पादपो में संचित स्टार्च तथा lignocellulose से ethanol का निर्माण , शैवालीय हाइड्रोजन फैक्ट्री 

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पादपो में संचित स्टार्च तथा lignocellulose से ethanol का निर्माण :

  • सामान्य रूप से उगाई जाने वाली कुछ प्रमुख स्टार्च फसले जैसे धाने , निलेट तथा कंद व शर्करा के उत्पादन हेतु उगाई जाने वाली कुछ प्रमुख फसले जैसे गन्ना तथा चक्कुन्दर जैव भार के उत्पादन हेतु प्रमुख फसले मानी जाती है।
  • वर्तमान समय में वैज्ञानिक तकनीकी की सहायता से इन पादपों से उत्पादित शर्करा व स्टार्च को द्रव्य एथेनॉल में परिवर्तित किया जाने लगा है।

lignocellulose से ethanol के निर्माण की क्रिया

  • पादपों में सेल्युलोज एक प्रमुख घटक होता है जिसे किसी विशिष्ट एंजाइम की सहायता से ग्लूकोज में अपघटित कर दिया जाता है तथा निर्मित ग्लूकोज से एथेनॉल का निर्माण किया जाता है।
  • अधिकतर सभी काष्टीय पादपो में सेल्युलोज के साथ साथ लिग्निन भी पाया जाता है जिन्हें एंजाइम की सहायता से ग्लूकोज में परिवर्तित किया जाता है तथा परिवर्तित ग्लूकोज में यीस्ट मिलाकर किण्वन की क्रिया की सहायता से एथेनॉल उत्पादित किया जाता है।

एथेनॉल उत्पन्न करने हेतु विभिन्न पादपीय स्रोत

  • ethanol उत्पन्न करने हेतु निम्न पादपीय स्रोतों का उपयोग किया जाता है – आलू , गन्ना , मक्का , चुकुन्दर आदि।
  • ऐसे पादप को एथेनॉल उत्पन्न करते है ऊर्जा पादप कहलाते है।
  • पादपो से ऊर्जा के रूप में प्राप्त इथेनॉल को पेट्रोलियम के साथ मिश्रित कर या अकेले ही ऊर्जा के स्रोत के रूप में उपयोग किया जाता है।
  • पिछले कुछ समय में ऐसी तकनीक का विकास किया गया है जिसकी सहायता से स्टार्च तथा शर्करा से उत्पादित एथेनॉल को पेट्रोलियम के स्रोत के रूप में उपयोग किया जाने लगा है।
  • सम्पूर्ण विश्व में ब्राजील ऐसा देश है जिसमे सन 1975 में राष्ट्रीय एल्कोहल प्रोग्राम चालू किया तथा वर्तमान समय में यह देश पूर्ण रूप से या 20% एथेनॉल को पेट्रोलियम पदार्थो के साथ मिश्रित कर ऊर्जा के स्रोत के रूप में उपयोग कर रही है।
  • भारत में आर्थिक महत्व वाली फसल गन्ने को बोया जाता है तथा चीनी के उत्पादन में गन्ने को कच्चे पदार्थ के रूप में उपयोग किया जाता है तथा इस उत्पादन में शिरा सहउत्पाद के रूप में उत्पन्न होता है तथा उत्पन्न होने वाले शिरे के आसवन के द्वारा एथेनॉल उत्पन्न किया जा सकता है।  जो परिशुद्ध रूप से 65.5% शुद्ध होता है।  परन्तु पेट्रोलियम पदार्थो के साथ इसे उपयोग करने हेतु इसका 66.8% शुद्ध रूप आवश्यक है।  इस हेतु भारत सरकार के द्वारा सतत प्रयास जारी है।
  • भारत सरकार के द्वारा निकट भविष्य में पेट्रोलियम पदार्थो के साथ 5% एथेनॉल को मिश्रित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है इसके फलस्वरूप पेट्रोलियम के प्राकृतिक स्रोतों की खपत में कमी आएगी तथा इसे लम्बे समय तक उपयोग किया जा सकेगा।
  • उपरोक्त 5% एथेनॉल के मिश्रण का लक्ष्य प्राप्त करने हेतु भारत सरकार के द्वारा सम्पूर्ण भारत में तीन संयन्त्र स्थापित किये गए जो निम्न प्रकार से है –
(A) उत्तर प्रदेश में बरेली
(B) महाराष्ट्र में मनमॉड तथा मीरज

शैवालीय हाइड्रोजन फैक्ट्री

  • शैवाल जल में पाए जाने वाले प्रकाश संश्लेषी वनस्पति है जो सामान्य स्थिति में स्थलीय पादपो के समान ऑक्सीजन तथा कार्बोहाइड्रेट का निर्माण करते है।
  • सन 2000 में एक वैज्ञानिक Anastasios Melis के द्वारा शैवालो की एक प्रमुख विशेषता का पता लगाया तथा किये गए प्रयोग के अंतर्गत यह निष्कर्ष निकाला गया कि दिन के समय यदि शैवालों को ऑक्सीजन तथा गंधक की सप्लाई बंद कर दी जाए तो शैवालो की उपापचयी क्रियाएं परिवर्तित हो जाती है जिसके परिणाम स्वरूप शैवालों के द्वारा संपन्न किये जाने वाले प्रकाश संश्लेषण के अन्त में ऑक्सीजन के स्थान पर हाइड्रोजन उत्पन्न की जाती है।
  • हाइड्रोजन अत्यधिक ज्वलनशील पदार्थ है अत: निकट भविष्य में ऐसा उत्पादन ऊर्जा का एक बड़ा स्रोत विकसित होगा।