार्थ को न तो नष्ट किया जा सकता है और न ही उत्पन्न किया जा सकता है और इसलिए उस समय पदार्थ के लिए पदार्थ की अविनाशिता का नियम दिया गया था।
लेकिन बाद में महान वैज्ञानिक आइन्स्टीन ने यह पाया कि ऊर्जा और पदार्थ को आपस में एक दूसरे के रूप में परिवर्तित किया जा सकता है अर्थात ऊर्जा को पदार्थ में बदला जा सकता है और पदार्थ को ऊर्जा में बदला जा सकता है , और पदार्थ और ऊर्जा में आपस में इस परिवर्तन को आइन्स्टीन ने E=m*c2 समीकरण द्वारा व्यक्त किया जिसे हम आइंस्टीन की ऊर्जा समीकरण कहते है।
यहाँ इस समीकरण में E = ऊर्जा है और m = पदार्थ का द्रव्यमान और c = प्रकाश का वेग है , c का मान 3.00 × 108 m/s होता है।

पदार्थ या द्रव्य के गुण या गुणधर्म या विशेषताएं

  • पदार्थ के कण बहुत ही छोटे छोटे होते है।
  • पदार्थ या द्रव्य के कणों के मध्य में कुछ खाली जगह या रिक्त स्थान पाया जाता है।
  • पदार्थ के कण लगातार गतिशील रहते है अर्थात पदार्थ के कण हमेशा लगातार गति करते रहते है।
  • पदार्थ के कणों के मध्य आपस में आकर्षण पाया जाता है अर्थात इसके कण आपस में एक दूसरे को आकर्षित करते रहते है।

द्रव्य अथवा पदार्थ के प्रकार

पदार्थ में पाए जाने वाले कणों के आधार पर इनको दो भागो में बांटा जा सकताहै –
1. शुद्ध द्रव्य
2. अशुद्ध द्रव्य
1. शुद्ध द्रव्य : ऐसे पदार्थ जिनमे केवल एक ही प्रकार के कण या अवयव या घटक उपस्थित होते है अर्थात ऐसे पदार्थ जो केवल एक ही प्रकार के अवयवी कणो से मिलकर बने होते है उन्हें शुद्ध द्रव्य कहते है।
उदाहरण : लोहा , ऑक्सीजन , जल , सोना आदि।
2. अशुद्ध द्रव्य : ऐसे पदार्थ जिनमें एक से अधिक प्रकार के कण या अवयव या घटक पाए जाते है अर्थात वे पदार्थ जो एक से अधिक प्रकार के अवयवी कणों से मिलकर बने होते है उन्हें अशुद्ध द्रव्य कहते है।
उदाहरण : मिट्टी , वायु आदि।