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काल बैसाखी किसे कहते हैं ? काल बैसाखी किस राज्य से संबंधित है kal baisakhi is associated with which state
kal baisakhi is associated with which state in hindi काल बैसाखी किसे कहते हैं ? काल बैसाखी किस राज्य से संबंधित है ?
ग्रीष्म ऋतु
ऽ इस समय सूर्य के कर्क रेखा की ओर उत्तरायण होने के कारण पूरे भारत में तापमान में वृद्धि होती है।
कुछ महत्त्वपूर्ण ग्रीष्मकालीन तूफान
आम्र वर्षा (Mango Showers)
ग्रीष्म ऋतु की समाप्ति के समय मानसून पूर्व वर्षा होती है जो केरल और कर्नाटक के तटीय भाग में आम बात है। दक्षिण भारत में इसे आम्र वर्षा (Mango showers) कहा जाता है, क्योंकि ये आमों के जल्दी पकने में मदद करती है।
फूलों की बौछार (Cherry Blossoms)
कर्नाटक में इस वर्षा को चेरी ब्लॉरम्स अथवा फूलों की बौछार कहते हैं। यह कॉफी के लिए काफी लाभदायक होती है।
नार्वेस्टर (Norwester)
इस समय स्थलीय गर्म एवं शुष्क पवन तथा आर्द्र समुद्री पवनों के मिलने से तूफान एवं तड़ित आंधी की उत्त्पति होती है। इन तूफानों को पूर्वी भारत में नार्वेस्टर एवं बंगाल में काल बैशाखी कहा जाता है। इन तूफानों से थोड़ी बहुत वर्षा होती है एवं ओले भी पड़ते हैं। यह चाय, पटसन और धान की खेती में लाभदायक होती है। असम में इसे बरदोली छीरे कहते हैं।
लू (Loo)
पंजाब से बिहार तक उत्तरी मैदान में गर्म शुष्क पवनें चलती हैं जो दिल्ली व पटना के बीच अधिक शक्तिशाली होती है।
वर्षा ऋतु
ऽ भारत की प्रायद्वीपीय आकृति के कारण दक्षिण पश्चिम मानसून दो शाखाओं में विभक्त हो जाती है:
(1) अरब सागर की शाखा
(2) बंगाल की खाड़ी की शाखा
ऽ अरब सागर शाखा द्वारा दक्षिण-पश्चिम मानसून भारत के पश्चिमी तट, पश्चिमी घाट, महाराष्ट्र, गुजरात एवं मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों में वर्षा होती है। यह केरल के तट से अचानक टकराती है जिसे मानसून की शुरूआत (Burst of Monsoon) कहते हैं।
ऽ दक्षिण-पश्चिमी मानसून 1 जून से लगातार बढ़ती है और 15 जुलाई तक पूरे देश में फैल जाती है।
ऽ भारत की कृषि अर्थव्यवस्था में मानसून महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है क्योंकि देश की कुल वर्षा का 3/4 भाग दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान प्राप्त होती है।
ऽ बंगाल की खाड़ी की शाखा ज्यों-ज्यों पश्चिम की ओर बढ़ती है, वर्षा की मात्रा में कमी आती है।
नोट: अरब सागर की शाखा अपेक्षाकृत अधिक वर्षा लाती है। मानसून द्वारा लायी गई कुल आर्द्रता का 65ः भाग अरब सागर से जबकि 35% भाग बंगाल की खाड़ी से आता है।
ऽ इस मौसम में तमिलनाडु तट सूखा रहता है क्योंकि यह दक्षिण-पश्चिम मानसून के अरब सागर शाखा के वर्षा छाया क्षेत्र में पड़ता है।
ऽ इस मौसम में बरसाती दिनों की संख्या अधिकतम होती है जिस कारण इसे आर्द्र मौसम (wet season) कहते हैं।
ऽ डेल्टा क्षेत्र को पार करने के बाद बंगाल की खाड़ी शाखा खासी घाटी (मेधालय) में प्रवेश करती है और चेरापूंजी व मासिनराम से लंबवत टकराती है।
भारत की जलवायु
ऽ किसी स्थान पर किसी भी समय की वायुमंडलीय अवस्था को वहां का मौसम कहते हैं। किसी क्षेत्र में लंबे समय तक मौसम की जो स्थिति रहती है, उसे उस स्थान की जलवायु कहते हैं। भारत की जलवायु उष्णकटिबंधीय मानसूनी जलवायु है।
ऽ भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने भारत की जलवायु को निम्नलिखित चार ऋतुओं में विभाजित किया है-
शीत ऋतु
ऽ इस ऋतु में पश्चिमोत्तर भारत में उच्च दाब का निर्माण होता है एवं वहां से निम्न दाब वाले क्षेत्रों की ओर पवन चलने लगती है। इसे शीतकालीन मानसून के नाम से जाना जाता है। इस उत्तर पूर्वी मानसून से तमिलनाडु के तटीय क्षेत्रों में वर्षा होती है।
ऽ इस ऋतु में पश्चिमोत्तर भारत में पश्चिमी विक्षोभ से चक्रवातीय वर्षा होती है जिसे स्थानी तौर पर ‘महावत‘ कहते हैं । यह वर्षा रबी फसल के लिए लाभकारी होता है।
ऽ दिसंबर एवं जनवरी इस ऋतु का सबसे ठंडा महीना होता है।
शरद ऋतु
ऽ इस ऋतु में बंगाल की खाड़ी पर तीव्र चक्रवाती तूफान विकसित होते हैं जो पूर्वी तट (तमिलनाडु व आध्र प्रदेश) पर पर्याप्त वर्षा लाते हैं। इन्हें उत्तर-पूर्व मानसूनी पवन कहते हैं। शीतऋतु में ये 40-60 सेमी वर्षा तमिलनाडु तट पर करती हैं।
ऽ उत्तर-पश्चिम भारत जिसमें जम्मू-कश्मीर, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और उत्तराखंड के कुछ भागों में निम्नलिखित प्रभाव के कारण शीतकालीन वर्षा होती है:
(i) जेट धारा (Jet streams)
(ii) पश्चिमी विक्षोभ (Western disturbances)
जेट धारा (Jet Streams)
ऽ ये 6 से 10 किमी की ऊंचाई पर 250-400 किमी/घंटा की गति से पृथ्वी की परिक्रमा करती हवाओं की प्रबल धारा है। ये 2-4 किमी मोटी सैकड़ों किमी चैड़ी और हजारों किमी लंबी होती हैं।
ऽ जेट धारा तब बनती है जब दबाव प्रवणता बल (Pressure Gradient Force) कोरियोलिस बल के बराबर व विपरीत हो जाता है।
ऽ जेट धाराएं शीत पवनों का एक रूप हैं। पछुआ जेट धाराएं (उत्तरी गोलार्ध की) भारतीय जलवायु को शीत ऋतु में प्रभावित करती हैं और वर्षा (2-5 सेमी) वर्षा कराती हैं।
सालाना वर्षा
वर्षा क्षेत्रों को दो भागों में वर्गीकृत किया जा सकता है:
1. भारी वर्षा क्षेत्र (सालाना 300 सेमी से अधिक)
(प) पश्चिमी घाट के पश्चिमी ढाल
(पप) मेघालय की पहाड़ियों समेत भारत के पूर्वी भाग ।
2. बहुत कम वर्षा वाले क्षेत्र (सालाना 50 सेमी से कम)
(i) पश्चिमी राजस्थान (थार मरूस्थल)
(ii) जम्मू और कश्मीर का लेह और लद्दाख क्षेत्र
कुल स्थलीय भाग का प्रतिशत वर्षा की मात्रा (सेमी)
11 200 से अधिक
21 125 से 200
37 75 से 125
24 35 से 75
7 35 से कम
नोट: भारत में औसत सालाना वर्षा लगभग 125 सेमी होती है।
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