कंस मेला कहाँ लगता है ? कंस मेले का आयोजन किस स्थान पर होता है kans fair in hindi

By   November 7, 2021

kans fair in hindi कंस मेला कहाँ लगता है ? कंस मेले का आयोजन किस स्थान पर होता है ?

कंस मेला :  कंस मेले का आयोजन उत्तर प्रदेश स्थित मथुरा में श्री कृष्ण एवं बलराम द्वारा कंस वध के स्मरणार्थ उत्सव के रूप में किया जाता है। इस दिन श्रद्धालु एवं उत्साही युवक कंस का पुतला बनाते हैं। पूरे नगर में कृष्ण-बलराम की झांकियां निकाली जाती हैं तथा झांकियों द्वारा ही कृष्ण-बलराम का कंस से युद्व दिखाया जाता है।
गंगा सागर मेलाः पश्चिम बंगाल में कोलकाता के दक्षिण में ‘सागर’ नामक स्थान पर जहां हुगली नदी सागर से मिलती है, वहां गंगा सागर मेले का आयोजन किया जाता है। इस मेले का आयोजन जनवरी माह में मकर संक्रान्ति के दिन किया जाता है। ऐसा विश्वास किया जाता है कि भागीरथ की घोर तपस्या के परिणामस्वरूप गंगा इस दिन भागीरथ के साठ हजार पुरखों की अस्थियों को स्पर्श करने हेतु पाताल लोक गई थीं।
जोगेश्वरी देवी का मेलाः मध्य प्रदेश स्थित गुना जिले में चंदेरी नामक स्थान पर प्रत्येक वर्ष चैत्र माह में इस मेले का आयोजन किया जाता है। इस मेले में कपड़े, बर्तनों तथा पशुओं का क्रय-विक्रय किया जाता है।
वैशाली का मेलाः बिहार स्थित जैन धर्मावलम्बियों के स्थल वैशाली में चैत्र शुक्ल त्रयोदशी के दिन इस मेले का आयोजन किया जाता है। इस मेले में देश के प्रत्येक कोने से जैन धर्मावलम्बी यहां एकत्रित होते हैं।
महावीर जी का मेलाः राजस्थान स्थित हिण्डौन के समीप महावीर नामक स्थान पर चैत्र माह में इस मेले का आयोजन किया जाता है। इस मेले में लाखों जैन, गुर्जर, मीणा तथा अन्य सम्प्रदाय के लोग यहां दर्शन करने के लिएएकत्र होते हैं।
घामोनी उर्सः मध्य प्रदेश में मस्तान शाहवाली की दरगाह पर होने वाला यह 6 दिवसीय उर्स सागर जिले के घामोनी नामक ऐतिहासिक महत्व के स्थान पर अपै्रल-मई माह में लगता है। दूर-दराज के गांव से लोग यहां आकर बाबा शाहवाली की दरगाह पर सम्मान प्रकट करते हैं।
उर्स का मेलाः उर्स के मेले का आयोजन राजस्थान स्थित अजमेर जिले में ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती की दरगाह पर प्रत्येक वर्ष दीपावली पर्व के आस-पास होता है। इस मेले में सम्पूर्ण भारत के कोने-कोने से मुसलमान आते हैं। उर्स पर कव्वाली का भी आयोजन होता है।
माघ मेलाः माघ मेले का आयोजन उत्तर प्रदेश स्थित इलाहाबाद में गंगा, यमुना व सरस्वती के संगम पर जनवरी-फरवरी माह में किया जाता है। इस मेले में यहां दूर-दूर से लोग आते हैं व संगम में स्नान कर पुण्य प्राप्त करते हैं।
कपिल मुनि का मेलाः कपिल मुनि मेले का आयोजन राजस्थान स्थित बीकानेर जिले के कोलायत नामक स्थान पर किया जाता है। इस मेले में बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं तथा कोलायत झील में स्नान करते हैं। चूंकि यह मेला कपिल मुनि की याद में आयोजित किया जाता है, अतः इसे कपिल मुनि के नाम से जागा जाता है।
सोनपुर का पशु मेलाः बिहार स्थित सोनपुर में कार्तिक पूर्णिमा के दिन इस मेले का आयोजन किया जाता है। यह भारत का सबसे बड़ा पशु मेला माना जाता है, जो गंगा-गंडक के संगम पर लगता है। यह मेला पूरे एक पक्ष तक चलता है। इस मेले को हरिहर क्षेत्र का मेला भी कहा जाता है।
अर्द्ध-कुम्भ का मेलाः प्रयाग कुम्भ के 6 वर्ष पश्चात् (प्रति बारह वर्ष में) उत्तराखण्ड स्थित हरिद्वार में इस मेले का आयोजन किया जाता है। इसमें सम्पूर्ण भारत से बड़ी संख्या में श्रद्धालु एकत्रित होते हैं। यह गंगा नदी के किनारे आयोजित किया जाता है।
काना बाबा का मेलाः काना बाबा का मेला मध्य प्रदेश में स्थित होशंगाबाद जिले के गांव सोदालपुर में प्रतिवर्ष आयोजित किया जाता है। यह 275 वर्ष से अधिक पुराना मेला है। ऐसा कहा जाता है कि काना बाबा नामक एक संत यहां रहते थे। उन्होंने 1714 ई. में जीवित समाधि ग्रहण कर ली थी।
जागकी नवमी का मेलेलाः जागकी नवमी का मेला बिहार मंे सीतामढ़ी नामक स्थान पर आयोजित किया जाता है। भगवान श्रीरामचंद्रजी की पत्नी सीताजी की जन्मस्थली तथा जन्म दिवस पर चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की नवमी को एक विशाल मेले का आयोजन किया जाता है।
रानी सती का मेलाः रानी सती का मेला राजस्थान स्थित झुंझनू में रानी सती की याद में आयोजित किया जाता है। इस मेले में राजस्थान के प्रत्येक कोने से बड़ी संख्या में लोग आते हैं।
बाबा शाहबुद्दीन औलिया का उर्सः मध्य प्रदेश स्थित मन्दसौर जिले की नीमच तहसील में प्रति वर्ष फरवरी माह में बाबा शाहबुद्दीन की दरगाह पर उर्स का अयोजन किया जाता है। यहां पर लगभग 85 वर्ष से उर्स का आयोजन किया जा रहा है। यह उर्स चार दिन तक चलता है।
ज्वालामुखी मेलाः ज्वालामुखी मेले का आयोजन हिमाचल प्रदेश स्थित कांगड़ा घाटी में अप्रैल और अक्टूबर माह में ज्वालादेवी के सम्मान में किया जाता है। इस मेले में हिमाचल प्रदेश के लोग समूहों में एकत्रित होकर सम्मिलित होते हैं।
बटेश्वर मेलाः इस मेले का आयोजन उत्तर प्रदेश के आगरा जिले में स्थित बटेश्वर नामक स्थान पर प्रति वर्ष कार्तिक माह में किया जाता है। इस मेले में बड़ी संख्या में श्रद्धालु सम्मिलित होते हैं तथा यमुना में स्नान कर यहां स्थित 108 मंदिरों के दर्शन कर पुण्य प्राप्त करते हैं। यहां पशु मेले का भी आयोजन होता है।
गणेश चतुर्थी का मेलाः गणेश चतुर्थी का मेला राजस्थान स्थित सवाई माधोपुर जिले में रणथम्भौर के ऐतिहासिक किले में गणेशजी के मंदिर में आयोजित किया जाता है। इस मेले में बड़ी संख्या में श्रद्धालु सम्मिलित होते हैं।
मेष-संक्रान्ति का मेलाः इस मेले का आयोजन बिहार प्रांत के विभिन्न भागों में किया जाता है। इस मेले को सतुआ संक्रान्ति या सिरूआ-विसुआ आदि के नाम से भी जागा जाता है। इस दिन ‘नवान्न भजवा’ का उत्सव भी मनाया जाता है। इसमें नए जौ, चने का सत्तू, आम आदि मौसमी फल, पंखे और घड़ों का भी क्रय-विक्रय किया जाता है।
तेजाजी का मेलाः तेजाजी का मेला मध्य प्रदेश राज्य के गुना जिले के मामावाद गांव में प्रतिवर्ष भाद्र माह में तेजाजी की जन्म तिथि पर लगभग 70 वर्षों से लगता आ रहा है। तेजाजी एक सभ्य, सुसंस्कृत परिवार के लड़के थे, जो अपनी सत्यवादिता के लिए प्रसिद्ध थे।
कैलाश मेलाः कैलाश मेला उत्तर प्रदेश के आगरा जिले में प्रतिवर्ष सावन के तीसरे सोमवार को आयोजित होता है। इस दिन आगरा-मथुरा माग्र पर सिकन्दरा के समीप स्थित कैलाश मंदिर में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ एकत्रित होने लगती है। श्रद्धालु यमुना नदी में स्नान कर कैलाश मंदिर में भगवान शिव की पूजा-अर्चना कर पुण्य अर्जित करते हैं।
रामदेव का मेलाः रामदेव मेले का आयोजन राजस्थान स्थित जैसलमेर जिले के पोखरन नामक स्थान पर भादों माह में किया जाता है। इस मेले में दूर-दूर से लोग आकर सम्मिलित होते हैं। इसमें संत रामदेव की पूजा की जाती है।
सिंगाजी का मेलाः सिंगाजी का मेला प्रतिवर्ष क्वार माह में मध्य प्रदेश राज्य के पश्चिम निमाड़ जिले के गांव पिपल्या में लगता है, जो एक सप्ताह तक चलता है। लगभग 400 वर्ष पूर्व सिंगाजी यहां रहते थे। अनेक चमत्कारों और अन्य अलौकिक घटनाओं के कारण मृत्यु के पश्चात वे एक दिव्य पुरुष बन गए।
रथ मेलाः रथ मेले का आयोजन उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले में वृंदावन नामक स्थान पर प्रतिवर्ष चैत्र माह में किया जाता है। इस दिन रंगनाथजी के मंदिर से रथ की सवारी निकाली जाती है। इस रथ को भक्त-जन खींचते हैं। इस रथ को पूरे वृंदावन में घुमाया जाता है। यह ब्रज क्षेत्र के प्रसिद्ध मेलों में से एक है।
दाऊजी का मेलाः दाऊजी का मेला, उत्तर प्रदेश राज्य के हाथरस जिले में भादों शुक्ल पक्ष की छठ को दाऊजी की वर्षगंठ के रूप में आयोजित किया जाता है। इस मेले का आयोजन हाथरस के किले में स्थित भगवान श्रीकृष्ण के मंदिर में किया जाता है।
अक्षय नवमी का मेलाः इस मेले का आयोजन कार्तिक माह की नवमी को उत्तर प्रदेश स्थित मथुरा जिले में किया जाता है। इस दिन श्रद्धालु लोग यमुना में स्नान करते हैं तथा मथुरा की परिक्रमा करते हैं।
शंकरजी का मेलाः मध्य प्रदेश स्थित बिलासपुर जिले के कनकी नामक स्थान पर अनेक वर्षों से यह मेला आयोजित हो रहा है। यह मेला भगवान शिव को समर्पित है। एक सप्ताह तक चलने वाला यह मेला फाल्गुन माह में महाशिवरात्रि के अवसर पर लगता है। अनेक चमत्कारिक कहानियां भी इस मेले के विषय में प्रचलित हैं।