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संवेग संरक्षण का नियम और इसके अनुप्रयोग (law of conservation of momentum and its application)

(law of conservation of momentum and its application) संवेग संरक्षण का नियम और इसके अनुप्रयोग : हमनेसंवेगके बारे में अध्ययन कर लिया है की “वस्तु के द्रव्यमान और वेग के गुणनफल को ही संवेग कहते है। ”

संवेग को निम्न प्रकार से लिखते है –

संवेग (p) = mv

इसके बाद हमने अध्ययन किया की यदि किसी वस्तु पर F बल t समय के लिए लगाने से उसके संवेग में परिवर्तन p होता है तो इनके सम्बन्ध को निम्न प्रकार लिखते है।

“संवेग में परिवर्तन की दर , आरोपित बल के बराबर होती है ”

अर्थात F = p/t

माना वस्तु पर आरोपित बल का मान शून्य है अर्थात F = 0 तो संवेग में परिवर्तन की दर भी शून्य होगी अर्थात dp/dt = 0 , या दूसरे शब्दों में कह सकते है की एक स्थिरांक के बराबर होता है।

निम्न बातों से एक परिमाण निकाला जाता है –

“यदि किसी वस्तु पर आरोपित सभी बलों का मान शून्य है अर्थात परिणामी बल का मान शून्य है तो उस वस्तु के संवेग का मान स्थिर रहता है , इसी को ही संवेग संरक्षण का नियम कहते है। ”

अर्थात कुल परिणामी बल F = 0 तो संवेग = स्थिरांक। यही संवेग संरक्षण का नियम है।

विलगित निकाय या वियुक्त निकाय

“वह निकाय जिस पर या तो कोई बाह्य बल कार्य या कर रहा हो या निकाय पर कार्यरत सभी बाह्य बलों का सदिश योग शून्य हो तो ऐसे निकाय को ही विलगित निकाय या वियुक्त निकाय कहते है। “
चूँकि हमने संवेग संरक्षण के नियम में पढ़ा की यदि किसी वस्तु या कण पर परिणामी बल का मान शून्य है तो उसमे संवेग संरक्षण के नियम की पालना होती है अत: विलगित निकाय या वियुक्त निकाय में संवेग संरक्षित रहता है।

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